chintu - 1 in Hindi Novel Episodes by V Dhruva books and stories PDF | चिंटू - 1

चिंटू - 1

मां मुझे भूख लगी है, हमे खाना कब मिलेगा? उसकी मां उसे अपनी गोद में बिठाकर कहती है जल्दी ही। पर ये तो आप कब से कह रही है। मुबंई के एक पॉश इलाके में यह वाक्य चल रहा था।
एक शादी के बाहर मां अपने दो बच्चों के साथ बैठी है। कहीं कुछ बचा कुचा खाना मिल जाए। मां का नाम था शारदा। उसका पति उसे छोड़कर चला गया था। शारदा अपने दो बच्चो का भीख मांग कर गुजारा करती है। आज एक शादी थी वहा सब भिखारियों के साथ वह भी अपने बेटे चिंटू और बेटी पिया के साथ बैठी थी। सवाल पूछने वाला पांच साल का चिंटू था। पिया अभी तीन साल की थी। भूख के कारण दोनों बच्चो की हालत खराब थी। रात के दस बजने आए थे। बारात को बिदा किया जा रहा था। शारदा ने यह देखकर कहा अब हमे जरूर खाना मिल जाएगा। आधे घंटे बाद ही शादी के हॉल से कुछ लोग आए और सबको खाना दे गए। सबको आज पेट भर खाना नसीब हुआ था। उनकी थाली में बचा खाना सब घर ले गए। घर के नाम पर सब भिखारी छोटी छोटी जुग्गिओ में रहते थे, जिसमे दरवाजे के नाम पर एक साड़ी का पर्दा लटक रहा था। घर में चार बर्तन और कुछ सोने के लिए और ओढ़ने के लिए मेली फटी चद्दर और रजाई थी। चिंटू हमेशा कहता था मां मै तुम्हे बड़े राजमहल? में रखूंगा देख लेना।

शारदा चिंटू को पढ़ाना चाहती थी। वह एकबार म्युनिसिपल स्कूल में दाखिला लेने चिंटू और पिया को लेकर गई। प्रिंसिपल मैडम ने चिंटू से कुछ सवाल जवाब किए। जिसके जवाब वह बखूबी दे रहा था। प्रिसिपल मैडम ने शारदा से कहां- चिंटू को दाखिला तो मिल जाएगा पर उसे रोज नहा धोकर, साफ़ सुथरा होकर आना पड़ेगा वो भी रोज। तभी इसे दाखिला दूंगी।
शारदा ने कहां- जी मैडम जी, मै इसे रोज भेजूंगी।।क्यो रे.. आएगा ना सकुल पढ़ने? तो ही दाखिला लूंगी। चिंटू ने हां में सिर हिलाया। प्रिंसिपल मैडम ने चिंटू का एडमिशन ले लिया और अगले दिन से उसे स्कूल आने को कहा।

चिंटू खुश होता होता अपनी बस्ती में सबको बताता जा रहा है कल से मै स्कूल जाऊंगा। मुझे वही से अच्छे कपड़े और पढ़ने के लिए किताबे भी मिलेगी वो भी मुफ्त में। तभी दूसरी गली में रहने वाली, उसकी ही हम उम्र सुमती उसे पूछती है- चिंटू मुझे भी दाखिला मिल जाएगा क्या?
चिंटू- हा क्यो नही। अपने मां बापू को लेकर स्कूल जाना कल तुझे भी दाखिला मिल जाएगा। फिर उन्हीं की उम्र के बच्चे मिलकर साथ में खेलने लगे।
दूसरे दिन चिंटू जल्दी उठ गया और स्कूल जाने की खुशी में वक्त से पहले तैयार हो गया। उसकी मां उसे स्कूल तक छोड़ने गई। पहले ही दिन वह सारे सहपाठियों के साथ घुलमिल गया।
क्लास में थोड़े ही दिनों में उसके अच्छे दोस्त बन गए। उसमे सबसे करीब मन्नू और राधा थे। तीनो साथ साथ ही क्लास में बैठते। और अपनी बस्ती में सुमती उसकी दोस्त थी। सुमति के मां बाप उसका दाखिला करवाने नहीं गए थे तो वह स्कूल नहीं जा पाई थी। चिंटू पढ़ाई में धीरे धीरे अव्वल नंबर पर आने लगा। सब टीचर्स का भी वह फेवरेट हो गया था। खेल में भी वह अच्छी रुचि रखता था। उसके साथ उसके दोस्त भी खेलकूद में पार्ट लेने लगे। स्कूल में मन्नू और राधा साथ देते और बस्ती में सुमति।
जैसे जैसे वह बड़े होते गए उन के बीच का बॉन्डिंग भी बढ़ता गया। अब तो पिया भी चिंटू के साथ ही स्कूल जाया करती थी। मन्नू और राधा चिंटू को मिलने कई बाहर बस्ती में आते थे तो वह सुमति को भी पहचानने लगे थे। अब चारों की चौकड़ी बन गई थी। वह सब मिलकर सुमति को पढ़ाते थे। बिना स्कूल जाए भी सुमति उन लोगो जैसी होशियार बन गई थी। सुमति की मां मंगू बंगले में काम करती थी तो वहा से मकान मालकिन की बेटी के कपड़े उसे मिल जाते थे वही पहनकर वह चिंटू से मिलती थी। जब चिंटू कहता तु इन कपड़ों में सुंदर दिखती है तो वह बहुत खुश हो जाती थी। वैसे हर पल वह चिंटू के घर पर ही रहती थी। कभीकभी उसकी मां उसे काम पर साथ ले जाती और बाप तो कही पड़ा रहता बेवड़ा होकर।?

एक बार चारो अपने अपने घर में बिना बताए मुबंई दर्शन के लिए निकल गए। वे सब कोई भी बस स्टॉप से चढ जाते। जब बस में कंडेक्टर टिकिट मांगता तब टीकट्स ना होने की वजह से नीचे उतर देता। फिर वे सब अगले स्टॉप पर चले जाते और फिर से वही टिकिट्स वाला किसा दोहराते। बस में पहले देखते कंडक्टर कहा है फिर को दिशा में वह होता उससे विपरीत दिशा में चले जाते और बस भी भीडभाड वाली ही पकड़ते। जबतक टिकीट्स चैक करने का टाइम आता तब तक बस कही आगे निकाल चुकी होती। उन चारो को यह खेल लगता था और मजा भी आता था। शाम होने तक जब बच्चें घर नहीं आए तो शारदा और मंगू उन दोनो को ढूंढने निकाल पड़ी। जब चिंटू और उसकी गैंग वापस आए तो आते ही मिली दे जापड़ पे जापड़...। शारदा और मंगू ने चिंटू और सुमति को पिट दिया और मन्नू और राधा को डांटकर भगा दिया।?

दूसरे दिन जब चिंटू स्कूल गया तो राधा ने पूछा,- हमारे जाने के बाद मौसी ने बहुत पीटा था क्या?
तो चिंटू ने बताया- अरे नहीं, वो तो बस यूं ही।
मन्नू ने कहा- फिर कब ऐसे घूमने जाएंगे चिंटू?
चिंटू- मरवाएगा साले। तेरे घर तो कोई तुझे कुछ नहीं पूछता पर मेरे घर मेरी मां मेरी वाट लगा देती है। अब कभी बिना बताए नहीं जाएंगे। वैसे भी मां को सुमति नी मां ने काम पर लगा दिया है। पिया जल्दी छूट जाती है स्कूल से तो मुझे स्कूल से जाकर उसे संभालना है।
राधा- तेरी मां काम पर जाएगी और तु स्कूल, तो पिया को कौन संभालेगा।
चिंटू- है न सुमति। वह मेरे घर रहेगी पिया का ध्यान रखने। उसे कहा कही जाना होता है।
मन्नू- और उसका बाप?
चिंटू- वो बेवडा पड़ा रहता है कही भी पी पाके। वैसे भी वो कभी सुमति और मंगू मौसी को मना नहीं करता हमारे घर आने से।

दोपहर स्कूल ख़त्म करके चिंटू सीधे घर पहुंच गया। पिया सो गई थी और सुमति रोटियां सेक रही थी। चिंटू को देखकर बोली- हाथ मुंह धोले, खाना बन गया है।
चिंटू- तूने बनाया?
सुमति- नहीं, मौसी ने। मैंने तो सिर्फ रोटियां ही बनाई है।
चिंटू- तु महज़ बारह साल की है और खाना भी बनाना सीख गई?
सुमति- वक्त ने सीखा दिया।
चिंटू- चूल्हा चौका तो अच्छे से सीखा दिया है मौसी ने, क्या बात है! तेरे दूल्हे को भूखा नहीं रहना पड़ेगा।
सुमति मन ही मन सोचती है, दूल्हा तो तु ही बनेगा मेरा।
फिर दोनो खाना खाकर सो जाते है। कुछ देर बाद पिया उठ जाती है। वह सुमति को उठाती है और कहती है- दीदी भूख लगी है, खाना दो न।
सुमति उसे कहती है- पिया तुम मुझे पहले दीदी कहना बंद करो।
पिया- तो क्या बुलाऊ?
सुमति- तु मुझे सुमति ही बुलाना। हम अच्छे दोस्त बनेंगे ठीक है?
पिया- अच्छा सुमति तो अब खाना दो मुझे, बहुत जोरो से भूख लग रही है।
सुमति उसे खाना खिलाती है। पिया के खाने के बाद दोनों बिना आवाज किए धीरे धीरे खेलने लगती है। चिंटू अभी भी सोया हुआ था।

शाम के पांच बजे चिंटू, सुमति और पिया बाहर वाले मैदान में खेलने जाते है। शारदा तब तक वापस आ जाती है। मंगू ने उसकी नौकरी अपने मालिक की फेक्टरी में लगा दी थी। वह सुबह नौ बजे चली जाती थी और साढे पांच बजे वापस आ जाती थी।
म्युनिसिपल स्कूल आठवीं क्लास तक ही थी। आगे की पढ़ाई के लिए चिंटू और उसके साथियों को प्राईवेट स्कूल में जाना था। शारदा ने चिंटू को अब आगे पढ़ने से मना कर दिया था। वह प्रायवेट स्कूल की फीस नहीं भर सकती थी। पर चिंटू को पढ़ाई आगे जारी रखनी थी। वह अपनी मां को कहता है- मै महेनत मजदूरी करूंगा और पैसे कमाऊंगा। तु मुझे पढ़ने दे मां।?
शारदा- मै तुझे पढ़ने के लिए भेज भी दूं पर हम गरीब को कौन दाखिला देगा अपनी स्कूल में?
चिंटू- तु उसकी चिंता मत कर। मै अपने लिए कोई न कोई स्कूल ढूंढ ही लूंगा। पढ़ाई के बगैर मै बड़ा आदमी कैसे बनूंगा और तुझे और पिया को खुश कैसे रख पाऊंगा?
सुमति भी वही खड़ी थी तब। वह चिंटू को गु्स्स से कहती है- और मेरा खयाल कौन रखेगा?
चिंटू- तेरा आदमी और कौन?
सुमति- देखा मौसी..., मेरी तो कोई कदर ही नहीं है इसे। अपने घर का ख़्याल रखने का यही सिला दिया इसने।?
चिंटू- ओ... कहे का तेरा घर? तेरा घर तो..।
शारदा- चुप रे नालायक। यह घर भी इसिका है।
चिंटू बबड़ता है- मान न मान मै तेरा महेमान।

स्कुल के आख़िरी दिन चिंटू अपने दोस्तो के साथ प्रिंसिपल की ऑफिस में गया। प्रिंसिपल सर ने उन्हें देखते ही अंग्रेजी में वार्तालाप शुरू किया- आओ आओ मेरे होनहार विध्यार्थिओ। तुम्हारा रिज़ल्ट देखा मैंने। सभी विषयो में अव्वल मार्क्स है तुम्हारे।
और चिंटू के साथ साथ मन्नू और राधा ने भी सर से अंग्रेजी में ही संवाद शुरू किया।
चिंटू- सर हम सब आपसे बात करना चाहते है।
प्रिंसिपल सर- हां हां बताओ, क्या बात है?
चिंटू- सर हमारे अव्वल आने का क्या मतलब जब हमे बाहर एडमिशन ही नहीं मिलेगा। प्राईवेट स्कूल की फीस हम गरीब कहा भर पाएंगे।?
प्रिंसिपल सर- यह तुम्हे किसने कहा कि तुम्हे एडमिशन नहीं मिलेगा? तुम्हे शायद पता नही पर भारत सरकार ने आदेश जारी किया है प्राईवेट स्कूल में आप जैसे बच्चो के लिए रिसर्व सीट तय की गई है। जहां पर आप सब फ्री में पढ़ सकते है।
चिंटू और उसके दोस्तो के मुंह पर खुशी छा गई। प्रिंसिपल सर ने आगे बताया। तुम सबका फार्म मै खुद ऑनलाइन भर दूंगा। अपने हिसाब से अच्छी स्कूल में ही दाखिला दिलवाऊंगा। तुम सब चिंता मत करो। तुम सब इतने होशियार हो कि उन लोगो को तुम्हे एडमिशन देना ही पड़ेगा।
चिंटू और उसके दोस्तो ने सर को धन्यवाद दिया और निकाल पड़े अपने घर की ओर।

घर जाकर चिंटू ने सुमति को अपना रिज़ल्ट बताया। सुमति खुशी से उछल पड़ी और चिंटू को गले लगा लिया। वह चिंटू को कहती है- तेरे अव्वल आने की खुशी में मै आज तुझे पानी पूरी खिलाऊंगी।
चिंटू- पैसे?
सुमति- मां मुझे जो पैसे खर्च करने देती है वही बचाकर रखती हुं।
चिंटू- कितने है?
सुमति- पूरे पांच रुपए है। इतने में तो हम दोनो खा ही सकेंगे। चल चलते है पिया को लेकर।
चिंटू- ठहर, कुछ पैसे मेरे पास भी थे बचाए हुए। देखता हुं कितने है।
चिंटू एक डब्बे को लता है। वह उसमे देखता है तो चार रूपए थे। वह कहता है- चल आज जमकर खाएंगे।
दोनो पिया को लेकर पानीपुरी खाने जाते है। सुमति के पैसों से पनीपुरी खाई और चिंटू के पैसों से चॉकलेट ली। घूमते फिरते तीनो शाम को घर आए। सुमति अपने घर गई और चिंटू पिया को लेकर अपने घर आ गया।
चिंटू ने उसकी मां को खुश होकर अपना रिज़ल्ट बताया और प्रिंसिपल सर से जो बात हुई वह भी बताया। तो शारदा ने कहा- मुझे कोई ऐतराज़ नहीं तेरे पढ़ने से अगर प्रिंसिपल साहब के कहे मुताबिक़ दूसरे स्कूल में दाखिला मिल जाए तो, तुम जरूर पढ़ना। मेरी बच्ची का क्या रिज़ल्ट आया है?
पिया- मां मैं अव्वल तो नहीं आई पर मार्क्स जरूर अच्छे मिले है।
शारदा- चलो अच्छा है, तुम दोनो पढ़ लिख लो तो मेरी तरह मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी।?
चिंटू- आंसू मत बहा मां। मै एक दिन जरूर बड़ा आदमी बनूंगा। तुम्हे और पिया को कोई दुःख नहीं जेलना पड़ेगा तब, देख लेना।

प्रिंसिपल सर ने काफी दिक्कतों के बाद चिंटू और उसके दोस्तो को एक बड़े स्कूल में एडमिशन दिलाया।स्कूल का टाइम सुबह का था तो तीनों जल्दी तैयार होकर पैदल ही चल पड़े। स्कूल उनके यहां से चार किलोमीटर के एरिया में था। स्कूल के पहले दिन जब तीनो स्कूल पहुंचे तो उसके गेट पर ही तीनो इतनी बड़ी स्कूल को देखकर अचंभित हो गए। मन्नू बोल पड़ता है- यार ये तो स्कूल है या कोई होटेल? इतनी बड़ी...?।
स्कूल के गेट पर खड़ा दरवान उन सब से पूछता है- इधर क्या कर रहे हो? जाओ यहां से।
चिंटू- अबे ओए! हम यहां पढ़ने आए है, न की यहां खड़े रहकर देखने। चल बाजू हट, रास्ता दे।
दरवान बाजू हट जाता है। उसे पता था इस स्कूल में स्लम एरिया के बच्चो को एडमिशन मिलता है और उसका खुद का लड़का भी इसी स्कूल में है। तो वह बिना कुछ बोले उन्हे अंदर जाने देता है। राधा तो घबराती घबराती स्कूल के पैसेज में चल रही थी। वहा सब बड़े बड़े घर के लड़के लड़कियां ही आते थे। राधा ने आते वक्त देखा था कुछ बच्चों को अपनी गाड़ी छोड़ने आई थी, कुछ स्कूल बस में आए थे। उसके साथ साथ चिंटू भी सोचता है क्या नसीब लेकर जन्मे है यह सब!

वह तीनो जब अपना क्लास ढूंढकर अंदर गए तो क्लास के सभी बच्चे उन्हे देखकर जोरजोर से उन्हें चिड़ने लगे। जब क्लास में क्लास टीचर एंटर हुए तो सब बच्चे चुप हो गए। आज स्कूल का पहला दिन था तो सब का इंट्रोडक्शन हुआ। जब चिंटू और उसके दोस्तो की बारी आई तो सर का भी मुड़ थोड़ा बिगड़ गया। वे धीरे से बोलते भी ही- पता नहीं कहां कहां से आ जाते है?? उनके होंठ के मूवमेंट से चिंटू को पता चल गया सर क्या बोले। उस वक्त वह तमतमा गया पर कुछ नहीं बोला। कुछ बोलता तो शायद स्कूल से निकाल देते। उनके पुराने प्रिंसिपल सर ने उन तीनो को समझाया था कोई कुछ भी बोले या कुछ भी करे तुम सब कुछ नहीं बोलेंगे। और कुछ करेंगे भी नहीं। उसी को याद करके वह चुप रह गया। यहां से ही उसे अपनी मंज़िल हंसिल करनी थी।

जब लंच ब्रेक पड़ा तो चिंटू अपने दोस्तो के साथ टिफिन खाने बैठा। क्लास के सभी लड़के लड़कियां उसके पास जाकर उसका और खाने का मजाक बनाने लगे। राधा को यह देखकर रोना आए गया। पर चिंटू ने उसका हाथ पकड़कर उसे खाते रहने को कहा। उन सभी लड़के लड़कियों में एक लड़की ने सबको डांटकर वहा से भगा दिया और वह चिंटू के पास आई।
उसका नाम लिना है।
लीना- तुम इन सब का बुरा मत मानना। शरारती है सब, पर दिल के बुरे नहीं है। कुछ वक्त में वे भी तुम सब से बाते करेंगे।मेरा नाम लीना है और आप सबका?
चिंटू ने अपना और अपने दोस्तो का नाम बताया। फिर लीना उनसे बाते करके बाहर चली गई। वे तीनों क्लास में ही रहे। जब छुट्टी का टाइम होने आया तब स्कूल के प्रिंसिपल मैडम ने वे सभी क्लास के बच्चो को एसेंबली बुलाया जो रीसर्व सीट में आए थे।

एसेंबली में जब सब पहुंच गए तब थोड़ी देर में प्रिंसिपल मैडम आए। उन्होंने सब बच्चो को यहां आने के लिए बधाई दी। साथ में यह भी कहा कि आप सब को मुबंई की बेस्ट स्कूल में एडमिशन मिल है तो आप सब महेनत करे और अपने साथ साथ स्कूल का नाम भी रोशन करे। मैडम ने बताया अगर कोई आप के साथ इस स्कूल में बद्तमीजी करे तो बेजीजक मुझे आकर बताए। उन सब के साथ साथ यह स्कूल आपका भी है। कुछ हिदायत देकर सब को वापस क्लास में भेजा गया। जब तीनो क्लास में पहुंचे तो उनके बैग्स गायब थे। छुट्टी हो गई पर तीनो ने के बैग्स नहीं मिल रहे थे। जब लीना ने पूछा क्या हुआ? तो राधा ने रूआसी आवाज में बताया- हमारे बैग्स नहीं मिल रहे। तब लीना ने जाकर कौने में रखे टेबल के पीछे देखा, बैग्स वही पर थे। शायद वह जानती थी अपने क्लासमेट की शरारत।

तीनो बैग्स लेकर अपने घर की ओर चल दिए। तीनो पैदल ही स्कूल आए थे। राधा चलते चलते कहती है- मुझे यह स्कूल बिल्कुल अच्छा नहीं लगा। यहां की बड़े बाप की ओलाद हमे बहुत परेशान करेगी।
मन्नू- लीना कहा हमे परेशान करती है? वह भी तो बड़े घर की है। और वो कह तो रही थी धीरे धीरे सब हमसे बात करेंगे।
चिंटू- सच कहां तूने मन्नू। हम यहां पढ़ने आए है ना के उनसे उलजने।
राधा- यह सब तो ठीक है पर एसे तो हमारा टाइम बहुत वेस्ट होगा। रोज चलकर आना और जाना। हम ना बस का पास निकलवा देंगे, तो घर आना जाना सरल रहेगा।
चिंटू- सही कह रही हो तुम। हम कल ही बस स्टैंड जाकर पास निकलवा लेंगे।

करीब दो बजे वे सब अपने अपने घर पहुंचे। चिंटू के घर पर सुमति थी, पिया भी स्कूल से आ गई थी। चिंटू आते ही अपना बैग एक तरफ रखकर पहले तो सो गया। सुमति ने उसके पास जाकर उसके माथे पर हल्के से हाथ फिराने लगी। चिंटू बंद आंखो से अपने सिर को हल्का महसूस करने लगा। फिर वह हाथ मुंह धोकर खाने बैठ गया। खाना खाकर फिर तीनो ही सो गए। जब शाम को उठे तो चिंटू का मुड़ कुछ बिगड़ा हुआ था। सुमति ने उसे पूछा क्या हुआ??

क्रमशः
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