Trikon - 25 in Hindi Crime Stories by Varun Vilom books and stories PDF | Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 25 — मोटरबाइक युद्ध

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Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 25 — मोटरबाइक युद्ध

हाईवे पर बस दहाड़ती हुई दौड़ रही थी।

पीछे धूल का गुबार उठ रहा था।

रियर-व्यू मिरर में जोगी ने देखा—

मोटरसाइकिलों का पूरा झुंड अब काफी करीब आ चुका था।

बीस… शायद पच्चीस।

सब फैलकर दौड़ रहे थे।

जोगी ने ड्रोन कंट्रोल टैबलेट उठाई।

“आ गए बाराती।”

अनीश ने स्टीयरिंग कसकर पकड़ा।

“पकड़ कर बैठो सब!”

बस और तेज़ हो गई।

पीछे—

एक काली SUV तेज़ी से आ रही थी।

सनरूफ से ऊपर निकला था—

जॉन।

गंजे सिर पर सूखा खून।

चेहरे के किनारे पड़ा नील।

आँखों में ज्वलंत क्रोध।

उसने अपने रेडियो पर गरजकर कहा—

“कोई बस पर फायर नहीं करेगा!

ना टायर पर!

Overtake the bus.

I want the girls alive!”

उसी समय एक बाइक सवार

बस के टायर पर लोहे के सरिये से वार करने की कोशिश करने लगा।

जॉन ने अपनी हैंडगन निकाली।

धाँय!

वह आदमी बाइक समेत सड़क पर लुढ़क गया।

बाकी सब समझ गए।

जॉन मज़ाक नहीं कर रहा था।

घेरा बनाती कुछ मोटरसाइकिलें बस के बिल्कुल पास आ गईं।

दो आदमी खड़े होकर

लोहे की सलाखों से बस के शीशों पर वार करने लगे।

तड़।

तड़।

काँच टूटने लगे।

बस बुलेटप्रूफ थी— पर शीशे नहीं।

अंदर लड़कियाँ चीख उठीं।

अनीश चिल्लाया—

“नीचे झुको सब लोग!”

जोगी ने ड्रोन एक्टिवेट कर दिए।

चारों ड्रोन बाइकों की तरफ लपके।

एक ड्रोन नीचे झपटा।

जॉन ने ऊपर देखा।

“Bloody toys…”

उसने कार के अंदर से रॉकेट लांचर उठाया।

सनरूफ पर चढ़ गया।

नीचे एक आदमी ने उसकी टाँगें पकड़ी ताकि वो स्टेबल रहे।

फायर।

रॉकेट सनसनाता हुआ निकला।

धड़ाम!

एक ड्रोन हवा में फट गया।

दूसरा ड्रोन तेज़ी से उसकी तरफ आया।

जॉन झुक गया—

वरना ड्रोन उसका सिर उड़ा देता।

ड्रोन निकल गया।

जॉन ने फिर निशाना लिया।

दूसरा धमाका।

दूसरा ड्रोन भी गिर गया।

अब सिर्फ़ दो ड्रोन बचे थे।

इसी बीच एक बाइक बस के बिल्कुल बगल में आ गई।

दो आदमी बस पर चढ़ने की कोशिश करने लगे।

अनीश ने अचानक स्टीयरिंग घुमा दिया।

बस दाईं तरफ झटके से मुड़ी।

बाइक बस से टकराई।

दोनों आदमी सड़क पर उछल गए।

उनकी बाइक चिंगारियाँ छोड़ती सड़क पर घिसटती चली गई।

पीछे से आती बाइक ने उन्हें कुचल दिया।

जोगी ने AR राइफल लोड की और बस की छत पर चढ़ गया।

निशाना साधा।

धाँय!

एक बाइक गिर गई।

धाँय!

दूसरी बाइक लुढ़क गई।

उसी समय दूसरी तरफ से फायरिंग शुरू हो गई।

चिंगारियाँ उड़ने लगीं।

जोगी झटके से नीचे बस में कूद गया।

तब तक एक गोली उसके घुटने को छूती हुई निकल चुकी थी।

अनीश ने उसे देखा।

“तू ठीक है?”

जोगी ने घुटने पर कपड़ा बाँधा।

खून कपड़े में समाता जा रहा था।

इतने में तीन बाइक सवार

बस के बिल्कुल पास आ गए।

एक आदमी कूदकर बस की छत पकड़कर लटक गया।

दूसरा खिड़की तोड़कर अंदर घुसने लगा।

अंदर लड़कियाँ चीख रही थीं।

अनीश ने बस जोर से डोलाई—

पर तीन लोग बस से चिपक चुके थे।

और खिड़की दर खिड़की ड्राइवर सीट की तरफ बढ़ रहे थे।

जोगी ने अंदर से एक को मुक्का मारा।

वह पलटी खाकर बाहर गिरा

और एक खंभे से टकराकर उसका सिर फट गया।

पीछे—

एक लड़की ने हिम्मत की।

उसने दूसरे आदमी के हाथ पर लात मारी।

दूसरी लड़की ने उसे धक्का दिया।

वह संतुलन खोकर सड़क पर गिर पड़ा।

पीछे आती जॉन की SUV

उसे रौंदती चली गई।

“Bloody hell!” जॉन चीखा।

बस के अंदर डर के बीच एक पल के लिए हिम्मत की लहर उठी।

जोगी ने टैबलेट पर स्क्रीन बदली।

तीसरा ड्रोन नीचे झपटा।

उसने मशीनगन मोड चालू किया।

गोलियाँ थोड़ी ही बची थीं।

तड़तड़तड़!

गोलियाँ SUV की तरफ गईं।

अनीश ने भी पीछे मुड़कर फायर किया।

धाँय!

SUV का एक टायर फट गया।

SUV बुरी तरह डगमगाई।

अचानक पलट गई।

पर अगले ही सेकंड—

जॉन दरवाज़ा खोलकर बाहर कूद गया।

SUV सड़क से फिसलती हुई पलटियाँ खाती एक खेत में जा गिरी।

और उसमें आग लग गई।

जॉन गरजते हुए उठा।

उसने अपनी हैंडगन से ड्रोन पर गोलियाँ दागीं।

धाँय! धाँय! धाँय!

निशाना अचूक था।

तीसरा ड्रोन भी आग पकड़कर गिर पड़ा।

जॉन ने पास से गुजरती एक बाइक पकड़ी।

राइडर को धक्का दिया।

खुद बाइक पर बैठ गया।

और फिर— और भी तेज़ी से बस के पीछे दौड़ पड़ा।

अब बाइक्स आधी से भी कम रह गई थीं।

तभी पीछे सायरन गूँजने लगे।

पुलिस की सफेद जीपें।

सायरन बजाती हुई।

त्रिशा जैकब्स की वफादार पुलिस टीम।

अनीश बुदबुदाया— “अब ये क्या मुसीबत आन पड़ी…”

बाइक्स और पुलिस गाड़ियाँ

अब बस के पीछे एक साथ दौड़ रही थीं।

“Get those bastards,” जॉन गरजा।

पुलिस जीपें आगे बढ़ने लगीं।

तभी— एक पुलिस जीप सड़क के किनारे के खेतों को चीरती हुई अचानक बाकी गाड़ियों के सामने आ गई।

ड्राइवर— इंस्पेक्टर बांक़ेलाल।

उसने अचानक ब्रेक मारा और जीप घुमा दी।

पीछे की दो पुलिस गाड़ियाँ उससे टकरा गईं।

उसकी जीप पलट गई।

पीछे से आती कई गाड़ियाँ और बाइकें पीछे टकराती चली गईं।

सड़क पर अफरा-तफरी मच गई।

और बस उस अराजकता का फायदा उठाकर आगे निकल गई।

जॉन ने अपनी बाइक तेज़ी से मोड़ी

और उस टक्कर से बचकर आगे निकल आया।

बांक़ेलाल अपनी उलटी पड़ी जीप में खून से लथपथ पड़ा था।

सीट बेल्ट से उल्टा लटका हुआ।

पास में पेट्रोल बह रहा था।

वह हँस पड़ा।

उसने अपना लाइटर उठाया।

पीछे से कुछ गाड़ियाँ फिर आगे बढ़ने लगी थीं।

बांक़ेलाल ने लाइटर जलाया— और पेट्रोल में फेंक दिया।

धड़ाम!

भयानक विस्फोट हुआ।

जीप के परखच्चे उड़ गए।

ब्लास्ट इतना शक्तिशाली था कि पीछे आती दो पुलिस गाड़ियाँ और तीन बाइकें भी उसमें समा गईं।

आगे बस में—

जोगी और अनीश ने पीछे देखा।

आग और धुएँ का गुबार।

अनीश ने पूछा—

“वो पीछे क्या हुआ?”

जोगी ने सिर हिलाया।

“पता नहीं। लगा, एक पुलिसवाला अपने ही लोगों से भिड़ गया।”

“पुलिसवाला… अपने ही लोगों से…”

अनीश एक पल को चुप रह गया।

फिर जैसे भीतर कोई नाम कौंधा।

“बाँकेलाल?”

जोगी ने उसकी तरफ़ देखा। “हो सकता है।”

अनीश की आँखें कुछ पल के लिए सख़्त हो गईं।

“उसे साथ ले ही लेते,” उसने धीमे से कहा,

“मेरी ही गलती थी। मैंने ही उस पर शक किया।”

तभी जोगी ने देखा आग की लपटों के आगे एक हिलती आकृति।

तेज़ी से आती एक बाइक।

जॉन।

बस बुरी हालत में थी।

शीशे टूट चुके थे।

दरवाज़ा आधा उखड़ा हुआ।

बॉडी में गोलियों के छेद।

छत पर आग लगी थी।

जॉन ने बाइक तेज़ की।

अनीश ने हल्की ब्रेक मारी।

एक पल— जॉन उछला।

बस के पीछे पकड़ लिया।

कलाबाज़ी खाकर छत पर चढ़ गया।

धम्म की आवाज़।

पीछे बाइक सड़क पर पलटती चली गई।

जोगी भी दरवाज़ा पकड़कर छत पर चढ़ गया।

दोनों आमने-सामने खड़े थे।

जॉन ने कमर से एक चमचमाता चाकू निकाला।

बिजली की तरह वार किया।

जोगी पहला वार बचा गया।

पर जॉन ने चाकू दूसरे हाथ में उछाला और तुरंत वार किया।

ब्लेड जोगी के कंधे में धँस गया।

जोगी दर्द से झटका खा गया।

पर अगले ही पल—

उसने जॉन को पकड़ लिया।

पूरी ताकत से उठाया—

और पीछे फेंक दिया।

जॉन बस से टकराकर सड़क पर जा गिरा।

सीधे पीछे आती कार के सामने।

धड़ाम!

कार उससे टकराई।

उसका शरीर

कार के टायरों के नीचे रौंदा गया।

बस आगे दौड़ती चली गई।

पीछे— सड़क पर धूल, टूटे मोटरसाइकिलें, उलटी पड़ी गाड़ियाँ।

और फैला हुआ युद्ध।

अंदर— लड़कियाँ चुप बैठी थीं।

जोगी कंधे से खून बहते हुए

छत से नीचे उतर रहा था।

उसने चाकू खींचकर बाहर फेंक दिया।

घाव पर कपड़ा दबाया

और एक सीट पर ढह गया।

अनीश ने बस सीधी सड़क पर चढ़ा दी।

और बस— दूर क्षितिज की तरफ दौड़ती चली गई।

सड़क किनारे एक मील का पत्थर था—

मुंबई — 5 मील।

कुछ सेकंड तक बस के अंदर सन्नाटा रहा।

सिर्फ़ इंजन की घरघराहट।

और टूटे शीशों से आती हवा।

अनीश ने माथे से पसीना पोंछा।

एक गहरी साँस ली।

फिर बस का डैशबोर्ड खोला।

अंदर से एक छोटा स्मार्टफोन निकाला।

स्क्रीन ऑन की।

स्क्रोल करने लगा।

कुछ सेकंड बाद—

एक ड्राफ्ट ईमेल खुला।

ईमेल की “To” लाइन में—

करीब पचास रिपोर्टरों और अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसियों के ईमेल अड्रेस।

दिल्ली के चैनल।

मुंबई के अख़बार।

लंदन और न्यूयॉर्क की एजेंसियाँ।

और भी कई।

ईमेल की बॉडी में— दर्जनों दस्तावेज़।

तस्वीरें।

कुछ सरकारी फाइलों के स्कैन।

और सबसे नीचे— लाल रंग में लिखी एक लाइन।

“उच्च न्यायालय के बाहर पहुँचो।

जितनी जल्दी हो सके।”

अनीश कुछ सेकंड स्क्रीन देखता रहा।

फिर बिना कुछ कहे— सेंड बटन दबा दिया।

फोन वापस डैशबोर्ड में रख दिया।

बस तेज़ी से आगे बढ़ती रही।


— जारी —

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