Digital Shikar - 1 in Hindi Crime Stories by prince dobariya books and stories PDF | डिजिटल शिकार - भाग 1

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डिजिटल शिकार - भाग 1


शहर की रफ्तार हमेशा की तरह तेज थी, और उस रफ्तार के बीच सुमित की उंगलियां कीबोर्ड पर उससे भी दोगुनी तेजी से चल रही थीं। सुमित, एक २३ साल का सीधा-साधा लड़का, जिसका पूरा संसार उसके कंप्यूटर, कुछ फाइलों और कोडिंग की दुनिया के इर्द-गिर्द सिमटा हुआ था। शहर के एक छोटे से कोने में बैठकर वो लोगों के ऑनलाइन काम, डेटा एंट्री और कंप्यूटर से जुड़े छोटे-मोटे प्रोजेक्ट्स करता था। शांत स्वभाव, चेहरे पर हमेशा रहने वाली एक हल्की सी मुस्कान और काम के प्रति ईमानदारी—यही उसकी पहचान थी।
उसे क्या पता था कि जिस डिजिटल दुनिया को वो अपनी उंगलियों पर नचाता है, वही दुनिया उसके गले का फंदा बनने वाली है।
रात के करीब ९:३० बज रहे थे। सुमित अपना आखिरी प्रोजेक्ट सबमिट करके कंप्यूटर बंद करने ही वाला था कि उसके फोन की स्क्रीन चमक उठी। स्क्रीन पर कोई नाम नहीं था, बस एक अजीब सा इंटरनेशनल नंबर फ्लैश हो रहा था—**+४४-००१९०...**
सुमित ने आम तौर पर ऐसे कॉल्स को स्पैम समझकर काटने की आदत डाल रखी थी, लेकिन इस बार न जाने क्यों, उसके हाथ खुद-ब-खुद 'रिसीव' बटन पर चले गए।
"हैलो?" सुमित ने फोन कान से लगाते हुए कहा।
दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आई। बस एक अजीब सी, भारी सांसों की सरसराहट सुनाई दे रही थी।
"हैलो, कौन बोल रहा है? आवाज नहीं आ रही आपकी," सुमित ने दोबारा कहा।
तभी दूसरी तरफ से एक भारी, रोबोटिक और बदली हुई आवाज गूंजी, "सुमित... समय बहुत कीमती है। और तुम्हारा समय अब उलटा चलना शुरू हो चुका है।"
सुमित के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई। उसने फोन को कान से हटाकर दोबारा नंबर देखा। "देखिए, अगर आप कोई मजाक कर रहे हैं तो मैं फोन काट रहा हूँ।"
"मजाक?" दूसरी तरफ से एक ठंडी, डरावनी हंसी गूंजी। "अगले पांच सेकंड में तुम्हारे कंप्यूटर स्क्रीन पर जो होगा, उसे देखकर तुम्हारी हंसी गायब हो जाएगी। फाइव... फोर... थ्री..."
सुमित ने घबराकर अपने कंप्यूटर की तरफ देखा। स्क्रीन बिल्कुल नॉर्मल थी।
"...टू... वन। जीरो।"
जैसे ही उल्टी गिनती खत्म हुई, सुमित के कंप्यूटर की स्क्रीन अचानक पूरी तरह से काली पड़ गई। सुमित के हाथ-पैर ठंडे होने लगे। उसने माउस हिलाया, कीबोर्ड के बटन दबाए, लेकिन सब बेकार। अगले ही पल, काली स्क्रीन पर लाल रंग के बड़े-बड़े अक्षरों में लिखकर आया:
> **"WELCOME TO THE GAME, SUMIT. TARGET NO. 1 IS DONE."**
> *(खेल में तुम्हारा स्वागत है, सुमित। पहला शिकार पूरा हुआ।)*
सुमित का दिल जोर से धड़कने लगा। उसने तुरंत फोन पर चिल्लाकर कहा, "क्या बकवास है ये? तुमने मेरा सिस्टम हैक कैसे किया? कौन हो तुम?"
"मैंने कहा था न सुमित, मैं बहुत आगे की सोचता हूँ। अब अपने कंप्यूटर को भूल जाओ, और जरा अपने फोन पर आने वाले मैसेज को देखो," उस अनजान आवाज ने कहा और कॉल कट गया।
कमरे में सन्नाटा छा गया। सिर्फ सुमित की तेज होती सांसों की आवाज आ रही थी। तभी उसके फोन पर एक के बाद एक, दनादन तीन मैसेज आए। सुमित ने कांपते हाथों से फोन अनलॉक किया। पहला मैसेज किसी बैंक का था।
मैसेज पढ़ते ही सुमित के पैरों तले से जमीन खिसक गई। शहर के सबसे बड़े बिजनेसमैन, 'आर. के. सिंघानिया' के पर्सनल अकाउंट से **५० लाख रुपये** ट्रांसफर हुए थे... और वो पैसे किसी और के नहीं, बल्कि सुमित के उस बैंक अकाउंट में आए थे जिसे उसने महीनों से इस्तेमाल भी नहीं किया था!
दूसरा मैसेज पुलिस डिपार्टमेंट का एक ऑटोमेटेड अलर्ट था, जिसमें लिखा था कि सिंघानिया के अकाउंट से हुई इस बड़ी साइबर धोखाधड़ी की जांच शुरू हो चुकी है।
और तीसरा मैसेज उसी अनजान नंबर से था:
> **"सबूत बहुत पक्के हैं सुमित। पुलिस के आने में सिर्फ १० मिनट बचे हैं। अब बचकर दिखाओ!"**
बाहर दूर कहीं... पुलिस की सायरन की आवाज हवा को चीरती हुई सुमित के कानों तक पहुंचने लगी थी।