SHADOW'S WORLD - CHAPTER 1 in Hindi Fiction Stories by Ansul Fouzdar books and stories PDF | SHADOW'S WORLD - CHAPTER 1

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SHADOW'S WORLD - CHAPTER 1

शौर्यगढ शहर के नेशनल कालेज में साल के आखिरी दिन फंक्शन मनाया जा रहा था, सभी कॉलेज स्टूडेंट्स स्टेज के आगे रखी कुर्सियों पर बैठे होते हैं, वही प्रीत स्टेज पर चल रहे प्रिंसिपल और प्रोफेसर्स के स्पीच से Bore हो रही थी, प्रीत की Right Side वाली कुर्सी पर दक्ष बैठा था और दक्ष की Right Side वाली कुर्सी पर रुद्र बैठा था। प्रीत दिखने में सुंदर शांत और एक Intelligent लड़की है दूसरी तरफ रुद्र एक तरह से खडूस कम हंसने और बोलने वाला जो सिर्फ खुद को सब से बड़ा मानता है और ज्यादातर साइकोलॉजी के बारे में पढ़ता रहता है और अगर बात करें दक्ष की तो वह मजाकिया मिजाज का Full Funny Boy है।
अविका को आने में देरी हो गई थी, अविका को सिर्फ एक ही चीज पसंद थी वह था बोलना इसलिए वह बोलती बहुत थी। अविका जल्दी से आकर प्रीत की Left Side वाली कुर्सी पर बैठ जाती है।
अविका – लगता है जल्दी Start कर दिया इन लोगों ने।
प्रीत – नहीं तुम Late हो।
अविका – जब मैं जल्दी आती हूं तो ये लोग Late कर देते हैं और Late आती हूं तो ये Time के Punctual बन जाते हैं मैं करूं तो भी क्या।
दक्ष – आगे से आओ ही मत, Problem solve.
अविका, दक्ष की तरफ देखकर उसे घूरती है और दक्ष समझ जाता है कि शायद कुछ गलत निकल गया।
प्रीत – आना ही नहीं चाहिए था फालतू में Bore कर रहे हैं ये लोग।
अविका – अरे साल का आखिरी दिन है कुछ नाच गाना करवाते तो कुछ बात थी।
प्रीत – सब से अच्छा कुछ करवाते ही न।
अविका – इनकी फालतू स्पीच से अच्छा तो कुछ न करना ही ठीक है पर मेरे Singing और Dancing वाले Idea में भी कोई Problem नहीं है।

दक्ष – किसकी चुगली कर रही हो तुम दोनों
अविका – हम कहां किसी की चुगली कर रहे हैं?
दक्ष – तो तुम दोनों आपस में भजन कीर्तन तो कर नहीं रहीं थीं।
प्रीत – अरे वो मैं कह रही थी कि….. चल छोड़ तुझे समझ मे नही आएगा, तू Enjoy कर।
दक्ष – क्यूं मेरी समझ में क्यूं नहीं आएगा?
इनकी बक बक सुनकर रुद्र परेशान हो जाता है,
रुद्र – या तो Enjoy कर ले या मुंह बन्द कर ले।
इतने में Principal द्वारा विवान को Best student of the year का Award मिल रहा होता है पूरा हौल तालियों से गूंज उठता है।
विवान उन चारों के ही Group का Member है। विवान दिखने मे Handsome,Smart, Intelligent और समझदार लड़का है, जो हर Problem का Solution निकाल लेता है लेकिन फिर भी विवान और रुद्र की आपस में कम बनती है या फिर कहें कि रुद्र विवान को खुद से कम समझता है। कॉलेज की उस फंक्शन में सब मौजूद थे सिर्फ एक को छोड़कर और वो थे प्रोफेसर कैलाश खुराना, जिन्हें सब प्रोफेसर खुराना या खुराना सर कहते थे। प्रोफेसर खुराना रिसर्चर भी थे और वह अपना ज्यादातर समय लाइब्रेरी की Books को पढ़ने में निकालते थे वह किसी से ज्यादा बात नहीं करते थे, उनसे बात करने पर लगता जैसे वह कुछ जानने की कोशिश कर रहे हैं। विवान को भी किताबें पढ़ने का थोड़ा शौक था इसलिए वह कभी-कभी लाइब्रेरी से permission लेकर किताबें घर ले जाता और उसे पढ़ कर वापस लाइब्रेरी में रख देता। ऐसे ही फंक्शन के बाद विवान लाइब्रेरी में किताब रखने आया तो उसने देखा की पूरी लाइब्रेरी खाली थी, बस प्रोफेसर खुराना बैठे हुए थे और सामने एक किताब खुली हुई थी और उनका लैपटॉप भी, विवान उनके पास जाकर उनसे कहता है–

विवान – सर मुझे बेस्ट स्टूडेंट ऑफ द ईयर का अवार्ड मिल गया।
प्रो.खुराना – Congratulations विवान।
विवान – Thanks.
प्रोफेसर खुराना फिर अपने काम में Busy हो जाते हैं, विवान किताब लाइब्रेरी में रखता है और जाने से पहले फिर से प्रोफेसर खुराना के पास जाता है-
विवान – सर फंक्शन में मुझे आप कहीं दिखे नहीं या आप आए ही नहीं थे।
प्रो.खुराना – नहीं मैं आया नहीं था, मुझे यहां थोड़ा काम था।
विवान – सर मैं आपको हमेशा यहां किताबें पढ़ते देखता हूं और मैं भी थोड़ा किताबों का शौकीन रहा हूं, आप जो किताब पढ़ रहे हैं इसके बारे में मैं जानना चाहता हूं जिससे आगे मैं इस किताब को पढ़ लूं अगर आप इसके बारे में मुझे कुछ बताएं।
प्रो.खुराना – नहीं तुम कुछ और देख लो, यह तुम्हारी समझ में नहीं आएगी।
विवान – मैं इस किताब को पढ़कर समझना चाहता हूं और फिर आप तो हैं ही मेरी मदद के लिए।
प्रो.खुराना – यह किताब ज्ञान की नहीं है विवान।
विवान – ज्ञान की नहीं है, तो ऐसा क्या है इसमें जिसे समझना मुश्किल है।
अब प्रोफेसर खुराना अपनी किताब बंद कर देते हैं और विवान की तरफ देखकर बस इतना बोलते हैं-
प्रो.खुराना – रहस्य।
विवान चौंक जाता है।
विवान – रहस्य..मतलब कैसा,किसका रहस्य।
प्रो.खुराना – एक जंगल का।
विवान – कौन से जंगल का।
अब प्रोफेसर खुराना धीरे से कहते हैं-
प्रो.खुराना – कालवन।
विवान कुछ और बोलता उससे पहले उसके फोन की घंटी बजती है वह फोन उठा कर बात करता है और घर पर कुछ जरूरी काम होने की वजह से उसे तुरंत घर जाना पड़ता है और प्रोफेसर खुराना फिर से अपनी किताब खोलकर पढ़ने लगते हैं, घर पर रात को विवान अपने कमरे में सोने जाता है और लाइट बंद करके सोते समय वह अपने और खुराना सर के बीच हुई बातों के बारे में सोचता है, वह सोचता है उस किताब के बारे में,वह सोचता है कालवन के बारे में और फैसला करता है कि सुबह कॉलेज जाकर सब से पहले खुराना सर से मिलेगा।