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सामाजिक भिक - 2


....... सुनिए जी , शर्मा जी का फोन आया हे ।
केशव बाबू- रुको अभी आया.... बोलिए शर्मा जी , कैसे हो आप सब ....
शर्मा जी- जी हम सब ठीक है केशव बाबू ...मुझे तो बस आपको एक खुश खबर सुनानी थी इसीलिए फोन किया..... अभय को मिनाक्षी बेटी पसंद हे....और हमे भीं !
केशव बाबू- जी ये तो वाकई बहोत ही खुशी की बात हे शर्मा जी हमारे लिए.... सुधा भी इस रिश्ते से बहोत खुश हैं ..... जी अब आप ये भी बता दीजिए , की अगली बैठक कब की जाए..... आगे की बाते भी तो करनी हे.... आप तय करके हमे बता दीजिएगा शर्मा जी।
शर्मा जी- क्या आप भी केशव बाबू, कबसे शर्मा जी शर्मा जि किए जा रहे हे, अब तो हमे संबधी जी कहिए आप..... और रही मिलने की बात , वो तो हम कल ही आ रहे हे भई .... हमे भी अब घर में बहु लाने की जल्दी जो हो गई है...!
केशव बाबू- जी बिल्कुल संबधी जी , आप कभी भी आइए, अब तो ये आप ही का घर हुआ....हम राह देखेंगे आपकी....!
.... सुनती हो सुधा, उन्हें हमारी मिनाक्षी बहोत ही पसंद हे...और वो कल ही आने वाले आगे की बात करने .... सुनो तुम सारी तयारी ठीक से करना,कोई कमी नही रहनी चाहिए ,समझी .... आखिर हमारी मिनू की शादी हे भई....
सुधा- जी बिलकुल समझ गई .. में सब संभाल लूंगी ,आप चिंता मत कीजिए.... पर में क्या कहती हु, एक बार आप मिनाक्षी से बात कर लेते तो ठीक होता जी.....
केशव बाबू- हां सुधा, में अभी मीनू से बात कर लेता हु.... दरअसल मुझे कल ही बात कर लेनी चाहिए थी.... पर पता नही इन सब बातो कि टेंशन में रह ही गया.....में भी ना.....!
......मीनू, ए मीनू कहा हो बिटिया ... कुछ काम कर रही हो बेटा ... मुझे तुमसे थोड़ी बात करनी थी , कल की बात को लेकर....
मीनू- जी कहिए न बाउजी, क्या बात करनी हे आपको ...
केशव बाबू- बेटा अभी शर्मा जी का फोन आया था,उन्हें तुम बहोट पसंद हो,और वो कल आने वाले हे...... मुझे तुमसे कल बात करने का समय ही नहीं मिला, इसीलिए अब पूछ रहा हु , तुम्हे अभय पसंद तो हे ना ....
मीनू - बाउजी मेने आपसे पहले भी कहा हे की में शादी आप ही की मर्जी से करूंगी , तो अब आप मुझसे पूछ क्यों रहे हे....
केशव बाबू- देखो बेटा मुझे और तुम्हारी मां को तो ये रिश्ता बहोत पसंद हे, पर हम दोनो तुम्हारी मर्जी के खिलाफ कुछ नही करना चाहते... इसीलिए पूछ रहा हु हमारी राजकुमारी को वो राजकुमार पसंद तो हे ना... वरना हम कोई और राजकुमार ढूंढ लेंगे....!
मीनू- ( शर्माते हुए) क्या बाऊजी ,आप भी ना..... !
केशव बाबू- शर्मा रही हे हमारी राजकुमारी ... मतलब हम हा समझे ना.....
मीनू- जी हा बाउजी..…!
....... बात की आपने मीनू से? क्या कहा उसने ? उसे अभय पसंद तो हे न?
......... भई एक साथ इतने सवाल ! सांस तो ले लो मीनू कि मां ।
और हा मीनू को भी लड़का पसंद है ,तुम तो है कल की तयारी करो सुधा... !
अगला दिन.....…........
..... सुधा सब तयारी तो ठीक से हो गई ना, वो लोग आते ही होंगे अभी...
.....जी हा ,सब ठीक से हो गया है,बस आप थोड़ी शांति लीजिए....!
....... केशव बाबू हे क्या घर में!
केशव बाबू- अरे आइए आइए संबधी जी, पूछ क्यों रहे हे,अब तो ये आपका ही घर हुआ ना....बैठिए समधन जी.... बैठो बेटा अभय!..... और आपकी यात्रा कैसी रही.... कोई परेशानी तो नहीं आई न?
शर्मा जी- जी हमारी यात्रा तो बड़ी अच्छी रही.....और होती भी क्यों नही भला,बहु से जो मिलने आ रहे थे..... वैसे मिनाक्षी बिटिया हे कहा?
केशव बाबू- उर्मी , जा बेटा जरा अपनी दीदी को बुलवा दे...
मिसेज शर्मा- कैसी हो बेटी?
मिनाक्षी- जी में ठीक हु, आप कैसी है?
मिसेज शर्मा- अब तक तो ठीक नही थी, पर अब तुम आ गई तो ठीक हूं.....
शर्मा जी- देखिए केशव बाबू , हमने तय किया है शादी तो हम हमारे तरफ ही करेंगे... आप चाहो तो सगाई यहां करवा सकते हे।
केशव बाबू- जी हमे तो इस बात से कोई एतराज नहीं..... पर में क्या पूछना चाहता हु शर्मा जी.. वो कुछ लेन देन की बात.....
अभय- ये क्या कह रहे है आप अंकल.... में नए विचारों वाला आदमी
हु... इस दहेज प्रथा मुझे कोई रुची नही.... इस प्रथा के तो में पूरी तरह से खिलाफ हु.... पता नही कितनो की जिंदगी बिगाड़ के रखी हे इस प्रथा ने... !
केशव बाबू- बहोत ही अच्छे विचार है बेटा आपके.... सब लोग अगर आपकी तरह सोचने लगे तो विचारो में क्रांति आ जाए...... वैसे भी में यही कहना था कि में ज्यादा कुछ दे नही सकता बस शादी का खर्चा कर सकता हु ......
मिसेज शर्मा- जी हमे कुछ चाहिए भी नही,सिवाय आपकी बेटी के........ जी मेने पंडित जी से पूछा हे , दो दिन बाद सगाई का मुहूर्त हे.... और पंद्रह दिन बाद शादी का..... अगर आप लोगो को कोई तकलीफ ना हो तो हम दो दिन बाद सगाई की रस्म कर ले तो ठीक रहेगा...!
केशव बाबू- जी ठीक हे.... हमे तो कोई ऐतराज नहीं है...!
शर्मा जी- ठीक ही फिर केशव बाबू मिलते हे सगाई में...………!
.....……जी बिलकुल संबधी जी!


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