Jindagi ki Dusra Kinara - 31 in Hindi Thriller by AbhiNisha books and stories PDF | जिंदगी की दूसरे किनारा - 31

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जिंदगी की दूसरे किनारा - 31

जिंदगी की दूसरा किनारा पार्ट 31

और तभी अचानक मेघना के सांस चढ़ते हुए 
अटक जाती है 
और अचानक उसके पलके झट से आवाज सुनते हूए सुकोड़ते हुए खुलती है 
और तभी अचानक दिखती है 
 उसकी आंखें भरी हुई 
और अचानक फिर पलके झुपकते हुए 
उसकी पलके अपने आप बंद हो जाती है 


और अभी
मेघना अपने बिस्तर पर है 
सोई हुई
 वह किसी 
और कमरे में है 
अपने किराए की रूम में नहीं 



और तभी बाहर से अचानक फिर से 
 ऊंची आवाज आती है

मॉम क्या 
 नाश्ता बन गया



और वही वह दूसरी तरफ रिया की आवाज है 
 रिया अपने कमरे से निकलते हुए 
गलीयोरो से गुजरते हुए 
और अपनी मां को आवाज लगाते हुए 
किचन की तरह बढ़ रही है 




और आज के सुबह मथुरा की है
सुबह-सुबह बाहर सुनहरी सनलाइट निकलते हुए पुरी शहर को सुनहरे रंग से भर दिया है 
और बाहर सड़कों पर कुछ गाड़ियां भी सुबह-सुबह चल रहे हैं 
और बहुत सारे चहल-पहल 
बहुत बिजी शहर बिल्कुल नहीं है एक शांत 
सुनहरी सुबह एक संतुलित दुनिया की तरह 

पर क्या मेघना की दुनिया संतुलित है 




और 
वही रिया रात को ही 
 मेघना को लेकर घर ले आई है



 और मेघना अपने रूम में सो रही है 
और उसकी आंखें बहती जा रही है 
बाहर की आवाज उसे सुनाई दे रही है 
पर उसके सपने उसे अजीब लगता है
हकीकत की तरह 
वह सोच में डूबी पलकें बंद करते हुए
 सोचती है 

इतना असली क्यों है
 क्यों था यह सपने

और अभी-अभी मैं कहां हूं
 कहां सोई हुई हूं 

उसे ऐसा लग रहा है 
 कि उसके यादें कट रहे हैं 
उसे सपनों की लगा आगे कुछ भी याद नहीं

वह नींद को तोड़ने की कोशिश कर रही है 
हालांकि वह जा चुकी है 
 एक लंबी सपनों से बाहर आ चुकी है 
पर  
ऐसे लग रहा है कि 
 वह अभी वह 13 साल की बच्ची है 
सपना और उसकी जिंदगी की हकीकत धुंधली है 



और इस सोच के बीच
उसके पलके नहीं खुल रही है 
वह चेहरों को सिकोड़ते हुए पलको उठाने की कोशिश करती है 
पर वह अपने पलके उठा ही नहीं पा रही


चाह कर भी आंखें ना खोल पानें की वजह से 
उसकी एंजायटी भर रही है 
और उसकी सांसे गहरी हो रही है 


वह पैनिक होते हुए छटपटाते हुए
हैरानी के साथ सोज रही है
असली क्या है 
 मैं भी कहां थी 
और मैं हूं कहां 
मेरी आंखें क्यों नहीं खुलार ही 
मेघना जिद्दों जहेद करते हुए 
अपनी आंखें खोलने की पूरी कोशिश कर रही है 
वह चेहरे के साथ पूरी बॉडी को सिकोड़ते हुए 
 अपने हाथ और पैर को सीधा करने की कोशिश कर रही है









और वही दूसरी तरफ 
 रिया गलियारों से गुजरते हुए 
अपनी मां के पास किचन की तरफ जा रही है 




और वही वैदेही किचन आयरलैंड के पास 
खड़ी होते हुए
 नाश्ता की तैयारी करते हुए 
अपने दोनों हाथों से
 दो ब्रेड को एक साथ टोस्ट पेन में सेक रही है 







 और तभी अचानक रिया
चलते हुए किचन में इंटर करती है 

 और अचानक ठहर जाती है 
कुछ सेकंड
और अपनी मां और किचन आईलैंड की तरह देखते हुए 

और फिर अचानक कुछ सेकेंड बाद
अपने दोनों हाथ उठाते हुए 

दोनों हाथ को एक दूसरे से जोड़कर 
थोरे दोनों हाथों की उंगलियां को मोड़ कर एक दूसरे हाथों की तरफ क्रॉस करके 
 उंगलियों को दबाते हुए
भूख की वजह से मासूमियत से रिएक्ट करते हुए 
हल्की आवाज में कहती है 

 औ 
औ 
कितनी भूख लगी थी




और यह कहते हुए अचानक रिया 
अपने दोनों हाथों की उंगलियों को उचकाते हुए 
 अचानक हथेली को खोलते हुए 
दोनों हाथ साईड करते हुए
अपने कदम अपनी मां की तरह बाड़ाती है 
और उने देखते हुए
दोनों हाथों को नीचे करती है 
 





और वह दूसरी तरफ अपने कमरे में सोई 
मेघना धीरे-धीरे खुद की बॉडी को रिलैक्स करते हुए 
और अपने पलकों को बंद रखते हुए
और हल्के गहरी सांस लेते हुए 
यकीन करने की कोशिश कर रही हूं कि 
 वह कहां है 
और वह अभी सपना देख रही थी 
उसकी कल की यादें धीरे-धीरे वापस आ रहे हैं 
पूरी तरह से नहीं 
पर इतना कि वह समझ चुकी है
की अभी वह बड़ी हो चुकी है
 13 साल के बच्चे नहीं है




आंखें कल की थोड़ी बहुत यादें भी है तो
वह 13 साल की बच्ची तो नहीं हो सकती 
यह सोचते हुए उसकी आंखें बारहे हैं 
वो अब पलके खोल सकती है 
पर कल के खोलने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही 
हमको देखना चाहती है कि 
वह कहां है 
न जाने क्यों वह अपने पलके उठा ही नहीं






और वही दूसरी तरफ किचन में 
 वैदेही 
ब्रेड को सेक कर दो ना हाथों से निकाल कर प्लेट में रखती है 
और वहीं किचन आईलैंड पर रखी हुई है 
कुछ और अलग-अलग प्रकार की नाश्ते बने हुए 




वैदेही प्लेट में ब्रेड को रखते ही अपने हाथ पीछे हटाते हुए

 हल्के सर घूमते हुए 
पीछे देखती है
रिया को हल्के मुस्कुराते हुए






और वही रिया चलते हुए अपनी मां के पीछे से 
 आते हुए आगे बढ़ती है 




और वही तभी अचानक वेदीही पलटे हुए 
 किचन आयरलैंड की तरफ देखती है
और हल्की मूरती है 





और वही रिया किचन आयरलैंड पे रखी हुई 
 ब्रेड को देखते हुए 
 अचानक से ठहर जाती है 
और हल्की नजर झुकते हुए
 झट से अपने हाथ उठाकर बढ़ाते हुए 
प्लेट में रखी हुई 
उस ब्रेड को पकढ़ते हुए झट से उठाते हुए
गरमा गरम ब्रेड को पकढ़ते हुए 
अचानक उसके हाथ जलती है 
और वह उंगलियों को हिलाते हुए रिएक्ट करते हुए 
 अचानक दूसरी हाथ उठाकर भी 
उसे ब्रेड को दोनों हाथ से पकड़ लेती है
अचानक अपने हाथों को रिलैक्स करते हुए
 अचानक हल्के सर झुकाते हुए
 उस ब्रेड को दोनों हाथों से उठाकर 
अचानक मुंह के पास लगाते हुए एक वाइट लेती है 




और वही वैदेही हल्की साइड होते हुए 
किचन आयरलैंडपर रखी हुई 
कुछ हरी पत्तों वाली सब्जियां को
 अपनी बाई हाथ में लेती है 
और 
दी हाथ बढ़कर नाइफ ब्लॉक 
से एक चाकू को पकढ़ते हुए उठाकर 
उस
 हरि पत्तों वाली सब्जियां काटने लगती है






और वही रिया ब्रेड मुंह मेंलेते हुए 
हल्की सी हाथ को पीछे लेती है 
और सर को सीधी करती है 
और 
मुंह में ब्रेड को चवाते हुए 
खाते हुए मजे से
 हुं भरती है 

हु





और वही वैदेही धीरे-धीरे चाकू चलते हुए 
सब्जियां कट रही है 






और वह रिया
ब्रेड को खाते हुए 
 हल्की नजर घुमा कर 
अपनी मां की तरह देखते हुए 
एक्साइटेड होकर 
हल्की रिएक्ट करते हुए
हल्की आवाज में कहती है 

हा यह दुनिया की सबसे बेस्ट ब्रेट है 






और वही वैदेही सब्जियां करते हुए 
अचानक सर घूमर पलके उठाकर मुस्कुराते हुए 
 रिया की तरफ देखती है 



और वही रिया ब्रेड को फिर से मुंह में लेते हुए 
 मस्ती में चबाकर खा रही है 



और वही वैदेही मुस्कुराते हुए रिया की तरफ देखते हुए 
हल्की आवाज में कहती है 


अब हो ही गया है 
जो उसे उठा देना 






और यह सुनते ही 
रिया दोनों हाथ में पकड़ कर मुंह में ब्रेड रखते हुए 
 नजर घुमा कर पलके उठाते हुए अपनी मां की तरफ देखते हैं






और वहीं दूसरी तरफ अपने कमरे में सोई हुई 
मेघना गहरी सांस लेते हुए 
अचानक अपने पलके उठाती है 
और आगे की तरफ देखती है 
और आगे देखती है 
अपने कमरे में लगी हुई उस छोटे से कैबिनेट को 
 उस पर कुछ किताबें 
और उसकी खुद की मोबाइल चार्ज में लगी हुई 
 रखी हुई है 



और वहीं कैबिनेट के ऊपर दीवार में लगी हुई 
बहुत बड़ा नहीं 
दो हाथ चोरी चार हाथ ऊंची एक आईना लगी हुई है 
इसमें मेघना की प्रतिबिम साफ दिखाई दे रही है 
हालाकी उस प्रतिबिम पर मेघना की नजर नहीं है









 सुबह असल दुनिया में 
तकरीबन 7:00 की करीब

अभिराज कुछ सोचते हुए 
धीरे-धीरे अपने अपार्टमेंट में आता है
 अपने कदम अपार्टमेंट के अंदर रखते हुए 




और 
वही मालिक बाथरूम से निकलती है
और उसकी नजर अचानक अभिराज पर जाती है 
और तभी मालिका हल्की सी मूरती है  
और अभिराज को सुबह आंखों देखा
 गुस्से से भर जाती है
 और वह गुस्से में अपने कदम बढ़ाते हुए 
अधिराज की तरफ जाने लगती है 




और वहीं अभिराज धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए
 आगे बढ़ रहा है 




और तभी मालिका मुड़ कर
 अचानक 
अभिराज के सामने आते हुए
 गुस्से में दोनों हाथ फैला कर हवा में लहराते हुए
 और रिएक्ट करते हुए कहती है 

अभिराज आप रात भर कहां थे 




और तभी अभीराज अपने नजरे उठाकर 
मालिक की तरफ देखता 
और उसे देखते हुए 
 उतरे हुए चेहरे के साथ हल्की आवाज में कहती है 


हम बाद में बात करते हैं
 मुझे भी आराम करना है


 और यह कहते हुए अभिराज 
अपनी कदम आगे बढ़ाने की कोशिश 




और तभी अचानक का मालिका
 एक कदम तिरछे पीछे हटते हुए
 वैसे ही चेहरे को सीकोड़ कर रिएक्ट करते हुए 
गुस्से में ऊंची आवाज में कहती है 

आप बताते क्यों नहीं



और तभी अचानक अभिराज अपने कदम बढ़ाते हुए 
मलिक को देखते हुए ठहर जाता है 




और वही मालिक वैसे ही रिएक्ट करते हुए अपनी बातों को आगे बढ़कर 
ऊंची आवाज में कहती है 


 आपको पता है
 मैं आपका इंतजार आधी रात तक किया
 

और यह कहते हुए 
मालिक मुर कर 
अपने हाथ को पीछे लेते हुए 
हल्के हाथ खाने की टेबल की तरफ बड़ाते हुए 
अभीराज को टेबल पर सजी हुई खान की तरफ दिखाते हुएऊंची आवाज में आगे कहती है 

खाने की टेबल पर बैठते हुए






और वही अभिराज मालीका की बातें सुनते हुए 
नजर उठाकर आगे खान की टेबल की तरफ देखा है
 और फिर उदास चेहरे के साथ 
 हल्के नजर झुका कर
 मालिक की तरफ देखते हुए 
हल्के अपने दाएं हाथ ऊपर उठाकर 


और वही अभिराज जब अपने हाथ उठाता है 
उसके हाथों पंजे मे लगी हुई एक सफेद पट्टी लगी हुई है

और वही अभिराज
मालीका की तरफ अपने हाथों की पंजा को दिखाकर
मालिक को ठहर जाने के लिए कहते हुए
हल्की आवाज में कहता है 


ठीक है सॉरी 
पर कहना हम बाद में बात करते हैं 






और 
वही मालिक सुनती ही नहीं
और अपने हाथ को नीचे करते हुए 
फिर से मुड़कर अभिराज को गुस्से से देखते हुए

 और गुस्से में वैसे ही चेहरे को सीकोड़ कर रिएक्ट करते हुए
अपने हाथ को हल्के उठा कर 
 हवा में नीचे की तरह बजाते हुए 
ऊंची आवाज मे कहती है 

नहीं मुझे अभी आपसे बात करना है 
मुझे जानना है आप कहां थे 







और वही अभिराज अचानक अपने हाथ नीचे करते हुए और मालिक को देखते हुए 
और उसकी बातें सुनते हुए 
बिना रिएक्ट किया 
हल्के गुस्से में आकर
 फिर से हल्की कदम अपने आगे बढ़ते हुए 
सख्त आवाज में मालिक से कहता है 

मलिक मैं थक गया हूं
 हटो सामने से 




और 
वही मालिक अभिराज की बातों को इग्नोर करते हुए 
हटाने की वजह उसके आगे और आते हुए 
 गुस्से में हल्की अपने वाई हाथ उठाते हुए 
चेहरे को सीकोड़ कर वैसे ही रिएक्ट करते हुए
ऊंची आवाज में कहती है 


मुझे बताइए अभिराज आप थे कहां 





और वही अभिराज फिर से अपनी कदद में ठहरा देता है मालीका को देखते हुए




और 
वही मालिका या कहते हुए
और अपने दूसरों हाथों को भी उठकर 
दोनों हाथों को साइड में करते हुए 
हल्के हवा में लहराकर रिएक्ट करते हुए 
गुस्से से जल्दबाजी में
 अचानक चिल्लाते हुए कहती है 


कहां थे अपनी वाइफ के साथ 





और यह सुनते ही अचानक अभिराज
मालिक को देखते हुए 
और हल्के गुस्से में आते हुए 
गंभीर आवाज में कहता है

 बस करो मालिका 





और 
वही मालिका अभिराज की बातों को इग्नोर करते हुए 
गुस्से में
अचानक अपनी बाई हाथ हल्के नीचे करती है 
 और अपने दाएं हाथ उठाकर अभिराज की तरफ बढ़ते हुए 
 वैसे ही रिएक्ट करते हुए 
जल्दबाजी में आगे चिल्लाते हुए कहती है 

यह आपने मरी हुई बेटी के साथ 
बता।ऐ



और मालिका आगे कुछ कहती की



और तभी अचानक अभिराज
यह सुनते ही 
 गुस्से से भर जाता है
 उसकी जिंदा बेटी को मरा हुआ
 नाम सुनते ही
 वह अचानक से अपने हाथ उठाते हुए 
खींचकर जोर की तमाचा मालिक के गाल पर तान मारता है 




और 
तभी अचानक मालिक अपनी बातें आगे बाड़ाती की 
अचानक उसके गाल पर जोर दार एक चाटा खींच के लगता है 

और अचानक से थप्पड़ लगते ही 
उसकी सर तिरछी हो जाती है 
और नजरे हल्के झुक जाती है
और अचानक वह लडकराते हुए 
 वही ठहर जाती है 

और अचानक उसकी आंखें गहरी होते हुए भर आती है 










और वहीं तरफ हॉस्पिटल में वैदेही अपनी बेटी के पास बैठे-बैठे उसके ही वेड पर सर रखते हुए
 सो गई है 





और 
तभी अचानक वह नर्स कुछ मेडिकल सामान से भरी हुई 
प्लेट को दोनों हाथों में पकढ़ते हुए 
इस आईसीयू रूम में आते हुए 
पेशेंट की वेट की तरफ बढ़ते हुए 
हल्की आवाज में कहती है 

उठऐ मेंम अब सुबह हो गई है 





और 
तभी अचानक वैदेही के कानों में नर्स की आवाज आती है 
और अचानक उसकी आंखें खुलती है 
और वह अपने दोनों हाथों पर से अपने सर को हटाते हुए हल्की सर तिरछी करते हुए 
अपनी बेटी की चेहरे की तरफ 
 अपने उधर चेहरे के साथ देखते हुए 
हल्की सी स्माइल देती है 
और सीधी होते हुए ठीक से बैठी है 
अचानक हल्के मुरते हुए पलट कर 
 उस नर्स की तरफ देखती है






और वही वो नर्स आगे बढ़ते हुए
 पेशेंट की लाइफ मॉनिटर की तरह नजर दोरते हुए 
दोनों हाथों में पकढ़ते हुए मेडिकल प्लेट लिए सलाइन बॉटल की तरफ बढ़ती है 





और वही वैदेही मुर कर नर्स की तरफ देखते हुए 
नजर घुमा कर 
फिर से अपनी बेटी की तरह दिखती है 
और हल्के गहरी सांस लेकर आहें भरते हुए 


हा

अपने दोनों हाथ हॉकी उठाकर पीछे लेती है 
और अचानक हल्की सी अपनी बाएं हाथ उठाकर 
अपनी बेटी के सर पर रखते हुए 
मुस्कुराते हुए
 उसके सर को सहलाने लगती है धीरे-धीरे 





 और वही वो नर्स चलते हुए 
 सलाइन बॉटल के पास जाती है 
हल्की सी झुकती है 
मेडिकल प्लेट वही टेबल पर रखती है
और रखते ही प्लेट छोड़कर 
अपने हाथ को हल्की उठाते हुए 
अपने हाथ को स्प्लिट की तरफ बढ़ती है
और उस प्लेट से
एक दवाई की बोतल और एक्सीडेंट 
 अपने हाथों में लेते हुए
सीधी उठ खड़ी होती है 
और 
 हल्के बोतल को हिलाते हुए
दोनों हाथ लगाकर
 धीरे-धीरे दवाई को सीई में भरने लगती है 
हर मुस्कुराते हुए वैदेही से 
 हल्की आवाज में कहती है 


मेंम आपको इतना चिंता नहीं करना चाहिए 
डॉक्टर देव कहते हैं कि
 बहुत सारी संभावनाएं हैं
 आपकी बेटी की होश में आने की 





और 
वही वैदेही अपने बेटी के सर पे प्यार से हाथ फेरते हुए 
उसे नर्स की बातें सुन रही है 




और 
वही वो नर्स दवाई सीई में भारते ही
 एक हाथों में 
दवाई सिसी और दूसरे हाथों में सिरिंज पकढ़ते हुए 
दवाई की सीसी को फिरसे हल्के झुकते हुए 
 टेबल पर रखते हुए 
आगे कहती है 

सच में
आपकी बेटी बिल्कुल ठीक हो जाएंगे
कभी-कभी उसके हार्टबीट अचानक बढ़ जाती है 
डॉक्टर देव कहते हैं 
हो सकता है की इने जल्दी होस जाएंगे




और यह कहते हुए नर्स 
उठ खड़ी होती है
 और अपने हाथ उठाकर बढ़ते हुए 
 उस सीई को धीरे-धीरे भरी हुई सलाइन बोतल में
लगाते हुए दवाई उस में डालने लगती है