होब्स एन्ड शॉ - फिल्म रिव्यू

होलिवुड की फिल्मों का दिवाना हो और उसने ‘द फास्ट एन्ड द फ्युरियस’ सिरिज की फिल्में न देखी हो, एसा तो शायद ही कोई बंदा होगा ईस धरती पर. 18 साल में एक से बढकर एक एसी कुल 8 फिल्मे देकर इस फिल्म-फ्रेन्चाइज ने बोक्सओफिस पर काफी रेकॉर्डतोड धमाके किए है. इसी सिरिज की लेटेस्ट फिल्म है ‘होब्स एन्ड शॉ’, जिसमें दुनिया के दो दिग्गज एक्शन स्टार्स ड्वेइन ज्होनसन ‘द रोक’ और जेसन स्टेधाम ने प्रमुख भूमिकाएं नीभाईं है.

फिल्म की कहानी कुछ खास नहीं है. एक वैज्ञानिक ने ‘स्नोफ्लेक’ नामके वायरस का ईजाद किया है. अगर वो वायरस गलत हाथों में चला जाए तो दुनिया तबाह हो जाएगी. अपन के पंटर हीरो लोग उस वायरस से दुनिया को बचाने के लिए मैदाने-जंग में शरीक होते है, और फिर क्या… एक्शन, एक्शन और एक्शन का तूफान आता है. एक ऐसा तूफान जो दर्शकों को दंग कर देता है.

कहानी जानी-पहेचानी सी ही है लेकिन ऐसी फिल्मों में कहानी से ज्यादा जरूरी होता है एक्शन. और एक्शन का डोज ‘होब्स एन्ड शॉ’ में कूटकूटकर भरा पडा है. फिल्म में कुल मिलाकर 4-5 एक्शन सीन्स है लेकिन सब एक-दूसरे से अलग है, ये इस फिल्म की सबसे खास बात है. फिर चाहे वो स्काइस्क्रेपर की सीधी दिवार पर भागादौदी का दश्य हो, या उक्रेन में विलन के अड्डे को नेस्तनाबूद करनेवाला सीन हो, या फिर लंडन की सडकों पर कार चेज के रोमांचक द्श्य हो. ‘होब्स एन्ड शॉ’ एक्शन के मामले में जरा भी निराश नहीं करती. खास जिक्र करना पडेगा 15 मिनट लंबे क्लाइमेक्स का जो की ‘समोआ टापु’ के बेहद खूबसूरत एक्झोटिक लोकेशन पर फिल्माया गया है. ‘फास्ट-फ्युरियस’ परंपरा के अनुसार क्लाइमेक्स में गाडीयों का कचूंबर तो किया ही गया है लेकिन इसके अलावा यहां एक्शन को फेन्टसी फिल्मों के क्लाइमेक्स जैसा रंग देने की कोशिश भी की गई है, जो काफी हद तक कामियाब हुई है. फिल्म के ट्रेलर में क्लाइमेक्स का एक भी सीन न दिखाकर फिल्म मेकर्स ने बडी ही चालाकी से काम लिया है. दर्शकों के लिए इस फिल्म का क्लाइमेक्स पूरी तरह से एक सरप्राइज साबित होता है. और फिल्म के आखिरी 15 मिनट ही है जो फिल्म का सबसे बेस्ट हिस्सा है. एसा हिस्सा जिसे देख दर्शक तालियां और सीटीयां मारने पर मजबूर हो जाते है.

अभिनय की बात करे तो… अब एक्शन फिल्म में अभिनय होगा तो भी कैसा होगा..? ज्होनसन और जेसन के बीच की अच्छी केमेस्ट्री के चलते दोनों के पात्र निखरकर सामने आते है. डायलोग्स फन्नी है, एक्टर्स की कोमिक टाइमिंग भी अच्छी है, लेकिन संवाद-लिखावट में थोडा और बहेतर काम हो सकता था. मारधाड में तो खैर दोनों अदाकारों ने उम्मीद से दुगना ही दिया है. न केवल वो दोनों, बलकी हिरोइन ‘वेनेसा कर्बी’ और विलन ‘इद्रिस आल्बा’ ने भी एक्शन करने में कोई कसर नहीं छोडी. वेनेसा फिल्म में काफी होट भी लगी. वो इतनी सेक्सी है की जब वो स्क्रीन पर होती है तो उनके चहेरे से नजरें नहीं हटती.

फिल्म के वी.एफ.एक्स इतने बढिया है की एक्शन सीन्स में कोई खामी या कमी नहीं ढूंढ पाता. हांलांकी कई सीन्स में लोजिक की धज्जियां उड जाती है, लेकिन जब एक्शन इतना मनोरंजक हो तो लोजिक की किसे परवाह..!! थ्री-डी ग्राफिक्स एक नंबर है, और अगर आप इस फिल्म को देखने का मन बना रहे है तो इसे थ्री-डी में ही देखिएगा. बेकग्राउन्ड स्कोर भी अव्वल और एडिटिंग भी चुस्त है. इससे पहेले ‘ज्होन विक’ और ‘डेडपूल २’ जैसी फिल्म बनानेवाले निर्देशक डेविड लिच का काम सराहनीय है. उन्होंने एक्शन जोनर पर पूरी तरह से खरी उतरे ऐसी फिल्म बनाई है.

तो इस ताली-मार, सीटी-मार, धमाकेदार, धूंआधार एक्शन फिल्म को मेरी ओर से 5 में से 3.5 स्टार्स. एक्शन के फैन्स इस हरगिज न चूके.

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