Aahuti ek Jwala - 2 in Hindi Love Stories by Madhu books and stories PDF | आहुति एक ज्वाला! - 2

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आहुति एक ज्वाला! - 2

कर्तव्य~आहु सुनो जरा हम घाट पर जा रहे हैं कुछ काम से आप ध्यान से रहियेगा l खाना हमने बना दिया आप खा लिजियेगा हमे आने में देर भी हो सकती है l आप सुन रही है ना l उसके सिर पर हल्की सी थपकी दी l
आहुति~ हम्म!! आप जाईये हम अपना ध्यान रख लेगे समय पर भोजन भी कर लेगे l आप भी अपना ध्यान रखियेगा समय पर आने की कोशिश किजियेगा l
कर्तव्य ~हम्म!! कहकर चला गया l
आहुति ~आहुति तब तक देखती रही कर्तव्य को जब तक वो उसकी आँखो से ओझल ना हो गया l मन में ~हम जानते है कर्तव्य आप हमारे लिये बहुत चिन्तित रहते हैं हमारी सुरक्षा हेतु परंतु हम अपना ध्यान रख सकते हैं l हम आप पर बोझ नहीं बनना चाहते हैं ना हि हमारी वजह से आपको कोई भी हानि पहुँचें l हम समझते हैं कि आप जानना चाहते हो हमारा वो सच जिससे हम प्रतिदिन लडते है शायद हि ऐसा हो हम आपको वो सच बता सके और बता कर भी हम आपको और हमारी वजह से परेशान नहीं कर सकते है l हम कुछ समय बाद यहाँ से चले जायेगे जिससे आप अपनी जिंदगी खुशी खुशी जी सके l कुछ चिन्तन कर आहुति अपने शयन जाकर विश्राम करने लगी l

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कर्तव्य ~~फोन पर... हा कुछ पता चला पक्की खबर है ना! इस बार कोई भी गडबड नहीं होनी चाहिए समझे तुम सब लोग पूरी तैयारी के साथ वही पहुँचें हम भी बस पहुँचने हि वाले है l मन में ~एक दिन वो जरुर आयेगा जब आहु आप हम पर पूरी तरह विश्वास कर अपना वो सच जरूर बतायेगी जिससे आप हर रोज लडती है l

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तकरीबन एक घण्टे बाद!

एक घना जंगल के पास अंदर कि ओर बढने पर एक पुराना खण्डहर नुमा सा गोदाम सा बना हुआ था देखने से लग रहा था कि बहुत ही पुराने जमाने का दीवारे स्याह काई सी हो गई थी दीवारो पर कुछ बेले लिपटी हुई थी l चारो तरफ़ झाडिया हि झाडिया थी और जीवो कि आवाजे भी आ रही थी कि किसी का भी दिल दहल जाय l कमजोर दिल वाला तो वहा जा हि ना पाय देखने पर बहुत डरावना सा लग रहा था जब कि दिन का समय था फिर भी l कुछ लोगों कि चहल पहल सी दिख रही थी खुसुर फ़ुसुर कि आवाजें आ रही थी l
हा माल तो कल रात में हि आ गया था बहुत ही सफ़ाई तरिके से कि किसी को कानोकान खबर भी ना हुई एक आदमी बोला जिसका मुहँ काले कपड़े से ढका हुआ था l
हा ये जगह हि ऐसी है कि लोग दिन में भी आने से कतराते है वो लोग सोच भी नहीं सकते यहाँ होता क्या है आखिर l दूसरा आदमी कहकर शैतानी हँसी हँस पड़ा l साथ में और लोग भी उस हँसी में शामिल हो गये l जो महौल को और भी डरावना बना रहे थे l पहला आदमी हम लोग जाते हैं तुम लोग अच्छे से माल कि निगरानी रखना रात में हि सारा माल अपनी जगह पहुंचा दिया जायेगा किसी भी कि तरह गडबड नहीं होना चाहिए नहीं तो तुम सब को ऊपर का टिकट करा दूँगा समझे बन्दूक तानते हुये बोला l
उस आदमी कि बात सुनकर हर कोई थर थर काँपने लगा जानते हि थे वो आदमी जो कह रहा है वो कर के हि रहता है!! !सुनकर हा भाई हम लोग अच्छे तरिके से अपना काम करेगे आप परेशान ना होये l उन सबमे से एक आदमी हिम्मत कर बोला l

उन सब एक निगाह देख पहला आदमी जिसका मुहँ काले कपड़े से ढका था और उसका साथी दोनों हि वहा से निकल लिये और वो लोग भी पूरी मुश्तैदी से खड़े होकर निगरानी रखने लगे l

कुछ हि वक़्त हुआ था कि एक गोली सीधा बाहर तैनात आदमी के माथे पर लगा वो सीधा वही ढेर हो गया l किसी को कुछ कहने का मौका हि नहीं ताबड़तोड़ गोलियां पर गोलियां चलने लगी l एक एक करके सारे आदमी ढेर हो गये l पूरी तैयारी से आई फ़ोर्स ने सारा माल जब्त कर लिया
अच्छे से छानबीन कर लिया है ना कोई भी माल छूटना नहीं चाहिए समझे l
"यस सर" एक साथ सभी बोले l


क्रमशः!