Yakshini ek dayan - 9 books and stories free download online pdf in Hindi

यक्षिणी एक डायन - 9

 

युग और अभिमन्‍यु भागते-भागते ऊपर वाले कमरे की ओर जाने लग जाते है। जब वो कछुए के पास पहुँचते है तो देखते है कि कछुआ एक कमरे के सामने भूत बनकर खड़ा हुआ था जिसका दरवाजा लगा हुआ था। डर के कारण कछुए के हाथ पैर अभी भी कंपकंपा रहे थे उसको देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उसने कोई भूत देख लिया हो।

 

अभिमन्‍यु फटाक से कछुए से पूछता है – "क्‍या हुआ कछुआ तू चीखा क्‍यों?"

 

कछुआ इतना डर गया था कि कुछ नहीं बोल पा रहा था उसकी आँखें अभी भी फटी की फटी और लाल थी।

 

युग कछुऐ का हाथ पकड़ते हुए कहता है – "कछुआ तु घबरा क्‍यों रहा है, हम आ गये है ना अब घबराने वाली कोई बात नहीं है समझा, तू आराम से बता क्‍या हुआ?"

 

कछुआ कहता कुछ नहीं बस अपने हाथ से दरवाजे के नीचे की ओर इशारा करने लग जाता है। जब युग और अभिमन्‍यु की नज़र दरवाजे के नीचे पड़ती है तो अभिमन्‍यु कछुए से कहता है – "ये नीचे क्‍या इशारा कर रहा है, नीचे तो कुछ नहीं है?"

 

कछुआ हकलाते हुए कहता है – "नीचे नहीं, दददद दरवाजे की कुंडी पर देख।"

 

जब युग और अभिमन्‍यु दरवाजे की कुंडी पर देखते है तो उनकी भी आँखें फटी की फटी रह जाती है। दरवाजे की कुंडी पर एक बड़ा सा ताला लगा हुआ था जिस पर लाल कपड़ा बंधा हुआ था और उसके ऊपर सफेद चंदन से स्‍वास्तिक बनाया गया था। उसी ताले के ऊपर मुस्लिम धर्म का एक ताबिज बंधा हुआ था जिसमे उर्दू में कुछ लिखा हुआ था। ताबिज के साथ ही क्रिस्‍चन का क्रॉस लॉकेट भी लटक रहा था।

 

अभिमन्‍यु उस ताले को देखकर शौक्‍ड हो जाता है और हैरानी के साथ कहता है – "ये क्‍या इस दरवाजे के ताले के ऊपर इतने सारे अलग-अलग धर्म के ताबिज क्‍यों बंधे हुए है।"

 

युग कमरे को देखते हुए कहता है – "ये कमरा तो पापा का है और ये वही कमरा है जहाँ पर उनकी मौत हुई थी।"

 

अभिमन्‍यु कुछ सोचते हुए कहता है – "इस‍का मतलब कछुऐ की दादी ने उसे जो कहानी सुनाई थी वो सच है।"

 

युग हैरानी के साथ कहता है – "मतलब?"

 

अभिमन्‍यु युग को समझाते हुए कहता है – "मतलब यह युग कि देख कछुए की दादी ने बताया था कि तेरे बड़े पापा मतलब दिलीप अंकल ने ग्रेव्‍यार्ड कोठी को बंद करवाने के लिए मेंदीपथार से तीन धर्म गुरूओ पुजारी, मौलाना और फादर को बुलाया था वो लोग यहाँ पर आये होगें और यक्षिणी तेरे पापा के कमरे में भटक रही होगी क्‍योंकि इसी कमरे में उसने उन्‍हे मारा था, तो उन तीनो धर्म गुरूओ ने अपनी ईश्वरीय शक्ति का प्रयोग करके इस कमरे को बंद कर दिया होगा और इस कमरे को बाहर से ईश्वरीय शक्ति से बाँध दिया होगा ताकी यक्षिणी इस कमरे से बाहर ना जा पाए।"

 

युग और कछुआ हैरानी के साथ अभिमन्‍यु की बाते सुन रहे थे।

 

अभिमन्‍यु अपनी बात को आगे जारी रखते हुए कहता है – "यक्षिणी को इस कमरे में बंद करने के बाद वो तीनो धर्म गुरु नीचे गये होगें और उन्‍होने बाहर ताला लगाकर अपनी बली दे दी होगी ताकि यक्षिणी यहीं पर कैद हो जाए मैंने तुझे बताया था ना आत्‍मा को किसी जगह पर कैद करने के लिए बली देनी पड़ती है और उन तीनो धर्म गुरूओ ने भी यही किया होगा।"

 

कछुआ लम्‍बी साँस लेते हुए कहता है – "इसका मतलब यह हुआ कि यक्षिणी अभी भी आजाद नहीं हुई है वो इसी कमरे में इसी दरवाजे के पीछे कैद है, ये तो बहुत अच्‍छी बात है; देख युग तुने ग्रेव्‍यार्ड कोठी खोल दी तो खोल दी पर प्‍लीज ये दरवाजा मत खोलना वरना सब तबाह हो जाएगा।"

 

युग के कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्‍या बोले, दरवाजे पर बंधे ताबिज इस बात की साफ गवाही दे रहे थे कि कछुए की दादी की कहानी सच थी पर युग का मन अभी भी इस बात को मानने से इंकार कर रहा था, उसे अभी भी लग रहा था कि ये सिर्फ अंधविश्‍वास है और कुछ नहीं।

 

अभिमन्‍यु दरवाजे को ऊपर से लेकर नीचे तक अच्‍छे से देख ही रहा था कि तभी उसकी नज़र दरवाजे पर लगी नम्‍बर प्‍लेट पर जाती है और नम्‍बर प्‍लेट को देखकर वो और ज्‍यादा शौक्‍ड हो जाता है। जब अभिमन्‍यु अपना हाथ उस नम्‍बर प्लेट पर फेरता है तो उसे एक बिजली का झटका सा लगता है और वो झट से पीछे हट जाता है।

 

अभिमन्‍यु को पीछे हटते हुए देख युग बौख्लाहट के साथ पूछता है – "अब तुझे क्या हुआ, तू ठीक तो है?"

 

अभिमन्‍यु दरवाजे को घूरते हुए डर के साथ कहता है – "ये कमरा.....ये कमरा शैतान का कमरा है युग!"

 

युग आँखें फाड़ते हुए कहता है – "क्‍या कहा शैतान का कमरा!"

 

अभिमन्‍यु अपने हाथ से दरवाजे की नम्‍बर प्‍लेट की ओर इशारा करते हुए कहता है – "हाँ युग शैतान का कमरा, वो देख ट्रिपल सिक्‍स यानी छः सौ छियासठ इसे शैतान का नम्‍बर कहा जाता है।"

 

"ये क्‍या बकवास कर रहा है अभिमन्‍यु तू कुछ भी मत बोल।"

 

"कुछ भी नहीं बोल रहा हूँ युग, शायद तुझे पता नहीं है पर ईसाई धर्म में इसे मनहुश नम्‍बर माना जाता है इस नम्‍बर के बारे में बाईबल में बताया गया है कि यह शैतान का नंबर है। जो व्‍यक्ति ईश्‍वर की शिक्षाओं को नष्‍ट करने का प्रयास करता है और इस नम्‍बर को अपने पास रखता है उसे इसाई धर्म का विरोधी कहा जाता है; तुझे पता है इस नंबर की मदद से शैतान को बुलाया जाता था और प्राचीन काल के अंदर कुछ दुष्‍ट लोग अपनी इच्‍छाओं को पूरा करने के लिए इस नंबर का प्रयोग करके शैतान को बुलाते थे।"

 

युग अपने चेहरे पर झूठी हँसी लाते हुए कहता है – "तु मजाक कर रहा है ना?"

 

"नहीं युग, मैं मजाक नहीं कर रहा हूँ क्रिश्‍चन धर्म के पवित्र ग्रंथ बाइबल न्‍यू टेस्‍टमैन में शामिल की गई आखिरी किताब “दी बुक ऑफ रिवेलेशन” के तेरहवे (13वें) अध्‍याय में नंबर ट्रिपल सिक्‍स (666) का जिक्र है यह महत्‍वपूर्ण इसलिए है क्‍योंकि इसी ग्रंथ में इस नंबर को दी नंबर ऑफ बीस्‍ट यानी शैतान का नम्‍बर कहा गया है।"

 

युग हैरानी के साथ कहता है – "क्‍या बात कर रहा है!"

 

अभिमन्‍यु अपनी बात को आगे जारी रखते हुए कहता है – "हाँ युग दी बुक ऑफ रिवेलेशन के रहस्‍मय लेखक जॉन की ये किताब 96 ईसा में लिखी गई थी ऐसा माना जाता है, वैसे यह किताब हमेशा से विवादों में रही है पर तुझे पता है इस किताब में पृथ्‍वी के समाप्‍त होने की भविष्‍यवाणी की गई है।"

 

कछुआ डरते हुए कहता है – "क्‍या भविष्‍यवाणी की गई है अभिमन्‍यु जरा बताएगा?"

 

"हाँ बताता हूँ, इसमें बताया गया है कि पृथ्‍वी जब समाप्‍त होगी तो वह वक्‍त बहुत ही भयानक होगा, आसमान से आग के गोले गिरेगें, भयानक नरभक्षी प्राणी जो इंसान का खून पीयेगें, वो पैदा होंगे जो भी थोडी बहुत इंसानीयत बची होगी वह भी शैतानी शक्तियों के हाथों खत्‍म हो जायेगी।"

 

जब अभिमन्‍यु ने ये बात कही तो एक पल के लिए युग और कछुए के आँखों के सामने पृथ्‍वी के समाप्‍त होने का दृश्‍य घटित होने लग गया।

 

अभिमन्‍यु अपनी बात को आगे जारी रखते हुए कहता है – "इसके अनुसार उस वक्‍त शैतानी शक्तियाँ पूरी दुनिया पर हावी होंगी, मुख्‍य रूप से दो शैतान पैदा होगें जिनमें से एक शैतान लोगो को दूसरे शैतान की पूजा करने के लिए प्रेरित और तैयार करेगा।"

 

कछुआ हकलाते हुए कहता है – "तो फिर क्‍या इंसान का अंत हो जाएगा, उसके पास जिन्‍दा रहने का कोई ऊपाय नहीं बचेगा?"

 

"बचेगा कछुआ, किताब के लेखक जॉन के अनुसार अगर किसी को अपने आप को बचाना होगा तो उनके पास दो विकल्‍प होगें पहला या तो उन्‍हे शैतान का नाम या फिर शैतान का नम्‍बर ट्रिपल सिक्‍स यानी छः सौ छियासठ अपनी बॉडी पर गुदवाना पड़ेगा।"

 

युग अपने माथे का पसीना पोंछते हुए कहता है – "अभिमन्‍यु ये सब सिर्फ एक किताब में लिखा है जो एक इंसान ने लिखा होगा, मैं इन चीजो को नहीं मानता।"

 

"तुझे नहीं मानना मत मान युग, तेरे मानने या ना मानने से चीजे झूठी नहीं हो जाएगी, सच को कोई नहीं झूठला सकता, तुझे नहीं पता पर बहुत सारी किताबो में ट्रिपल सिक्‍स को शैतान का नम्‍बर बताया गया है, तुझे पता है ट्रिपल सिक्‍स को हिब्रू भाषा से भी जुडा हुआ माना जाता है।"

 

युग अपना सिर खुजाते हुए कहता है – "अब ये हिब्रू भाषा क्‍या होती है?"

 

" दो हजार (2000) साल पहले हिब्रू भाषा में ही संचार का माध्‍यम था और मूल बाइबल भी हिब्रू भाषा में ही है। हिब्रू में अंक अक्षर के रूप में लिख गये है या फिर हम यह कह सकते है कि हर अक्षर एक अंक के साथ जुडा था। ट्रिपल सिक्‍स भी किसी अक्षर के साथ ही जुड़ा था और इसका युज कोड के रूप में होता था हिब्रू को गेमेत्रिया..."

 

कछुआ बीच में ही अभिमन्‍यु को टोकते हुए कहता है – "अब यार ये गेमेत्रिया क्‍या होता है?"

 

"ग्रेमेत्रिया अक्षरों को अंको में डिकोड करने की एक प्रणाली है। हिब्रू भाषा को गेमेत्रिया से ही पढ़ा जाता है। इसमें अंक एक को ईश्‍वर का नंबर और अपने आप में परिपूर्ण बताया गया है, जिस तरह ईश्‍वर स्‍वंय में पूरे है इसी तरह अंक सात को भी पूरा करने वाला नंबर बताया गया है।"

 

युग हैरानी के साथ पूछता है – "ऐसा क्‍यों, नम्‍बर सात को पूरा क्‍यों माना जाता है।"

 

"क्‍योंकि बाईबल में माना जाता है कि ईश्‍वर ने सात दिनों में सृष्टि की रचना की थी इसलिए सात से ठीक पहले आने वाले नंबर छ: (6) को अधूरा बताया है इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि छठे दिन ही भगवान ने इंसान की रचना की थी और छठे वें दिन ही भगवान की आज्ञा का उल्‍लघंन करने के कारण आदिम और हौव्‍वा उनके प्रकोप का भोजन बनना पड़ा था।" 

 

कछुआ फिर बीच में अभिमन्‍यु को टोकते हुए कहता है – "अब ये आदिम और हौव्‍वा कौन है?"

 

"कछुए इनकी अलग कहानी है वो फिर कभी, अभी तू ट्रिपल सिक्‍स पर फोक्स कर; कहते है आदिम और हौव्‍वा को पाप करने के लिए उकसाने वाला एक साँप था जिसे शैतान का स्‍वरूप माना गया है यह सब सृष्टि के निमार्ण के बाद छठवे दिन हुआ था इसलिए छ: (6) को पाप का यानी शैतान का नम्‍बर माना जाता है। जैसा कि हम सब को पता है यक्षिणी मर्दो के साथ संभोग करके उन्‍हें मार देती है तो हो सकता है वो भी शैतान हो और उसी ने दरवाजे पर यह ट्रिपल सिक्‍स लिखा हो ताकी वो शैतान को बुला सके।"

 

युग अभिमन्‍यु की बात का विरोध करते हुए कहता है – "पर पापा ने कहा था कि यक्षिणी अच्‍छी औरत...."

 

युग ने इतना ही कहा था कि तभी जिस दरवाजे के सामने वो लोग खड़े थे वो दरवाजा अपने आप जोर-जोर से हिलने लग जाता है। दरवाजा इतनी जोर से हिल रहा था कि उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि अंदर से कोई उस पर जोर-जोर से लाते मार रहा हो। दरवाजा हिलता हुआ देख युग अभिमन्‍यु और कछुआ तीनों के होश उड़ गये थे। कछुआ तो डर के मारे काँपने लग गया था।

 

कछुआ डरते हुए कहता है – "देख युग मैंने कहा था ना अंदर यक्षिणी है, देख वो बाहर निकलने के लिए तड़प रही है अब तो तुझे यकीन हो गया ना कि इस कमरे के अंदर यक्षिणी है।"

 

एक पल के लिए तो युग भी दरवाजे को अपने आप हिलता हुआ देखकर डर गया था पर जब उसने खिड़की की तरफ देखा तो तब उसकी जान में जान आयी। 

 

युग अपने हाथ से खिड़की की तरफ इशारा करते हुऐ कछुए से कहता है – "अबे वो देख खिड़की के बाहर मौसम बिगड़ रहा है, ऐसा लग रहा है जैसे तुफान आने वाला है, हो सकता है अंदर वाले कमरे में कोई खिड़की खुली हो उसी से हवा अंदर आई हो और जब दरवाजे से टकराई हो तो ऐसा लगा जैसे कोई ठोक रहा हो, मैं ना तुझे बचपन से जानता हूँ ये ना तेरे काम ना करने के बहाने है काम चोर कहीं का है चल अब ये सब छोड़ और वापस से सफाई करने लग जा।"

 

कछुआ उदास मुँह बनाते हुए कहता है – "नहीं यार मुझसे नहीं हो पाएगा।"

 

"अरे ऐसे कैसे नहीं हो पाएगा, कोई यू.पी.पी.एस.सी. का एक्‍जाम थोड़ी है जो नहीं हो पाएगा, झाडू ही तो लगानी है, एक काम कर यदि तुझे ऊपर की सफाई नहीं करना तो मत कर, जा नीचे जा और हॉल में पोछा लगा देना समझा, ऊपर की सफाई मैं और अभिमन्‍यु कर लेंगे और भूल मत कायर के हिस्‍से का काम भी तुझे ही करना है।"

 

"हाँ जाता हूँ पर पहले वादा कर चाहे कुछ भी हो जाए तू इस दरवाजे को छुएगा भी नहीं और ना ही खोलने की सोचेगा।"

 

युग अपने हाथ जोड़ते हुए कहता है – "हाँ मेरे बाप नहीं खोलूगा, अब तु जा नीचे।"

 

कछुआ झाडू लेकर नीचे चला जाता है। कछुए के जाने के बाद ही अभिमन्‍यु युग से पूछता है – "युग तू यक्षिणी के बारे में कुछ कह रहा था कुछ देर पहले।"

 

"हाँ वो मैं कह रहा था यार तू कैसे कह सकता है कि यह ट्रिपल सिक्‍स यक्षिणी ने बनाया है, तुझे पता है ना पापा ने बताया था कि यक्षिणी एक अच्‍छी औरत थी बस किसी अभिशाप के कारण बुरी बन गयी और मुझे पता है मेरे पापा कभी मुझसे झूठ नहीं बोल सकते और भूल गया उस दिन तू ही तो कह रहा था कि यक्षिणीयाँ दूसरे लोको से आई है जिन्‍हे देवी की तरह पूजा जाता था पहले, अब तू ही बता जिन्‍हे देवी की तरह पूजा जाता था भला वो शैतान का काम क्‍यों करेगी।"

 

युग की बात सुनकर अभिमन्‍यु सोच में डूब जाता है और सोचते हुए कहता है – "यार देखा जाए तो तेरी भी बात ठीक है पर फिर यह ट्रिपल सिक्‍स इस दरवाजे के ऊपर क्‍या कर रहा है और किसने बनाया होगा इसे?"

 

"मुझे पता है ये यहाँ कैसे आया और किसने बनाया होगा।"

 

अभिमन्‍यु हैरानी के साथ पूछता है – "किसने?"

 

"यार भूल गया तुने बताया था कि यह ग्रेव्‍यार्ड कोठी अंग्रेजो के जमाने की है और उन्ही ने बनाई थी।"

 

"हाँ, तो?"

 

"तो भाई, हम सब को पता है अंग्रेज कितने कमीने थे और तेरी यह ट्रिपल सिक्‍स वाली थ्योरी मैं मान भी लू तो हो सकता है कि अंग्रेजो ने ही यह ट्रिपल सिक्‍स बनाया हो शैतान को बुलाने के लिए ताकी वो यहाँ पर अपने इंडिया में जंग जीत सके और राज कर सके, ये अंग्रेज लोग इंडिया पर राज करने के लिए कुछ भी कर सकते थे शैतानो से दोस्‍ती भी।"

 

"वैसे तेरी बात में दम तो है ऐसा हो सकता है।"

 

"ऐसा हो सकता नहीं ऐसा ही हुआ होगा और अब तू ये सब छोड़ और जल्‍दी-जल्‍दी सफाई करने लग बहुत काम है और हाँ इस दरवाजे को रहने दे इसे साफ मत करना गलती से एक ताबीज भी नीचे गिर गया या कुछ हो गया तो कछुआ हम दोनो की जान ले लेगा।"

 

"हाँ ठीक है।"

 

युग और अभिमन्‍यु वापस से ग्रेव्‍यार्ड कोठी की सफाई करनी शुरू कर देते है।

 

रात के आठ बज रहे थे और ग्रेव्‍यार्ड कोठी की सफाई लगभग पूरी हो चुकी थी। बाहर जोरो की बारिश हो रही थी। अब बस हॉल में लगे झूमर की सफाई बची हुई थी। जिसे युग और अभिमन्‍यु ने नीचे ऊतार लिया था और उसकी सफाई कर रहे थे। कछुआ भी वहीं पर था और जमीन पर बैठकर आराम फरमा रहा था।

 

कछुआ झुमर को देखते हुए कहता है – "यार ये झुमर तो बहुत ही अच्‍छा लग रहा है, ऐसा लग रहा है जैसे किसी अनोखी चीज को देख रहा हूँ।"

 

अभिमन्‍यु कछुए की बात का जवाब देते हुए कहता है – "ये अनोखी ही चीज है कछुऐ, ये ऐसा वैसा झूमर नहीं है ये लैम्‍प वाला झुमर है जो आज के जमाने में ना के बराबर मिलता है।"

 

"यार इसकी किमत क्‍या होगी?"

 

अभिमन्‍यु कछुए के साथ मजाक करते हुए कहता है – "क्‍यों, क्‍या तु बेचेगा इसे?"

 

कछुआ अपने चेहरे पर हँसी लाते हुए कहता है – "हाँ बेच दूँगा अगर युग हाँ बोले तो।"

 

कछुए ने इतना ही कहा था कि तभी अचानक से लाईट चले जाती है।

 

अभिमन्‍यु हँसते हुए कहता है – "देख तुने बेचने की बात कही और लाईट चले गयी, ग्रेव्‍यार्ड कोठी का सामान बेचने से पहले यक्षिणी तुझे बेच देगी, भूल मत ये कोठी यक्षिणी की है।"

 

कछुआ डरते हुए कहता है – "ऐसा मत बोल यार, मैं तो मजाक कर रहा था, सॉरी यक्षिणी मैं कुछ नहीं बेचने वाला।"

 

युग उन दोनो को टोकते हुए कहता है – "यार तुम दोनों बाते बंद करो और कोई मोबाईल का टॉर्च ऑन करो और किचन से माचिस लेकर आओ मेरे मोबाईल की बैट्रेरी खत्‍म हो गयी है।"

 

अभिमनयु कहता है – "यार किचन जाने की जरूरत नहीं मेरे पास लाईटर है।"

 

इतना कहकर अभिमन्‍यु अपनी जेब से लाईटर निकालता है और झुमर के अंदर जो नौ दस लैम्‍प लगे हुए थे उन्‍हे जलाने लग जाता है। जब वो लैम्‍प जलते है तो कोठी के अंदर फिर एक बार उजाला हो जाता है। अंधेरे में झुमर पर जलते हुए लैम्‍प और भी आकर्षक लग रहे थे। तभी अचानक से दरवाजा खट खटाने की आवाज आने लग जाती है "खट खट खट।"

 

युग कहता है – "यार तुमने आवाज सुनी।"

 

कछुआ हकलाते हुए कहता है – "हां सुनी।" 

 

अभिमन्‍यु डरते हुए कहता है – "यार ये आवाज तो ऊपर वाले कमरे से आ रही है जहाँ पर यक्षिणी कैद है।"

 

क्रमश..................