Hero - 1 in Hindi Fiction Stories by Ram Make books and stories PDF | Hero - 1

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Hero - 1




यह कहानी है एक ऐसे लड़के की जो रहस्यम्यी में शक्तियों के साथ पैदा हुआ सन् 2002 सर्दियों का मौसम नवंबर महीना 11 तारीख सुबह सूर्य की किरण के साथ 10:30 बजे भारत की राजधानी दिल्ली के एक छोटे से गांव ढांसा में मिडिल क्लास परिवार में एक बच्चे का जन्म हुआ जिसका नाम उन्होंने जतिन रखा। जतिन सिंघल हिंदू धर्म में जतिन का अर्थ किसी का अंश नहीं स्वयं भगवान शिव होता है।जतिन के पैदा होने के साथ-साथ परिवार में बहुत ही खुशखबरी आए। यह बच्चा बहुत ही शक्तियों के साथ पैदा हुआ था।

यह बच्चा और बच्चों से अलग था। ढाई साल बाद उसकी मम्मी बर्तन धो रही थी और वह अपने बेटे जतिन से बोली, मुझे वह पतीला धोने के लिए ला दो तो जतिन बोला जाकर अपने बाप से मांग ले। यह कहते हुए उसका पिता देख रहा था। उसके पिता को बड़ा गुस्सा आया। उसके पिता अगले दिन नजफगढ़ में श्री राम इंटरनेशनल स्कूल में उसका एडमिशन करवाया है। जतिन स्कूल में जाने लग गया। स्कूल में जाते वक्त उसी के गांव का लड़का मिला जो कि उसका दोस्त बन गया। स्कूल जाते वक्त अक्सर बच्चे रोते थे लेकिन जतिन उन सभी से बिल्कुल अलग था।
जतिन हमेशा ही अपने ख्यालों में खोया रहता था|उसी की गांव के लड़के जिसकी मुलाकात जतिन से हुई थी, उसका नाम अरुण था। अरुण बहुत ही होशियार लड़का था |

दोनों में बहुत गहरी मित्रता हो गई। दोनों साथ में स्कूल जाते। अगर एक स्कूल नहीं जाता तो दूसरा उसके लिए रोने लग जाता और दूसरा नहीं जाता तो पहला वाला रोने लगता था तो इसका कारण लोग उनकी मित्रता का उदाहरण देने लग गए और दोनों साथ में स्कूल में जाते थे तो साथ में उनको अपनी कमियों के बारे में और ताकत के बारे में पता था। दोनों स्कूल में बहुत से कांड करते थे जिसकी खबर किसी को नहीं होती थी। इतने शरारती थी यह दोनों की इनकी शरारतों का क्या कहना

इसी तरह वर्ष बीतते गए और जतिन और अरुण बड़े होते गए और बड़े होते होते हुए आठवीं कक्षा पार कर गए। लेकिन किस्मत को यह मंजूर नहीं था कि दोनों एक साथ रहे इसीलिए सकूल के बदले माहौल को लेकर जतिन के पिता ने जतिन का स्कूल बदलवा दिया। उसको उसके गांव के स्कूल में के आर डी इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में उसका एडमिशन करवा दिया।जतिन उसके स्कूल बदलने के कारण बहुत निराश था जब वह नौवीं कक्षा में के आर डी स्कूल में गया तो उसका मन नहीं लग रहा था। 

जतिन जब अपनी कक्षा में पहुंचा तो उसकी कक्षा के विद्यार्थियों ने उसको देखकर मजाक उड़ाया क्योंकि वह बहुत दुबला और पतला था। तभी उसके पास एक लड़का आया। उसी के गांव का जिसका नाम दीपांशु था, जतिन उसको नहीं जानता था, लेकिन उसने जतिन से पूछा भाई तेरा इस स्कूल में नया एडमिशन है तो जतिन ने गर्दन हिलाते हुए हमें उत्तर दिया और उसने पूछा भाई तुम्हारा क्या नाम है तो जतिन ने बहुत ही आराम से कहा, मेरा नाम जतिन है तो दीपांशु बोला, मेरा नाम दीपांशु है। मैं ढासां से हूं तो जतिन बोला, मैं भी ढासां से हूं।

दोनों के बीच दोस्ती हो गई। ऐसा होते होते बहुत से इकट्ठा हो गए और जतिन से दोस्ती कर ले तब उसका मन थोड़ा थोड़ा लगने लगा। लेकिन फिर भी उसे अपने पुराने स्कूल की याद आ रही थी और खासकर अरुण की |
लेकिन जतिन और अरुण एक गांव के होने के कारण कभी कबार आपस में मिलते रहते जिससे वे आपस में अपनी कक्षा के बारे में बताते फिर धीरे-धीरे जतिन का भी मन के आर डी स्कूल में लगने लग गया। जतिन ने 12वीं क्लास तक बहुत से दोस्त बनाया, लेकिन उसके चार पांच ही सच्चे दोस्त थे | जो हमेशा उसके साथ रहते थे।

लेकिन 12वीं कक्षा पास होने के बाद सभी बच्चे अपने अपने करियर पर ध्यान देने लग गए। लेकिन फिर भी जतिन अपनी मस्ती में मस्त रहता था। 17 साल का होने के बावजूद भी वह अपने ख्यालों में खोया रहता था। वह अभी भी अपनी शक्तियों से अनजान था।12वी होने के 2 साल बाद भी जतिन कुछ नहीं कर रहा था। जतिन अब 19 साल का हो गया था लेकिन एक दिन जतिन जब सोने जाने के लिए बेड पर जा रहा था तो वह थोड़ा ध्यान में बैठा और ध्यान में बैठने के बाद जतिन ने अपने अंदर एक अजीब सी उर्जा को महसूस किया, जिससे वह बिल्कुल डर गया था।

उसका शरीर कभी गर्म हो रहा था तो कभी ठंडा तो जतिन को कुछ समझ नहीं आ रहा था। यह उसके साथ क्या हो रहा है तभी उसके कानों में एक अजीब सी आवाज सुनाई दी|वह आवाज जतिन के कानों में कह रही थी। मेरा इंतजार अब खत्म हुआ। जतिन ने पूछा को कौन कौन कौन हो तुम मुझे बताओ कौन हो तुम लेकिन जतिन को और उसके बाद कुछ भी सुनाई नहीं दिया |

फिर थोड़ी देर बाद जतिन के कानों में ओम की ध्वनि गूंजी।पूरी रात जतिन ओम की ध्वनि को सुनता रहा जिससे उसको पूरी रात भर नींद नहीं आई।अगली सुबह जतिन अपने ख्यालों में उस ध्वनि के बारे में सोचते सोचते काफी दूर निकल गया।

होश में आया तो उसने देखा वह एक दीवार के सामने पहुंच गया है। जिस दीवार पर नीले रंग का चित्र बना हुआ था और वह चित्र स्वयं भगवान शिव का था। जब जतिन ने उस चित्र पर गौर किया तो वह चित्र नीली रोशनी में चमक लाइन लगा और उस चित्र के अंदर से एक इंसान इस आया एक इंसानी शरीर बाहर निकला जिसे देखकर जतिन पूरा सफेद पड़ गया था। वह बुरी तरह से डर गया था। जतिन ने जैसे तैसे करके हिम्मत जुटाई और वह वजह से ही भागने के लिए मुड़ा तो उसके सामने व्यक्ति प्रकट हो गया। जतिन ने डरते डरते उस व्यक्ति से पूछा।

त-त- तुम कौन हो ? तो उस व्यक्ति ने जतिन को कोई भी जवाब नहीं दिया। वह जतिन को घूरता रहा। जतिन काफी डर चुका थ
Jatin के पूछने के बाद वह इंसान जो चित्र में से निकला था वह बोला 

मैं भगवा जतिन यह सुनकर चौक गया और चोकते हुए उसने बोला भगवान नहीं तुम मेरे साथ मजाक कर रहे हो है नाजो व्यक्ति अपने आप को भगवान बता रहा था वह बोला नहीं नहीं मैं सच में भगवान हूं मेरा नाम शिव है 

जतिन उसकी यह बात सुनकर हसना चाहता था लेकिन उस व्यक्ति से जतिन को डर लग रहा था लेकिन उस व्यक्ति को ऐसी बातें सुनकर जतिन ने भी मजाकिया अंदाज में कहा शिव नाम रखने से कोई भगवान नहीं बनता तुम भगवान शिव से डरते नहीं जो अपने आप को भगवान शिव बता रहे हो  वह व्यक्ति जो अपने आप को भगवान कह रहा था वह बोलानहीं भगवान शिव ऐसा कुछ नहीं करते जिससे उनके भक्तों को ठेस पहुंचे तो Jatin भी अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कान के साथ बोला तो मैं भी भगवान हूं क्योंकि मेरे नाम का अर्थ थी स्वयं भगवान शिव है Jatin ने हस्ते हुए कहा 

अपने आप को भगवान कहने वाले व्यक्ति बोला सच में तुम सबसे अलग हो
जतिन के चेहरे की हंसी गायब हो गई और उसकी आंखों में अजीब तरह से ठंडी हो गई अपने डर को दबोचने के बाद ठंडी आवाज में उस व्यक्ति को बोला अब बताओ कौन हो तुम?जतिन का इस तरह का व्यवहार देखकर वह व्यक्ति दंग रह गया और उसने अपने आप में सोचने लगा मेरा चयन एकदम सही था यह व्यक्ति और मनुष्य से अलग है इतनी छोटी उम्र में इतनी अच्छी तरह से अपनी भावनाओं पर काबू पा रखा है जतिन उसको सोच में डूबा हुआ देखकर उसके सामने हाथ मिलाते हुए बोला हेलो मिस्टर क्या हुआ?  इतना कहते ही वह व्यक्ति अपने ख्यालों से बाहर आया और बोला
अगर तुम मुझे भगवान नहीं बोलना चाहते तो मत बोलो लेकिन मुझे मिस्टर भी मत बोलो मेरा नाम शिव है तुम मुझे शिव कह सकते हो और दूसरी बात मैं कौन हूं यह जानना तुम्हारे लिए महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि यह जानना तुम्हारे लिए महत्वपूर्ण है कि तुम कौन हो? 
जतिन यह सुनकर चकित रह गया और जो उस व्यक्ति ने बोला उसे दोहराते हुए जतिन बोला 

मैं कौन हूं?  इतना बोलते ही जतिन का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया जतिन की आंखों में गुस्सा लग दिख रहा था जतिन ने उस गुस्से पर काबू पाने के लिए अपनी आंखें बंद करता हैं अचानक उसे वही ऊर्जा महसूस हुई जो उसे उस रात को महसूस हुई थी 
जतिन आँखे खोलता उससे पहले वह उर्जा जतिन के पूरे शरीर में फैल गई शरीर के हर एक Cell में फहल गई फलते-फलते वह ऊर्जा जतिन के दिमाग में भी फैल गई जतिन ने जब अपनी आंखें खोली तो उसका दाया हाथ आग की लपटों से घिरा हुआ था जब उसकी नजर अपने हाथ पर पड़ी तो उसने अपने हाथ बड़ा अजीब लगा हाथ पर आग लगने के बावजूद भी उसे जलन महसूस नहीं हो रही थी जिससे जतिन सोच में पड़ गया लेकिन तभी जतिन में गुस्से में उस व्यक्ति की ओर देखा जो अपने आप को भगवान कह रहा था जतिन ने गुस्से में आया और उससे पूछा

तुमने मेरे साथ क्या किया? तभी व्यक्ति बोला मैंने तुम्हारे साथ कुछ नहीं कियाजतिन उसकी बात काटते हुए पूछा तो मेरे हाथ पर ही आग कैसी? जतिन की बात सुनकर शिव बोला

तुहारी शक्तियों का एक नमूना है तुम मैं ऐसी बहुत सी शक्तियां हैं जो तुम्हें खुद उजागर करनी होगी लेकिन अभी तुम्हारी शक्तियां बहुत कमजोर है और तुम अपने वर्तमान शरीर की शक्तियों के साथ तुम 10 मिनट तक की अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हो और जो सवाल मैंने तुमसे पूछा तुम कौन हो समय आने पर तुम्हें खुद ही जान जाओगे कि तुम कौन हो मेरा काम था तुम्हारे शक्तियों को तुम से मिलवा ना जो कि मैंने कर दिया तभी जतिन बोलता है 
तुम मुझे यह नहीं बताओगे कि तुम कौन हो? तुम मुझे यह नहीं बताओगे कि मैं कौन हूं?लेकिन तुम मुझे यह तो बताओगे कि मैं अपनी शक्तियों को कैसे बड़ाउ यह सवाल सुनकर शिव के मुंह पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई और बोला मैं तुम्हें जब बताऊंगा जब तुम मुझे मेरे नाम से बोलोगे यह सुनकर जतिन थोड़ा चिढ़ गया और भारी मन से बोला शिव मुझे बताओ मैं अपनी शक्तियों को कैसे बड़ाऊ क्या मेरे जैसे और भी लोग हैं जिनके पास ऐसी शक्तियां हैंयह सुनकर शिव के मुंह पर लंबी चौड़ी मुस्कान आ गई और बोला 
हां  
ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके पास तुमसे भी ज्यादा शक्तियां हैं जो कि तुम से भी ज्यादा ताकतवर हैजिनका ने को ब्रह्मांड ऊपर राज है यह सुनकर Jatin ने शिव से पूछ शिव हमारे ब्रह्मांड के अलावा और भी ब्रह्मांड है?  यह सुनकर शिव बोला हां और ब्रह्मांड है लेकिन अभी मेरी बात पूरी तरह से खत्म नहीं हुई 

यह सुनकर चुप-चाप शिव की बात सुनने लगा जतिन की जिज्ञासा को देखकर शिव की हंसी आ गई अपनी हंसी पर काबू पाते हुए शिव बोला अभी की अनंत शक्तियों के साथ 27 ब्रह्मांड है जैसे-जैसे अनंत शक्तियां बैठेंगी तो ब्रह्मांड भी बढ़ते जाएंगे लेकिन इन ब्रह्मांडा पर राज करने का एक राज है जिनके पास ज्यादा सकती है वह दूसरों के ब्रह्मांड पर हमला करके उसे जीत सकते हैं साफ-साफ मतलब यह है कि जिसके पास अधिक सकती है वहीं ब्रह्मांडम पर राज करेगा सुनकर उसने बोला तो आप मुझे यह क्यों कह रहे थे कि तुम सबसे अलग हो 
क्योंकि मैंने ऐसा इसलिए बोला क्योंकि तुम आम इंसानों की तुलना में अपने दिमाग का 5% इस्तेमाल करते हो जहां आम इंसान 1 या 2% सिमट जाता है वहा तुम अपने दिमाग का 5% इस्तेमाल करते हो अगर तुम ब्रह्मांड पर राज करना चाहते तो मैं अपनी जादुई शक्तियों के साथ-साथ शारीरिक शक्ति और दिमागी शक्ति का भी इस्तेमाल करो यह सुनकर जतिन के चेहरे पर अजीब सी मुस्कान फैल गई और आंखों में अलग तरह की चमक दिखाई दे रही थीलेकिन तो भी उसका चेहरा बदल गया और उसका शरीर सुन पढ़ने लग गया और उसकी आंखें बंद होकर वह जमीन पर गिर गया यह देखकर शिव डर गया वह बोला मैंने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके इसके हाथ की आग को कम क्यों नहीं किया अगर इसने अपनी क्षमता से ज्यादा अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया कहीं इसकी मृत्यु न हो जाए|