Lara - 8 in Hindi Fiction Stories by रामानुज दरिया books and stories PDF | लारा - 8 - (एक प्रेम कहानी )

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लारा - 8 - (एक प्रेम कहानी )

Behind the scenes love Story❤
(Part 8)
जय के लिए मेरे दिल में सच्ची फीलिंग्स आने लगी थी....जिसे सच्चा वाला प्यार कहते हैं वही होने लगा था । लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि जय मेरे साथ टाइम पास कर रहे हैं, वो किसी और की यादों से बाहर निकलने के लिए मुझे इस्तेमाल कर रहे हैं। मुश्किल से 15 से 20 दिन में ही मुझसे वो बोर हो चुके थे।
वो कैसे भी करके मुझ से अपना पीछा छुड़ाना चाहते थे, और इस बात से मैं बिल्कुल अनजान थी ।और जब इंसान कोई काम जबरदस्ती करता है तो उसका उससे बहुत जल्दी मन भर जाता है। और जय के साथ में ऐसा ही कुछ हो रहा था। वह कैसे भी करके मुझे खुद से दूर करना चाहते थे, लेकिन यह इल्जाम वो अपने माथे नहीं लेना चाहते थे, वो यही सोच रहे थे कि क्या करूं कि नैन्सी खुद मुझे छोड़ दे मुझ से दूर हो जाए। और जो वो सोच रहे थे वो उन्होंने कर भी दिखाया। एक दिन रात को वो मुझसे बोले कि नैन्सी मुझसे कितना प्यार करती हो?
मैंने कहा बहुत ज्यादा खुद से भी ज्यादा, तब उन्होंने मुझसे पूछा कि मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो? मैंने कहा कि हां मैं कर सकती हूं। तो उन्होंने कहा कि तो ठीक है मेरे लिए अपनी फैमिली से बगावत कर लो, मेरे पास अभी तुरंत अपना घर परिवार सब कुछ छोड़ कर चली आओ।
राम जी आप तो मुझे जानते ही हो कि मैं अपने खिलाफ जाकर अपने मां-बाप अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकती हूं लेकिन अपने मां पापा के खिलाफ जाकर खुद के लिए मैं कुछ भी नहीं कर सकती। क्योंकि मुझे खुद से ज्यादा उनके मान सम्मान का ख्याल रहता है, मुझे अपनी जान से ज्यादा उनकी इज्जत की परवाह है, मैं अपनी वजह से उनका सर नीचे नहीं झुकाना चाहती। मैं ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहती हूं जिससे वह शर्मिंदा हो। तो मैं 20 दिन के प्यार के लिए 20 साल के प्यार को अपने मां पापा को ठुकरा कर कैसे जा सकती थी। और इतनी जल्दी मैं किसी अनजान पर इतना भरोसा कैसे कर सकती थी। मैंने कहा जय ये कैसा मजाक कर रहे हैं आप,
जय बोले मैं मजाक नहीं कर रहा हूं सच बोल रहा हूं। अगर तुम मुझसे प्यार करती हो तो अभी तुम्हें मेरे पास आना होगा,
तब मैंने जय को बहुत समझाने की कोशिश की, मैंने बताया कि जय आप मेरी फैमिली को नहीं जानते हो। अगर मैंने उनके खिलाफ एक भी कदम उठाया तो मेरी फैमिली मुझे जान से मार देगी। उन लोगों को किसी की जान की परवाह उतनी नहीं है, जितना अपनी इज्जत की परवाह है। मेरी फैमिली वाले अपनी इज्जत के लिए कुछ भी कर सकते हैं, किसी की भी जान ले सकते हैं, वह मुझे तुरंत मार देंगे और कोई कुछ नहीं कर पाएगा।
मेरी इतनी सी बात पर जय को गुस्सा आ गई, और वो मेरी फैमिली के बारे में उल्टा सीधा बोलने लगे। वो बोले तुम्हारी फैमिली को जानता हूं, चाहे जैसे भी हो कितने भी बड़े लोग क्यों न हो, कितनी भी पावर क्यों ना हो, अगर उन्होंने किसी का खून कर दिया कत्ल कर दिया तो धारा 302 के तहत तुरंत अंदर हो जाएंगे और उन्हें उम्र कैद होगी फिर किसी की पावर काम नहीं आएगी,
कितने भी बड़े अफसर क्यों ना हो, लेकिन कानून सबके लिए बराबर होता है लगता है तुम्हारी फैमिली कानून के बारे में नहीं जानती। तो राम जी आप ही बताइए मैं अपनी फैमिली के खिलाफ कोई बात कैसे सुन सकती थी। जबकि राजनीति और कानून में ही मेरी फैमिली पली-बढ़ी है। हर पल मेरी पूरी फैमिली में बस राजनीत और कानून की बातें होती हैं । और जय मेरी फैमिली को बता रहे हैं कि तुम्हारी फैमिली को कानून के बारे में कुछ मालूम ही नहीं है। मुझे गुस्सा आ गया। मैंने कहा ठीक है मेरी फैमिली को कुछ नहीं मालूम है ना, आप ही को तो सब कुछ मालूम है तो ठीक है, मैं आज के बाद आपसे बात नहीं करूंगी। और अगर आपकी यह शर्त है, कि अगर मैं आपसे प्यार करती हूं तो मुझे यह सब करना होगा। तो जाइए मैं आपसे प्यार नहीं करती और मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी,
फिर चाहे आप मुझसे कभी बात ना करें।
फिर क्या था जय तो चाहते ही थे, कि मैं उनसे बात ना करूं ।
उन्होंने कहा ठीक है मैं भी बात नहीं करूंगा। उसी रात के बाद से हमारी बात बंद हो गई ।
हम बात नहीं कर रहे थे कुछ भी नहीं ना फोन ना मैसेज कुछ भी नहीं ।
याद तो मुझे आती थी कभी कभार लेकिन उनकी याद से जादा मेरा ही ईगो आगे आ रहा था, मैं उन्हें जल्दी याद भी नहीं करना चाहती थी। फिर दूसरी बार कुछ दिन बाद जय ने खुद ही मेरे पास मैसेज किया, सॉरी बोलकर मुझे मनाया, बोले मुझे ऐसा कुछ भी नही बोलना चाहिए था, मुझे तुम्हारी फैमिली के बारे में कुछ नहीं पता था। मुझे तो आज पता चला, जब मेरी फैमिली ने मुझे बताया कि तुम्हारे फैमिली के लोग कैसे हैं, कितनी पावर है, क्या करते हैं। तब मुझे पछतावा होने लगा, मुझे लगा मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी। यार सॉरी माफ कर दे ना, अब ऐसी गलती कभी नहीं होगी। प्लीज मुझे माफ कर दो।
बस फिर क्या था मैं एक बार फिर जय की बातों में आ गई । तुरंत मेरा पत्थर सा दिल मोम की तरह पिघल गया, और फिर हमारी बातें शुरू हो गई।
फिर वही बातें शुरू हो गई, सुबह गुड मॉर्निंग रात को गुड नाईट, शाम को इंतजार करना रात को घंटों चैटिंग करना ।
लेकिन कहते हैं ना जबरदस्ती का प्यार ज्यादा दिन नहीं टिकता। पहली बार का प्यार 20 दिन चला था,
दूसरी बार का प्यार 2 दिन चला।
तीसरे दिन उन्होंने बोला कि यार मुझे किसी को जलाने के लिए इस प्यार भरे चैट की जरूरत थी, इसीलिए मैंने तुमसे ऐसी बातें की थी am sorry yrr।
फिर क्या था, यह बातें सुनकर मन कर रहा था। कि या तो जय का गला घोट दे, या खुद अपनी जान देकर मर जाएं। मुझे खुद पर गुस्सा आ रहा था नफरत होने लगी थी खुद से। कि मैं किसी के प्यार में इतनी अंधी हो गई हूं, कि मुझे उसका सच दिखाई ही नहीं देता। वो बार-बार मेरी फीलिंग के साथ खिलवाड़ करके चला जाता है और मैं बार-बार उसकी बातों में आ जाती हूं । आज फिर वो एक बच्चा बनकर खिलौना समझकर मेरी फिलिंग्स के साथ खेल कर चला गया, और मैं उस टूटे हुए खिलौने की तरह बिखरी पड़ी रह गई। आखिर मेरी कोई सेल्फ रिस्पेक्ट नाम की चीज नहीं है, मैं इतनी गिर गई हूं। मुझे खुद से नफरत हो गई थी। फिर मैंने ठान लिया कि मैं आज के बाद जय से कभी बात नहीं करूंगी, चाहे जो कुछ भी हो जाए।
जय खुद मेरे पास मैसेज करें या सॉरी बोले लेकिन मैं कभी बात नहीं करूंगी। और मैंने उसी वक्त जय को अपनी फ्रेंड लिस्ट से अनफ्रेंड कर दिया।