बरसात के बाद की सुबह थी। गाँव की पगडंडियाँ भीगी हुई थीं, खेतों से मिट्टी की खुशबू आ रही थी, और दूर मंदिर की घंटियाँ वातावरण को और भी शांत बना रही थीं।उसी गाँव में रहता था तेजस, एक सीधा-सादा, मेहनती किसान का बेटा।
उसे शहर की चमक-दमक नहीं, बल्कि अपने गाँव की सादगी से प्यार था।गाँव में कुछ ही दिन पहले अपने ननिहाल आई थी ग्रेस। शहर में पली-बढ़ी ग्रेस पहली बार इतने दिनों के लिए गाँव आई थी। शुरुआत में उसे लगा कि यहाँ करने के लिए कुछ नहीं होगा,
लेकिन धीरे-धीरे उसे गाँव की हवा, खेत, तालाब और लोगों का अपनापन अच्छा लगने लगा।एक शाम ग्रेस तालाब के किनारे बैठकर डूबते सूरज को देख रही थी। तभी तेजस अपनी भैंसों को लेकर वहाँ पहुँचा। दोनों की नज़रें मिलीं।"शहर में भी ऐसा सुंदर नज़ारा मिलता है?" तेजस ने मुस्कुराते हुए पूछा।ग्रेस हँस पड़ी,
"नहीं... वहाँ इतनी शांति नहीं मिलती।"उस दिन के बाद दोनों रोज़ किसी न किसी बहाने मिल जाते। कभी आम के बाग़ में, कभी सरसों के खेतों के बीच, तो कभी गाँव की छोटी-सी चाय की दुकान पर।धीरे-धीरे उनकी बातें दोस्ती से आगे बढ़ने लगीं। एक दिन हल्की बारिश हो रही थी। दोनों पुराने बरगद के पेड़ के नीचे खड़े थे।
तेजस ने धीमे से कहा, "ग्रेस... अगर एक दिन तुम्हें शहर लौटना पड़ा, तो क्या मुझे भूल जाओगी?"ग्रेस ने उसकी आँखों में देखते हुए जवाब दिया, "जिस गाँव ने मुझे अपना बना लिया... और जहाँ मेरा दिल रह गया...
उसे कैसे भूल सकती हूँ?"तेजस मुस्कुरा दिया। उस पल बारिश की हर बूँद जैसे उनके प्यार की गवाह"तेरे
आँगन की धूप" — भाग 2
गाँव में सावन का मेला लगा था। चारों तरफ़ रंग-बिरंगी दुकानें, झूले, बच्चों की हँसी और ढोल की आवाज़ गूँज रही थी।
ग्रेस ने पहली बार गाँव का मेला देखा। उसने हरे रंग का सूट पहना था, बालों में चमेली के फूल लगाए थे। तेजस दूर से उसे देख रहा था। उसे लगा जैसे पूरे मेले की सबसे खूबसूरत चीज़ वही हो।
"चलो, झूले पर बैठते हैं?" तेजस ने मुस्कुराकर पूछा।
ग्रेस ने हल्की-सी शर्माते हुए कहा, "अगर तुम साथ बैठोगे... तभी।"
दोनों एक ही झूले पर बैठ गए। झूला जैसे-जैसे ऊपर जाता, ग्रेस डरकर तेजस का हाथ कसकर पकड़ लेती। तेजस मुस्कुरा देता, लेकिन उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगता।
मेले से लौटते समय तेजस ने अपनी जेब से एक छोटी-सी चाँदी की पायल निकाली।
"ये... तुम्हारे लिए।"
ग्रेस ने हैरानी से पूछा, "मेरे लिए?"
"हाँ... महँगी नहीं है, लेकिन इसमें मेरा पूरा दिल है।"
ग्रेस की आँखें भर आईं। उसने पायल पहन ली और धीरे से बोली,
"अब ये पायल नहीं... तुम्हारे प्यार की निशानी है।"
उस शाम दोनों सरसों के खेत के किनारे बैठे सूरज को डूबते देख रहे थे।
तेजस ने हिम्मत करके कहा,
"ग्रेस... मैं तुमसे प्यार करता हूँ। इतना कि अगर पूरी दुनिया भी मेरे खिलाफ हो जाए, तब भी तुम्हारा हाथ कभी नहीं छोड़ूँगा।"
ग्रेस की आँखों से खुशी के आँसू बह निकले।
उसने तेजस का हाथ अपने हाथों में लेकर कहा,
"मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, तेजस। जहाँ तुम हो, वहीं मेरा घर है।"
लेकिन उसी समय दूर खड़े एक आदमी ने दोनों को साथ देख लिया...
वह था ग्रेस का मामा।
उसके चेहरे पर गुस्सा साफ़ दिखाई दे रहा था।
यहीं से उनके प्यार की असली परीक्षा शुरू होने वाली थी...