unknown connection - 73 in Hindi Love Stories by Heena katariya books and stories PDF | अनजान रीश्ता - 73

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अनजान रीश्ता - 73

विशी टेंशन में जैसे तैसे पागलों की तरह अविनाश के घर पहुंचता है । गेट को खोलते हुए वह सोचता है कि सारे गार्ड्स कहां गए। उसके दिल में घबराहट बढ़ रही थी । वह जल्दी से कार को पार्क करते हुए मुख्य द्वार खोलते हुए घर में दाखिल होता है । हॉल में अंधेरा था । सिर्फ बार की लाईट जल रही थी । तो उसे लगा कि अविनाश को शराब पीते हुए चौंट लगी होगी । वह उसी कमरे की और आगे बढ़ता है । की तभी आवाज आती है।


अविनाश: विशी.... मैं यहां हूं!!? ।


विशी: ( अंधेरे में सीढ़ियों की ओर देखने की कोशिश करता है लेकिन उससे कुछ दिखाई नहीं देता फिर वह ताली बजाते हुए लाइट ऑन करता है। जिससे मानो उसने जो देखा उसका दिल दहल रहा था । भागते हुए अविनाश के पास जाते हुए ) अवि.... व्हाट द हेल!!! ये क्या हाल करके बैठे हो ... ( अविनाश के हाथ को अपने हाथ में हड़बड़ाते लेता है। रूमाल से खून को रोकने की कोशिश करते हुए। फिर वह सीढ़ियों से देखते हुए बार रूम तक नजर जाती है तो अविनाश के खून की रेखा बनी हुई थी । ) ।


अविनाश: अबे! चिल कोन - सा पहली बार तुम मुझे ऐसी हालत में देख रहे हो !? । छोटी मोटी चौंट है ऐसे ही ठीक हो जाएगी ।


विशी: ( गुस्से को काबू में करते हुए हुए ) तुमसे में बाद में बात करता हूं... । ( कॉल करते हुए ) हैलो.... डॉक्टर साहब कहां है आप मैनें आपको १० मिनिट पहले कॉल करके कहां था की जितनी जल्दी हो सके आ जाए । आपको क्या मेरी बात मजाक लग रही थी । अगर आप हैंडल नही कर सकते तो में किसी और को अपॉइंट कर लेता हूं । जल्दी मतलब जल्दी मुझे आप यहां ५ मिनिट में हाजिर चाहिए । जी !!! ।


अविनाश: चल ना यार कमरे तक छोड़ दे!! मुझे नींद आ रही है । ये डॉक्टर तो आता रहेगा मैं कौन सा मरे जा रहा हूं!!? ।


विशी: शट अप!!! शट द हैक अप!!! ( चिल्लाते हुए ) तुम क्या कोई छोटे बच्चे हो जो मैं बार-बार तुम्हे समजाता रहूं और तुम गलती करते रहो!!? । हां!!! अक्ल वक्ल है या फिर इस चकाचोन मैं वो भी खो दी हां!! अवि!! आई स्वेर ये आखिरी बार मैं तुम्हे माफ कर रहा हूं... अगर आइंदा मुझे ऐसी हालत में मिले तो मैं खुद नहीं जानता क्या करूंगा । और ऐसा कौन सा पहाड़ टूट पड़ा है जो इस कदर तुम खुद को चौंट पहुंचाने पे तुले हो!? ।


अविनाश: ( विशी के कंधे पे हाथ रखते हुए खड़े होने की कोशिश करता है। ) यार!! तू मुझे बहरा करना चाहता है क्या!! बहुत चिल्लाते हो यार तुम! ( कान में उंगली करते हुए ) ।


विशी: ( अविनाश को सहारा देते हुए खुद भी खड़ा हो जाता है । ) ( गुस्से को काबू में करते हुए और कुछ बोलना नहीं चाहता था । ) ।


अविनाश के कमरे का दरवाजा खोलते हुए विशी उसे अंदर कमरे में बेड के पास ले जाता है । बेड के पास सिर्फ नाइट लेंप ही जल रहे थे । और थोड़ी बहुत चांद की रोशनी कमरे में आ रही थी। इसके अलावा बाकी अंधेरा ही दिख रहा था । बेड की ओर जाने पर कुछ चीजें पाव में लग रही थी लेकिन अंधेरे की वजह से विशी देख नहीं पाता । विशी अविनाश को बेड पर लिटाता है । अविनाश के हाथ पर बंधे रूमाल की और देखता है सफेद रंग से लाल हो गया था । विशी हाथ को मुठ्ठी बंद करते हुए .... खुद को रोके रखता है । तभी डोरबेल की आवाज आती है । जिस वजह से वह भागते हुए दरवाजा खोलने जाता है। अविनाश बस ऐसे ही बेड पर लेटा हुआ था । तभी थोड़ी देर बाद विशी... डॉक्टर को लेकर ऊपर आता है । लाईट ऑन करते हुए... डॉक्टर को अविनाश के पास ले जाता है । तभी विशी का ध्यान जमीन पर पड़ी चूड़ियां और गहनों पर पड़ते है जो कमरे में बिखरे हुए थे । यह देखते देखते विशी बेड के सामने लॉन में देखता है तो उसकी नजर सामने सोफे पर दुल्हन के जोड़े में सोई हुई लड़की पर पड़ती है । मानो जैसे उसके पांव थम से गए थे । क्योंकि अब उसे धीरे धीरे सारी कहानी समझ में आ रही थी । और बस मन ही मन यहीं दुआ कर रहा था की जो वह सोच रहा है वह गलत हो!! । डॉक्टर अविनाश की नब्ज चेक कर रहे थे लेकिन अविनाश का ध्यान तो सामने सोई हुई पारुल पर था । अभी भी वह शादी के जोड़े में ही थी । बाल बिखरे हुए.... लिपस्टिक पोंछी हुई, आंखों से थोड़ा काजल चेहरे पर भी बह गया था शायद रोने की वजह से । अविनाश पारुल को देख रहा था और विशी अविनाश को!!। तभी अविनाश कहता है।


अविनाश: क्या ऐसे क्यों देख रहे हो!? क्या मैं कोई जोकर दिख रहा हूं!! ( पारुल से नजर हटाए बिना ) ।


विशी: पता नहीं लेकिन आई हॉप जो में सोच रहा हूं वह गलत निकले!!!?।


डॉक्टर: मिस्टर. विशी... अभी तो टेंशन की बात नहीं है लेकिन.... इनकी बॉडी में से कुछ ज्यादा ही खून बह गया है जिस वजह से इन्हें चक्कर आए थे । और अगर इनका खून फिर से इस तरह से बहा तो आई थिंग फिर डेन्जरेस हो सकता है । तो बी केर फुल।


विशी: ( गुस्से में अविनाश की ओर ही देखे जा रहा था ) जी डॉक्टर थैंक यू ... एंड आई विल मेक श्योर की आगे ये ऐसी हरकत बिल्कुल ना करे ।


डॉक्टर: ईट बैटर टू नेवर हेपन अगेन... फिलहाल मैं इन्हें इंजेक्शन दे देता हूं और कुछ दवाइयां भी लिख देता हूं। लेकिन मरहम पट्टी का खास ध्यान रखे। लेकिन यह घाव गहरा है तो शायद टांके लगवाने पड़े। एक काम कीजिए कल सुबह क्लिनिक आ जाए वही कुछ चेक अप के बाद पता लग सकता है ।


विशी: ओके थैंक यू सो मच.. ( हाथ मिलाते हुए मानो उसने चैन से सांस ली हो । कम से कम सब कुछ ठीक तो है । ) ।


अविनाश: ( डॉक्टर जा ही रहा था की तभी अविनाश कहता है । ) एक मिनिट डॉक्टर... ।


डॉक्टर: ( मुड़ते हुए ) जी!!?।


अविनाश: ( पारुल की ओर सिर से इशारा करते हुए ) जरा!! उनका भी चेक अप कर दीजिए कुछ ज्यादा... ज्यादा... ही पानी में भीगी है... कहीं कोई.... ।? ।


डॉक्टर: ओके... । ( पारुल के पास जाते हुए उसका नॉर्मल चेक अप करते है फिर उसके सिर पर हाथ रखकर थर्मोमीटर से तापमान की जांच करते है । थोड़ी देर बाद डॉक्टर अविनाश के पास आते हुए कहता है । ) वैसे तो मामूली सा बुखार है पर अगर उन्होंने यहीं भीगे हुए कपड़े पहने रखे तो शायद बुखार बढ़ सकता है तो कपड़े बदलवा लीजिए और ये दवाई दे रहा हूं एक गोली आज और कल तीन टाईम देनी होगी जिससे बुखार कम हो जाएगा ।


अविनाश: ओके थैंक यू!! ।


विशी: चलिए डॉक्टर साहब में आपको बाहर तक छोड़ देता हूं।


अविनाश: ( अपने बेड के सहारे उठते हुए पारुल जहां थी वहां जाता हैं। थोड़ी देर तो उसे देखता रहता है लेकिन फिर उससे सोफा पर से गोद में उठाते हुए बेड पर ले जाता है । पारुल शायद बुखार या तो गहरी नींद में थी जिस वजह से उसे कुछ पता ही नही चला क्या हो रहा है!?।सिर्फ एक दर्द भरी कराहते हुए अविनाश के गले में हाथ रखते हुए सीने पर सिर रखते हुए फिर से सो जाती है।) ( अविनाश मुस्कुराते हुए ) क्या बात है वाईफी... मैं तुम्हे इतना पसंद हूं ये मुझे पता नहीं था । वैसे अभी तुम बिलकुल मासूम इंसान की तरह... फिर पता नहीं क्यों जागते ही कोन - सी चुडेल तुम्हारे अंदर आ जाती है। ( बेड पर पारुल को सुलाते हुए। पारुल के हाथ को अपने गले से निकालते हुए बेड पर रख देता है । और कंबल ढकते हुए उसके लिए बाथरूम में कपड़े लेने जा रहा होता की तभी विशी आ जाता है ।) ।


विशी: ( चिल्लाते हुए ) फ*की*ग* केर टू एक्सप्लेन की क्या चल रहा हैं!?।


अविनाश: ( अपने मुंह पर उंगली रखते हुए उसे चुप रहने को कहता है । ) बाहर चलो वही बात करते है!!। ( कमरे से बाहर जाता है विशी भी उसके पीछे गुस्से में जाता है। अविनाश दरवाजा बंद करते हुए )... मैने शादी कर ली है।... ( बिना किसी। भाव के ) ।


विशी: ( चौंकते हुए ) यू वॉट....!?।


अविनाश: मैने पारुल से शादी कर ली है। ( शब्दो पर ज्यादा भार देकर बोलता है )।


विशी: यू आर लाइंग राइट... ( अविनाश का कॉलर पकड़ते हुए ) झूठ बोल रहे हो ना!!! ? ।


अविनाश: ( विशी के हाथ कॉलर से हटाते हुए सिगरेट जलाता है। और बॉक्स विशी को देता है । ) तुम्हे में कोन से एंगल से मजाक के मूड में लग रहा हूं। ( धुंआ हवा में उड़ाते हुए ) ।


विशी: ( गुस्से में एक सिगरेट जलाते हुए ) फिर ऐसी कोन- सी मुसीबत आ पड़ी जो तुम्हे शादी करनी पड़ी...और वो भी पारु.... ।


अविनाश: ( गुस्से में सिगरेट को पाव के नीचे कुचलते हुए... विशी की बात काटते हुए कहता है ।) भाभी.... भाभी है अब वो तुम्हारी!!।


विशी: ( आश्चर्य में अविनाश को ही घूरे जा रहा था । मानो जैसे उसने जो भी सुना उस पर यकीन नहीं हो रहा था । ) ।


अविनाश: ऐसे क्या देख रहे हो!! कहीं तुम गम में तो नहीं चले गए की तुम्हारा प्यार किसी और का हो गया है!?।


विशी: घिस इस फ*किं*ग* नोट फनी...।


अविनाश: फाइन... उस दिन तुमने जब मुझसे कहां की शादी को बदले के लिए ना करूं तब मुझे एहसास हुआ की में पारुल से कितना प्यार करता हूं..और फिर में उसे रेस्टोरेंट में मिलने गया... वहां मेने उसे अपने दिल की बात बताई और इसी दौरान किसी ने हमारी तस्वीरे खीच ली और फिर हम दोनों ने शादी कर ली!!! और आगे तो तुम ये चौंट और कहानी जानते ही हो। ( विशी की ओर देखते हुए ) ।


विशी: ( विशी के चहेरे पे कोई भी भाव नहीं था । फिर थोड़ी देर बाद सोचने के बाद ) तुम्हे लगता है मैं तुम्हारी इन गढ़ी हुई कहानी पे यकीन करूंगा...!?।


अविनाश: ( चिढ़ते हुए ) फाइन... वाइफी जब कल सुबह ठीक हो जाए तुम खुद ही पूछ लेना !!?।


विशी: वो तो मैं पूछूंगा ही... लेकिन अगर मुझे एक भी बात झूठ लगी... कसम से अवि.. तुम्हारी खैर नहीं!! समझे!! अभी आराम करो कल हम तीनो आमने सामने बात करेंगे इस बारे में!!। ( अविनाश की पीठ थपथपाते हुए ) ।


अविनाश: ( सिर्फ सिर को हां में हिलाते हुए जवाब देता है। )


विशी: ठीक है मैं चलता हूं अब! कुछ काम हो तो! कॉल करना सुबह मिलते है ।


अविनाश: या!! । ( विशी को जाते हुए देखता है । फिर वह अपने कमरे में जाता है तो देखता है की पारुल अभी भी भीगे हुए कपड़ो में थी । तभी वह रमा को बुलाने के लिए आवाज देने वाला होता है की उसे याद आता है की आज तो उसने सबको छुट्टी दे दी है। फिर वह थोड़ी देर सोचता है कि क्या करे! क्या करे! थक हार कर वह वार्ड रॉब में से टीशर्ट और ट्रेक लेके आता है । ) सॉरी... वाईफी... मुझे पता है सुबह तुम मेरा खून भी करने में नहीं हिचकिचाओगी पर मजबूरी है । तो.... इसमें मै कुछ नहीं कर सकता....।


अविनाश पारुल की चोली की डोरी खोलता है । उसके हाथ कांप रहे थे । फिर धीरे धीरे चोली को उतारते हुए कंधो तक ले आता है । वह मन ही मन खुद को शांत रखते हुए ब्लाउज की चैन खोलते हुए... पारुल को टी शर्ट पहनाता है । टीशर्ट पहनाने के बाद मानो जैसे उसने चैन की सांस ली हो । फिर वह सोचता है कि लहंगा ना ही बदले तो अच्छा है!!! लेकिन फिर डॉक्टर की बात भी याद आती है । तब वह गुस्से में बड़बड़ाते हुए कहता है ।


अविनाश: फ**क अविनाश खन्ना संभालो खुद को क्या ही कर रहे हो!! सिर्फ लहंगा ही तो बदलना है सिंपल।


अविनाश पहले पारुल को अपनी गोद में बिढाते हुए एक गहरी सांस लेते हुए कहता है।


अविनाश: वाईफी!!! तुम सच में खुश किस्मत हो!! एक तो मैरी बीवी!! ऊपर से देखो क्या काम करवा रही हो मुझसे!! बस कल सुबह चिल्ला चिल्ला के मेरा दिमाग मत खा ना प्लीज!!! ।


पारुल को पहले ट्रैक पेंट पहनाता है और फिर उसके लहंगे की चेन को खोलते हुए उससे जमीन पर गिरा देता है। वह पारुल को गोद में उठाते हुए फिर से बेड पर लिटा देता है। और कंबल से ढकते हुए कमरे में हिटर चालू कर देता है । वह फिर बालकनी में जाते हुए फिर से सिगरेट पीते हुए आसमान की ओर देखने लगता है । सोचता है की आज रात कुछ ज्यादा ही घनी है । थोड़ी देर वहां खड़े खड़े ठंडी हवा खाते हुए और सुनसान रास्ते की ओर देख रहा होता है । फिर वह बालकनी को बंद करते हुए ..... बेड पर सोने चला जाता है