Hamraaz - 20 in Hindi Crime Stories by Gajendra Kudmate books and stories PDF | हमराज - 20

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हमराज - 20

फिर ज़ेबा ने वहाँ रहते हुये अपने जवानी का जादू चलाना सुरु कर दिया था. उसे उन दहशतगर्दों की कमजोरी का पता चल गया था. ज़ेबा धीरे धीरे उनकी कमजोर नस दबाकर अपने मकसद को पूरा करने की ताड़ में रहने लगी थी. एकदिन ज़ेबा अपना पहला दाव खेला और उन दहशतगर्दों में से एक को अपना दिवाना बनाना सुरु कर दिया. दहशतगर्दों के सरगना ने ज़ेबा पर कड़ी नजर रखने के लीये जीस दरिंदे को पहरे पर लगाया था. ज़ेबा ने उसे ही अपना दिवाना बनाना सुरु कर दिया. ज़ेबा ने उसे अपनी अदायें दिखाना सुरु कर दिया था. पहले अपने सरगना के डर से वह ज़ेबा के करीब आने की जुर्रत नहीं करता था. लेकिन ज़ेबा ने उसे उसके करीब आने को मजबूर कर दिया और एकदिन अपने हुस्न की झलक उसे दिखा दी. उसने उसके हवस की आग को भड़काने के लीये उसे अपने जीस्म को छूने की इजाजत दी. वह दरींदा डरता रहा उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी, क्यों की उसे पता था के अगर उसने ज़ेबा के साथ कोई भी हरकत करने की कोशीश की तो उसका सरगना उसे मौत के घाट उतार देगा. लेकिन ज़ेबा ने भी अपने जीस्म का ऐसा जादू चलाया था के वह आखीर ज़ेबा की आगोश में आने को मजबूर हो गया. फिर उस दहशतगर्द ने आखीर में ज़ेबा को कसकर अपनी बाहों में ले लीया. उसके बाद वह उसके जीस्म के साथ खेलने लगा. ज़ेबा ने भी उसे अपने जीस्म के साथ खेलने दिया और फिर कुछ देर के बाद उसे खुद से दूर कर दिया.

    ज़ेबा ने उसे यकायक दूर करने पर उसने पूछा, " क्यों क्या हुआ जानेमन तुम्हे मेरा प्यार पसंद नहीं आया क्या." तो ज़ेबा ने उसे झूठ कहा वह बोली, " ऐसा नहीं मेरे सरताज, लेकिन कोई तो हमें देखकर यहाँ से भाग गया." फिर उसने पूछा, " कौन था और किस तरफ भागा. " तब ज़ेबा ने कहा, " वह आप में से ही कोई था और मुझे लगता है के वह आपके सरगना को बताने गया है." उसके बाद ज़ेबा ने उसे एकतरफ इशारा करके बताया के वह शख्स इधर भागा है. फिर क्या उस दहशतगर्द ने आव देखा न ताव डर के मारे उस ओर उसे पहले जो भी दिखा उसने उसे मार दिया और उसकी लाश को खाई में फेक दिया. फिर वह वापस ज़ेबा की तरफ आ गया और उसने कहा, " ख़त्म कर दिया मैंने अपने राजदार को." फिर ज़ेबा ने कहा, " बहोत खूब मेरे सरताज." ऐसा बोलकर ज़ेबा ने उसके चेहरे पर से अपनी ऊँगली फेर दी. ज़ेबा की उस अदा से वह दहशतगर्द दिवाना हो गया था. फिर ज़ेबा ने उसे अपनी जगह पर जाने के लीये कह दिया. इसतरह दिन बीतते रहे और ज़ेबा अपनी चालाखी से अपने हुस्न का जादू चलाकर एक एक दहशतगर्दों को मीटाती रही. फिर एकदिन उस सरगना ने ज़ेबा को बुलाया और उसे कहा, " ज़ेबा आपको हम एक ख़ुफ़िया मीशन पर भेज रहे है. आपको वहाँ जाना है और उस नमकहराम, धोखेबाज को मौत के घाट उतारना है. इसके लीये आपको जो मदत चाहिये वह वक्त वक्त पर आपको मील जायेगी. हमारे साथी आपको वहाँ पर मील जायेंगे. वह आपके साथ साये की तरह रहेंगे और आपकी हिफाजत करेंगे. तो आपको कल ही उस ख़ुफ़िया मीशन पर नीकलना है तैयार हो जाओ जाने के लीये. वहाँ की सारी जानकारी आपको मील जायेगी." ऐसा कहकर वह सरगना चला गया.

     अब ज़ेबा को अपना नया दाव खेलना था और अपने मंसूबे उनके ही हातों से पूरा करना था. तो ज़ेबा को उन्होंने एक खुबसूरत अदाकारा के रूप में वहाँ भेजने का मंसूबा बनाया था. उस हिसाब से ज़ेबा के बारे में तरह तरह की बाते उस अफसर के दफ्तर में बताई गई थी. ज़ेबा को वहाँ उस अफसर के पास कुछ काम करने की इजाजत लेने जाना था. इसके लीये ज़ेबा के जीस्म में उसके सरगना ने एक ख़ुफ़िया ट्रांसमीटर छिपाया था ताकी ज़ेबा किसी के साथ बात करे तो वह उन्हें वहाँ बैठे बैठे सुनाई दे. साथ साथ में अगर ज़ेबा कोई होशारी कर के भागने की सोचे तो उसका पता उन्हें उस ट्रांसमीटर से चलता रहे. तो जैसा तय हुआ था उस तरह ही ज़ेबा एक दुसरे मुल्क के दफ्तर की कर्मचारी बनकर उस मुल्क में अपने मुल्क के काम को शुरू करने की इजाजत मांगने के लीये गयी थी. ज़ेबा ने वहाँ जाकर अपना नाम बताया और उस अफसर से मीलने की दरख्वास्त उस सीपाही से की. तब वह सीपाही अंदर उस अफसर के पास गया और उसने उसे ज़ेबा के बारे में कहा. किसी औरत का नाम सुनकर उस अफसर ने तुरंत ही उस सीपाही को ज़ेबा को लेकर आने के लीये कहा. फिर क्या था ज़ेबा वहाँ गयी और दरवाजे पर जाकर बोली," हुजुर क्या हम अंदर आ सकते है." ज़ेबा की मधुर आवाज सुनकर वह अफसर खुश हो गया और उसने कहा, " हाँ आइये मोहतरमा. आइये तशरीफ़ रखीये." फिर ज़ेबा अंदर जाकर कुर्सी पर बैठ गयी और इधर उधर देखने लगी. फिर वह अफसर बोला, " मोहतरमा आप क्या देख रही है इधर उधर." तब ज़ेबा बोली, " हुजुर हम आपके शानदार दफ्तर को देख रहे है, वल्लाह कितना खुबसूरत है." ऐसा कहते हुये ज़ेबा ने अपनी कातील नजर अफसर पर डाली और गुलाबी होटों से मुस्कुरा दी.

    वह अफसर ज़ेबा की अदा देखकर फ़िदा हो गया था. फिर वह बोला, " मोहतरमा आपने आपका नाम नहीं बताया." ज़ेबा ने कहा, " हुजुर हमारा नाम हसीना है और हम आपके पड़ोस के मुल्क से आये है." तब अफसर बोला, " तो फिर आपके मंसूबे के बारे में बताइये." ज़ेबा ने कहा, " हुजुर हमारे मुल्क में हम खुशबु बेचते है और हमारा इत्तर का व्यापार है. हुजुर हमारी ख्वाहीश है की हम आपके मुल्क में भी हमारी खुशबु का व्यापार करे. इसके लीये हम आपकी इजाजत चाहते है, इसके एवज में हम आपको हमारे मुनाफे में से अच्छी खासी रकम देंगे. हम आपका हर तरह से ख्याल रखेंगे. आपको कभी किसी बात की शिकायत का मौका नहीं देंगे." ऐसा कहते हुए ज़ेबा ने अपने नाजुक कोमल हात अफसर के हाथों पर रख दिए. ज़ेबा के कोमल हातों की छुअन से वह अफसर पागल हो गया था. फिर उसने कहा, " आप हमारा हर तरह से ख्याल रखने का वादा कर रही हो. तो बताइये किस तरह से आप हमारा ख़याल रखेंगी. फिर ज़ेबा बोली, " हुजुर आप जीस तरह जहाँ बोलेंगे हम उस वक्त उस जगह आपकी खिदमत में हाजीर हो जायेंगे. फिर वह अफसर ने ज़ेबा का कोमल अपने हातों से दबाकर कहा, "आप बाद में अपने वादे से मुकर तो नहीं जाओगी." फिर ज़ेबा ने भी उसका हात दबाकर कहा, " हमें एकबार आजमाकर तो देखीये हुजुर आप हमें सारी जिंदगी भुला न पाओगे." ऐसा कहते हुये ज़ेबा ने अफसर को आँख मारी. 

    शेष अगले भाग में ........