unknown connection - 77 in Hindi Love Stories by Heena katariya books and stories PDF | अनजान रीश्ता - 77

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अनजान रीश्ता - 77

अविनाश अपने गाने के लीरिक्स याद करने में व्यस्त था तो पारुल भी सोफा पे सिर रखकर सो गई थी । तभी दरवाजा खटखटाने की आवाज आती है । जिससे अविनाश का ध्यान पेपर में से आईने की ओर जाता है । पारुल को सोता देखकर मुस्कुराहट चेहरे पर आ जाती है। वह अपने सिर को ना हिलाते हुए कहता है ।


अविनाश: कम इन...।


स्पॉट बॉय: सर आपका पार्सल आया है ।


अविनाश: हम्म्म!! मैडम को दे दो!!।


स्पॉट बॉय: ( पारुल की ओर देखते हुए ) मेम... तो सो रही है.... ।


अविनाश: ( पेपर को साइड में रखते हुए ) अरे! तो वहां तुम्हे पास में टेबल नजर नहीं आ रहा क्या!? वहां रख दो कॉमन सेंस नाम की भी कोई चीज होती है ।


स्पॉट बॉय: जी सर...।


अविनाश: और हां मेरे लिए कॉफी भिजवाओ!! ।


स्पॉट बॉय: यस सर!! ( बाहर जाते हुए ) ।


फिर से सांग को याद करने की कोशिश में लग जाता है लेकिन यह कुछ बोल उसको याद ही नहीं हो रहे थे । जिस वजह से अविनाश का गुस्सा बढ़ ही रहा था । तभी पारुल के आलस दूर करते हुए आवाज आती है ।


पारुल: आहाह!!! ( आंखो को मलते हुए ) ।


अविनाश: ओह! वाउ मैडम हो गई आपकी नींद पूरी!!।


पारुल: ( अविनाश की ओर देखकर मुंह बिगाड़ते हुए ) जी! कोई आपत्ति आपको! पतिदेव!? ।


अविनाश: ( आईने में से पारुल की ओर गुस्से में देखते हुए ) अरे! मेरी प्यारी वाईफी मुझे क्या तकलीफ होगी !?।


पारुल: ( बतीसी दिखाकर झूठी मुकुराहट के साथ ) शुक्रिया! वर्ना आप नाराज हो जाते तो जैसे मेरा पूरा संसार ही बिखर जाता !!! ( ड्रामा करते हुए ) हाए!! ।


अविनाश: ( गुस्से में पारुल की ओर बढ़ते हुए ) तुम्हे नहीं लगता की तुम कुछ ज्यादा ही फ्रैंक हो रही हो! शादी को अभी दो दिन ही हुए है । और इतनी आसानी से बात कर रही हो! डर नहीं लगता तुम्हे !? ।


पारुल: ( उपहास करते हुए ) अरे! में तो बहुत ही डर गई! मेरे देखो डर के मारे पसीने से पानी पानी हो रही हू।


अविनाश: ( मुस्कुराते हुए सोफा पर बैठते हुए ) आहान! अभी भी हिम्मत है!? । वैसे मुझे यहीं ही उम्मीद थी की तुम इतनी जल्दी तो हार मानोगी नहीं! ।


पारुल: ( गुस्से में अविनाश की और देखते हुए ) जैसे मुझे उम्मीद है की तुम कभी नहीं सुधरोगे है ना!? ।


अविनाश: ( हंसते हुए ) हाहाहाहाहा... क्या बात है!? काफी अच्छी तरह से जानती हो मुझे!? ।


पारुल: बिलकुल! कोई शक है इसमें!? ।


अविनाश: ( सिर को ना में हिलाते हुए चहेरे के भाव बदलते हुए ) फिर तो तुम ये भी अच्छी तरह जानती होगी! की मैं किसी भी हद तक जा सकता हूं! जब बात दुश्मनी की हो!? ।


पारुल: ( दर्द के साथ हंसते हुए ) हाहाहाहा.... ये बात मुझसे अच्छी तरह कोन जान सकता है ।


अविनाश: अरे! अभी तो शुरुआत ही हुई है और इतना दर्द... अभी तो मैने गेम स्टार्ट भी नहीं की!? ।


पारुल: क्या मतलब है तुम्हारा!?


अविनाश: ( पार्सल को पारुल की गोद में रखते हुए ) अरे! मेरा चहेरा क्या देख रही हो!? मुंह दिखाई का गिफ्ट है! अब में इतना भी पागल नहीं हूं.. खोलो...।


पारुल: ( बस अविनाश की ओर ही देखे जा रही थी । ) ।


अविनाश: ( गिफ्ट को खोलते हुए ) एक तुम और दूसरा हर बार तुम्हारा ये बुत बनने का रिएक्शन। क्या!? कोई एक्टिंग कर रही हो क्या! जो इतना ड्रामा!।


पारुल: तुमने मुझसे बहस करने की कसम खाई हुई है क्या!? ।


अविनाश: ( पारुल के हाथ में अंगूठी और मंगलसूत्र थमाते हुए ) ये पहन लो इससे पहले किसी का ध्यान जाए! ( अविनाश अंगूठी पहनते हुए ) ।


पारुल: ( आश्चर्य में अविनाश की ओर देखते हुए सोचती है! ये इंसान आखिर चीज क्या है! पागल हो गया है क्या!? ) ।


अविनाश: अब ये भी मुझे पहनाना पड़ेगा क्या!? यार इतनी स्लो क्यों हो!? एक तो वैसे ही तुम्हे देखकर इंसान का पूरा दिन बीगड़ जाए ऊपर से तुम्हारी हरकते बेड़ा गरत समझो!।


पारुल: तुम मेरी लाईफ में आए सबसे बड़े बेगेरत इंसान हो!।


अविनाश: पता है मुझे! बताने की जरूरत नहीं है ।


पारुल: ( गुस्से में अंगूठी और मंगलसूत्र पहनते हुए ) ।


अविनाश: और हां.. इस बार पिछली बार की तरह अंगूठी फेंक दी तो अंजाम अच्छा नहीं होगा।


पारुल: ( अविनाश की ओर देखते हुए ! इससे कैसे पता चला कि मैंने सगाई वाली अंगूठी फेंक दी थी!? भगवानाजी!? ) नहीं.. वो गुम हो गई थी।


अविनाश: वाईफी तुम नई हो! इसलिए इस बार माफ कर रहा हूं! पर मुझे झूठ बोलने वाले बिल्कुल भी पसंद नही है।


पारुल: तुम कौन सा दूध के धुले हुए हो!? ।


अविनाश: बेशक! में बुरा हो सकता हूं! लेकिन मैं कभी पीठ पीछे वार नहीं करता! जो भी करता हूं उसे कुबूल करने की बेजिजक हिम्मत है मुझमें!?। तो अगर तुम्हे मुझ पर वार ही करना हो तो सामने से करना! ये दोगले इंसान मुझे बिल्कुल पसंद नहीं।


पारुल: तो इसका मतलब ये भी नहीं की तुम जो सबकुछ कर रहे हो वह सही हो जाता है। गलत... गलत ही रहता है । चाहे छुपकर करो या ताल ठोक कर... सजा सबको मिलती है ।


अविनाश: अच्छा! ( मजाक उड़ाते हुए ) तो कौन सा इंसान इस दुनिया में सच्चा है जरा मिलवाओ तो... प्रिंसेस अपनी इस ख्याली दुनिया से बाहर आओ यहां हर कोई अपने हिस्से की गलती करके भूल भी जाते है...। अगर तुम किसी को चौंट नहीं पहुंचा रहे इसका मतलब ये नहीं की वह तुम्हे चौंट नहीं पहुंचाएगा.... । जितना पत्थर दिल बनोगी उतना ही जीना आसान हो जाएगा ।


पारुल: ( सिर को ना में हिलाते हुए ) बिलकुल भी नहीं... अगर ऐसा ही सब करने लगे तो फिर इंसान में से इंसानियत नही रहेगी । माफ कर देने से जिंदगी आसान हो जाती है । दिल को सुकून माफी देने से मिलती है ना की बदला,गुस्सा,नफरत करने से ।


अविनाश: तुम.. और तुम्हारी बाते काफी फिल्मी है वाइफी.... माफी... एंड ऑल...।


पारुल: अभी ये समझ नहीं आएगा…. जब किसी से दिल से रिश्ता जुड़ेगा तब ये बातो के मायने पता चलेंगे... ।


अविनाश: दिल.... ( ऐसे बोल रहा था मानो जैसे की कोई गुनाह हो ) और कहां मिलेगा ये दिल... जरा में भी तो खरीद कर देखूं... ऑनलाइन मिलेगा.... या फिर मार्केट में मिल जाएगा.... कोड़ियो के दाम में ।
पारुल: ( गुस्से में इरिटेड होते हुए वहां से खड़े होकर जा रही थी । ) तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता ।
अविनाश: ( पारुल का हाथ पकड़ते हुए ) वाईफी... माफ कर दो! जो कुछ भी मेने किया!?।
पारुल: ( चौंकते हुए अविनाश की ओर देखते हुए ) क्या!? ।
अविनाश: हाहाहाहाहा.... माय... माय.. ( खड़े होते हुए ) देखो खुद को... यह बाते सिर्फ मूवीस में ही अच्छी लगती है बीवी..! रियल लाइफ में तो दर्द... धोखा.... अगर कोई एक थप्पड़ मारे तो सामने चार मारो तभी ये दुनिया जीने देती है। ( पारुल की आंखों में देखते हुए ) वर्ना तुम्हारे करीबी ही तुम्हारे सीने पर वार करते हुए मिलेंगे । ( पारुल के सिर पर हाथ फेरते हुए बाल बिगाड़ देता... है ) ।

अविनाश इसी के साथ वेनेटी से बाहर चला जाता है । पारुल जिस ओर अविनाश गया था वही देखे जा रही थी। और सोचती है की यह इतना क्यों बदल गया है! और तो और वह ऐसी बाते कर रहा है!!। पहले तो वह इससे उल्टी बातें करता था!! । जो खुद मुझे दर्द दे रहा है वह ऐसे बात कर रहा है जैसा किसीने उसे दर्द पहुंचाया हो...। पर किसने.... और क्यों....? । पारुल सिर को ना में हिलाते हुए या तो ये बहुत बड़ा ड्रामेबाज है या फिर सच में कुछ हुआ है!?।