यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई in Hindi Fiction Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई

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यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई

                          :  प्रकरण - 27 :

मैंने ' नैना बरसे रिमझिम रिमझिम ' उपन्यास लिखी थी, जो भाई बहन के प्यार पर आधारित थी.. वह दोनों एक ही मा की संतान थे, इस से अंजान हालत में एक दुसरो के मिलते हैं..

इस कहानी की प्रेरणा मुझे हमारे संबंधी परिवार से मिली थी. दो बहने थी. उन के सगे बेटे बेटी ने शादी की थी.

शास्त्र में ऐसे रिश्ते में शादी के लिये निषेध किया गया हैं.

' सगे बाप बेटी को भी ज्यादा समय साथ रहने के लिये मनाई की गई हैं..'

यहाँ भी वही शास्त्र का निषेध ना मानने के कारण ऐसा अनिष्ट हुआ था.

दोनों बहन ने बाजू बाजू में बंगले ख़रीदे थे. उस की वजह से दोनों के बेटे बेटी बहुधा साथ ही रहते थे.औऱ यही नजदीकियां उन के लिये दुश्मन बन गई थी.

वह एकांत में सुध बुध खो बैठे थे. फल स्वरूप लड़की को गर्भ रह गया था. और दोनों ने शादी कर ली थी. यह सुनकर उन की नानी को दिल का दौरा पड़ा था. और वह बड़ा सदमा लगने के लिये दुनिया छोड़कर चली गई थी.

लेकिन यहाँ मुसीबतों ने पीछा छोड़ा था.

आगे चलकर बाप को कुष्ट रोग हो गया था. साथ में लडके को भी वह बीमारी लागू हो गई थी. वह मूक पैदा हुआ था.

दोनों बहनो की जग हसाई हुई थी..काफ़ी बदनाम हो गई थी.

अब होनी को कौन टाल सकता था?

मेरी कहानी में एक मा अपने जमाने में एक लडके से प्यार करती थी, जिस की वजह से वह सगर्भा हो गईं थी. सामाजिक डर से वह ' धूल का फूल ' फ़िल्म से प्रेरित होकर अपने बच्चे को मंदिर के प्रांगण में छोड़ देती हैं. जो किसी और के हाथों में आता जाता हैं, वहाँ उस का लालन पालन होता हैं, परवरिश होती हैं.

और लड़की की दूसरे व्यकित से शादी हो जाती हैं.

समय के साथ उस का लड़का और लड़की इत्तेफ़ाक़ से एक ही कोलेज में पढ़ने के लिये इक्क्ठे होते हैं.

कोलेज की तरफ से पिकनिक का आयोजन किया जाता हैं, जिस का प्रस्ताव खुद नायिका वीणा ने रखा था.

लड़के का नाम वरुण था. दोनों की मदद से यह पिकनिक का आयोजन हुआ था . वहाँ सब लोग एक होटल में उतरे थे.

वहाँ एक लड़का वीणा पर अत्याचार करता हैं..और वरुण कुपित होकर ऊस की पिटाई भी करता हैं, लेकिन जो कुछ हुआ था उसे तो बदला नहीं जा सकता था.

वीणा प्रेग्नेंट हो जाती हैं. वरुण उसे अपनाने को तैयार हो जाता हैं. तब दोनो को सच्चाई का साक्षात्कार होता हैं.

वह दोनों एक ही मा के संतान हैं!

अब शादी कैसे हो सकती थी?

लेकिन उस की कुंडली में क्या लिखा था?

वीणा को कैंसर हो जाता है. और वह इस दुनिया को छोड़ चली जाती हैं .

इस कहानी में मैंने भाई बहन के प्यार को एक नया लिबाश पहनाया था. लेकिन कुदरत ने अपनी आपखुदी का परचा दिया था.

बहन की मौत से वरुण की आँखे बारिश की तरह 'नैना रिमझिम रिमझिम ' की तरह बरसने लगती हैं .आंसू रुकने का नाम नहीं लेता हैं.

पिकनिक में वीणा ने खुद यह गीत गाया था.

" अधूरा हूं मैं अफसानाजो याद आये चले आनामेरा जो हाल हैं तुझ बिनवह आकर देखते जाना

अपनी बहन साथ में थी जिस की उसे जानकारी नहीं थी और ज़ब मालूम हुआ तो वह बहुत दूर चली गई थी.

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मेरी एक और कहानी प्रकाशित हुई थी.

' बिन पंख के पंछी '

इस उपन्यास के जरिये मैंने यह कहने की कोशिश की थी. हम लोग बिना पंख के पंखी हैं जो अपनी मर्जी के मुताबिक उड़ नहीं सकते . हम लोग पिंजरे में कैद पंखी जैसे हैं.

एक पिता अपने बाप दादा का कारोबार जारी रखने की जिद में अपने बच्चे का क्या हाल करते हैं? उस का सटीक निरुपण करने का दिखाने प्रयास किया था.

12-15 साल का लड़का पढ़ने में काफ़ी तेज था.. एक पिता अपना पारम्परिक धंधा जारी रखने की जिद में अपने बेटे के भावि को दाव पर लगाता हैं. उसे पढ़ने नहीं देता. उसे मर्जी के खिलाफ अपने धंधे में घुसेड़नी की कोशिश करता हैं, जिस की वजह से बेटे श्याम का भावि खतरे में पड़ जाता हैं .

इस से प्रेरित होकर मैंने ' बिन पंख के पंखी लिखना शुरू किया था

मेरी कहानी में यह भूमिका विशाल ने निभाई थी.

उस के पिता ने भी अपने बेटे का अपना धंधा आगे भी चलता रखने की जिद में भटका दिया था. वह चाहते तो माल की डिलीवरी करने के लिये कम से कम क़ोई मजदूर रख सकते थे. लेकिन यह काम भी उन्होंने अपने बेटे के कंधो पर थोप दिया था. उसे हाथ गाड़ी में माल पहुंचाने जाना पड़ता था, जिस वजह से वह स्कूल में जा नहीं पाता था.

बाप की बात नहीं मानने पर उसे मार खाना पड़ता था, भूखा रहना पड़ता था.

फिर भी उस का दिल मजबूत था. हमेशा एक ही गीत उस का प्रेरक बल साबित हुआ था.

नाम ना लेना रोने का रोते को हसाने आये होनहीं रूठना कभी तुम रूठो को मनाने आये हो

एक बार माल की डिलीवरी के दौरान उस की हाथ गाड़ी को एक खटारा उड़ा देता हैं. सारे माल का कच्चर घाण निकल जाता हैं.

और वह ड़र के मारे घर नहीं पाता हैं

और उस के पैर उसे स्टेशन की दिशा में घसीट ले जाते हैं. और वह कुछ भी सोचे बिना गाड़ी में बैठकर मुंबई में चला जाता हैं..

गाड़ी में एक भैया उसे मिल जाता हैं . उस की कहानी सुनकर वह बड़ा प्रभावित होता हैं. वह उसे अपने भाई की चाय की दुकान में काम दिलवाता है..

दुकान में वह झाड़ू पोता और सफाई का काम करता हैं और रात को पढ़ाई करता हैं..

ऐसे ही वह एस एस सी की परीक्षा पास करता हैं और कोलेज में दाखला भी ले लेता हैं.

कोलेज डे के कार्यक्रम में वह अपनी कहानी ' बिन पंख के पंखी ' पर नाटिका तैयार करता हैं जो लोगो को वह काफ़ी पसंद आता हैं. जिस से कहानी की नायिका प्रभावित जाती हैं. और दोनो को प्यार हो जाता हैं.

.लेकिन लड़की जिस का नाम सारंगी था. उस की एक सहेली जो बेवा थी. उस का एक लड़का था, जो पिता के बिना रह नहीं पाता था.

विशाल को उसे अपने पिता की याद आती हैं. वह विपुल से खूब मिल गया था. इस स्थिति में विशाल अपने प्रेम की आहुति देकर उस की सहेली से शादी कर के गांव में वापस लौट आता हैं.

आगे जाकर वह लेखक बन जाता हैं..उसे फ़िल्म में कहानी लिखने का मौका मिला भी मिलता हैं..

लडके का नाम विपुल था. पढ़ने में काफ़ी आगे था. लेकिन उस की आँखे थोड़ी कमजोर हो गईं थी . वह अकेला बाहर नहीं जा सकता था.

इस स्थिति में विशाल एस्कॉर्ट बनकर उस के साथ रहता था.

वो कहाँ था? उस के बारे में उस के मात पिता को ज्यादा जानकारी नहीं होती हैं. कोई उसे बताता हैं.

उस के मा बाप बड़ी तकलीफ से गुजर रहे हैं.

उन्हों ने मतलब के लिये बेटे के साथ जो व्यवहार किया था, उस के बदले उन क़ो बहुत पछतावा होता हैं. वह अपने आप को कभी माफ नहीं कर पाये थे. उस के छोटे भाईने उस का सब कुछ हड़प लिया था .

वह दोनों मर मर के जी रहे थे. एक पिता ने अपने बेटे से जो व्यवहार किया था. उस से गांव में हर क़ोई उसक़ो धिक्कारते हैं, नफ़रत करते हैं.

चांदी सोने में तुलता हो जहाँ दिलो का प्यारआंसू भी बेकार वहाँ पर आहे भी बेकार

किसी ने उन्हें पूछा नहीं था. यह बात उसे हरदम अपराधी होने का एहसास दिला रही थी.

ऐसे पिता की ऐसी स्वार्थी सोच ना जाने कितने लोगो की जिंदगी बर्बाद कर देती हैं.

फिर भी वह सब कुछ भूलकर अपने बाप का व्यवहार भूल कर अपनी बीवी और लड़के को लेकर गांव लौट आता हैं. उन्हें देखकर माता पिता खुश हो जाते हैं.

                   000000000000 ( क्रमशः )