The Mind Reader's Secret - 1 in Hindi Fiction Stories by Neha Banchhor books and stories PDF | The Mind Reader's Secret - 1

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The Mind Reader's Secret - 1

भाग एक: शौर्य रायचंद का औरा और उसकी एंग्जायटी

मुंबई के सबसे महंगे और मॉडर्न बिजनेस हब में स्थित' रायचंद कॉर्प' का हेड ऑफिस किसी विदेशी कंपनी जैसा दिखता था. पूरी बिल्डिंग कांच और स्टील से बनी थी, जिसके बाहर एक बडा सा डिजिटल बोर्ड लगा था. सुबह के ठीक आठ बज रहे थे. ऑफिस के अंदर का माहौल काफी शांत लेकिन थोडा स्ट्रेसफुल था. हर एम्प्लॉई अपनी सीट पर मौजूद थे, क्योंकि सब जानते थे कि बॉस के आने का समय हो गया है.
तभी ऑफिस के पोर्च में काले रंग की एक चमचमाती लग्जरी कार आकर रुकती है. बॉडीगार्ड फौरन दौडकर कार का पिछला दरवाजा खोलता है. गाडी से बाहर आता है—शौर्य रायचंद.
फिटेड ब्लैक सूट, आंखों पर ब्रांडेड सनग्लासेस और चेहरे पर एक ऐसा एटीट्यूड जिसे देखकर कोई भी सहम जाए. शौर्य रायचंद कॉर्प का युवा मैनेजिंग डायरेक्टर था. पूरे कॉर्पोरेट जगत में उसे एक' जीनियस' माना जाता था. उसके पास लोगों के दिमाग को पढने की एक कमाल की एबिलिटी थी. वह सामने वाले की बात करने के तरीके, उसके हाथों की मूवमेंट और उसकी आंखों के एक्सप्रेशन से तुरंत भांप लेता था कि सामने वाला सच बोल रहा है या झूठ. लोग उसे' द माइंड रीडर' भी कहते थे.
लेकिन यह तेज दिमाग शौर्य के लिए एक बडी मुसीबत भी था. वह चौबीसों घंटे लोगों के झूठ और उनके स्वार्थ को पकडता रहता था, जिसकी वजह से उसका अपना दिमाग कभी शांत नहीं हो पाता था. इसी ओवर- थिंकिंग की वजह से वह पिछले कुछ सालों से गंभीर एंग्जायटी और पैनिक अटैक्स का शिकार था. उसने अपनी इस कमजोरी को दुनिया के सामने कभी आने नहीं दिया था. वह किसी पर भरोसा नहीं करता था और लोगों को खुद से दूर रखता था.
जैसे ही शौर्य अपने प्राइवेट लिफ्ट से होता हुआ अपने टॉप फ्लोर के केबिन में पहुंचा, उसकी सांसें थोडी भारी थीं. उसका दिल जोर से धडक रहा था और उसे घबराहट हो रही थी. उसने तुरंत अपनी जेब से एक छोटी सी डिब्बी निकाली और एक दवा निकालकर पानी के साथ निगल ली. उसने अपनी आंखें बंद कीं और खुद को शांत करने की कोशिश की. तभी केबिन के दरवाजे पर Knock हुआ. शौर्य ने फुर्ती से दवा की डिब्बी को ड्रावर में छुपाया, अपने सूट को ठीक किया और अपनी आवाज को कडक करते हुए कहा, कम इन।

भाग दो: नताशा की एंट्री और शौर्य का गुस्सा

दरवाजा खोलकर नताशा अंदर आई. नताशा रायचंद कॉर्प की चीफ स्ट्रेटेजिस्ट थी और शौर्य की Collage Friend भी. वह बेहद स्टाइलिश, खूबसूरत और महत्वाकांक्षी थी. वह शौर्य की बुद्धिमानी की दीवानी थी और अंदर ही अंदर उससे प्यार करती थी. वह हमेशा शौर्य के करीब आने के मौके ढूंढती थी, लेकिन शौर्य उसके साथ हमेशा एक सख्त प्रोफेशनल दूरी बनाकर रखता था.
नताशा ने एक आईपैड और कुछ फाइल्स शौर्य की टेबल पर रखीं और थोडे परेशान लहजे में कहा, शौर्य, तुम्हारी नई सेक्रेटरी की फाइल. कल जो लडकी काम पर आई थी, उसने कल दोपहर में ही रोते हुए Job छोड दी. एचआर का कहना है कि तुम इंटरव्यू में इतने कडे और पर्सनल सवाल पूछते हो कि लोग बर्दाश्त नहीं कर पाते. तुम्हें एक पर्सनल असिस्टेंट की सख्त जरूरत है. आज कुछ और लडकियां आई हैं, प्लीज उनका इंटरव्यू ले लो।
शौर्य ने बिना फाइल्स की तरफ देखे ठंडे लहजे में कहा, वो लडकियां डरती नहीं हैं नताशा, वो झूठ बोलती हैं. कोई कहती है कि उसे इस कंपनी से प्यार है, कोई कहती है कि वो दिन- रात काम कर सकती है. मुझे उनके चेहरों पर साफ उनका लालच दिखता है. और मुझे अपने आसपास ऐसे फेक लोग बिल्कुल नहीं चाहिए।
नताशा ने थोडा पास आकर कहा, मैं समझती हूँ शौर्य. लेकिन तुम अकेले पूरी कंपनी का शेड्यूल नहीं संभाल सकते. आज जो लडकियां आई हैं, उनमें से एक लडकी की प्रोफाइल बहुत ही कमाल की है. उसने टॉप बिजनेस स्कूल से गोल्ड मेडल जीता है. एक बार मिल तो लो।
शौर्य ने एक गहरी सांस ली, अपनी कुर्सी पर पीछे की ओर झुका और कहा, ठीक है, उसे अंदर भेजो. लेकिन अगर वो भी बाकी लडकियों की तरह निकली, तो मैं एचआर हेड को फायर कर दूंगा।

भाग तीन: कायरा की एंट्री और शौर्य का ऑब्जर्वेशन

बाहर वेटिंग एरिया में कई लडकियां नर्वस होकर बैठी थीं. कोई अपने नाखून चबा रही थी तो कोई बार- बार अपना मेकअप ठीक कर रही थी. लेकिन उन्हीं के बीच बैठी थी कायरा.
कायरा बहुत ही सिंपल और सोबर फॉर्मल कपडों में थी. उसकी आंखों में एक अजीब सा कॉन्फिडेंस और जिद थी. वह बाकी लडकियों की तरह नर्वस नहीं थी, बल्कि शांति से अपने फोन में कुछ देख रही थी. लेकिन अगर कोई उसके हाथों को ध्यान से देखता, तो उसने अपनी उंगलियों को कसकर पकड रखा था, जैसे वह अंदर चल रहे किसी बडे तूफान को छुपाने की कोशिश कर रही हो.
जब रिसेप्शनिस्ट ने कायरा का नाम पुकारा, तो वह एक गहरी सांस लेकर शौर्य के केबिन के अंदर दाखिल हुई.
शौर्य अपनी सीट पर बैठा हुआ था. जैसे ही कायरा ने अंदर कदम रखा, शौर्य की गहरी और पारखी नजरें उस पर टिक गईं. उसका दिमाग हमेशा की तरह फौरन कायरा को स्कैन करने लगा: कपडे बहुत सिंपल हैं लेकिन बिल्कुल परफेक्ट हैं—यानी इसे अनुशासन पसंद है. फाइल को उसने अपने पेट के पास कसकर पकडा है—यह एक डिफेंसिव पोजिशन है, यानी यह किसी बात को लेकर अलर्ट है. आंखें सीधे मेरी आंखों में देख रही हैं—या तो यह सचमुच बहुत कॉन्फिडेंट है, या फिर जानबूझकर ऐसा दिखा रही है।
शौर्य ने अपनी आवाज को थोडा धीमा लेकिन कडक रखते हुए पूछा, बैठो. तुम्हारी सीवी कहती है कि तुमने देश के टॉप बिजनेस स्कूल से टॉप किया है. तुम चाहतीं तो किसी भी बडी मल्टीनेशनल कंपनी में सीधे एक अच्छी पोस्ट पर मैनेजर बन सकती थीं. फिर तुम यहाँ एक मामूली सेक्रेटरी की Job के लिए क्यों आई हो?
कायरा ने बिना झिझके सीधे शौर्य की आंखों में देखते हुए कहा, क्योंकि मुझे लगता है कि रायचंद कॉर्प के एमडी के साथ काम करके जो बिजनेस की बारीकियां सीखी जा सकती हैं, वो कोई और कंपनी मुझे नहीं सिखा सकती. और मुझे इस काम में कोई छोटापन नहीं लगता. मुझे काम सीखने से मतलब है।
तभी शौर्य को एक बहुत ही अजीब और अलग अहसास हुआ. जब से कायरा उस केबिन में आई थी और उसकी शांत, कंपोज्ड आवाज कमरे में गूंजी थी, शौर्य के दिमाग में जो हर वक्त एक अजीब सी घबराहट और शोर रहता था, वो धीरे- धीरे शांत होने लगा था. कायरा की मौजूदगी में एक ऐसी हीलिंग वाइब थी, जिसने शौर्य की एंग्जायटी को पल भर में कम कर दिया था. शौर्य खुद हैरान था कि ऐसा कैसे हो सकता है.

भाग चार: दस मिनट का चैलेंज

शौर्य ने खुद को संभाला और अपने चेहरे के भावों को वापस सख्त कर लिया. वह देखना चाहता था कि यह लडकी वाकई में इतनी स्मार्ट है या सिर्फ रट्टा मारकर आई है. उसने टेबल से एक बहुत मोटी बाइंडिंग वाली फाइल उठाई और उसे कायरा की तरफ बढा दिया.
यह हमारी आने वाली एक बहुत बडी इंटरनेशनल टेक- डील की समरी है. इसमें लगभग चार सौ पन्ने हैं, शौर्य ने फाइल कायरा के सामने रखते हुए कहा, तुम्हारे पास ठीक दस मिनट हैं. इसे पढो और मुझे सिर्फ तीन लाइनों में बताओ कि इस पूरी डील में रायचंद कॉर्प के लिए सबसे बडा खतरा या रिस्क क्या है।
नताशा, जो केबिन के कोने में खडी यह सब देख रही थी, मन ही मन मुस्कुराई. उसे लगा कि चार सौ पन्नों की फाइल को दस मिनट में पढना और उसमें से रिस्क ढूंढना नामुमकिन है. कायरा भी बाकी लडकियों की तरह घबरा जाएगी.
लेकिन कायरा ने बिना कोई वक्त गंवाए फाइल उठाई और बहुत ही फोकस के साथ पन्ने पलटना शुरू किया. कमरे में सिर्फ पन्नों की सरसराहट की आवाज आ रही थी. शौर्य लगातार उसकी आंखों की मूवमेंट को नोटिस कर रहा था कि क्या वह वाकई समझ रही है या सिर्फ दिखावा कर रही है. कायरा का पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ उस फाइल पर था.
ठीक नौवें मिनट पर, कायरा ने फाइल बंद की, उसे टेबल पर रखा और सीधे शौर्य की तरफ देखा.
सर, इस डील में रिस्क पैसों का या प्रॉफिट का नहीं है, कायरा ने बहुत ही क्लियर आवाज में कहा, इस फाइल के पेज नंबर एक सौ बारह के क्लॉज नंबर बयालीस के मुताबिक, अगर यह डील Sign होती है, तो हमारी कंपनी का सारा सीक्रेट डेटा सामने वाली कंपनी के सर्वर पर ऑटोमैटिकली सिंक हो जाएगा. इसका मतलब है कि रायचंद कॉर्प अपनी प्राइवेसी खो देगी. सामने वाली कंपनी हमसे बिजनेस पार्टनरशिप नहीं करना चाहती, बल्कि वो चालाकी से हमारा डेटा चुराना चाहती है।
शौर्य अपनी कुर्सी पर बिल्कुल सीधा हो गया. उसकी आंखें छोटी हो गईं. उसने खुद उस फाइल को तीन बार ध्यान से पढा था तब जाकर उसे वो चालाकी समझ आई थी, और इस लडकी ने सिर्फ दस मिनट में उस लूपहोल को ढूंढ निकाला था. नताशा का चेहरा भी यह सुनकर उतर गया.

भाग पाँच: कायरा का सीक्रेट और बदला

शौर्य अपनी कुर्सी से खडा हुआ. वह धीरे- धीरे चलकर कायरा की चेयर के पास आया और उसके बिल्कुल करीब झुक गया. केबिन में एक गहरा सन्नाटा छा गया था. शौर्य ने उसकी आंखों में झांकते हुए पूछा, तुम जितनी स्मार्ट दिख रही हो कायरा, सच में उतनी ही हो. या यह सिर्फ कोई इत्तेफाक है?
कायरा ने अपनी जगह से हिले बिना, हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा, आप कल से मुझे काम पर रखकर खुद देख सकते हैं, सर. आपको जवाब मिल जाएगा।
शौर्य ने कुछ सेकंड्स तक उसकी आंखों में देखा, जैसे वह उसके दिमाग की गहराइयों को पढने की कोशिश कर रहा हो. लेकिन कायरा की आंखों में एक अजीब सा परदा था जिसे शौर्य का दिमाग भी पार नहीं कर पा रहा था. शौर्य ने नताशा की तरफ देखा और कहा, नताशा, इसे अपॉइंटमेंट लेटर दे दो. कल सुबह आठ बजे यह मुझे मेरे केबिन में चाहिए।
कायरा खडी हुई, उसने शौर्य को थैंक You कहा और पूरे ग्रेस के साथ केबिन से बाहर निकल गई. लेकिन जैसे ही वह केबिन के भारी दरवाजे से बाहर आई, उसके चेहरे की वो प्रोफेशनल मुस्कान पूरी तरह गायब हो चुकी थी. उसने एक लंबी और ठंडी सांस ली, मानो उसका दम घुट रहा हो. वह कॉरिडोर के एक सुनसान कोने में गई, जहाँ कोई नहीं था. उसने अपने बैग की चेन खोली और अंदर से एक पुराना लॉकेट निकाला. उस लॉकेट को खोलते ही अंदर उसके पिता की एक हंसती हुई तस्वीर दिखाई दी.
कायरा ने उस तस्वीर पर अपनी उंगली रखी और बहुत ही धीमी, नफरत भरी आवाज में बुदबुदाई, पापा. मैं रायचंद कॉर्प के अंदर पहुंच चुकी हूँ. जिस शौर्य रायचंद ने अपनी साजिशों से आपकी ईमानदारी पर दाग लगाया और आपको सुसाइड करने पर मजबूर किया. मैं उस इंसान को उसी के केबिन में बर्बाद करके रहूंगी. आपके ऊपर लगा हर दाग मैं अपने हाथों से साफ करूंगी।
उधर केबिन के अंदर, शौर्य खिडकी के कांच से बाहर कायरा को बिल्डिंग से बाहर निकलते हुए देख रहा था. शौर्य का' माइंड रीडर' दिमाग उसे बार- बार अंदर से एक सिग्नल दे रहा था कि कायरा जितनी सीधी और टैलेंटेड दिख रही है, उसके पीछे कोई बहुत बडा और खतरनाक तूफान छुपा है जो सीधे उसकी जिंदगी से जुडा है.
उधर केबिन के अंदर, शौर्य खिडकी के कांच से बाहर कायरा को जाते हुए देख रहा था. उसका' माइंड रीडर' दिमाग चिल्ला- चिल्लाकर कह रहा था कि इस लडकी में कुछ तो गडबड है, लेकिन उसका दिल पहली बार किसी की मौजूदगी में सुकून महसूस कर रहा था. शौर्य को अंदाजा भी नहीं था कि जिस लडकी को उसने अपनी सेक्रेटरी बनाया है, वो उसकी जिंदगी की सबसे बडी कमजोरी बनने वाली है.
कांच के उस पार खडी इस खूबसूरत आंधी को शौर्य समय रहते भांप पाएगा, या कायरा के बुने इस जाल में वो अपना सब कुछ और अपना दिल दोनों हार बैठेगा? इस माइंड गेम का अगला ट्विस्ट देखने के लिए बने रहिए. क्योंकि असली खेल तो अब शुरू होगा, सिर्फ एपिसोड दो में!