Kahaani Sangrah - 12 in Hindi Novel Episodes by Shakti Singh Negi books and stories PDF | कहानी संग्रह - 12 - दूर-दूर तक धाक जम गई

कहानी संग्रह - 12 - दूर-दूर तक धाक जम गई

एक बार मैं एक जंगल से होकर गुजर रहा था. मुझे बचपन से ही व्यायाम व योगासन का बहुत शौक था. इससे मेरा शरीर बहुत बलिष्ठ था. मैंने कई युद्ध कलायें भी सीख रखी थी. अचानक जंगल में मुझे 40 - 50 राक्षस मिल गये. राक्षस बहुत भयंकर और शक्तिशाली थे.


राक्षसों ने मुझ पर आक्रमण कर दिया. मैंने भी अपनी दिव्य तलवार का आह्वान किया और राक्षसों पर प्रहार करना शुरू कर दिया. कुछ ही देर में सभी राक्षस मर गये. इस घटना के बाद दूर-दूर तक के गांवों में मेरी बहादुरी की धाक जम गई. आप की इस विषय में क्या राय है? 😁😁😁😁😁😁










एक दिन मैं जंगल में से होकर जा रहा था. अचानक मुझे एक सुंदर सा पेड़ दिखाई दिया. पेड़ के नीचे एक सुंदर सी शिला रखी हुई थी. मैं शिला पर बैठ गया. अचानक मुझे लगा कि फूलों की बारिश हो रही है. अचानक मैं शिला पर से गायब हो गया. मैंने देखा तो मैं परी लोक में था.


परीलोक आकाश में स्थित था. वहां हजारों परियां थी. कोई नीली, कोई पीली, कोई हरी, कोई सफेद. मुझे बहुत अच्छा लगा. परियों की रानी स्वर्ण परी थी. उसने मेरे से शादी कर ली. मैंने कई वर्ष परीलोक में गुजारे. बड़ा आनंद आ गया. उसके बाद में घर वापस आ गया.


आपकी क्या राय है? क्या मैंने सही किया? कृपया बताएं.













उस समय में दिव्य अस्त्र - शस्त्रों की प्राप्ति के लिए एक घनघोर जंगल में महा कठिन, महा कठोर तपस्या कर रहा था. मैंने एक वृक्ष के नीचे आसन जमाया और बैठकर तपस्या करने लगा.


पहले माह मैंने केवल उस वृक्ष के फल खाए. दूसरे माह मैंने केवल उस वृक्ष के पत्ते खाए. तीसरे माह मैं केवल हवा पर जीवित रहा. चौथे माह मैंने हवा भी त्याग दी.


पांचवें माह इंद्र देवता प्रकट हुये और उन्होंने मुझे अपने अनेक दिव्यास्त्र दिए. दिव्यास्त्र प्राप्त करके मैंने अपना हुलिया ठीक किया और अपने महल की तरफ चल पड़ा.


महल में दास - दासियों ने फूलों से मेरा स्वागत किया. तभी एक 18 वर्ष की बहुत सुंदर अंजान सी नवयौवना आई. उसके हाथों में फूलों का एक गुच्छा था. उसने वह फूल मुझे अर्पित किये. वह लड़की मुझे बहुत पसंद आई और मैंने उससे शादी कर ली.


आपकी क्या राय है? क्या मैंने सही किया? कमेंट कीजिए धड़ाधड़ धड़ाधड़ धड़ाधड़.














बचपन के दिन हमारे सुनहरे दिन थे. मम्मी - पापा दोनों सरकारी नौकरी में थे. इसलिए हमको बचपन में किसी चीज की कमी नहीं हुई. हमारा काम था केवल खाना-पीना और पढ़ाई करना. आपकी क्या राय है?









एक बहुत बड़ा राजा था. उसकी एक इकलौती बेटी थी. राजकुमारी विवाह की उम्र की हो गई थी. ज्योतिषी ने बताया कि उसकी शादी एक बहुत गरीब व्यक्ति से होगी. राजा यह सुनकर बहुत दुखी हुआ. राजा ने सोचा चलो गरीब व्यक्ति से भी शादी हो जाए तो वह दान दहेज दे कर अपने गरीब जामाता को भी अमीर बना देगा.


लेकिन ज्योतिषी ने कहा कि अगर राजा ने ऐसा किया तो उसके दामाद और बेटी की मृत्यु हो जाएगी. राजा मन मसोस कर रह गया. राजा ने एक गरीब लड़के से राजकुमारी की शादी कर ली. राजकुमारी की केवल एक सास थी और सास के चार बेटे थे. जिसमें सबसे छोटा राजकुमारी का पति था.


कुछ दिनों बाद राजकुमारी की सास मर गई. अब चारों भाइयों ने बंटवारा कर लिया. राजकुमारी और उसके पति को उन्होंने बंटवारे में एक छोटी सी झोपड़ी, एक छोटा सा बंजर खेत और एक बूढ़ी भैंस दी. कुछ टूटे-फूटे बर्तन और पुराने कपड़े यह सब राजकुमारी और उसके पति के हिस्से में आए.


सभी भाई अलग - अलग रहने लग गये. राजकुमारी ने खूब मेहनत की और बंजर खेत को शस्य श्यामल धरती में बदल दिया. अब खेत में अधिक चारा होने से भैंस तगड़ी हो गई और अच्छा दूध देने बैठ गई. यह देखकर राजकुमारी का पति भी खूब मेहनत करने बैठ गया. राजकुमारी का पति मजदूरी भी करने लगा.


राजकुमारी ने नए - नए सुंदर वस्त्र, नए बर्तन, नया फर्नीचर आदि भी ले लिए.

धीरे-धीरे उनके घर की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी. कुछ ही दिनों में राजकुमारी के पास काफी धन एकत्र हो गया. अब राजकुमारी ने एक बड़ा सा मकान बनाया और एक बड़ा सा खेत खरीदा तथा अच्छी सी नस्ल की कुछ भैंसें भी ले ली. अब राजकुमारी और उसके पति की इनकम काफी बढ़ गई.





कुछ ही दिनों में वह गांव की सबसे अमीर व्यक्ति बन गई. इसी बीच राजकुमारी का एक सुंदर सा बच्चा भी ही उत्पन्न हो गया. राजकुमारी और उसका पति उस क्षेत्र के सबसे अमीर व्यक्तियों में गिने जाने लगे.


राजा यह देखकर बहुत खुश हुआ. तभी ज्योतिषी ने बताया कि राजकुमारी का श्राप खत्म हो गया है. राजा ने राजकुमारी और उसके पति को अपना युवराज घोषित कर दिया










जब मैं कक्षा 8 में था तो मुझे दो कन्याओं से एक साथ प्यार हो गया था. उसके बाद मेरा उनसे कुछ - कुछ भी हुआ लेकिन बाद में बड़े होकर उनकी शादी कहीं और हो गई.


तभी से मेरा दिल दर्द से तड़प रहा है. हाय मेरा दर्द ए दिल कोई नहीं जानता. आपकी क्या राय है?


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मैंने एक किराए का मकान लिया. उस मकान में एक आईना लगा हुआ था. आईना बहुत सुंदर था. मुझे बार-बार आईने से आकर्षण सा महसूस होता था. मैं बार-बार आईने में अपना चेहरा देखने बैठ गया.


अक्सर मैं रात में भी आईने में अपनी शक्ल देखने लगा. धीरे-धीरे मुझे लगा आईने में कोई परछाई सी है जो मुझे देखकर हंसती है. एक दिन मैं रात को 12:00 बजे आईने में अपनी शक्ल देख रहा था.


अचानक एक भयंकर हाथ आईने के अंदर से आया और उसने मेरी गर्दन पकड़ कर मुझे आईने के अंदर खींच लिया. बड़ी मुश्किल से मैंने अपनी गर्दन छुड़ाई. अगले दिन मैंने डर के मारे आईना खिड़की से बाहर फेंक दिया.









बहुत समय पहले की बात है. उस समय मैं बेरोजगार था. कई जगह मैंने इंटरव्यू दिए. लेकिन सफल नहीं हुआ. आखिर में एक जासूसी संस्थान में मेरी नौकरी लग गई. धीरे-धीरे मैं जासूसी सीखता गया. एक दिन मेरे पास एक बहुत बढ़िया केस आया.


मेरे बॉस ने मुझे चार बहनों की जासूसी करने का काम सौंपा. मेरे बॉस को काम देने वाले महिला का उन चारों लड़कियों पर किसी किस्म का शक था. मैंने इस मामले में छानबीन की. लास्ट में वह चारों लड़कियां निर्दोष निकली. लेकिन इस बीच मेरा चारों लड़कियों से अफेयर हो गया.


चारों लड़कियां मेरे प्यार में पड़ गई. चारों बहुत खूबसूरत थी. आखिर में मुझे उन चारों लड़कियों से शादी करनी पड़ी. आपकी क्या राय है? मैंने गलत किया या सही?