ज्यादातर साइबर ठग ईडी, सीबीआई, क्राइम ब्रांच, पुलिस, आईटी, आरबीआई, ट्राई का डर दिखाकर पैसे ऐंठने का काम करते हैं। यह वस्तुतः, डर को भुनाने का मकड़जाल है, जिसमें आमजन फंसकर अपनी गाड़ी कमाई लुटा बैठते हैं।
भारत में डिजिटल अरेस्ट स्कैम की शुरूआत 2023 में हुई, जिसे आज हम डिजिटल पैमेंट सिस्टम के महादोष के रूप देख रहे हैं।
कई ठग कुरियर सर्विस जैसे फिडेक्स, ब्लूडार्क, एक्सप्रेस, डीटीडीसी का कर्मी बताकर दावा करते हैं कि उनके नाम से फलां एयरपोर्ट या रेल्वे स्टेशन पर अवैध पैकेट फंसा पड़ा है।
ऐसा ठग खुद को कस्टम विभाग या क्राइम ब्रांच पुलिस का बड़ा अधिकारी बताता है कि आरबीआई द्वारा निर्देशित बैंक खाता में रुपया ट्रांसफर कर दिया जाए।
इसमें सबसे ज्यादा खतरनाक है सेक्सटौर्शन, जिसमें अपराधी फौरी प्रोफाइल बनाते हैं और झूठे भावनात्मक संबंध स्थापित करते हैं।
फिर किसी व्यक्ति की आपत्तिजनक निजी तस्वीरें व वीडियो बनाकर उसको धमकाते हैं कि इतना-इतना रुपया फलां खाते में अंतरण कर दो, नहीं तो तुम्हारी खैर नहीं। वे ऐसे बंदों का अधिकतर शिकार बनाते हैं, जो किसी चर्चित केस से पहले से जुड़ा हुआ है।
साइबर डग काल पर डिजिटल अरेस्ट वारंट दिखाते हैं और पीड़ित को गंभीर मामले में फंसने का खौफ दिखाते हैं। यहां तक कि डिजिटल अरेस्ट व्यक्ति को जेल भेजने की धमकियां तक देते हैं।
इससे स्वाभाविक है कि सामनेवाला घबरा जाता है और वह सब कुछ करने के लिए तैयार होता है, जो वे कराना चाहते हैं।
इतना ही नहीं, शातिर बदमाश सपड़ में आए अपनी मछली को स्काई ऐप डाउनलोड करवाते हैं, जिसमें वीडियो काल पर फर्जी पुलिस वर्दी, आईडी कार्ड और बोगस आधिकारिक लेटर दिखाते हैं, जिससे कि मानसिक रूप से प्रताड़ित व्यक्ति उनसे बात करने के लिए तैयार हो जाता है।
यह भी पता चला है कि कई ठग एआई टेक्नीक का इस्तेमाल कर उत्पीड़ित के परिजनों की ध्वनि की नकल करते हुए उन्हें इतना डराते हैं कि पीड़ितजन उनके झांसे में आ जाते हैं।
डिजिटल स्कैम के अड्डे-
डिजिटल स्कैम के अड्डे भारत में झारखंड, दिल्ली, यूपी, राजस्थान में तो है ही, सूत्र बताते हैं कि कंबोडिया, लाओस और वियतनाम में भी इनके प्रमुख अड्डे हैं।
दरअसल, भारतीय बेरोजगार युवाओं को इन देशों में ठग नौकरी देने के नाम पर बुलाते हैं और इन्हें ठगी के आपराधिक गतिविधि में झोंक देते हैं।
साइबर फ्राड करनेवाले पैसों को म्यूल बैंक खातों, क्रिप्टोकरेंसी, फर्जी इन्वेस्टमेंट साइट्स व आनलाइन सट्टों के जरिए इधर-उधर कर देते हैं।
डाटा की उपलब्धता-स्कैमर बैंको व बीमा कंपनियों से डेटा चुराते हैं। इसके अलावा डार्क वेब से डेटा क्रय करते हैं।
डग आधार नंबर, फोन नंबर, खाता नंबर उन आफिशियल एजेंशियों से चुराते हैं, जहां से उनको भ्रष्ट तरीके से मिलने की संभावनाएं रहती है।
साइबर डगी से बचाव-जैसा कि पूर्व में बताया गया है कि ठग डर नामक मनोभावों को उभारते हैं और डर को भुनाने का काम करते हैं, इसीलिए किसी आमजन को डरने की जरूरत नहीं है, जिसने कोई अपराध नहीं किया है।
दूसरा यह कि कोई सरकारी एजेंसी कभी किसी को फोन लगाकर कोई जानकारी नहीं मांगती। इस स्कैम में जागरूकता ही बचाव है। ऐसा काम ठग ही कर सकते हैं। इसीलिए किसी के पास खुदा न खास्ता कोई काल आया, तो उसको विवेक से काम लेना चाहिए। इसमें शांत रहते हुए घबराना नहीं चाहिए।
किसी ऐसे धमकीभरे काल को सुनकर संबंधित संस्थान से पुष्टि करनी चाहिए या राष्ट्रीय साइबर पोर्टल, साइबर हेल्पलाइन 1930 में तुरंत शिकायत दर्ज करना चाहिए।
साथ ही, समस्त साक्ष्य जैसे मोबाइल कालिंग डिटेल्स, लेनदेन की जानकारी व मैसेज सुरक्षित रखनी चाहिए, ताकि खोया हुआ पैसा वापस पाया जा सके।
अब, उन प्रकरणों पर दृष्टि डालिए, जो वास्तव में घट चुकी हैं-
केस नंबर-1
डिजिटल अरेस्ट कर बुजुर्ग से 54 लाख की साइबर ठगी-
छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर एंटी क्राइम ब्रांच यूनिट के निरीक्षक विजय चौधरी के अनुसार, ‘‘सेंट्रल गवर्नमेंट के सेवानिवृत्त कर्मचारी और बिलासपुर निवासी जयसिंह चंदेल, उम्र 71 वर्ष ने जुलाई 2024 को 54 लाख की साइबर ठगी का मामला दर्ज कराया था।’’
साइबर ठगों ने पीड़ित बुजुर्ग को फोन कर उनका आधारकार्ड और मोबाइल नंबर मनी लांड्रिंग में इस्तेमाल होने और मोबाइल से पोर्न वीडियो अपलोड करने का आरोप लगाते हुए वाट्सएप पर फेक एफआइआर भेजा।
फिर डिजिटल अरेस्ट कर उनसे काफी देर तक पूछताछ की और डराया,‘‘आपके मामले में ईडी की जांच चल रही है. आपके बैंक खाते की भी जांच होगी।’’
उनने ईडी व उच्चतम न्यायालय के बोगस दस्तावेज तक भेजे और मुंबई ईडी का अधिकारी बनकर जमकर डराया-धमकाया।
इससे पीड़ित चंदेल ने 14 लाख रुपया उनके खाते में अंतरण कर उनसे पीछा छुड़ाने का प्रयास किया।
इसके कुछ ही दिनों बाद म्यूचुअल फंड की जांच कराने का कहकर 25 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए।
फिर 10 लाख व 5 लाख अपने खातों में डलवाए. बारबार फोन करने से बुजुर्ग को शक हुआ. उसने बिलासपुर थाने में मामला दर्ज करवाया।
पुलिस एक्शन में आई। उन मोबाइल नंबरों को ट्रेस करी, जिससे धमकीभरा काल आया करता था। पुलिस उनका पीछा करी।
पकड़े गए आरोपियों में निकुंज 20 साल और लक्ष्य सैनी 20 साल का होकर क्रमशः हरियाणा के सिरसा और राजस्थान के अलवर के रहनेवाले हैं। दोनों आरोपी पॉलीटेक्निक में डिप्लोमाधारी हैं। मैंन्स पार्लर में काम करते थे। तीसरा एक और आरोपी है, जो फरार है।
इनने ईडी अधिकारी बताकर बुजुर्ग से जमकर वसूली की। इन साइबर ठगों के गैंग का उत्तरी अमेरिका, चीन और यूरोप से कनेक्शन होने का भी पता चला है।
ठगों ने यूएसटीडी क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट कर ठगी के पैसों को सुरक्षित कर रखा था। दोनों ठगों के बैंक अकाउंट में ठगी के 9-9 लाख रुपये जमा हैं।
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-क्रमशः-
समसामयिक लेख का शेष भाग अगले लेख में मिलेगा।
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