LAST STAGE - 1 in Hindi Fiction Stories by Muhib Khan books and stories PDF | LAST STAGE - 1

Featured Books
Categories
Share

LAST STAGE - 1

दिल्ली शहर  १९९७ एक छोटी सी हॉस्पिटल में पैदा हुआ साहिर अली साहिर के पैदा होने से ठिक २ हफ्ते पहले ही उसके वालिद अलीगुल खान का फेक्ट्री में आग लगने की वजह से इस दुनिया से रुखसत हो गए . साहिर के पैदा होने के ६ महीने बाद साहिर की वालिदा साजिया भी हार्ट अटैक आने से इस दुनियां से रुखसत हों गई साहिर को उसके एक लोटे चाचा मुरसलीन ने ही पाला पढ़ाया ओर बड़ा किया मुरसलीन चा चा ने कभी शादी नहीं की हमेशा अपने भतीजे की देखभाल की वक्त बीत ता गया अब साहिर २८ साल का हो गया  है ओर दिल्ली की बड़ी it कंपनी में एक वेब डिजाइनर था ओर काफी ओछी तंखा थी लेकिन साहिर हमेशा खर्चा कम करता ओर पैसा काफी बचाता था . 



कंपनी में 

साहिर के बॉस चड्डा साहब

चड्डा साहब
साहिर की केबिन में आ कर साहिर की तरफ देख कर

" साहिर तुम्हे पता है ना आज गुप्ता जी का काम खत्म करना है"



साहिर
चड्डा साहब को देख कर

"जी सर में लगा हुआ हु काम पर आज कैसे भी करते खत्म कर दूंगा "



चड्डा साहब 
थोड़ा गुस्से में 

" आज मुझे के भी कर के गुप्ता जी का काम खत्म चाहिए" 

ओर इतना कह कर वहां से चले गए 




कुछ देर बाद साहिर अपनी केबिन से बाहर आता है ओर काफी पीने के लिए कैंटीन की ओर जाता है तभी वहां उसका एक कलिग रोशन वहां आता है ओर वाहिद को देख कर बोलता है 



रोशन
वाहिद की ओर आ कर 

" क्या बोल रहा था बॉस काफी गुस्से में निकला था तेरी केबिन से " 


साहिर
रोशन को 

" क्या बताऊं यार काम का प्रेशर दिन रात लगा पड़ा हु इस काम को खत्म करने के लिए लेकिन ये बॉस रोज आता है ओर *** छोड़ यार "

रोशन
साहिर को

" भाई तू फिकर मत कर सब आसानी से हो जाएगा " 


साहिर
रोशन को 

" भाई में जनता हु सब ठीक से हो जाएगा लेकिन ये बॉस इसका मूड खराब हुआ तो सब बर्बाद हो जाएगा छोड़ यार इन बातों कोई जा रहा हु अभी बहुत काम पड़ा है "

इतना कह कर साहिर कैंटीन से वापिस अपनी केबिन में चला जाता है सारा दिन काम करता है इस बीच दिमाग दुरुस्त करने के लिए काफी कॉफी पीता है और स्मोकिंग भी करता है 



शाम के करीब सात बज चुके थे। ऑफिस लगभग खाली हो चुका था, बस कुछ ही लोग बचे थे। साहिर की उंगलियां अभी भी कीबोर्ड पर तेजी से चल रही थीं। तभी अचानक उसके डेस्क पर रखे इंटरकॉम की घंटी बजी। स्क्रीन पर 'बॉस' का नंबर चमक रहा था।
साहिर की धड़कनें तेज हो गईं। उसने एक गहरी सांस ली और फोन उठाया।


बॉस
साहिर को (फोन पर कड़क आवाज़ में)

" साहिर, वो फाइनल प्रेजेंटेशन फाइल लेकर मेरे केबिन में आओ। अभी! "


साहिर
घबराहट छिपाते हुए
" जी सर, बस अभी लाया। "


फोन रखते ही साहिर ने फाइल उठाई और अपनी टाई ठीक करते हुए बॉस के केबिन की तरफ बढ़ गया। रास्ते में उसे रोशन मिला, जो घर जाने के लिए अपना बैग पैक कर रहा था। साहिर ने उसे देखकर एक नर्वस सी मुस्कान दी और बॉस के केबिन का दरवाज़ा खटखटाया।
" कम इन! " अंदर से आवाज़ आई।

साहिर ने अंदर कदम रखा। बॉस के माथे पर सिलवटें थीं और वे अपने लैपटॉप की स्क्रीन को घूर रहे थे। उनका मूड सच में खराब लग रहा था।


साहिर
फाइल टेबल पर रखते हुए
" सर, ये रही वो रिपोर्ट जिसकी आपको... "


बॉस
बीच में ही बात काटते हुए


" मुझे पता है ये क्या है। मुझे बस ये बताओ कि इसमें वो सारे पॉइंट्स कवर किए हैं जो मैंने सुबह मीटिंग में कहे थे? क्लाइंट बहुत स्ट्रिक्ट है साहिर, मुझे इसमें कोई भी गलती नहीं चाहिए। "



साहिर ने हिम्मत जुटाई और अगले पंद्रह मिनट तक बॉस को पूरी प्रेजेंटेशन बारीकी से समझाई। इस दौरान बॉस के चेहरे के भाव लगातार बदलते रहे। साहिर को बार-बार लग रहा था कि अब उसे डांट पड़ने वाली है।
प्रेजेंटेशन खत्म होने के बाद केबिन में कुछ पलों के लिए अजीब सी शांति छा गई। बॉस ने फाइल बंद की और अपनी कुर्सी पर पीछे की ओर झुक गए।


बॉस
चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान लाते हुए


" वेल डन, साहिर। तुमने सच में बहुत अच्छा काम किया है। मुझे उम्मीद नहीं थी कि तुम इतने प्रेशर में इतनी जल्दी इसे इतने परफेक्शन के साथ पूरा कर लोगे। यू सेव्ड द डे! "


साहिर को अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ। उसकी दिन भर की थकान, टेंशन और वो सारी कॉफी की तलब, सब पल भर में छूमंतर हो गई।


साहिर
राहत की सांस लेते हुए चेहरे पर मुस्कान के साथ

" थैंक्यू सो मच सर! "


केबिन से बाहर आते ही साहिर का चेहरा खुशी से चमक रहा था। रोशन अभी भी वहीं खड़ा उसका इंतज़ार कर रहा था। साहिर ने दूर से ही रोशन को थम्स-अप किया।


साहिर
रोशन को राहत भरी हंसी के साथ


" भाई तू बिल्कुल सही कह रहा था, सब आसानी से हो गया। बॉस एकदम इम्प्रेस है। चल, आज की चाय और समोसे मेरी तरफ से! "


इतना कहकर साहिर ने अपना बैग उठाया और दोनों दोस्त हंसते हुए लिफ्ट की तरफ बढ़ गए।

दोनों लिस्ट से बाहर निकले ही थे कि साहिर के चेहरे पर बॉस की तारीफ की खुशी थी, लेकिन वो खुशी ज्यादा देर नहीं टिक पाई। अचानक साहिर का चेहरा पीला पड़ गया। उसने पेट को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया।


रोशन
चिंता में साहिर की तरफ झुकते हुए


" क्या हुआ भाई? अचानक पेट में दर्द हो गया क्या? मैंने बोला था इतनी ज्यादा कॉफी मत पिया कर खाली पेट। "



साहिर
दरद से कराहते हुए, धीमी आवाज़ में


" नहीं रोशन... ये दर्द... ये बहुत अलग है। ऐसा लग रहा है जैसे पेट के अंदर कोई... "


साहिर अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि अचानक उसे एक बहुत तेज उबकाई आई। उसने मुंह पर हाथ रखा और वॉशरुम की तरफ भागा। रोशन भी घबराकर उसके पीछे दौड़ा।
जैसे ही साहिर वॉशबेसिन के पास पहुंचा, उसे एक भयानक खांसी उठी और उसके मुंह से गहरे लाल रंग के खून की उल्टी (Heavily blood-stained emesis) हुई। वॉशबेसिन खून से लाल हो गया। यह देखकर साहिर के पैर कांपने लगे और वह वहीं फर्श पर बैठ गया।


रोशन
घबराकर चिल्लाते हुए


" साहिर!! भाई ये क्या है? तू ठीक तो है ना? उठ, मैं तुझे अभी हॉस्पिटल लेकर जा रहा हूँ। "


अस्पताल में (अगले दिन की सुबह)
रोशन रात भर साहिर के साथ हॉस्पिटल में ही था। डॉक्टर ने साहिर की गंभीर हालत को देखते हुए तुरंत उसकी एंडोस्कोपी (Endoscopy), सीटी स्कैन (CT Scan) और कुछ जरूरी ब्लड टेस्ट करवाए थे।
साहिर बेड पर लेटा हुआ था, ग्लूकोज की बोतल चढ़ रही थी। तभी डॉक्टर हाथ में रिपोर्ट्स लेकर केबिन में आए। उनके चेहरे पर गहरी चिंता थी। रोशन तुरंत खड़ा हो गया।

रोशन
उत्सुकता और डर से


" डॉक्टर साहब, रिपोर्ट्स में क्या आया है? कल रात खून की उल्टी क्यों हुई थी? कोई इंफेक्शन है क्या? "


डॉक्टर
एक गंभीर सांस लेते हुए, रिपोर्ट्स को देखते हुए

" मिस्टर रोशन, काश यह सिर्फ एक मामूली इंफेक्शन होता। साहिर की रिपोर्ट्स बहुत ही चिंताजनक हैं। उन्हें गैस्ट्रिक कैंसर (Stomach Cancer) है... और बेहद दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि यह अपनी लास्ट स्टेज (Stage 4) पर पहुंच चुका है। कैंसर पेट से फैलकर बाकी अंगों तक भी असर दिखा रहा है। "