चैप्टर 5: समीर का डर।
समीर के सामने हवा में तैरती हुई उस सफेद स्क्रीन पर अचानक कुछ हलचल हुई।
वहां एक लोडिंग बार उभर कर सामने आ गया।
उस बार के अंदर कुछ नंबर बहुत तेजी से चलने लगे।
1, 2, 3…
वह नंबर लगातार आगे बढ़ रहे थे।
...50... 60... 80... 90…
समीर की आंखें उन बदलते हुए नंबरों पर टिकी थीं।
...98, 99, 100.
देखते ही देखते वह लोडिंग बार पूरा भर गया।
स्क्रीन पर एक चमक पैदा हुई और वह नंबर वहां से गायब हो गए।
तभी समीर के दिमाग में दोबारा वही आवाज गूंजी।
"इंस्टालेशन कंप्लीट हुआ। होस्ट आपका स्वागत है..."
वह आवाज शायद आगे कुछ और भी बोलना चाहती थी।
पर समीर ने उसे बीच में ही टोक दिया।
वह एकदम से फट पड़ा और बिना सोचे समझे बोलने लगा।
"स्वागत है? स्वागत है से तुम्हारा क्या मतलब है?"
उसकी सांसें फूलने लगी थीं और उसका लहजा तेज हो गया था।
"ये शरीर मेरा ही है।"
उसने अपने सीने पर हाथ रखा।
"और भला तुम मेरे ही शरीर में मेरा स्वागत कैसे कर सकते हो?"
वह एक पल के लिए भी नहीं रुका।
"तुम कहना क्या चाहते हो? साफ-साफ बोलो।"
समीर का दिमाग बहुत तेज स्पीड से दौड़ रहा था।
"और ये सब क्या है?"
उसने हवा में हाथ हिलाते हुए उस स्क्रीन की तरफ इशारा किया।
"क्या मैं किसी फैंटेसी की कहानी में चला गया हूं?"
उसे इंटरनेट पर पढ़ी हुई नोवेल्स याद आने लगीं।
"क्या मेरी असली दुनिया कहीं पीछे छूट गई है?"
उसने मुड़कर जमीन पर सोते हुए अपने भाई को देखा।
"क्या ये जो मेरे भाई जैसा दिख रहा है वो असल में किसी और समीर का भाई है?"
उसने कमरे की दीवारों को घूरा।
"और ये कमरा? क्या ये भी किसी और समीर का है?"
उसके अंदर का डर अब शब्दों के रूप में बाहर आ रहा था।
"और इस दुनिया में क्या मेरे माता-पिता? क्या वो मेरे माता-पिता हैं या किसी और समीर के?"
समीर ने अपने दोनों हाथों से अपना सिर पकड़ लिया।
"देखो तुम जो भी हो पर मैं एक बात क्लियर कर देना चाहता हूं।"
उसने हवा में देखते हुए एक चेतावनी भरे लहजे में कहा।
"मैं अपनी दुनिया बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहता।"
उसकी आंखों में एक घबराहट साफ दिख रही थी।
"भले ही मुझे वहां एक आम जिंदगी ही गुजारनी पड़े।"
“मेहनत मजदूरी कर लूंगा पर…”
उसने अपने दांत पीसते हुए कहा।
"तो तुम मेहरबानी करके मुझे वापस मेरी दुनिया में पहुंचा दो..."
समीर एक पल भी रुके बिना लगातार बोले जा रहा था।
असल में उसने इंटरनेट पर बहुत सारी ऐसी कहानियां पढ़ी थीं।
जब भी वो अपनी पढ़ाई के बोझ तले दबाने ता वो ऐसी ही मजेदार सिस्टम वाली कहानियां पड़ता था।
उन कहानियों में हीरो अक्सर किसी और दुनिया में चला जाता है।
वह नई दुनिया अक्सर हीरो की पुरानी दुनिया जैसी ही हुबहू होती है।
और वहां उसे किसी न किसी तरह का सिस्टम मिलता है।
वह सिस्टम हीरो को आसमान की ऊंचाइयों पर पहुंचा देता है।
पर समीर को ये सब अपनी असली दुनिया से अलग होने की कीमत पर नहीं चाहिए था।
वह जिंदगी में सफलता जरूर चाहता था।
पर वह कभी भी अपनी असलियत से भागना नहीं चाहता था।
वह यहीं पैदा हुआ था और यही उसका घर था।
हां वह एक गरीब परिवार में पैदा हुआ था।
पर इसका मतलब यह नहीं था कि वह अपने माता-पिता को छोड़ दे।
अपने भाई अपनी असलियत को छोड़ दे।
उसे अपनी जिंदगी में सहूलियतें और पैसा चाहिए था।
पर वह उन चीजों के लिए वो कोई बड़ी कीमत नहीं चुकाना चाहता था।
खासकर अपनी असली दुनिया को खोने की कीमत तो बिल्कुल भी नहीं।
इसीलिए जब उसने अपनी आंखों के सामने वह सफेद स्क्रीन देखी तो वह पूरी तरह से हाइपर हो गया।
उसका दिमाग खराब हो गया और वह बिना रुके लगातार अपनी भड़ास निकालता रहा।
समीर को इस तरह लगातार बक-बक करता देख वह सिस्टम भी चुप हो गया।
उसने समीर को बीच में बिल्कुल नहीं टोका।
जब आखिरकार समीर बुरी तरह हांफते हुए रुका तो कमरे में फिर से सन्नाटा छा गया।
समीर की छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी।
तभी उस सिस्टम ने एक चिढ़ी हुई आवाज में जवाब दिया।
"हो गया? अब मैं बोलूं?"
उस आवाज में एक अजीब सी झुंझलाहट थी।
"मैंने अपने पुराने होस्ट को पहले ही मना किया था।"
सिस्टम ने किसी इंसान की तरह ताना मारते हुए कहा।
"कि इतने सुदूर ग्रह पर ऐसे व्यक्ति को ना चुनें जिसके पास कोई जादुई पावर तक ना हो।"
उस आवाज में समीर के लिए एक साफ निराशा झलक रही थी।
"पर वो फिर भी नहीं माना।"
सिस्टम ने एक लंबी सांस जैसी आवाज निकाली।
"खैर मैं किसके पास जाऊंगा इसका आखिरी फैसला हमेशा से ही मेरे होस्ट का होता है।"
सिस्टम की बातें समीर के सिर के ऊपर से जा रही थीं।
"अब मेरे पिछले होस्ट ने तुम्हें चुन ही लिया है तो उसने जरूर तुम्हारे अंदर कुछ ऐसा देखा होगा जो शायद मैं नहीं देख पाया।"
सिस्टम ने अपनी बात खत्म की।
पर सिस्टम की इस लंबी बक-बक से समीर को अभी भी कोई राहत नहीं मिली।
उसकी उलझन अभी भी वहीं की वहीं थी।
उसे अब भी डर था कि वह किसी और दुनिया में है।
उसके चेहरे का तनाव बिल्कुल भी कम नहीं हुआ था।
और सिस्टम ने समीर के अंदर के इस डर को बहुत आसानी से भांप लिया।
समीर के चेहरे का तनाव देखकर सिस्टम सब कुछ समझ गया।
उसने बिना कोई समय बर्बाद किए अपनी बात को आगे बढ़ाया।
"देखो नए होस्ट सबसे पहले तो मैं तुम्हें ये क्लियर कर दूं।"
सिस्टम की आवाज में एक ठहराव था।
"कि तुम अपनी असली दुनिया में ही हो।"
“और हा तुम्हे ज्यादा reincarnation वाली कहानियां नहीं पढ़नी चाहिए।”
पर समीर ने सिस्टम की बस शुरुआती बात ही सुनी और बस इतना ही सुनना था।
की समीर के सीने से एक भारी बोझ एकदम से हट गया।
उसके अंदर खुशी की एक लहर दौड़ गई।
उसका सारा डर एक झटके में हवा हो गया।
उसके चेहरे का पीलापन एकदम से गायब हो गया।
वह खुशी के मारे अपनी जगह पर उछल पड़ा।
उसने सिस्टम को उसकी बात पूरी करने का मौका ही नहीं दिया।
वह तुरंत जोश में भरकर बीच में ही बोल पड़ा।
"क्या सच में मैं अपनी असली दुनिया में ही हूं?"
उसकी आवाज में एक बड़ी राहत थी।
"फिर तो कोई दिक्कत की बात ही नहीं है।"
उसने अपनी दोनों मुट्ठियां कस लीं।
समीर का सारा तनाव अब एक भयंकर उत्साह में बदल चुका था।
उसने हवा में तैरती स्क्रीन को घूरा।
"और क्या तुम सच में कोई जादुई सिस्टम हो?"
उसकी आंखों में एक चमक आ गई थी।
"जैसा कि मैंने अक्सर कहानियों में पढ़ा है?"
"क्या तुम भी मुझे ढेर सारी शक्तियां दोगे?"
समीर अपनी खुशी को बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा था।
"ऐसी शक्तियां जो मुझे इस दुनिया में सबसे ताकतवर बना देंगी?"
उसकी धड़कनें तेजी से चलने लगी थीं।
उसके दिमाग में सफलता के सपने दौड़ने लगे थे।
उसे यकीन हो गया था कि अब उसका वक्त आ गया है।
उसे पता था कि अब से उसकी जिंदगी बिल्कुल ही बदलने वाली है।
उसकी गरीबी अब हमेशा के लिए खत्म होने वाली थी।
वह इस दुनिया का सबसे महान इंसान बनने वाला था।
पर क्या सच में ऐसा होगा?