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अनजान रीश्ता - 80

अविनाश पारुल का हाथ थामे हुए गाड़ी का दरवाजा खोलते हुए इशारे से पारुल को कार में बैठने के लिए कहता है । पारुल उसे सिर का ना में हिलाते हुए मना करती है । अविनाश पारुल को उठाते हुए सीट पर बिठा देता है और दरवाजा बंद कर देता है । ड्राइवर सीट पर बैठते हुए कार चालू करते हुए कहता है।

अविनाश: चाहो तो रो सकती हो! टिस्सू सामने के बॉक्स में है ।
पारुल: (गुस्से में) आई हेट यू....।
अविनाश: ( मुस्कुराते हुए ) जानता हूं! और कुछ नया बताओ..!? ।
पारुल: बेइंतहा नफरत है तुमसे! तुम्हारी हरकतों से! तुम्हारे अस्तित्व से!? ।
अविनाश: आई नो! और कुछ! ।
पारुल: ढीढ़ तो हो ही तुम बेशर्म भी हो! ।
अविनाश: ( बड़ी मुस्कुराहट के साथ... और कुछ नहीं कहता । ) ।
पारुल: ( कार के बाहर देखते हुए उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे । ) तुम... कभी नहीं समझ सकते की क्या... होगा अगर में वहां ऐसे उनके सामने गई तो.. ( और कुछ बोल नहीं पाती ) ।
अविनाश: ( एक हाथ से कार ड्राइव करते हुए दूसरे हाथ से टिस्सू बॉक्स निकालते हुए पारुल की गोद में रख देता है । ) आई नो! ।
पारुल: ( गुस्से की वजह से उसका पारा और भी बढ़ रहा था । वह टिस्सू बॉक्स अविनाश की ओर फेकते हुए ) क्या खाक! पता है तुम्हे जो कब से आई नो! आई नो! करे जा रहे हो!? हां तुम जानते भी हो!? कैसा लगेगा जब एक लड़की बिना बताए अपने घर से आधी रात को गायब हो जाती है। और कुछ दिन में शादी करके लौटती है । क्या वह मुझे गले लगाके स्वागत करेंगे नहीं! क्योंकि वह लोग खुद को कोसेगे! की आखिर क्या कमी रह गई थी उनकी परवरिश में जो मैने ऐसा काम किया!? लोग क्या कहेंगे!? की देखो सिर पर चढ़कर रखा था बेटी को अब भुगत रहे है। ये समाज उन्हें हर पल इस बात का अहसास दिलाता रहेगा की तुम्हारी बेटी ने मुंह काला करवाया है । ( उपहास करते हुए ) हाहहहा! पर तुम कैसे समझोगे! तुम तो लड़के हो! अगर भागकर शादी करके भी जाओगे तो! दो दिन बात बनायेगे! और भूल जाएंगे! ज्यादा से ज्यादा गुस्सा होगे! बस घरवाले भी भूल जाएंगे और ये समाज भी।
अविनाश: ( फिर से टीसू पारुल की गोद में रखते हुए कुछ नहीं कहता! )....।
पारुल: ( गुस्से से आग बबूला होते हुए ) तुम जैसा हार्टलेस इंसान मैने आज तक नहीं देखा!? यहां में तुम्हे टेंशन में मरे जा रही हूं और तुम एक लफ्ज़ भी...!? ।
अविनाश: तो क्या चाहती हो तुम!? अब मैं तुम्हे तसल्ली दू! फिर तो मैं पाखंडी बन जाऊंगा। क्योंकि मैं ऐसा इंसान नहीं हूं जो दर्द भी पहुंचाए ओर मरहम भी लगाऊं! मेरे अपने उसुल है। मैं उसीके हिसाब से काम करता हूं। और.... ( पारुल की ओर एक नजर देखकर फिर से आगे रॉड पर देखते हुए ) मैं पहले भी कह चुका हूं और अब भी कह रहा हूं! इन सबकी शुरुआत तुमने की है। मैंने नहीं! कोई मेरी इतनी साल की मेहनत पर पानी फेरे या उसपे दाग लगाने की कोशिश करे ये मुझे पसंद नहीं । चाहे वह इंसान में खुद ही क्यों ना हूं मैं खुद को भी चौंट पहुंचाने में नहीं संकोच नहीं करूंगा ।
पारुल: ( अविनाश की ओर घिन भरी नजरो से देखते हुए ) ।
अविनाश: जानता हूं तुम अभी मुझसे और भी नफरत कर रही होगी! तो ये नजरो से जाहिर करने की कोई जरूरत नहीं है । लेकिन मैं आंखे बंद करके यह नहीं मान सकता की सबकुछ ठीक है । अगर ऐसा होता तो मैने जो कुछ भी खोया है शायद मेरे पास! मेरे साथ होता! हमेशा के लिए!। तो वहम में रखने से अच्छा है में तुम्हे कड़वी सच्चाई दिखाऊं! । और वैसे भी तुम अगर वहां नहीं जाओगी तो क्या शादी का सच गायब हो जाएगा! नहीं ना! तो बेहतर है सामना करना सीखो! रोने से बेहतर ही तरीका है तुम्हे एक स्ट्रॉन्ग इंसान बनाता है। जब तुम हर घड़ी हर एक मुसीबत में अकेले सामना करना सीख लो तो ।
पारुल: ( समझ नहीं पाती कहना क्या चाह रहा है । ) ( भारी आवाज के साथ ) क्या! मतलब है तुम्हारा?। तुम इसीलिए मुझे अपने मॉम-डेड से इसलिए मिलवा रहे हो ताकि में स्ट्रॉन्ग बन सकूं!? ।
अविनाश: ( अपना सिर पीटते हुए ) तुम बेवकूफ थी ये तो मुझे पता था लेकिन इतनी... !? । ( सिर को ना में हिलाते हुए ) ।
पारुल: बेवकूफ ही सही मैं लोगो को जानबूझकर चौट तो नही पहुंचाती! अगर उसे बेवकूफी कहते है तो मैं बेवकूफ ही ठीक हूं। तुम्हारी समझदारी तुम्हे मुबारक। ( ताना मारते हुए ) ।
अविनाश: ( पानी की बोतल पारुल की गोद में फेकते हुए ) बीवी! तुम्हे नहीं लगता तुम कुछ ज्यादा ही बीवियों वाली हरकते अपनाने लगी हो !? । अभी थोड़ी देर पहले मेरे हाथ छूना और अब ये ताने देना!! ।
पारुल: ( गुस्से में बोतल फेकने ही वाली थी की तभी अविनाश कहता है । ) ।
अविनाश: आआहान! पी लो पानी!? ।
पारुल: मुझे नहीं पीना! ।
अविनाश: अरे! मै तुम्हारे लिए थोड़े ही दिया है । ये तो मैने अपनी कान की सुरक्षा के लिए पीने को कहां है।
पारुल: ( एक आइब्रो ऊपर करते हुए सवाल भरी नजरो से देखती है। ) ।
अविनाश: ( शोखी मुस्कुराहट के साथ पारुल की ओर देखते हुए ) वह क्या है ना तुम्हारी आवाज रोने की वजह से अभी मर्दाना लग रही है! और मेरे कान बड़े कीमती है। इनके बगेर में म्यूजिक कैसे सुनूगा! और सुनूगा नहीं तो सॉन्ग कैसे बनाऊंगा और सॉन्ग!।
पारुल: ( गुस्से में चिल्लाते हुए ) बस! ( बोतल को खोलते हुए पानी पीने लगती है। ) ।
अविनाश: थेट्स लाइक माय बीवी!।
पारुल: (गुस्से भरी नजरो से अविनाश की ओर देख रही थी ) आगे नजर रखो! वर्ना सीधा नर्क पहुंचोगे।
अविनाश: ( आगे चहेरा करते हुए ) अरे! कोई नहीं! मैं अकेले थोड़े जाऊंगा तुम भी तो होगी मेरे साथ! ( पारुल की ओर बड़ी सी मुस्कुराहट के साथ देखते हुए । ) ।
पारुल: ( हाथ जोड़ते हुए ) भगवान के लिए आगे देखो और सही से गाड़ी चलाओ! कम मुसीबत नहीं है लाईफ में एक और नई मुसीबत नहीं चाहिए।
अविनाश: वेल! आपका हुकुम सिर आंखों पर ।

यह कहने के साथ ही अविनाश कार चलाने ने व्यस्त हो जाता है। और पारुल भी सिर को सीट के सहारे रखते हुए आंखे बंद करके सो जाती है । वह वैसे भी मानसिक तौर पर सोच सोचकर थक चुकी थी । दिमाग में और कुछ भी सोचने की हिम्मत नहीं थी । करीबन एक - डेढ़ घंटे बाद अविनाश पारुल को हड़बड़ाते हुए कहता है ।

अविनाश: वाईफी... ओय... कहीं मर तो नहीं गई.... वाइफी... ।
पारुल: ( नींद में ही ) मेरी जिंदगी में इसकी कमी थी जो अब तुम सपनो में भी परेशान करने आ गए हो !? जाओ यार कम से कम सपनो में तो खुशी से रहने दो।
अविनाश: वाईफी.... उठो! तुम सोते हुए भी पागलों जैसी हरकत कर रही हो! तुम्हारा डेफिनेटली इलाज करवाने की जरूरत हैं।
पारुल: ( सिर को पकड़ते हुए ) आआहह! ये सिर दर्द! ( आंखे खोलते हुए देखती है तो अविनाश उसके ऊपर यमराज की तरह मंडरा रहा था । ) क्या!? हार्ट अटैक देने का इरादा है । ( शांत करते हुए ) ऐसे क्यों मंडरा रहे हो !?।
अविनाश: वह बात ऐसी है की मैं पिछले पांच मिनिट से तुम्हे जगा रहा हूं!! पर तुम तो कुछ पागलों जैसी ही बात कर रही थी। और मैने तो तुम्हारे अंतिम संस्कार तक का सोच लिया था मुझे लगा तुम चली गईं इस दुनिया से ।
पारुल: ( गुस्से में अविनाश की ओर ही देखे जा रही थी। ) ... ।
अविनाश: ( मुस्कुराते हुए ) अब अपनी इस जालिम नजरो से मुझे बाद में देखना! तुम्हारा ( घर की ओर हाथ से ईशारा करते हुए ) घर आ गया है । क्या करना है! कैसे कहोगी तुम पर निर्भर करता है। मैं प्रॉब्लम बढ़ाने नहीं आने वाला अगर लगे की बात बिगाड़नी है तो बेजिजक बुला लेना ।
पारुल: ( आश्चर्य में अविनाश की ओर ही देख रही थी। सोचती है: ये इतना कबसे सोचने लगा और वो भी मेरे बारे में... आखिर चल क्या रहा है इसके दिमाग में... एक पल समझदार तो दूसरे पल नफरत करना क्या चाहता है। तभी उसका ध्यान अविनाश के हाथ पर लगी पट्टी पर जाता है वह खून से लाल हो गई थी । ) तुम्हारा हाथ .. !?।
अविनाश: क्या!? ।
पारुल: तुम्हे शायद पट्टी बदल लेनी चाहिए!? खून निकल रहा है ।
अविनाश: ( हाथ की ओर देखते हुए ) ओह! शायद ड्राइविंग की वजह से! डॉक्टर ने कहां तो था पर में भूल गया !? कोई नहीं ये तो ऐसे ही ठीक ही हो जाएगी । इससे बड़ी भी चोंट ठीक हो गई है तो फिर ये तो मामूली है।
पारुल: ( सोचते हुए: ये पागल तो नहीं!?, कार में से फर्स्ट एड बॉक्स ढूंढती है और अविनाश की ओर देते हुए ) वैसे मुझे तुम्हारी परवाह नहीं करनी चाहिए! लेकिन इतनी भी पत्थर दिल नहीं हूं की इग्नोर कर पाऊं! मैं जब तक आऊ तक तक मरहम पट्टी कर लेना! और हां थैंक यू के भी हकदार नहीं हो तुम क्योंकि तुम्हारी ही वजह से ये परिस्थिति बनी है। पर फिर भी शुक्रिया! बात को और ना बिगाड़ने के लिए और मेरे मॉम-डेड को और परेशान ना करने के लिए ।
अविनाश: ( मुस्कुराते हुए बॉक्स लेते हुए ) हाए! संभल के हां कहीं ये शुक्रिया इजहार ए मोहब्बत में ना बदल जाए! वरना बड़ी मुश्किल हो जाएगी तुम्हारे लिए ।
पारुल: ( गुस्से में अविनाश की ओर देखते हुए ) तुम से बात ही करना बेकार है । ( यह कहते हुए दरवाजा खोलते हुए कार से बाहर चली जाती है । ) ।

अविनाश मुस्कुराते हुए अपनी पट्टी खोलते हुए मरहम पट्टी करने लगता है। वह फिर नई पट्टी को एक हाथ और मुंह से बांध ही रहा था की तभी विशी का कॉल आता है । वह उठाते हुए उसे कहता है की वह लोग पारुल के घर पहुंच गए है । विशी अविनाश पर भड़क ही रहा था की अविनाश उसे छोड़ के कैसे जा सकता है । अविनाश फिर मुस्कुराते हुए कहता है की क्या! करे! अब बीवी इतनी इंटरेस्टिंग मिली है की किसी और का ख्याल नहीं आता । अविनाश पारुल का गुस्से वाला चेहरा याद करते हुए हंसी रोक नही पाता। और सोचता है उसे चिढ़ाने में एक अलग ही मजा है। फिर वह फोन काट देता है । और पारुल के आने का इंतजार कार में करता है