zindagi ki dusra kinara - 18 in Hindi Thriller by AbhiNisha books and stories PDF | जिंदगी की दूसरे किनारा - 18

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जिंदगी की दूसरे किनारा - 18

जिंदगी की दूसरा किनारा पार्ट 18 







और वही असल दुनिया में अस्पताल में 

आईसीयू रूम में

मेघना के वेट के पास बैठे हुए हैं


उसकी की मां और बहन 




मेघना की मां हल्के सर तिरछे रखते हुए 

 मेघना के सर पर हल्के हाथ फेरते हुए 

अपने रोते हुए आंखों के साथ हल्की आवाज में कहती है 


तुम ठीक तो है ना 





और वही रिया भी अपनी बहन को देखते हुए

 हल्की रो रही है







और वही हल्के कदम बढ़ाते हुए

 डॉक्टर देव उसे रूम की तरफ आ रहा है 

हल्के नज़रे नीचे करते हुए

उदास चहरा लेकर कुछ सोचते हुए 







और वही मेघना की मां अपनी बेटी के सर पर हाथ फेरते हुए 

दर्दके साथ हल्की आवाज में आगे कहती है 


हम तुम्हारे इंतजार कर रहे हैं 

तुम वापस आ जाओ









और वही दूसरे तरफ मेघना की दुनिया में

 मेघना कहीं जाने के लिए 

तैयार हो रही है 

शीशे के सामने खड़ी होकर 

हल्के सर झुकाते हुए

अपने शर्ट की बटन लगा रही है 


और तभी अचानक उसके सर में तेज दर्द होता है 

एक सरसराहट की आवाज के साथ 

और वह अचानक से पैनिक है कर 

अपने चेहरे को सिकोड़ते हुए 

अपनी पूरी बॉडी टाइट कर लेती है

 और अचानक अपने शर्ट से 

 अपनी दाएं हाथ हटाते हुए उठाकर 

 जल्दबाजी में अपनी कान से रखते हुए सर पर रखती है 

और दूसरा हाथ अपने आप नीचे गिर जाती है 


और वभी वो चेहरे को सिकोड़ते हुए 

और आंखें कड़ी करते हुए आंखें बंद कर लेती है 





और तभी अचानक उसके कानों में

 तेज आवाज आती है 


हम तुम्हारे इंतजार कर रहे हैं

 वापस आ जाओ 




और यह सुनते ही अचानक मेघना अपने कान के पास हाथ

कि कहेनी से मलते हुए 

और उसके सांस गहरी ठेहेरा भारी हो जाती है 

और धीरे-धीरे बाहर की आवाज ढूंढली


और वो हल्के सर राउंड करते हुए 

पैनिक हो कर अजीब से रिएक्ट करती है 

और रिएक्ट करते हुए 

 अचानक से दूसरे हाथ उठाकर भी 

 दूसरी साइड कान और सर पर रखती है 



2 सेकंड कान के पास हाथ के कहेनी को मिलते हुए

अचानक से मेघना लंबी सांस लेते हुए 

सर उठाते हुए 


आंख खोलकर शीशे की तरह कड़ी निगाहों से देखती है 

और देखते ही गहरी और लंबी सांस लेते हुए






और उसे दिखाई देती है 

धीरे-धीरे ढूंढने से होते हुए 

 एकदम से साफ

शीशे के अंदर एक दुनिया बनने लगती है

बाहर की पूरी आवाज साइलेंट हो जाती है 

और अंदर की हलचल उसे सुनाई देने लगती है

 वो दुनिया हकीकत की दुनिया की प्रतिबिंब है 




एक लड़की जो बेहोश है 

और उसके सामने बैठी हुई दो लेडी 

एक लेडी जो उसके सर पर हाथ फेर रही है 

और कह रही है


 हम तुम्हारे इंतजार कर रहे हैं 

वापस आ जाओ 



और वही मेघना यह सब देखते हुए हैरान है 

फिर भी वह गहरी गहरी ठेहरते सांस लेते हुए

और कड़ी आंखें करते हुए 

और अपने सर पे कानों के पास हाथ मलते हुए ठहर जाती है

और उसे दृश्य को देखते हुए 

और अचानक उसकी सांसे गहरी भारी होते हुए थम सी जाती है

और हाथ अपने आप कानों और सर पे रुक जाती है







और वही हकीकत में 

अपने सफेद जैकेट के दोनों जब में हाथ डालते हुए 

और उदास चेहरा लिए कुछ सोचते हुए

 उस आईसीयू रूम में चलते हुए 

डॉक्टर देव अचानक नजर उठाते हुए 

उस पेशेंट को और उसकी फैमिली को देखता 

और अपने कदमें ठहरा देता है 




और वही मेघना की मां और उसकी बहन 

उसके पास बैठकर उसे देख रही है 

और उसके सर को सेहला रही है





और फिर डॉक्टर देव कुछ सेकेंड बाद 

उन लोगों को देखते हुए

 उसके तरफ अपने कदम बड़ाता है 







और वही मेघना को परछाई के साथ-साथ डॉक्टर देव की कदमों की आहट भी सुनाई दे रही है

 जो अभी उस अस्पताल में हो रहा है 

वह सब 



और यह देखते हुए 

वह फिर से अचानक मेघना जोरो जोरो से सांस लेते हुए

 और चेहरे को सिकोड़ते हुए 

वैसे ही हाथ को कान के पास रखते हुए 

कड़ी आंखों के साथ शीशे की तरह देख रही है 



वह देख रही है एक आदमी की कदम जो

 उस पेशेंट की तरफ बढ़ रहा है 






और वही डॉक्टर देव आसल दुनिया कोमा रूम में 

आगे बढ़ते हुए 

अचानक से फिर से ठहर जाता है 



और वही पेशेंट की मां और बहन को देखते हुए

शांत और उदास चेहरे के साथ

 हल्की भरी आवाज में संवेदना के साथ कहता है 



आप चिंता मत कीजिए वह ठीक हो जाएंगे 






और तभी अचानक यह सुनते ही 

मैं मेघना की आंखें चोड़ी हो जाती है 

और वो और भी ज्यादा पैनिक होकर 

और भी कड़ी आंखें करते हुए 

गहरी गहरी सांस लेकर

आईने की तरफ देखनी हुई

उस प्रतिबिंब के देखती है 






और वही डॉक्टर देव यह कहते हुए 

और हल्की नजरे उठाकर उसे पेशंट को दिखाते हुए

अपने ठहरे हुए कदम हल्के से आगे बढ़ते हैं





 और तभी देव की बातें सुनते ही 

मेघना की मां हल्के अपने हाथ अपनी बेटी के सर से हटाते हुए पीछे पलट कर देखती है 



और साथ-साथ रिया भी मूरते हुए 

डॉक्टर की तरफ देखती है 






और वही डॉक्टर देव एक कदम आगे बढ़ते हुए 

पेशेंट की तरफ देखते हुए 

 खामोशीके साथ फिर से ठहर जाता है 







और वही मेघना को प्रतिबिंब में 

वह डॉक्टर नहीं दिख रही है 

वो बस उसकी पैरों को देख आ रही है

  और उसके सामने कोमा में पड़ी हुई वह पेशेंट जो

जो उसे साफ से दिखाई नहीं दे रही


 और साथ में बैठी हुई रिया और उसकी मां 

उसे बिल्कुल साफ से दिखाई देर ही है 




और वह यब सब गहरी आंखों से देख रही है

और वह देखना चाहती है 

वह उस डॉक्टर की चेहरे को 

और यह देखने की कोशिश में 

उसकी चेहरे सर और 

 बॉडी की मांसपेशियां सिकोड़ते हुए टाइट हो जाती है

और वह ऐसे करते हुए अपने दिमाग को थका देती है 


और उसके सर में और भी ज्यादा तेज दर्द होता है 

और वो गहरी सांस लेते हुए 

और जोरो जोरो से दोनों हाथ कान के पास मलने लगती है और दर्द और पैनिक से घबराहट में 

 सर हिलाते हुए अजीब तरह से रिएक्ट करते हुए


और बार-बार चेहरे को देखने की कोशिश वजह से 

 सचमुच में इसका दिमाग थक जाती है 

और वह आईने मे दिख रही वह प्रतिबिंब 

 अचानक से वहीं ठहेर जाता 




और यह देखते हुए वह और भी ज्यादा पैनिक हो जाती है 

उनकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं 

और उसके सर में और ज्यादा दर्द होता है 

 और चेहरे को सिकोड़ते हुए 

और जबरा करते हुए सर को राऊन करने लगती है


 फिर से नजर उठा कर आईने पर नजर टिका देती है 

  और जोरो जोरो से दर्द और घबराहट में सांस लेने लगती है





और 

तभी अचानक उसके अंदर से एक डरावनी 

और भारी आवाज आती है




क्या देख रही है 

क्या थक गई




और तभी यह आवाज सुनते ही

  अचानक मेघना डर जाती है 

और डरते हुए 

उसके हाथ अपने आप कानों और सर पे ही ठहेर जाती है 

और उनकी चेहरे और आंखें सिकोड़ते हुए

और भी चोरी और सख्त हो जाती है 

 और उसके सांसे थम जाती है 

और फिर अचानक 2 सेकंड में 

वह डरते हुए

सहेम कर अचानक के कदम पीछे हो जाती है 

ठेहरा भरी सांस लेते हुए हिचक कर

पलके झपकाते हुए 

और उसके हाथ भी कान के पास से अपने आप 

गिरते हुए नीचे हो जाती है 




और वही शीशे में चलने वाली दृश्य अभी ठहरा हुआ है 

 वीर की कदमों पे 

और उसे पेशेंट और उसकी मां और बहन पे




और फिर कभी मेघना हीचकते हुए 

गहरी ठहरते हुए सांस लेते हुए 

अपने कदमों को जमीन पर ठहरने की कोशिश करती है 

अचानक से खुद को संभालने की कोशिश करते हुए 

 हल्के सर उठा कर फिर से शीशे की तरफ देखती है 



डर में भी घबराते हुए 

अपने सामने हो रही वह अजीब दृश्य 

 अंजानी दुनिया की सामना करते हुए






और तभी अचानक से गीलीच होते हुए 

उस शीशे में उसकी ही एक तेज दरार परछाई ऊपर आती है 

जिसके कपड़े एकदम से काले हैं 




और तभी अचानक से यह देखते ही 

 मेघना की चेहरा सीकोड़ते हुए 

आंखें और

डर के कारण 

घबराहट में फिर से चोड़ी हो जाती है 

और उसके चेहरा टाइट

 वह ठेहरे हुए फिर से भरी सांस लेने लगती है 

पर वह इस बार नजरे नहीं हटती 




और तभी आईने में उबारी हुई काली परछाई 

जोरो जोरो से हंसने लगती है 




हा हां हां हा आ




और वही मेघना उसे देखते हुए और 

 हंसी की आवाज सुनते हुए 

 पैनिक में घबराते हुए 

और अपने चेहरे और आंखों को सिकोड़ते हुए

गहरी सांस ले रही है

अचानक से फिर से अपने दोनों हाथ उठाते हुए 

हाथों की केहेनी से कान दबाते हुए 

 सर पर हाथ रख लेती है





और तभी आईने में हंसते हुए उसकी ही परछाई 

डरावनी आवाज के साथ कहती है 


क्या तुम्हें जानना है 

 वह कदम वह आहट



और वही मेघना चेहरे को सिकोड़ते हुए 

सर को हिलाते हुए 

और हाथो की केहेनी से कान को जोरों से दबाते हुए 

और जोरो जोरो से घबराहट में सांस लेते हुए 

आईने की तरफ देख रही है कड़ी आंखों से






और ही यह कहते ही 

वह शीशे में ऊपरी हुई उसकी परछाई 

जोर-जोरों से डरावनी हंसी हंसने लगती है 


हा हा हा हा हा




और तभी अचानक 

और देखते ही देखते 

उसकी परछाई अपने आप बिखरने लगती है 

और साथ में वह अस्पताल की वह दृश्य आते हुए 

दृश्य टूट कर 

कागज की टुकड़ों की तरह आपस में बटते हुए

  बिखरने लगते हैं

 इधर के सेन उधर जाने लगते हैं

 और उधर के सीन उधर




और साथ में उसकी परछाई थी 

जोरो जरो से हंसते हुए दिखाई देने लगते हैं 


हा हा। हा। हा। हा




और वही अचानक यह देखते हुए 

मेघना की पैनिक और भी ज्यादा बढ़ जाती है 

 और अपने आप उसकी आंखें कड़ी हो जाती है 

वह ठेसराऊ और गहरी सांस लेते हुए 

पूरे चेहरे को सीकोड़ लेती है 

 और उसकी बॉडी के नशे अपने आप टाइट हो जाती है 





 और शीशे में दिख रही दृश्य उल्टी सीधी होते हुए 

अचानक धीरे-धीरे टूटने लगते हैं 

ऐसा लगता है की हवा में गायब हो रही है 




और यह देखते हुए

 मेघना गहरी भरी सांस लेते हुए 

घबराहट में पैनिक होते हुए लड़खराने लगती है





और वही उसके अंदर की वह व्यक्ति है

और जोर-जोरों से हंसने लगता है 


 हा हा। हा हा। हा




और वही मेघना इस बार उस ध्यान देने की कोशिश नहीं करती 

पर वह आवाज भी उसे असहनीय महसूस हो रही है 

वह से बर्दाश्त नहीं कर पा रही 

फिर भी चेहरे को सिकोड़ते हुए 

 दर्द में गहरी सांस लेते हुए 

और शिसक शिशक कर रोते हुए 

और कान को वैसे ही दबाते हुए 


अपनी नजर शीशे पर टिकी हुई है 



यह देखने की कोशिश में की 

आखिर होता क्या है 

अगर इस दृश्य का 

और इस आवाज को मैं 

 कुछ देर बर्दाश्त करूं तो





और आईना मे अचानक आपस में मिलते जुलते 

बहुत सारे पुराने पिक्चर बनाने लगते हैं 

और उसके साथ-साथ बहुत सारी आवाज 

फुस फुसाते हुए गूंजने लगते हैं 

 



और वही मेघना यह सब सुनते हुए 

 और अचानक घबराहट में लड़खरते हुए 

डगमगा जाती है

और अचानक से अपने झपकते हुए 

और पल को बार-बार झटका कर खोलते हुए 

हल्के झुक कर तिरछे से खड़े होते हुए

 शीशे की तरफ ही नजर टिकते हुए देख रही है 

गहरी और लंबी सांस लेते हुए

आंखों से आंसू बहते हुए







और वही उसके अंदर के इंसान और 

जोर-जोर से हंस रहा है 


और तभी अचानक ऐसा लगता है 

 कि मेघना की पलके बंद हो रही है 

आईने को देखते हुए वह लड़खड़ा रही है 




और अचानक आईने के अंदर की वो सारी आवाज़ साइलेंट हो जाती है 




और फिर आईने में चलती हुई दृश्य एक तेज रफ्तार में 

 दिखाई देती है 

एक स्कूल में पढ़ने वाली लाइन बच्ची 

जल्दबाजी में कदम बढ़ाते हुए

एक बिल्डिंग के अंदर आती है

 और फिर लोभी से गुजरते हुए 

लिपि में जाती है 

लिपि के दरवाजा बंद होती है 

और फिर कुछ देर बार

वह लिफ्ट

बिल्डिंग की विसमी मंजिले पर 

आकर रूकती है 

और वह बच्ची लिपि से बाहर होते ही 

सीधे अपनी कदम बढ़ाते हुए कुछ कदम चलती है 

और फिर वहां से मूरती है दक्षिण की ओर

 वह बच्ची गलियों से गुजरते हुए

 एक अपार्टमेंट के पास जाती है

 रूम में लगी हुई दरवाजे की तरफ 

 अपने हाथ बाराती है 

वहां लगी हुई नंबर लॉक खोलने के लिए 

 वो कीपैड पर अपनी उंगलियां रखते हुए 

कुछ नंबर जल्दबाजी में डायल करती है 

डायल करते ही 

 वह अपने हाथ नीचे करती है 

और दरवाजे

अचानक से खुल जाती है


और वह तभी वह बच्चे अपनी कदम बढ़ाते हुए 

 उस अपार्टमेंट के अंदर जाती है 





कुछ कदम अंदर जाते ही वो लोभी से होते हुए 

कुछ कदम मूरती है

 और आगे की तरफ देखते हुए 

 अचानक से शोख खाते हुए ठहर जाती है 




 और वही उस अपार्टमेंट की दूसरी तरफ 

 एक साइड में एक बिस्तर है

और उस बिस्तर पर एक आदमी एक औरत के साथ है 

एक दूसरे की बाहों में 



और तभी अचानक दृश्य 

मे गिलिच आने लगते हैं 

सब कुछ अप डाउन होते हुए 

अचानक धीरे-धीरे वह गिलिच धुंधली होते हुए 

अंधेरी में बदलने लगते हैं

 


गहरी अंधेरा और भारीपन 

जो कि बर्दाश्त के बाहर है 




और तभी अचानक शीशे के सामने खड़ी हुई मेघना के

सर में और तेज दर्द होता है 

और वह और भी ज्यादा झुक जाती है 

अपने सर को हल्के तिरछे 

 और चेहरे को सिकोकर आंखों को बंद करते हुए 


और दर्द से उसकी बॉडी की पूरी नशे भी खिंच जाती है 


और वो आपने हाथों से कान को दबाते हुए 

और हाथ बढ़ाकर  अपनी कान केहनी से दबाती है

और आपने ही हाथों की पंजों से घबराहट में पैनिक हो

अपने ही बालों को खिचते हुए 


जोर से चिल्लाती है 



आ।