स्वागत है दोस्तों एपिसोड 6 में !
पिछले एपिसोड में हमने देखा कि विक्रांत और आन्या के बीच अंधेरे ऑफिस (Office) में एक तीखा खिंचाव देखने को मिलता है। आन्या चाहकर भी खुद को रोक नहीं पाती। लेकिन जैसे ही लाइट्स (Lights) वापस आती हैं, विक्रांत फिर से कड़क हो जाता है और उसे घर जाने के लिए कहता है। अब देखते हैं कि ऑफिस की इस रात के बाद आगे आन्या के साथ क्या होने वाला है... दिल थाम कर बैठिए!
एपिसोड 6: धड़कनों की कशमकश और नया मोड़
विक्रांत के केबिन (Cabin) का दरवाज़ा जैसे ही बंद हुआ, आन्या ने एक गहरी और लंबी साँस ली। पूरे ऑफिस (Office) का माहौल अब बिल्कुल शांत था, लेकिन आन्या के अंदर एक ऐसा तूफान चल रहा था जो थमने का नाम नहीं ले रहा था। उसकी उंगलियाँ अभी भी बुरी तरह काँप रही थीं, और उसकी कमर पर विक्रांत की उन मज़बूत उंगलियों की तपिश अब भी साफ़ महसूस हो रही थी।
"मुझे क्या होता जा रहा है? मैं खुद पर काबू क्यों नहीं रख पा रही?" आन्या ने अपनी डेस्क (Desk) समेटते हुए अपने जलते हुए गालों को छुआ। उसका दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था, मानो अभी सीने से बाहर आ जाएगा। वह विक्रांत की तरफ़ बढ़ते अपने इस खिंचाव से बुरी तरह डर रही थी। वह उसका बॉस (Boss) था—कड़क, बेरहम और रहस्यमयी। फिर भी, जब वह उसके करीब आया था, तो उसकी आँखों में नफ़रत नहीं, बल्कि एक ऐसी डरावनी और जूनून से भरी दीवानगी थी जो आन्या को अपनी तरफ़ खींच रही थी।
उधर केबिन (Cabin) के अंदर, विक्रांत दरवाज़े से पीठ टिकाए खड़ा था। उसकी साँसें तेज़ थीं और उसकी मुट्ठियाँ कसी हुई थीं। उसका पूरा शरीर उस आग में जल रहा था जो आन्या को छूने के बाद भड़की थी। वह बंद आँखों से भी सिर्फ आन्या के चेहरे को देख पा रहा था। उसकी वो भीनी सी खुशबू विक्रांत के दिमाग (Mind) पर इस कदर हावी हो चुकी थी कि उसका खुद पर से कंट्रोल (Control) छूट रहा था।
"वह सिर्फ मेरी है... उसे मुझसे कोई दूर नहीं कर सकता," विक्रांत ने गुर्राते हुए शीशे की टेबल (Table) पर हाथ मारा। आन्या के लिए उसकी यह चाहत सिर्फ एक अट्रैक्शन (Attraction) नहीं थी, यह एक ऐसी खतरनाक दीवानगी थी जो उसे पागल बना रही थी। वह उसे अपनी नज़रों के सामने रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था, कोई भी झूठ बोल सकता था और पूरा कॉन्ट्रैक्ट (Contract) बदल सकता था।
रात के ग्यारह बज चुके थे। आन्या ने जल्दी-जल्दी अपना लैपटॉप (Laptop) बंद किया और काँपते हाथों से अपना बैग (Bag) उठाकर नीचे की तरफ़ बढ़ गई। जब वह ऑफिस बिल्डिंग (Office Building) के बाहर आई, तो ठंडी हवा के एक झोंके ने उसका स्वागत किया, जिससे उसकी चेतना वापस लौटी। सामने ही विक्रांत की आलीशान काली गाड़ी खड़ी थी। ड्राइवर (Driver) ने आन्या को देखते ही फुर्ती से गाड़ी का पिछला दरवाज़ा खोल दिया।
"मैम, सर का सख्त हुक्म है कि आपको पूरी हिफाज़त के साथ सीधे घर छोड़ दूँ," ड्राइवर (Driver) ने बेहद अदब से कहा।
गाड़ी में बैठने से पहले आन्या ने एक पल के लिए पीछे मुड़कर ऑफिस की सबसे ऊपरी मंज़िल की तरफ़ देखा। वहाँ, विक्रांत के केबिन (Cabin) की खिड़की का पर्दा हटा हुआ था। अंधेरे में भी आन्या साफ़ महसूस कर सकती थी कि विक्रांत की वो गहरी, भूखी आँखें लगातार उसी को देख रही थीं। वह वहाँ तब तक खड़ा रहा जब तक कि आन्या की गाड़ी उसकी नज़रों से ओझल नहीं हो गई। रास्ता बिल्कुल सुनसान था और आन्या की बंद आँखों में भी सिर्फ विक्रांत का वो दीवाना चेहरा घूम रहा था।
Ending Note:
दोस्तों, विक्रांत की यह खतरनाक दीवानगी अब आन्या को पूरी तरह अपने जाल में घेर चुकी है! विक्रांत आन्या के प्यार में इस कदर पागल हो चुका है कि वह उसे एक पल के लिए भी खुद से दूर नहीं करना चाहता। लेकिन क्या आन्या विक्रांत के इस कड़क रूप के पीछे छिपे दीवाने और जुनूनी आशिक को संभाल पाएगी? क्या यह बढ़ती हुई नज़दीकी किसी बड़े तूफान की शुरुआत है?
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लेखक की बात:
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