बदलते रिश्ते (पार्ट 3) in Hindi Social Stories by किशनलाल शर्मा books and stories Free | बदलते रिश्ते (पार्ट 3)

बदलते रिश्ते (पार्ट 3)

"नही सालू।मैं इतना स्वार्थी नही हूँ।सब कुछ जानते हुए मैं तुम्हे अभाव और दरिद्रता की जिंदगी जीने के लिए मजबूर नही करूँगा।"
महेेेश की ना सुनकर सालू    रोती हुई चली  गई। महेश  कितना बेबस  था। सालू को कोई   भी लड़का   पत्नी बनााकर अपने भाग्य  पर इतरा   सकता था।वह कितना मजबूर था।एक लड़की   अपना  हाथ उसके   हाथ मे देने के लिए  तैैयार थी।लेकिन   वह मजबूर था।    काश वह सालू को अपनी पत्नी बना  पाता।
सालू नही चाहती थी फिर भी उसका रिश्ता सुरेश से पक्का हो गया।शादी से पहले वह डबडबाई आंखे लिए उसके  पास आई थी।
"महेश मैं तुम्हारे बिना नही रह पाऊंगी।दूसरे मर्द की पत्नी बनकर मैं जिंदा लाश बनकर रह जाऊंगी।अब भी समय है।अगर तुम चाहो तो हम एक हो सकते है।"
"सालू प्यार का मतलब सिर्फ शादी नही होता।चाहे हमारी शादी न हो।तुम चाहे जंहा भी रहो।मैं हमेशा तुम्हे चाहता रहूंगा।प्यार करता रहूंगा।"
"तुम बड़े निष्ठुर हो"महेश कि बात सुनकर सालू रोते हुए बोली,"मैं ही पागल हूँ।कहीँ पत्थर के देवता भी पिघलते है।"
अचानक जोर का झटका लगा।सालू अतीत से निकलकर वर्तमान में लौटते हुए बोली,"क्या हुआ?"
"कुछ नही मैडम।गाय बीच मे आ गई थी।"
"लोग जानवर पाल तो लेते है,फिर आवारा छोड़ देते है,"सालू मन ही मन में बड़बड़ाई थी।कार फिर चल पड़ी।सालू फिर अपने अतीत के पन्ने पलटने लगी।
शादी के बाद भी सालू ने कॉलेज नही छोड़ा था।जब शादी के बाद सालू पहली बार महेश को मिली,तो वह उसे देखकर बोला था,"खुश तो हो?"
"तुम्हारी बला से,"महेश की बात सुनकर  सालू खिन्न मन से बोली,"औरत जिंदगी में प्यार सिर्फ एक ही बार करती है।"
उस दिन के बाद सालू की महेश से अक्सर मुलाकात होने लगी।सालू पहले कि तरह ही मिलती थी।उससे मिलकर महेश को कभी कभी लगता।शायद सालू ने पिछली बातों को भुला दिया है।
एक दिन सालू कॉलेज केम्पस में महेश से बाते कर रही थी।तभी  अचानक सुरेश आ गया।महेश उसे नही जानता था।अपनी पत्नी को पराये मर्द के साथ देखकर उसे गुस्सा आ गया।वह महेश को उल्टा सीधा बकने के साथ उससे हाथापाई को उतर आया।सालू ने पति को समझाने का प्रयास किया।पर व्यर्थ।वह सालू को जबदस्ती खींचकर अपने साथ ले गया।
उस दिन के बाद सुरेश पत्नी पर नज़र रखने लगा।उसे शादी पूर्व सालू के महेश से प्रेम प्रसंग का पता चल चुका था।पति कैसे सहन कर सकता है कि पत्नी पराये मर्द से हंसे बोले।सालू खुले विचारों की मॉडर्न युवती थी।उसने पति को समझाने का भरपूर प्रयास किया।तब सुरेश साफ शब्दों में उससे बोला,"तुम पति या प्रेमी में से एक को चुन लो।"
एक तरफ उसका प्यार था।दूसरी तरफ दाम्पत्य।वह अजीब उलझन में फंस गई।काफी सोच विचार करने के बाद उसने महेश को दौलत  बाग में बुलाया था।
दौलत बाग के चप्पे चप्पे पर उनके प्यार की खुशबू बिखरी पड़ी थी।यंहा की हर चीज उन्हें जानती थी।यंहा वे घण्टो प्यार की दुनिया मे खोये रहते।प्यार भरी मीठी बाते, छेड़ छाड़ करते।लेकिन सालू की शादी के बाद वे पहली बार यंहा एकांत में मिल रहे थे।सालू ने महेश से पूछा था,"तुम मुझसे प्यार करते हो?"
"आज तुम यह क्यो पूछ रही हो?"सालू की बात सुनकर महेश बोला,"क्या मुझे प्यार का सबूत देने की जरूरत है।"

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