SHADOW KING - 1 in Hindi Fiction Stories by chetan chaware books and stories PDF | SHADOW KING - 1

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SHADOW KING - 1

एपिसोड 1: “जिस रात अंधेरा जाग उठा”


रात के ठीक बारह बज रहे थे।

शहर की सारी सड़कें लगभग खाली थीं। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और दूर कहीं बिजली चमक रही थी।

लेकिन शहर के आखिरी छोर पर बने पुराने पहाड़ी रास्ते पर एक लड़का अकेला चल रहा था।

उसका नाम था आरव राठौड़।

कंधे पर पुराना बैग, हाथ में मोबाइल और चेहरे पर थकान।

आरव ने आसमान की तरफ देखा।

“आज भी बारिश आने वाली है…”

वह तेज कदमों से आगे बढ़ने लगा।

उसे जल्दी घर पहुँचना था।

लेकिन तभी—

धड़ाम!

आसमान में बिजली कड़की।

आरव अचानक रुक गया।

उसके सामने सड़क के बीचों-बीच एक अजीब-सी काली धुंध दिखाई दे रही थी।

आरव ने आँखें सिकोड़कर देखा।

“ये… क्या है?”

काली धुंध धीरे-धीरे फैल रही थी।

आरव ने पीछे हटना चाहा।

लेकिन उसी पल उसके कानों में किसी की धीमी आवाज गूँजी—

“आरव…”

वह जम गया।

“कौन है?”

कोई जवाब नहीं।

फिर वही आवाज आई।

“आरव राठौड़…”

इस बार आवाज बिल्कुल उसके पीछे से आई थी।

आरव ने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा।

वहाँ…

कोई नहीं था।

सिर्फ अंधेरा।

आरव का दिल तेजी से धड़कने लगा।

“कौन है? सामने आओ!”

अचानक उसके मोबाइल की स्क्रीन अपने आप बंद हो गई।

फिर सड़क की सारी लाइटें एक साथ बुझ गईं।

चारों तरफ सिर्फ काला अंधेरा रह गया।

आरव ने मोबाइल दोबारा चालू करने की कोशिश की।

लेकिन स्क्रीन पर एक अजीब संदेश दिखाई दिया।

“तुम्हारा इंतजार बहुत लंबा था।”

आरव की उंगलियाँ काँप गईं।

“ये क्या बकवास है?”

अगले ही पल मोबाइल की स्क्रीन पूरी तरह काली हो गई।

और फिर—

उसके सामने जमीन पर एक विशाल काली आकृति उभरने लगी।

जैसे किसी इंसान की परछाई जमीन से बाहर निकल रही हो।

आरव पीछे हटने लगा।

“नहीं…”

वह आकृति धीरे-धीरे उठी।

उसकी कोई आँखें नहीं थीं।

कोई चेहरा नहीं था।

फिर भी आरव को महसूस हो रहा था कि…

वह उसे देख रही है।

आकृति ने अपना हाथ आरव की तरफ बढ़ाया।

और उसी क्षण आरव के सिर में भयंकर दर्द उठा।

“आह्ह!”

वह जमीन पर गिर पड़ा।

उसकी आँखों के सामने अजीब-अजीब तस्वीरें घूमने लगीं।

एक विशाल काला महल…

हजारों योद्धा…

आसमान में लाल चाँद…

और एक सिंहासन।

उस सिंहासन पर बैठा हुआ एक व्यक्ति।

उसका पूरा शरीर काली ऊर्जा से ढका था।

आरव उसे पहचान नहीं पा रहा था।

लेकिन उस व्यक्ति ने अपना सिर उठाया।

और उसकी आवाज सीधे आरव के दिमाग में गूँजी—

“वापस आओ…”

आरव चीख पड़ा।

“मैं कौन हूँ?!”

तस्वीर अचानक गायब हो गई।

आरव की आँखें खुलीं।

वह अभी भी सड़क पर पड़ा था।

उसके आसपास सब कुछ सामान्य था।

सड़क की लाइटें जल रही थीं।

बारिश शुरू हो चुकी थी।

मोबाइल उसके हाथ में पड़ा था।

स्क्रीन पर समय था—

12:01 AM

आरव ने हाँफते हुए खुद को उठाया।

“मैं… सपना देख रहा था?”

उसने अपने हाथ को देखा।

कुछ भी असामान्य नहीं था।

लेकिन फिर उसकी नजर जमीन पर पड़ी।

उसकी अपनी परछाई…

उसके पैरों की दिशा में नहीं थी।

आरव का चेहरा सफेद पड़ गया।

“ये कैसे…”

उसने एक कदम आगे बढ़ाया।

परछाई भी आगे बढ़ी।

लेकिन…

एक पल की देरी से।

आरव पीछे हटा।

परछाई वहीं खड़ी रही।

अब आरव सच में डर चुका था।

“ये क्या हो रहा है?”

तभी उसकी जेब में रखा मोबाइल बज उठा।

ट्रिंग!

आरव ने फोन निकाला।

स्क्रीन पर उसकी छोटी बहन मीरा का नाम था।

उसने तुरंत कॉल उठाया।

“हाँ, मीरा?”

दूसरी तरफ से घबराई हुई आवाज आई—

“भैया, आप कहाँ हो?”

“बस घर आ रहा हूँ।”

“जल्दी आओ।”

आरव ने पूछा—

“क्या हुआ?”

कुछ सेकंड तक मीरा चुप रही।

फिर उसने धीमी आवाज में कहा—

“भैया… घर के बाहर कोई खड़ा है।”

आरव के कदम रुक गए।

“कौन?”

“पता नहीं।”

“पड़ोसी होंगे।”

“नहीं…”

मीरा की आवाज काँप रही थी।

“वो इंसान जैसा दिखता है… लेकिन उसकी परछाई नहीं है।”

आरव के हाथ से मोबाइल लगभग छूट गया।

उसने सड़क के दूसरी तरफ देखा।

वहाँ…

एक आदमी खड़ा था।

लंबा काला कोट।

चेहरा आधा अंधेरे में छिपा हुआ।

और सबसे डरावनी बात—

उसके पैरों के नीचे कोई परछाई नहीं थी।

आरव ने फोन कान से लगाया।

“मीरा, दरवाजा लॉक करो।”

“भैया?”

“अभी!”

उसने कॉल काट दी।

वह आदमी अचानक आरव की तरफ देखने लगा।

दोनों की नजरें मिलीं।

अजनबी मुस्कुराया।

फिर उसने अपने होंठ हिलाए।

दूरी इतनी ज्यादा थी कि उसकी आवाज सुनाई नहीं दे सकती थी।

फिर भी आरव ने साफ सुना—

“आखिरकार मिल ही गए… Shadow Blood.”

आरव का दिल रुकने जैसा हो गया।

“Shadow… Blood?”

अजनबी ने अपना हाथ उठाया।

उसकी हथेली से काली ऊर्जा निकलने लगी।

आरव पीछे हट गया।

तभी उसके पैरों के नीचे की परछाई अचानक फैलने लगी।

सड़क पर मौजूद सारी रोशनी जैसे उस परछाई के अंदर खिंचने लगी।

आरव घबरा गया।

“रुको!”

लेकिन परछाई रुकने के बजाय और फैलती गई।

और फिर—

उसके कानों में एक रहस्यमयी आवाज गूँजी।

“छाया की शक्ति जागृत हो रही है।”

आरव ने चारों तरफ देखा।

“कौन बोल रहा है?”

आवाज दोबारा आई।

“उत्तराधिकारी की पहचान सत्यापित।”

आरव के सामने हवा में काले अक्षर उभर आए।

[छाया शक्ति सक्रिय हो रही है।]

आरव की साँस रुक गई।

फिर दूसरा संदेश आया—

[पहला चरण प्रारंभ।]

[अपने पहले शत्रु को परास्त करो।]

आरव ने सामने खड़े आदमी को देखा।

अजनबी अब धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ रहा था।

उसकी आँखों में एक अजीब चमक थी।

“तुम्हें अभी कुछ समझ नहीं आएगा, लड़के।”

वह मुस्कुराया।

“लेकिन आज रात के बाद तुम्हारी पुरानी जिंदगी खत्म हो जाएगी।”

आरव ने मुट्ठियाँ भींच लीं।

“मेरी बहन के पास से दूर रहना।”

अजनबी हँसा।

“तुम अभी भी सोच रहे हो कि तुम उसे बचा सकते हो?”

उसने हाथ आगे किया।

काली ऊर्जा हवा को चीरती हुई आरव की तरफ दौड़ी।

आरव ने आँखें बंद कर लीं।

धड़ाम!

लेकिन हमला आरव तक पहुँचा ही नहीं।

उसके सामने…

एक विशाल काली दीवार बन चुकी थी।

आरव ने धीरे-धीरे आँखें खोलीं।

उसके सामने वही दीवार थी।

काली।

जीवित।

और पूरी तरह उसकी अपनी परछाई से बनी हुई।

अजनबी पहली बार घबराया।

“असंभव…”

आरव खुद भी उस शक्ति को देखकर हैरान था।

तभी उसकी परछाई से एक धीमी आवाज निकली—

“भागो मत…”

आरव ने नीचे देखा।

परछाई धीरे-धीरे एक हाथ का आकार ले रही थी।

“लड़ो।”

आरव के सामने आखिरी संदेश चमका—

[छाया शक्ति — 1% जागृत]

और उसी पल…

आरव की आँखों में पहली बार एक गहरी काली चमक दिखाई दी।

अजनबी पीछे हट गया।

“नहीं…”

उसने काँपती आवाज में कहा—

“अगर इसकी शक्ति सच में जाग गई है…”

उसकी आँखों में डर था।

“तो हमें इसकी खबर तुरंत विक्रम काल तक पहुँचानी होगी।”

आरव ने उसका नाम सुन लिया।

“विक्रम… काल?”

अजनबी अचानक मुस्कुराया।

“तुम जल्द ही उसका नाम बहुत बार सुनोगे।”

अगले ही पल वह काली धुंध में गायब हो गया।

सड़क फिर शांत हो गई।

लेकिन आरव की परछाई अब भी उसके पैरों के नीचे सामान्य नहीं हुई थी।

वह धीरे-धीरे ऊपर उठी…

और आरव के पीछे एक विशाल आकृति का रूप लेने लगी।

एक सिंहासन।

एक मुकुट।

और उस सिंहासन पर बैठा हुआ…

एक Shadow King।

आरव ने पीछे मुड़कर देखा।

लेकिन वहाँ कुछ भी नहीं था।

सिर्फ अंधेरा।

फिर उसके सामने एक आखिरी संदेश दिखाई दिया—

[स्वागत है, आरव राठौड़।]

[तुम्हारी छाया की कहानी आज से शुरू होती है।]

और उसके ठीक नीचे—

[अगला मिशन: अपने परिवार का छिपा हुआ रहस्य खोजो।]

[समय सीमा: 24 घंटे।]

आरव की आँखें फैल गईं।

“मेरे परिवार का… रहस्य?”

दूर कहीं बिजली चमकी।

और उसी रोशनी में पहाड़ी के ऊपर एक काला महल दिखाई दिया—

जबकि वहाँ ऐसा कोई महल कभी था ही नहीं।

कहानी अभी शुरू हुई थी।

एपिसोड 1 समाप्त।