Wo Nigahen - 17 in Hindi Fiction Stories by Madhu books and stories PDF | वो निगाहे.....!! - 17

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वो निगाहे.....!! - 17


अपनी निगाहो मे ना सही
अपनी यादो मे बसाय
रखना ......!!



धानी डिस्चार्ज हो कर घर आ गई थी अपने हि ख्यालो में इस कदर गुम हो गई अपने फ़ादर साहब का आना पता हि नहीं चला!

अब आगे......!


नहीं फ़ादर साहब मै इतने दिनों से बेड रेस्ट पर थी स्कूल भी जाना नहीं हो पाया बच्चो का कलचरल प्रोग्राम भी मिस कर दि l बस वही सोच रही थी और कुछ नहीं!

अरे बेटा तुम ठीक हो जाओ फिर से अपने स्कूल जाने लगोगे l

तुम यू खमोश नहीं अच्छी लगती है तुम शरारत करते हुये ठीक लगती हो l जहा भी रहती हो माहोल खुशनुमा कर देती हो बच्चे प्यार से उसका गाल सहला दिया l

हा जी फ़ादर साहब आज आप दुकान नहीं गये थे क्या? आज इतनी जल्दी कैसे?

क्यों मै जल्दी नहीं आ सकता? वैसे भी दुकान पर श्याम है तो फिक्र करने कि जरुरत नहीं है उसे पता है कैसे क्या करना है l तुम्हें देखने आया था अभी चला जाउगा l
अच्छा बच्चे तुम आराम करो डिनर पर मिलते है l आराम मतलब आराम हि करो फ़ाल्तू का सोचना मत कुछ l मै श्री फोन करके बुला देता हूँ तुम्हें अच्छा लगेगा l वैसे तो आ जाती पर आज क्यों नहीं लगता काम में फ़स गई होगी l
तुम्हारी मम्मी रसोईघर में है कोई भी बात हो तो उन्हें आवाज लगा देना समझी l अब जाता हूँ l

नहीं फ़ादर साहब जाकर आता हूँ ऐसा बोलो नाराजगी से बोली l
हा बाबा ठीक जाकर आता हूँ अब ठीक मुस्कुराकर बोले l

हा अब ठीक l कहकर मुस्कुरा दि l


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श्री का घर......!

श्री के माँ पापा बैठे बाते कर रहे थे l
प्रकाश जी क्या हुआ श्री कि मम्मी (प्रकाश जी अपनी पत्नी का नाम नहीं लेते है वो ऐसे हि अपनी पत्नी को बुलाते है) देख रहा हूँ आपको कुछ दिनों से परेशान लग रही हो l कुछ कहना चाहती हो लेकिन कह नहीं पा रही हो?

हा श्री के पापा (श्री कि मम्मी उर्मी भी अपने पति का नहीं लेती है वो भी अपने पति को श्री के पापा कहकर बुलाती है) कहना तो चाह रही हूँ समझ नहीं आ रहा कैसे कहुँ कहिं जल्दबाजी तो नहीं कर रहे हम l

आप बात तो बताईये पहले l

वो हम कह रहे थे कि अब देखो श्री कि सगाई के कितने दिन हो गये है अब शादी के बारे में सोचना चाहिए l आप तेज के पापा से बात कर लिजिये तो उनकी क्या राय है इस बारे में l

अरे इसमे परेशानी वाली क्या बात है आप बेझिझक कह देती क्या आपको हम पर भरोसा नहीं था? झूठी नाराजगी से बोले l

नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं कही जल्दबाजी तो नहीं कर रहे है इसलिए नहीं पूछ पाय आप नाराज मत होईये l परेशान सी बोली l

अरे हम तो झूठी नाराजगी लिये बोले आप तो परेशान हि हो गई l हम आज हि बात करते है भाई साहब से कि उनकी क्या राय है कहकर अपनी पत्नी को गले लगा लिया l
जी उर्मी जी भी गले लग गई l दोनों को हि आत्मिक शान्ति मिली l


किसी कि आहट पर दोनों चौके झिटक कर दूर हो गये..!!

क्रमशः!