ये इश्क नहीं आसान - 1

हमारे समाज में अकसर लोग सच्चे प्यार को समझ नहीं पाते, या फिर ये कहे कि समाज उनको समझना ही नहीं चाहता, जभी तो सभी अमर प्रेम कहाँनी अधूरी रह जाती है। चाहे वो लैला मजनू की हो या हीर राँझे की,

मगर हमारी ये प्रेम कहाँनी कुछ अलग है। जिसमें एक युवती अपने सच्चे प्यार को हासिल करने के लिए दुनिया के तौर तरीकों को अपनी कमजोरी ना बना कर अपनी ताकत बनाती है। और बेहद पेचीदा हालातों से होकर अपने सच्चे प्यार को हासिल करने की कोशिश में लग जाती है। अब देखना ये है की क्या वो अपना सच्चा प्यार पा सकेगी या अंत में उसका भी वही हाल होगा जो अकसर और लोगों का होता है। 
तो आइए रहस्यों और रोमांच से भरपूर इस कहाँनी की शुरुआत करते है। 

परिणीता एक 20 वर्षीय युवती जो बेहद ही सुंदर होने के साथ साथ एक अत्यंत अमीर घराने से थी। जो बेहद सकती में पली बढ़ी थी। रामा अनुज उसके करोड़पति पिता थे। बहुत पहले ही उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो चुका था जिसके कारण परिणीता उनकी एक लोती संतान थी और अपनी पत्नी से बेहद प्रेम करने के कारण उन्होंने दूसरा विवाह भी नहीं किया था।

पाबंदियों में पली बढ़ी परिणीता की केवल एक ही दोस्त थी आकांशा उसके अतिरिक्त उसका कोई दोस्त नहीं था। लेकिन एक बार परिणीता की मुलाकात एक सुंदर युवक से हुई। जिस पर परिणीता मोहित हो गई। और उससे प्रेम करने लगी, युवक का नाम नील  था वो युवक भी परिणीता से प्रेम करने लगा था। अब दोनों की मुलाकात आसान बनाने में आकांशा का काफी बड़ा हाथ होता। मगर दोनों की मुलाकात अधिक दिनों तक छुपी ना रह पाई। किसी प्रकार रामा अनुज (परिणीता के पिता) को इन सब का पता चल गया। और वो परिणीता पर बहुत बरसे और उसको नील के बारे में अनाप शनाप बोल कर उससे दूर रहने को कहा। और उसके घर से बहार निकलने पर और भी अधिक सकती कर दी। मगर प्यार रोके से कहाँ रुकता है। परिणीता ने आकांशा और एक नोक रानी की सहायता से नोक रानी का भेस बनाया और चोरी छुपे वहाँ से निकल कर नील से जा मिली, नील और उसके बीच बहुत सी चौंकाने वाली बातें हुईं, परिणीता ने नील को कुछ ऐसी राज़ की बातें बताई जो कुछ ही लोगों को पता थी।

परिणीता " नील तुम मुझसे सच में प्यार करते हो ना,??

नील " बाबू सच में करता हूँ। अपनी जान से भी ज्यादा,

परिणीता " तो जो में तुमसे कहूँगी, तुम मेरे लिए वो करोगे।

नील " बोल कर तो देखो। अपनी जान भी दे दूंगा।

परिणीता" आज से दो हफ्ते बाद मेरा इक्कीसवाँ जन्मदिन है। तुम्हें उस दिन मेरे साथ मेरे पिता के खिलाफ जा कर कोट मैरिज करनी होगी।

नील " मेरे लिये तुमसे शादी करना दुनिया की सबसे बड़ी खुशी होगी बाबू। मगर मैं कभी नहीं चहूँगा। के हमारे कारण तुम्हारे पिता का सिर दुनिया के सामने शर्म से नीचा हो। इसलिये मैं चाहता हूं एक बार तुम्हारे पिता से बात करके उनको मनाऊं, क्या पता वो मान जाए।

परिणीता " नहीं तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे नहीं तो हमारी शादी कभी नहीं होगी।

नील " पर क्यों ? 

परिणीता " क्योंकि रामा अनुज मेरे सगे पिता नहीं हैं।

नील " मतलब? 

परिणीता " मेरे जन्म के 10 दिन बाद ही मेरे पिता की एक दुर्घटना में मौत हो गई थी। उसके बाद मेरी माँ ने रामा अनुज से शादी की, शादी के 6 वर्षों पश्चात मेरी माँ को कैंसर हो गया। जिसके कारण उनका भी दिहान्त हो गया, ये सारी दौलत मेरे असली पिता की थी जो उनके मरने के बाद मेरी माँ के नाम हो गई थी। और मेरी माँ ने मरने से पहले अपनी वसीयत में मेरे सौतेले पिता को मेरे इक्कीसवें जन्म दिन तक केवल एक देख रेख करने वाला बना दिया। उसके बाद सारी प्रोपर्टी मेरे नाम हो जाएगी। इस बीच अगर मुझे कुछ होता तो सारी प्रोपर्टी डोनेट हो जाती। 
इस वसीयत के अनुसार मेरा सौतेला बाप मेरे इक्कीसवें जन्मदिन पर वापिस सड़क पर आ जायेगा। इसलिये दौलत के लालच में उसने कोई ऐसा तोड़ निकाला है। जिससे मेरे इक्कीसवें जन्म दिन के बाद सारी प्रोपर्टी रामा अनुज की हो जाएगी। 
इतना बोल कर परिणीता भावुक हो गई। और रोने लगी। फिर नील उसको अपने सीने से लगा कर विश्वास दिलाता है। ऐसा कुछ नहीं होगा और तुम्हारे जन्मदिन पर हम जरूर शादी करेंगे और उसको समझा बुझा कर घर वापिस भेज देता है। 
उसके बाद नील अपने घर वापिस आया, जहाँ पर दो आदमी पहले से मौजूद होते है। जिनमें से एक नील का हम उम्र होता है। जिसका नाम विवेक है। और विवेक नील का लँगोटियाँ यार है। दूसरा शख्स अधेड़ उम्र का व्यक्ति होता है। जिससे देख कर नील बोला " योजना सफल हुई, हम उसके इक्कीसवें जन्मदिन पर विवाह कर रहे हैं। इस बात को सुन कर वो व्यक्ति बेहद ही खुश होकर निल को गले लगाता है। और नील को शाबासी देकर वहाँ से चल दिया। ये अधेड़ उम्र का व्यक्ति कोई और नहीं परिणीता का सौतेला पिता रामा अनुज था।

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Divyansh Nawal

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Shuaib Alam

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Asad Shamsi

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