My Love - 1 in Hindi Love Stories by Radha books and stories PDF | My Love - 1

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My Love - 1

कॉलेज का पहला दिन...

आरव, सनी, अनु और मधु एक दूसरे से बहस करते हुए कॉलेज में प्रवेश करते हैं। वे सब कॉलेज के पहले दिन ही लेट हो गए थे।आरव अनु से कहता है- अनु तुम आज भी इतना लेट कैसे हो सकती हो तुम्हारी वजह से हम लेट हो गए हैं।
अनु-मेरी वजह से कैसे सनी ने मुझे कॉलेज टाइम ही नही बताया था तो इसमें मेरी क्या गलती है ।
अनु की बात पर सनी कहता है -अरे! झूठ क्यों बोल रही हु मैने तुझे कल कॉल पर बताया था।
अनु- बताया होता तो मुझे पता होता ।
आरव - गजब है , तुम्हे खुद तो याद नहीं है और हमें गलत बात रही हो।
अनु- नहीं बताया था।
सनी- बताया था।
अनु - नहीं बताया था यार।
सनी - बताया था मैंने ।
अनु- मान जाओ ना कि बताया था।
सनी- ठीक है मेरी मां, बताया था मेने, अब खुश हो।
अनु - तो इतनी देर झूठ क्यों बोल रहे थे?
सनी - वा रे अनु ! जबरदस्ती बात को मनवाती हो।
ऐसी ही बहस करते करते तीनों अंदर जा रहे थे और मधु बिन कुछ बोले उनकी बातें सुन रही थी और नया कॉलेज देख रही थी। तीनो की लड़ाई को देख मधु कहती हैं - आज तो लड़ाई मत करो देखो तो ये कॉलेज कितना अच्छा है। मधु की बात सुन तीनो कॉलेज को देखते हैं कॉलेज देख अनु कहती है - वाह ! कॉलेज तो बहुत अच्छा है और देखो ना कितना बड़ा है।
राघव - कॉलेज इतना अच्छा है तो यहाँ के स्टूडेंट्स कितने अच्छे होंगे अनु- तुम्हारा मतलब ,यहाँ की लड़कियां, हना ?
राघव कॉलेज पर नज़र घुमाते हुए- नहीं तो, मैने तो ऐसा कुछ नहीं कहा।
अनु - जरा इधर देखना , तुम्हारी ये जो मुस्कान है ना वो सब बता रही हैं समझे।
राघव- तुम मेरे पर ही ध्यान रखती हो क्या ?
अनु - हां, रखना पड़ता है।
राघव मुँह बिगड़ते हुए- रखना पड़ता है।
चारों का ध्यान एक दूसरे पर ही था अचानक से अनु की नज़र सामने पड़ती हैं उसे देख अनु मधु से कहती है - मधु वो अंश है ना?? अनु की बात सुन तीनो सामने देखते हैं सामने से 2 लड़के आ रहे थे जिनमें से एक अंश था और दूसरा उसका बचपन का फ्रेंड। दोनों अपनी ही बातों में मग्न होकर आ रहे थे।

2 साल पहले.....

अंश और मधु एक ही स्कूल में पढ़ते थे । जहाँ मधु आर्ट्स की स्टूडेंट् थी और अंश साइन्स मैथ का स्टूडेंट् था तब अंश मधु का क्रश था इसलिए जहा भी अंश दिखाई देता वो अपना रास्ता घुमा लेेती थी वो कभी अंश के सामने नहीं आयी थी बस दूर से देखा करती थी और दिन भर अनु ओर सनी से बस अंश की ही बाते करती रहती। ऐसे ही एक दिन जब सब क्लास में बैठे हुए थे तब अनु और सनी दोनों मधु से अंश की वही बातें बार बार सुन पक चुके थे मधु की बात के बीच में ही अनु कहती है -हे !! मधु , तू जाके एक बार उससे बात क्यों नहीं करती।
मधु - पागल है क्या !!
सनी - हां मधु तुुझे जाना चाहिए क्या पता बात बन जाये ।
मधु - तुम उसके सामने मेरा मज़ाक बनाना चाहते हो क्या ??
सनी - नहीं , हम तो तेरी हेल्प करना चाहते हैं।
अनु - हां मधु अगर तू बात कर लेगी तो रोज उसकी बातों से हमे पकायेगी नही, उसे भी पता चल जायेगा कि उससे भी ज्यादा तू उसके बारे में जानती है और रोज हमे उसकी वही बातों से पकायेंगी नहीं।
मधु -मै तुम्हें पकाती हु क्या ?
सनी - हां , और नहीं तो क्या ।
मधु -तो ठीक है, मैं करुँगी बात ।
ऐसा बोलते हुए वो क्लास से बाहर निकल जाती है मधु को अचानक से जाता देख दोनो भी पिछे पिछे जाते है जाते हुए अनु कहती हैं ये सच में चली जाएगी क्या ?
सनी - पता नहीं, देखते हैं कहा जाती है।
कुछ देर में मधु अंश की क्लास के सामने जाकर खड़ी हो जाती है और दोनों थोड़ी दूर से ही उसे देख रहे थे कुछ देर में स्टूडेंट्स बाहर निकलने लगते है और उनके बाद अंश बाहर निकलता है अंश मधु को बाहर खड़ा देखता है लेकिन कुछ नहीं कहता तभी पिछे से उसका दोस्त अंश को खीचते हुए उसे वहाँ से ले जाता हैं। दोनों के जाने के बाद अनु और सनी मधु के पास जाते है।
अनु कहती है - देख, तुने कुछ नहीं बोला और सामने मूर्ति की तरह खडी हो गयी।
लेकिन मधु का ध्यान कही और ही था मधु को हाथ लगाते हुए सनी कहता है- कहा खो गयी।
मधु - तुमने देखा कि अंश ने मुझे देखा।
सनी - हा देखा ना और ये भी देखा कि वो तुुझे इग्नोर करके चला गया।
मधु - पर उससे पहले देखा भी तो था।
मधु की ऐसी बात सुन सनी कहता है - वा रे मधु, तेरा कुछ नहीं हो सकता, अब चले ??
और ऐसे ही तीनों वहाँ से निकल जाते है।

स्कूल का लास्ट दिन....

अंश म्यूजिक रूम से अपने गिटार के साथ बाहर निकलता है तभी पीछे से कोई आवाज़ लगाता है अंश पीछे मुुुड़ कर देखता है वहाँ मधु खड़ी हुई थी मधु पास में आती है लेकिन कुुुछ नहीं बोलती है उसे ऐसे चुप चाप देख अंश कहता है - क्या हुआ मधु , कुछ कहना है क्या?
अंश ने इतने प्यार से बोला था कि मधु कुुछ बोल ही नहीं पाती है फिर कुुुछ देर रुक कर कहती है - अंश, मैं कह रही थी कि ..........
अंश - हां बोलो , क्या कह रही थी।
मधु - तुम्हारी कोई बेस्ट फ्रेंड है क्या कोई लड़की ??
अंश - हां , है ना, क्यों क्या हुआ ?
मधु - बहुत स्पेेशियल होगी ।
अंश कुछ नहीं बोलता है। मधु एक बॉक्स निकाल कर कहती है - ये तुम्हारे लिए ।
अंश लेेते हुए कहता है - मेंरे लिये ।
मधु - हां तुम्हारे लिए है किसी ने मुझे तुम्हे देंने के लिए बोला था।
अंश - किसने ??
मधु - पता नहीं, स्कूल गेट पर दिया था।
अंश -कौन था ??
मधु - उसने खुद का नाम स्वेता बताया था।
अंश थोड़ा सा झुक कर कहता है तो उसने ही तुम्हेंं ये पूूूछने के लिए भी बोला था कि मेंरी कोई गर्ल फ्रेंड हैं कि नहीं ?
मधु हां बोलने ही वाली थी कि वो अपनी नज़रे उठा कर देखती है अंश को अपने बिल्कुल सामने देख अचानक से कह देती हैं - नहीं।
उसकी बात पर अंश मुुस्कूरा देता है और मधु वहाँ से चली जाती है।अनु दौड़ते हुए दोनों के पास जाती है और कहती हैं - मेने दे दिया।
अनु -तो फिर इतना उदास क्यों है।
मधु - उसकी शायद गर्ल फ्रेंड है।
सनी - अब तुम जा रही हो अभी भी उसी के बारे मे सोचोगी क्या ? अब नई जगह नया स्कूल इंजॉय करना।
मधु उदास मन से - हम्म !!!!

1 साल बाद वर्तमान में ......

चारों अंश को ही देख रहे थे लेकिन अंश अपने दोस्त के साथ बातों में मगन था। मधु उसके पास से निकल जाती है। कुुुछ दूर जाकर अंश पिछे मुुुड़ देखता है वहाँ कोई नहीं था। तब उसका दोस्त (देव) कहता है - क्या हुआ अंश , क्या देख रहा है। अंश - मेंने अभी मधु को देखा । देव -मधु यहाँ कैसे हो सकती हैं वो तो पढ़ने के दिल्ली गयी थी ना? अंश कुछ नहीं बोलता है और उसके साथ अंदर जाने लगता है।