Kuchh Rishtey Ulje se - 1-2 in Hindi Film Reviews by Toufeek Ahmad books and stories PDF | कुछ रिश्ते उलझे से - 1-2

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कुछ रिश्ते उलझे से - 1-2

एक ऐसा रिश्ता जिसकी चाहत भी है और डर भी —
बेस्ट फ्रेंड की दोस्ती खोने का भी,
और बचपन के प्यार को खोने का भी…                             अध्याय 1
यादों की बारात जज़्बात की वादियों में
शाम का सुहाना मौसम था। नसरा के घर में शादी की तैयारियाँ ज़ोरों पर चल रही थीं। घर रंग-बिरंगी रोशनियों से जगमगा रहा था। हर तरफ हँसी, मज़ाक और खुशियों का माहौल था।
ज़ोया अपनी फैमिली के साथ शादी में शामिल होने आई थी। कई साल बाद वह इस घर में आई थी, इसलिए पुरानी यादें उसके दिल में फिर से ताज़ा होने लगीं।
“ज़ोया!”
नसरा खुशी से भागती हुई उसके पास आई और उसे गले लगा लिया।
“तू आ गई! मुझे लगा था इस बार भी कोई बहाना बना देगी।”
ज़ोया मुस्कुराई।
“इतनी भी बुरी नहीं हूँ मैं।”
दोनों हँस पड़ीं।
मेहंदी की खुशबू पूरे घर में फैली हुई थी। सभी लोग शादी की तैयारियों में व्यस्त थे, लेकिन ज़ोया का दिल जाने क्यों हल्का सा बेचैन था। उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई पुरानी कहानी फिर से उसके सामने आने वाली हो।
तभी घर के बाहर एक कार आकर रुकी।
नसरा के चेहरे पर अचानक चमक आ गई।
“लगता है भैया आ गए!”
ज़ोया का दिल एक पल के लिए रुक सा गया।
कार का दरवाज़ा खुला और एक लंबा सा लड़का बाहर निकला। सफेद कुर्ते में उसका चेहरा पहले से ज्यादा गंभीर और आकर्षक लग रहा था। उसकी आँखों में वही अपनापन था, जिसे ज़ोया कभी भूल नहीं पाई थी।
अमन…
तीन साल बाद वह वापस लौटा था।
अमन ने जैसे ही अंदर कदम रखा, उसकी नज़र सीधे ज़ोया पर जाकर ठहर गई। दोनों कुछ पल बिना कुछ बोले बस एक-दूसरे को देखते रहे।
जैसे समय वहीं थम गया हो।
नसरा मुस्कुराते हुए बोली,
“लगता है तुम दोनों आज भी वैसे ही हो।”
ज़ोया तुरंत नज़रें झुकाकर दूसरी तरफ देखने लगी, जबकि अमन के होंठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई।
उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि यह मुलाकात उसकी जिंदगी के सबसे खूबसूरत और उलझे हुए रिश्ते की शुरुआत बनने वाली थी।                                                   अध्याय 2
दिल की हलचल और अनकहे एहसास
सुबह की हल्की धूप खिड़कियों से होकर कमरे में फैल रही थी। नसरा के घर में आज हल्दी की रस्म की तैयारियाँ चल रही थीं। हर तरफ हँसी, शोर और मस्ती का माहौल था।
ज़ोया आईने के सामने खड़ी खुद को देख रही थी। पीले रंग का सूट उसके चेहरे की मासूमियत को और निखार रहा था। लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी।
कल रात से अमन का चेहरा बार-बार उसके सामने आ रहा था।
“कहीं मैं ज़्यादा सोच तो नहीं रही…” उसने धीरे से खुद से कहा।
तभी नसरा कमरे में आई।
“मैडम, आज तो कोई बहुत खोई-खोई लग रही है।”
ज़ोया तुरंत संभल गई।
“ऐसी कोई बात नहीं है।”
नसरा शरारती मुस्कान के साथ बोली,
“अच्छा? फिर भैया को देखते ही तेरी आवाज़ क्यों बंद हो गई थी?”
ज़ोया ने तकिया उठाकर उसकी तरफ फेंक दिया।
“चुप कर!”
दोनों हँस पड़ीं।
कुछ देर बाद हल्दी की रस्म शुरू हुई। ढोलक की आवाज़ और गानों के बीच पूरा घर खुशियों में डूबा हुआ था। ज़ोया भी सबके साथ हँस रही थी, लेकिन उसकी नज़र बार-बार किसी को ढूँढ रही थी।
और तभी…
अमन सामने से आता दिखाई दिया।
पीले कुर्ते में वह पहले से भी ज्यादा हैंडसम लग रहा था। उसकी नज़र जैसे ही ज़ोया पर पड़ी, उसके कदम कुछ पल के लिए रुक गए।
ज़ोया ने तुरंत नज़रें झुका लीं।
अमन हल्का सा मुस्कुराया और उसके पास आकर बोला,
“कैसी हो, ज़ोया?”
उसकी आवाज़ सुनते ही ज़ोया का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
“ठीक हूँ…” उसने धीरे से जवाब दिया।
कुछ पल दोनों के बीच खामोशी रही।
फिर अमन मुस्कुराते हुए बोला,
“तीन साल में तुम बिल्कुल नहीं बदली।”
ज़ोया ने पहली बार उसकी आँखों में देखा।
“और तुम… बहुत बदल गए हो।”
अमन हल्का सा हँस पड़ा।
“शायद वक्त इंसान को बदल देता है।”
दोनों की बातें छोटी थीं, लेकिन उनके दिलों में कई अनकहे एहसास जन्म ले चुके थे।
उन्हें अभी यह नहीं पता था कि यह रिश्ता धीरे-धीरे दोस्ती से आगे बढ़ने वाला है।    😊🤩😍