Kutrim Buddhimata - 2 in Hindi Motivational Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | कुत्रिम बुद्धिमता - 2

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कुत्रिम बुद्धिमता - 2

                         :  प्रकरण - 2 :

           मैंने तो ऊस दिन के बाद स्कुल मे गुटली मारना बंद कर दिया था. लेकिन मेरे बड़े भाई ने फिर से स्कुल जाना बंद कर दिया.

          यह जानकर नानी मां क़ो बड़ा गुस्सा आया था. उन्होंने भाई क़ो ढोर मार मारा था, इतना ही उस का खाना पीना बंध कर दिया था. और बाजु के घर के अंधेरे गोडाउन मे उसे बंद कर दिया था.

         ऊस बात का भाई पर विपरित असर हुआ था. वह बीमार पड़ गया था और इस तरह ऊस का स्कुल ना जाने का इरादा सफल हो गया था.

         भाई ने दोबारा स्कुल मे गुटली मारना शुरू किया ऊस के दो दिन पहले पिताजी का ख़त आया था.

          " मैंने दोबारा शादी कर ली हैं. "

           यह जानकर नानी मां क़ो बड़ा धक्का लगा था. मेरी मां ने मरने से अपनी मां क़ो सूचित किया था.

            " मेरे बच्चों क़ो पराई औरत क़ो मत सौंपना. "

             शादी की खबर सुनकर नानी मां छोटी बहन भाविका क़ो गोद मे लेकर रोने लगी थी. ऊस बात से मुझे अचरज हुआ था. हमें तो मां मिली है ऊस मे रोने की क्या बात थी.

             मैंने नानी मां क़ो सवाल भी किया था. उन के प्रतिभाव ने मुझे सोचने पर विवश किया था.

             " क्या नई मां अच्छी नहीं होती? "

             मुझे तो ऐसी बातों पर भरोसा नहीं था, लेकिन मेरे भाई बहन नई मां से डरने लगे थे. मेरा बड़ा भाई तो नई मां से मिलने क़ो भी तैयार नहीं था.

             ऊस के दिल नई मां की गलत तस्वीर नानी मां की बातों ने अंकित कर दी थी.

             नानी मां के रुक्ष व्यवहार की भाई की सेहत पर बुरी असर हुई थी, ऊस का बुखार उतरना का नाम नहीं ले रहा था.

              एक दिन मैं स्कुल जाने क़ो तैयार होकर खाना खाने बैठा था. ऊस वक़्त टपाली आकर एक खत घर के अंदर फेंक कर चला गया था. वह भाई की बाजु मे ही गिरा था. वह उसे उठाकर पढ़ने लगा था. यह देखकर नानी मां ने सहज सवाल किया था.

              " किस का ख़त हैं? "

               सूखेश की जुबान जवाब देने के लिये लड़खड़ा रही थी. ऊस ने बोलने की कोशिश की थी.               " पप प पप्पा का मम मौसी का! "

            इतना कहते ही ऊस की वाचा चली गई थी.

            यह देखकर नानी मां गभरा गई थी. उन्होंने मौसी के लडके क़ो बुलाया था. हालत काफ़ी गंभीर थी. उन्होंने ने तुरंत मेरे पिताजी क़ो टेलीग्राम किया था. और वह नई मां क़ो लेकर गांव मे पहुंच गये थे. सूखेश की हालत काफ़ी नाजुक थी. इस हालत मे डोक्टर ने उसे सूरत ले जाने की सलाह दी थी.

             और हम सब टेक्सी मे सूरत पहुंच गये थे.. ऊस समय, 6-30 बजे थे.

             नई मां का मौसरा भाई डोक्टर था. उन्हें तुरंत घर बुलाया था, और तुरंत उपचार जारी हो गया था.

              लेकिन मेरा भाई चौबीस घंटे मे नई मां की मां के घर मे गुजर गया था.

              नई नानी मां क़ो हम से क्या दुश्मनी थी. वह हमें नफ़रत करती थी, हमें पूछती भी थी. हमारी नानी के साथ भी बातचीत का व्यवहार नहीं था. लेकिन वह मजबूर थे उन्हें भाई के लिये उन के घर मे पांव रखना पडा था. सूखेश भी उन से दूर रहता था, लेकिन भगवान उसे मारने के लिये उन्ही के घर ले गये थे.

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            बड़े भाई की मौत से पिताजी क़ो अपने बच्चे दुसरो के हाथ मे सोपने का अफ़सोस हुआ था. वह अपने बच्चों क़ो अपने साथ रखना चाहते थे. यह सुनकर नानी मां रो पड़े थे. उन्होंने सवाल किया था.

           " मैं अकेली कैसे रहूंगी? "

            अपनी सासु मां की लागणी का ख्याल कर के पिताजी ने सन्तानो का बटवारा किया था, उन्होंने भाविका क़ो उन के हाथो सौंप दिया था. यह सब से बडी गलती साबित हुई थी. लंबे अरसे तक यह दुरी भाई बहन क़ो दूर कर गई थी.

             मेरी नई मां का नाम गीता बहन था. उन की मां ने अपने स्वार्थ के लिये अपनी बेटी क़ो लंबे अरसे तक घर मे बिन ब्याही रखा था.

             उन की एक सौतेली बहन थी. ऊस क़ो भी मुझ से क्या बैर था. पति पत्नी मुझे बहुत परेशान करते थे. उन्हें डर था मिल्कत मे बटवारा होगा.

             इस लिये उन्होंने ने मुझे शुरू से ही नापसंद कर के बुद्धू की श्रेणी मे ऱख दिया था. मुझे गीता बहन से दूर रखने का सक्रिय प्रयास किया था.

             एक दिन शाम क़ो चार बजे मौसी ने घर मे दाखिल होकर गीता बहन क़ो आदेश दिया था.

             " जल्दी तैयार हो जाओ. हमें अस्पताल जाना हैं. "

             मैं बाजु मे ही था. अकेला घर मे नहीं रह सकता था. मुझे डर लगता था तो मैंने कहां था.

              " मुझे भी साथ ले चलो. "

              ऊस पर मौसी ने मुझे समझाने की कोशिश की थी. " छोटे बच्चे अस्पताल नहीं जा सकते. "

              यह कहकर वह गीता बहन क़ो अपने साथ ले गई थी. और मैं घर मे अकेला भूखा प्यासा रो रहा था. इस का पता चलते ही पड़ोस मे रहने वाली अनन्या मेरे पास आई थी. ऊस ने फोन कर के मेरे पिताजी क़ो सब कुछ बताया था.

             और मेरे पिताजी काम छोड़कर घर आ गये थे, ऊस से उन के बोस खफा हो गये थे.

              वह कौन सी अस्पताल मे गये थे. कुछ पता नहीं था. ऊस की जानकारी के लिये पिताजी मुझे मौसी के घर ले गये थे. घर मे नौकरानी थी, उसे कुछ मालूम नहीं था. इस स्थिति मे मायूस होकर हमें घर लौटना पडा था.

             पिताजी ने मेरे लिये नास्ता ख़रीदा था.

              सात बजे गीता बहन वापस लौटे थे. ऊस पर पिताजी ने गुस्सा किया था. वह छोटे बच्चे की भ्रान्ति रोने लग गये थे.

               वह किसी का एक शब्द भी सुन नहीं सकते थे. छोटी छोटी बातों मे बिल्कुल बच्चे की तरह रोने लग जाते थे.

               ऊस वक़्त तो मैं बहुत छोटा था. दुनियादारी से बिल्कुल अलिप्त था. कुछ जानता नहीं था. तब किसी अन्य रिश्तेदार के मुंह से सुना था.

                मौसे ने गीता बहन का फायदा उठाया था और उसे कुछ पिलाकर उन का यौन शोषण किया था. इसी बात ने उन की शादी मे विघ्न डाला था.

             घर का माहौल भारी था. इस स्थिति मे पिताजी हमें खाना खाने बाहर ले गये और फ़िल्म भी दिखाई थी.

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