Surprise - Ateet ki Yaadein - 9 in Hindi Thriller by vishnupriya pandit books and stories PDF | हैरानी - Ateet ki Yaadein - 9

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हैरानी - Ateet ki Yaadein - 9

Episode - 8 (एक खबर और सब खत्म)

आर्यन की मौत की खबर ने रिया के जीवन से सारे रंग छीन लिए थे। मिस्टर दीक्षित ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की, "बेटा, जो आया है उसे एक दिन जाना ही पड़ता है। आर्यन का समय शायद इतना ही था। उसे भूल जाओ और जीवन में आगे बढ़ो मेरी गुड़िया।" 


पर रिया के लिए आर्यन सिर्फ एक दोस्त नहीं, उसकी रूह का हिस्सा था। वह रातों को आर्यन का नाम लेकर तकिए में मुंह छिपाकर रोती, पर उसका दर्द सुनने वाला कोई न था।

महीने बीत गए। मिस्टर दीक्षित एक रिश्ता लेकर आए। रिया ने साफ़ मना कर दिया, "मुझे शादी नहीं करनी।" पर माँ ने उसे दुनिया की रीत और अपनी ममता की दुहाई दी। माँ ने कहा, "क्या सारी उम्र हमारे पास रहेगी? शादी के बाद अपना जीवन फिर से शुरू कर।" रिया बेबस थी। उसने भारी मन से कहा, "ठीक है माँ, जैसा आप लोग चाहें।"

वह अक्सर छत पर जाकर उस जगह को निहारती जहाँ वह और आर्यन बचपन में साथ घूमा करते थे। उसे अपनी उस एक भूल पर आज भी पछतावा था—उसने अपने अहंकार में आर्यन को जाने के लिए कह दिया था, और वह सच में हमेशा के लिए चला गया। उसे लगा कि वह खुद को कभी माफ नहीं कर पाएगी।

शादी का दिन तय हो गया। घर फूलों से महक रहा था, हर तरफ हँसी-मज़ाक था, पर दुल्हन बनने जा रही रिया के अंदर सन्नाटा पसरा था। आज लड़के वाले उसे देखने आए थे। रिया लाल साड़ी पहनकर चाय की ट्रे लेकर आई, तो दूल्हा उसे देखता ही रह गया। पर रिया ने एक बार भी नज़रें ऊपर नहीं उठाईं। रिश्ता पक्का हो गया और मिठाई बाँटी जाने लगी। कमरे में जाकर रिया ने गुस्से और दुख में अपनी साड़ी उतार फेंकी और चादर ओढ़कर रोने लगी। उसे लगा जैसे किसी को उसका दर्द दिखाई नहीं दे रहा, सब अपनी ही खुशी में मगन हैं।

जैसे-तैसे समय बीता और शादी की रस्में शुरू हो गईं। घर मेहमानों से भर गया। हल्दी की रस्म आई, उसे पीली साड़ी पहनाकर फूलों से सजाया गया। रस्मों के बीच उसकी आँखों में सिर्फ आर्यन की याद के आँसू थे, जिन्हें वह छिपाने की असफल कोशिश कर रही थी। 

अगले दिन मेंहदी की रस्म थी। माँ ने मेंहदी वाली लड़की से कहा, "इसके हाथ पर दूल्हे के नाम का अक्षर 'ग' लिख दो।"
रिया ने मेंहदी लगवाई, पर जैसे ही उसे मौका मिला, वह घर के मंदिर में गई और भगवान पर चढ़ी मेंहदी से उस 'ग' अक्षर को 'अ' में बदल दिया। उस पल उसके चेहरे पर एक फीकी सी मुस्कान थी।

शादी वाले दिन सब कुछ ठीक चल रहा था। रिया दुल्हन के लिबास में किसी अप्सरा जैसी सुंदर लग रही थी—लाल जोड़ा, हाथों में लाल चूड़ियाँ, माथे पर बिंदिया और बालों में मोंगरे का गजरा। बारात दरवाज़े पर आ चुकी थी। ढोल-नगाड़ों की आवाज़ से घर गूंज रहा था। दूल्हा मंडप में बैठ चुका था। 

रिया की माँ उसे लाने कमरे की ओर बढ़ीं, तभी रिया की बचपन की सहेली प्रिया वहाँ पहुँची। "आंटी रुकिए, मैं रिया को लेकर आती हूँ।"

प्रिया कमरे के अंदर गई और रिया को दुल्हन बना देख ताना मारते हुए बोली, "चलो दुल्हन साहिबा! सब इंतज़ार कर रहे हैं।" रिया ने दुखी होकर कहा, "मुझे माफ करना यार, मैंने तुझे बुलाया नहीं था, इसीलिए ताना मार रही है ना?" 

प्रिया ने मुस्कुराकर कहा, "अरे छोड़ ये सब, तू बुलाती या न बुलाती, मुझे तो आना ही था। खैर, ये देख... तेरे लिए एक खत आया है।"
"खत? किसका खत है?" रिया ने चौंक कर पूछा।
"खुद खोलकर देख ले," प्रिया ने रहस्यमयी अंदाज़ में कहा।

रिया ने कांपते हाथों से वह खत खोला। जैसे-जैसे वह खत के शब्द पढ़ती गई, उसकी आँखों की पुतलियाँ फैलती गईं। उसके चेहरे पर आँसुओं के साथ एक ऐसी चमक और हैरानी उभरी जिसे देख प्रिया भी सन्न रह गई। उधर मंडप में दूल्हा इंतज़ार कर रहा था और इधर रिया उस खत की सच्चाई में डूबती जा रही थी।

वह खत किसने भेजा था? क्या आर्यन वाकई मर चुका था या यह किसी गहरे षड्यंत्र का हिस्सा था? और उस खत में ऐसा क्या लिखा था जिसने दुल्हन की आँखों में हैरानी उभरी थी?

 नमस्ते प्रिय पाठकों, उम्मीद है आपको आज का अध्याय- एक खबर और सब खत्म, पसंद आया होगा। क्या लिखा था उस खत में और किसने भेजा था? क्या रिया अपने इस नए जीवन की शुरुवात कर पाएगी? जानने के लिए बने। अगर कहानी पसंद आए तो रेटिंग जरूर करें। कहानी में कोई कमी हो तो अपना सुझाव जरूर दे ताकि में सुधार कर कहानी को और बेहतर बना सकूं।