Sathiya - 10 in Hindi Fiction Stories by डॉ. शैलजा श्रीवास्तव books and stories PDF | साथिया - 10

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साथिया - 10

शालू साँझ के हॉस्टल से निकली और अपनी स्कूटी लेकर घर की तरफ चल दी। थोड़ी ही दूर चली थी कि स्कूटी बंद कर हो गई।

शालू ने स्कूटी साइड में खड़ी की और चेक करने लगी। पर देखा स्कूटर स्टार्ट नही हुई साथ है वो पंचर भी थी।


". ओह्ह गॉड इसे भी अभी खराब होना था और पंचर भी है...। अब यहां से कहां जाऊं कैसे जाऊं? इधर तो कोई मैकेनिक भी नही है और न कोई ऑटो ही मिल रहा है।" शालू खुद से ही बोले जा रही थी कि तभी उसके पास आकर एक बाइक रुकी।

शालू ने नजर उठाकर देखा तो ईशान खड़ा हुआ था। शालु की ईशान से ऐसी कोई मुलाकात या बातचीत नहीं थी पर वह इतना जानती थीकि वो भी इसी कॉलेज में पढ़ता है और अक्षत का छोटा भाई है।


" डू यू नीड एनी हेल्प ?" ईशान ने कहा तो शालु ने उसकी तरफ देखा।

" यह स्कूटी पंचर हो गई है और स्टार्ट भी नही हो रही। यहां आस-पास कोई मैकेनिक है क्या तो मैं इसे सही करवा लूं क्योंकि यहां पर कोई ऑटो भी नहीं मिल रहा है।" शालू ने परेशान होकर कहा।

" डोंट वरी यहां से 2 किलोमीटर आगे एक मैकेनिक है आप चाहो तो मेरे साथ चल सकती हो।वहां से हम मैकेनिक को लेकर आ जाएंगे?" ईशान बोला तो शालु ने एक नजर उसको देखा और वो समझ नही पाई कि कया करे।


" मैं भी आपके साथ आपकी यूनिवर्सिटी में पढ़ता हूंमैनेजमेंट डिपार्टमेंट में। आप विश्वास कर सकती हो हम एक ही कॉलेज से हैं तो एक दूसरे की हेल्प तो कर ही सकते हैं।" ईशान ने कहा तो शालू झिझकते हुए उसकी बाइक पर पीछे बैठ गई।


तभी वहां से अक्षत और मनु भी निकले।

मनु ने ईशान की बाइक पर शालू को बैठे देखा तो उसने के चेहरे पर शरारती मुस्कान आ गई।

" है राक्षस ...!"मनु जोर से चिल्लाई तो ईशान के साथ-साथ शालू ने भी उसकी तरफ देखा।

" तू तो कह रहा था कि तेरी बाइक पर सिर्फ तेरी गर्लफ्रेंड को बैठने का अधिकार होगा और बाद में तेरी बीवी को फिर आज यह इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की जूनियर लड़की तेरी बाइक पर क्या कर रही है?" मनु बोली और खिलखिला उठी।

अक्षत ने ईशान को देखा और बाइक आगे बढ़ा दी।

" ये भूतनी कभी नहीं सुधर सकती।" ईशान खुद से ही बोला तो वही शालू के चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट आ गई।


"सॉरी यार बस उसकी मजाक करने की आदत है!" ईशान बोला।

" कौन है तुम्हारी फ्रेंड?" शालू बोली ।

" वो बाईक पर मेरा बड़ा भाई था। अक्षत चतुर्वेदी लॉ डिपार्टमेंट से।" ईशान बोला।

" उनको जानती हुं , सुपर सीनियर है वो।" शालू बोली।

" ओर वह मानसी है । मेरे पापा के दोस्त की बेटी है । कहना चाहिए मेरी बहन के जैसी। हमारे साथ हमारे घर पर ही रहती है।" ईशान ने कहा और उसी के साथ बाइक की स्पीड बढ़ा दी।


शालू के चेहरे पर एक क्यूट सी मुस्कुराहट आ गई थी। वैसे भी वह ईशान और अक्षत को थोड़ा बहुत जानती थी और उसने अपने पापा से उसके पापा के बिजनेस के बारे में और बड़े रईस परिवार होने के बारे में काफी कुछ सुन रखा था।

उसके चेहरे पर आई हल्की सी मुस्कुराहट इस समय ईशान ने भी बैक मिरर में देख ली और उसके चेहरे पर भी स्माइल आ गई।


थोड़ी देर में वो लोग मैकेनिक की शॉप पर थे।

ईशान ने मेकेनिक से बात की और और वह शालू की स्कूटी के पास आने के लिए तैयार हो गया।

एक दूसरी बाइक पर मैकेनिक और उसका एक सपोर्टिंग स्टाफ बैठ गया और ईशान की बाइक पर शालू। ओर वापस से दोनों मुड़कर वहां चल दिए जहां पर स्कूटी रखी हुई थी।


" क्या प्राब्लम है मैडम?" उस मेकेनिक ने पूछा।

शालू ने उसे स्कूटी की चाभी पकड़ाई और उसे बताने लगी की स्कूटी ऐसे बीच में बंद हो गई थी।

उसने थोड़ा बहुत देखा और शालु ईशान की तरफ देखा।

" आप कल ले लीजिएगा मैडम।मैं आज दुकान पर ले जाकर रिपेयरिंग कर देता हूं और हां सर्विसिंग की भी जरूरत है शायद।"

" अभी कर दो ना भैया वरना मैं घर कैसे जाऊंगी ? यहां से सिटी दूर है और यहां पर तो कोई कनवेंस भी नहीं मिलता है।" शालु ने कहा।

" तो आप इन्हीं के साथ चली जाइए ना जिनके साथ आप आई थी।" मेकेनिक ने कहा।

" लेकीन?" शालू बोली।

" मै कह रहा हूं ना मैडम जी टाइम लगेगा और आप कब तक बैठी रहोगी। दो-तीन घंटे आप बैठी रहोगी तो फिर आपको जाने में रात हो जाएगी।" मैकेनिक बोला..!

शालू के चेहरे पर टेंशन आ गई।

"शालिनी आप गाड़ी यही छोड़ दो... कल हम आकर यहां से उठा लेंगे ।आपको मैं ड्रॉप कर देता हूं।" ईशान ने कहा तो शालू ने उसकी तरफ देखा।



"पर आप बेवजह ही परेशान होंगे ...! मैं वेट कर लूंगी ना । जब ठीक हो जाएगी तब चली जाऊंगी ।" शालू बोली।


" आपको यूं यहां अकेले छोड़कर तो नही जाउंगा मै। और वह कह रहे हैं ना कि टाइम लगेगा और फिर रात को यहां से निकलोगी और रास्ते में फिर से खराब हो गई तो परेशानी होगी। आप विश्वास कर सकती हो मुझ पर। हम एक ही यूनिवर्सिटी से है मैं आपको सेफली आपके घर ड्रॉप कर दूंगा और कल आपको पिक भी कर लूंगा। फिर यहां मैकेनिक की दुकान से आप स्कूटी उठाकर फिर यूनिवर्सिटी निकल जाना।" ईशान बोला।


शालू के पास कोई दूसरा उपाय भी नहीं था तो वह चुपचाप ईशान के पीछे बैठ गई और उसी के साथ ईशान ने बाईक आगे बढ़ा दी।

दोनों रास्ते भर बातें करते रहे। अपने-अपने क्लास सब्जेक्ट के बारे में अपने घर परिवार के बारे में और थोड़ी बहुत अक्षत और सांझ के बारे में भी।

दोनों को एक दूसरे को जान कर अच्छा लग रहा था।

थोड़ी देर बाद वो लोग शालू के घर के बाहर थे।

ईशान ने बाइक रोकी तो शालू बाइक से उतर गई ।

"थैंक यू इशान आपने आज हेल्प कर दी वरना मैं बहुत परेशान हो जाती!" शालू बोली।

" अब तो हम दोस्त बन गए हैं और दोस्त की हेल्प करने के लिए थैंक यू और सॉरी बोलने की जरूरत नहीं है !" ईशान बोला तो शालू की आंखों में चमक आ गई।


"क्यों गलत बोला क्या मैंने ? दोस्त तो हम बन ही सकते हैं ना?" ईशान ने अपना हाथ आगे करके कहा तो शालू ने उसका हाथ थाम लिया।

" बिल्कुल और तुम्हारे जैसे दोस्त तो हर कोई चाहता है ..!" शालू बोली।

" कल तुम्हें 10:00 बजे आकर पिक करता हूं।" ईशान ने कहा।

" घर चलो चाय पी कर निकल जाना। मम्मी पापा से भी मिल लेना।" शालू बोली।

" फिर कभी आ जाऊंगा। आज देर हो गई है और अब तक तो उस भूतनी ने अच्छा खासा रायता फैला दिया होगा। अब मुझे जाकर सब के सवालों के जवाब देने होगें।" ईशान ने कहा तो शालु ने आंखे छोटी करके देखा ।

क्रमश:

डॉ. शैलजा श्रीवास्तव