प्यार💕 एक अनकहा एहसास...!!
मेरे ख्वाबो मे जो आए,,,,
आ के मुझे छेड़ जाए,,,,,
उससे कहो मेरे....
सामने तो आए,,,
मेरे ख्वाबो मे जो आए ,,,,ऐ,,,,ऐ,,,,
तभी माँ ने अंदर से आवाज लगाई,
पहले अंदर आजा नहीं तो सर्दी लग जायेगी...बाद मे अपने राजकुमार
को बुलाना 😄.....
विधि अंदर आते ही टेड़ा मुह करते हुए, "तुम भी ना माँ"...!! हमेशा बीच मे आजाती हो,,,कितना मजा आ रहा था बारिश मे भीगने मे।
माँ भी हँसी मे उसकी बात टालते हुए, अरे .....मै कहा बीच मे आयी वो
तो तुम्हें बारिश से सर्दी ना लग जाए इसीलिए कहा बस,,,,
वैसे जाना चाहो तो जा सकती हो,
फिर पापा कि डांट भी ,,तुम ही
सुनना....
माँ ने किचन मे जाते हुये कहा।
विधि अपने माँ पापा कि एक ही बेटी
थी तो लाडली थी दोनों कि।
देखेंने मे दुबली पतली पर सुंदर थी
जो कोई देखे तो देखता ही रह जाए।
BSc Final की स्टुडेंट् थी तो
कॉलेज मे सीनियर, अपने जूनियर
पर रोब जमाना, उनकी खिचाई
करना आदत थी उसकी।
वैसे सब स्टुडेंट् उसकी सब बातें
मान भी लेते थे...वो थी ही ऐसी पर
किसी को पास नही आने देती।
प्यार के ...नाम से ही दूर भागती।
उसके फ्रेंड्स भी कहते...
"इतना क्यों भागती हो प्यार के नाम से ,कभी तुम्हें भी प्यार हो गया तो"...!!
तब विधि, वही बात काटते हुए कहती, हटो...!!"इन फालतू कामो
के लिए वक़्त नहीं है मेरे पास"...!!
मुझे तो बस, अपनी पढ़ाई पर ध्यान
देना है, ना कि इन बातों पर.... प्यार
का क्या है वो शादी के बाद कर लेंगे।
बस, ऐसे ही हमेशा हँसी मे बात टाल
देती और अपने काम मे लग जाती।
पर दिल ही दिल मे वो भी चाहती
थी की कोई ऐसा हो जो उसका
अपना हो।
उसे भी अपने सपनो के राजकुमार
का इंतजार था पर कॉलेज मे ऐसा
कोई अब तक उसे मिला ही नहीं।
*******
उस वक़्त मार्केट मे नये नये स्मार्ट फोन आये थे। सभी दोस्तो के पास फोन देख कर विधि को भी लगा उसे भी नया फोन लेना चाहिए। तो विधि ने पापा से बात
कि।
उसके पापा सोफे पर बैठे टीवी पर न्यूज़ देख रहे थे।
विधि पापा के पास आकर बैठ कर,
दोनों हाथ पापा के गले मे डालते हुए
प्यार से कुछ कहने लगी ...
पापा तभी समझ गए आज यह जरूर कुछ मागने वाली है, पैसे या कोई चीज।
तभी विधि बोल बैठी "पापा मुझे भी वो नया फोन दिला दो ना"...!!
पापा ने बात काटते हुए कहा "अरे क्या करना है नये फोन का...!! तुम्हारे पास है ना तुम्हारा फोन, बस अब उसी से काम चलाओ"....
बस इतना ही कहा कि, विधि नाराज
होकर अपने रूम मे चली गयी।
सुबह भी ज्यादा किसी से बात नहीं कि ओर कॉलेज चली गयी...कॉलेज मे सब
के पास फोन देख कर उसका मन ओर ललचाने लगा।
दो-तीन दिन ऐसे ही गुजर गए। विधि को नाराज देख कर पापा समझ गए वह क्यु नाराज है। फिर थी तो पापा कि लाडली उसकी सभी ख़्वाईशे, वो जो भी मागती उसके पिता लाकर देते। उसे ऐसे नाराज नही देख सकते थे..।।
फिर दूसरे ही दिन पापा ने उसके लिए नया फोन लाकर उसे चौका दिया।
विधि भी फोन देख कर ख़ुशी से उछलने लगी।
उस दिन विधि बहुत खुश थी। कॉलेज पहुचते ही उसने अपने सब दोस्तो को फोन दिखाया।
विधि के साथ वो भी खुश थे। विधि तो उतना जानती नही थी फोन के बारे मे, तो उसकी एक दोस्त जिसका नाम निशा था उसी ने ही कुछ गेम्स और कुछ एप्स के बारे में बताया फिर धीरे धीरे विधि सब सिख गई।
बस...!! तभी से उसकी लाइफ ही बदल गयी..।।
विधि ने कभी सपने मे भी नही सोचा था इस छोटे से फोन मे उसे उसकी दुनिया मिल जाएगी, कोई ऐसा मिल जाएगा जिसे वो कब से पाना चाहती थी।बिलकुल उसके सपनो के राजकुमार जैसा .....
"जो उसका होगा सिर्फ उसका "....।
किसी को यकी हो ना हो पर, यह हुआ ...वो इंसान जिसे विधि ने कभी देखा नही, जानती तक नही थी, उसने
विधि का दिल चुरा लिया।
शायद इसीलिए कहते है "प्यार सोच समझ कर, देख परख कर नहीं होता" वो तो बस हो जाता हैं। क्यों की प्यार प्यार होता है, व्यापार नही जो हम सोच समझ कर करे।
वो लड़का विधि को अॉनलाइन चैटिग एप मे मिला। विधि को वैसे भी शेरों शायरी का शौक था और वह लड़का भी अपनी पोस्ट मे शायरी ही लिखता जो विधि के दिल को छु जाती।
विधि के प्रोफाईल् मे पहले तो कोई फ़ोटो नहीं थी पर जब उसने अपनी फ़ोटो dp मे लगाई दूसरे ही दिन उस लड़के का मैसेज आया।
पहले तो विधि को डर लगा ऐसे किसी अंजान से बात करने मे, फिर कुछ सोच कर उसने भी रिप्लाईं कर दिया।
लड़का : हैलो
विधि : हैलो
लड़का : तुम बहुत सुंदर हो।
विधि : थैंक्स 😊, "पर तुम कौन हो और तुम अपनी फोटो नहीं लगाते"?
लड़का : नहीं, मुझे नहीं पसंद।
लड़का : क्या, मै आपसे कॉल पर बात कर सकता हु ?
विधि : जी नहीं, यही कहो जो कहना है।
लड़का : बस 2 min. बात करनी है। अच्छी लगे तो ठीक नहीं तो काट देना कॉल।
विधि सोचते ही रह गयी कि क्या करे,,,
पहले कभी उसने ऐसे किसी अंजान से
फोन पर बात नही कि थी।
फिर कुछ सोच कर ....
विधि : ok, पर 2 min. ही।
लड़का : ok
विधि कि मंजूरी लेकर उसने कॉल किया। फिर क्या था बस तभी से जो
बातों का सिलसिला शुरू हुआ जो बस चलता रहा।
बाते हो भी क्यु ना...उसकी बात ही अलग थी। सबसे अलग अंदाज था उसका ...
अब तक स्कूल ,कॉलेज मे कितने लड़के मिले पर उसके जैसा कोई नही मिला....
कुछ अलग ही जादु था उसकी बातों मे और आवाज भी उसकी ऐसी कि वो खो जाती।
कितनी बाते करते थे वो सुबह- शाम घंटों ,,बाते होती पर बाते कभी खत्म ही नही होती थी विधि तो बस उसी के ख्यालो मे खोई रहती और अकेले ही मुस्कुराती बाते करती ओर कहती ,"लगता ही नही , कभी उसे देखा नही या जानती नही।
ऐसा लगता है, "जैसे हम कोई अजनबी है ही नही"बरसों से एक दूसरे को जानते हो".....।
घर हो या कॉलेज हर जगह उनकी बाते चलती। अब विधि के फ्रेंड्स भी सोचने लगे 🤔 ये इतनी बाते किस के साथ करती हैं। वो पूछते रहते कौन है? पर विधि हमेशा टाल देती।
कोई नही बस,,,किसी रिस्तेदार का कॉल है, यह कह कर....
पर कहते है ना"इश़्क-मुश्क" छुपाए नहीं छुपते। दोस्तो को एक दिन पता चल गया। उन सब ने विधि कि बाते जो सुन ली।
फिर क्या था सभी चिढ़ाने लगे, बॉय फ्रेंड ....!! और किसी को खबर भी नही।
विधि सोचने लगी,, 🤔
बॉय फ्रेंड!!! नहीं ?मैंने तो सोचा भी नही ,वह मेरा बॉय फ्रेंड है या प्यार जैसा कुछ....हम तो बस बाते करते थे। क्यो कि हमे एक दूसरे का साथ अच्छा लगता था।
अब तो सबको पता चल गया था विधि किसी से प्यार करती हैं।
अब क्या? सब का यही सवाल कौन है ?कैसा है?कॉलेज का या बाहर का?
पर, वो बताये भी तो क्या और दिखाए तो किसे। सब हँसेगे उस पर, बात ही ऐसी थी।
क्या ?कोई मानता ऐसी बात ....जिसे उसने कभी देखा नही,जानती नही,कौन है कैसा है ऐसे इंसान से कैसे कोई प्यार कर सकता है।
पर यह हुआ था उसके साथ ....
वो प्यार था या कुछ और नही पता पर उनके दिल जरूर जुड़ गए थे।
कभी भी उसे दिल से याद करू उसे खबर हो जाती या वो याद करे तो मुझे।
शायद इसलिए दिल का रिस्ता सबसे ज्यादा मजबूत होता है। जिसे कोई नही तोड़ पाता फिर कितना भी जोर लगा लो।
वो लड़की जो प्यार नाम से दूर भागती थी शायद उसे भी ये रोग लग ही गया।
दो महीने कैसे बीत गए पता भी न चला।
उनकी बाते रोज होती थी।
एक दिन जब वो उस लड़के से कॉल पर बात कर रही थी तभी उसके पापा ने उनकी बाते सुन ली।
विधि फोन पर लगी थी तभी पापा आये और विधि के हाथ से फोन लेते हुए गुस्से से, " क्या इसलिए तुम्हे ये नया फोन लेना था, लड़को से बाते करने के लिए",,,,!!
विधि भी डर गयी पापा को गुस्सा करते देख ओर डरते हुए बोली,
"पापा ऐसा कुछ नहीं है...!!
वो बस मेरा एक दोस्त है जो मुझे पढ़ाई मे हेल्प करता है ओर इसीलिए थोड़ी बाते करते है और कुछ नहीं",,,,
पर पापा नहीं माने क्योकि पापा ने फोन मे उनकी सारी चैट पढ़ ली थी।
बस फिर क्या था पापा ने उसका फोन ही ले लिया और डाटते हुए
कहा...
"कल से तुम सीधा कॉलेज जाओगी और अपनी पढाई पर ध्यान दोगी",
ये आखरी साल है इसके बाद जल्दी ही तुम्हारे लिए एक अच्छा सा लड़का देख कर शादी पक्की कर देते है।
ज्यादा लाड प्यार से बिगड़ रही हो,,,,
विधि के बाद माँ को भी डाटने लगे,
"कुछ ध्यान दो अपनी लाडली पर ,नहीं तो कहीं मुह दिखाने लायक नहीं छोड़ेगी"।
विधि : पर पापा मैंने ऐसा क्या किया है...
बस बात ही तो कि है...!!फिर इतना क्यों रिएक्ट कर रहे हो।
पर पापा अब नहीं मानने वाले थे।
दूसरे दिन सुबह विधि जल्दी ही कॉलेज चली गयी। आज उसने उस लड़के को ना कोई मैसेज किया था ना उसका कोई मैसेज देख पायी थी।
कॉलेज मे उसका मन नहीं लग रहा था वो बस उसी के बारे मे सोच रही थी।
उसे कैसे बताये कि अब हम बात नहीं कर सकते या पापा ने फोन ले लिया है।
इसी उलझन मे वो खोई थी कि, उसकी दोस्त निशा ने उसे हिलाते हुए पूछा
"क्यो? कहा खोई हो"...!!
आज तुम्हारा फोन भी नही दिखाई दिया," क्यु कहा गया",,,,?
पर विधि ने ध्यान नहीं दिया उसकी बातों पर ओर किताब खोल कर पढ़ने लगी।
दो दिन ऐसे ही बीत गए। अब और नहीं रह सकती थी वो उस लड़के से बात किए बिन।
अब विधि ने सोचा कुछ तो करना पड़ेगा या तो अपनी दोस्त निशा को बताये सारी बाते कि क्या हुआ है या पापा से फोन वापस ले ....पर पापा से फोन लेना मुश्किल था, तो दूसरे दिन कॉलेज आते ही....
विधि निशा से, "यार सुन ना, मुझे तुम्हें एक बात बतानी है"।
निशा : कहो..
तो विधि ने सारी बाते निशा को
बता दी कि क्या हुआ घर मे ओर उस लड़के के बारे मे भी सब कुछ ओर पापा ने फोन क्यों छिन लिया ये भी।
ओह्ह!! तो तु इस बात को लेकर इतने दिन से नाराज है ओर खोयी हुयी
भी क्यों की उस लड़के से बात नहीं हो रही....
हा... अब कितने दिन हो गए, बेचारा वो क्या सोच रहा होगा उसे तो ये भी नहीं मालूम कि मेरा फोन मेरे पास नहीं है। 😔
ओह्ह...!! बस इतनी सी बात बताने के लिए तुझे अपने दोस्त से इतना क्या सोचने कि जरूरत थी, बोल देती...
ओर मेरे फोन से उसे मैसेज या कॉल कर के बात कर लेती.... चलो कोई नहीं अब बात कर ले और बता दे उसे सब कुछ।
तो विधि ने निशा के फोन से उस लड़के को कॉल कर सारी बाते बता दी की क्या हुआ और इतने दिन क्यों नहीं बात हो पायी।
उस लड़के से बात करके विधि को ऐसे लग रहा था जैसे सब मिल गया ओर दिमाग का जैसे बोझ कम हो गया हो...
उसकी ख़ुशी उसके चेहरे से साफ़ झलक रही थी। अब वो खुश थी ।
घर पहुँचते ही मम्मी से कुछ बात करके खाना खाकर जल्दी ही सो
गयी ताकि सुबह जल्दी कॉलेज
पहुँच कर उस लड़के से फिर बात
कर सके।
बेड पर जाकर उसके ही ख्यालो मे खो गयी, कब आँख लगी उसे पता भी न चला।
अगले दिन सुबह जल्द ही तयार होकर कॉलेज के लिए निकल गयी। कॉलेज पहुँचते ही निशा को ढूंढने लगी पर आज निशा थोड़ी लेट आयी तो उसका वेट करते विधि कैंटिन मे बैठ गयी।
थोड़ी देर मे निशा भी वही पहुँच गयी।
निशा आते ही बातों मे लग गयी पर विधि को फोन करने की जल्दी थी...
तो विधि ने निशा से फोन मांगा ओर कॉल करने वाली थी तभी सामने से एक लड़का ब्लैक जिन्स व्हाइट शर्ट मे विधि के सामने आकर....
हैलो !! आई एम अंश.....
क्रमश:.....................