Galatee - The Mistake - 54 in Hindi Detective stories by prashant sharma ashk books and stories PDF | गलती : द मिस्टेक  भाग 54

Featured Books
  • ایک لمحے کا یہ سفر

    یہ سفر صرف ایک لمحے کا ہے۔   یہ میرے ساتھی کے ساتھ صرف...

  • Purasra Kitab - 4 - Last Part

    چھ دوست جو گھر سے گھومنے اور انجوائے کرنے کے ارادے سے نکلے ت...

  • Purasra Kitab - 3

    یہ لسی رات آئی تھی اُن دوستوں کی زندگی میں… شاید کالی رات اس...

  • Purasra Kitab - 2

    چھ دوست تھے: رونی، عائشہ، ودیشا، ارینا، کبیر اور ہیمنت۔ یہ س...

  • Purasra Kitab - 1

    جیسا کہ آپ جانتے ہیں ہر انسان کا ایک پَیشن ہوتا ہے کسی کو کہ...

Categories
Share

गलती : द मिस्टेक  भाग 54

ऑफिस पहुंचते ही परमार ने भौमिक से कहा- तो बताइए सर कातिल कौन है ? आपको कैसे पता चला कातिल के बारे में ?

तुम्हें पूरी बात बता दूंगा परमार पहले मैं तुम्हें दिखाना चाहता हूं। एक चेयर लेकर इस ओर आ जाओ। भौमिक ने कहा।

परमार ने एक चेयर ली और भौमिक के पास ही वो चेयर लगा ली और उस पर बैठ गया। भौमिक ने अपने लेपटॉप को ओपन किया और उसमें एक वीडियो चलाने लगा। परमार और भौमिक दोनों की नजरें लैपटॉप पर जम गई थी। वीडियो प्ले हुआ।

हवेली के गेट पर एक कार आकर रूकती है। उसमें से डॉक्टर अविनाश सक्सेना उतरते हैं और उनके पीछे उनकी पत्नी और दोनों बच्चे उतरते हैं। कार को हवेली पर उतरता देख राजन कार की ओर भागता हुआ आता है। डॉक्टर अविनाश जेब से एक खत निकालकर उसकी ओर बढ़ाते हैं। राजन लेटर पढ़ता है और डॉक्टर अविनाश को हवेली में अंदर आने की ओर इशारा करता है और फिर कार से सामान निकालकर हवेली में ले जाता है।

अंदर हवेली में विशाल और उसके दोस्त डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए थे। डॉक्टर अविनाश उन्हें देखता है और फिर अपने कमरे की ओर चला जाता है। फिर विशाल और उसके दोस्त भी अपने कमरे में चले जाते हैं। यहां से भौमिक वीडियो को कुछ आगे बढ़ाता है। करीब दो बजे के समय पर वो वीडियो को लाकर रोक देता है। इस दौरान वीडियो में हवेली के सिवाय कुछ नजर नहीं आ रहा था। विशाल और उसके दोस्तों और डॉक्टर अविनाश और उसके दोस्तों की कोई हरकत उसमें नजर नहीं आ रही थी। 2 बजकर 2 मिनट पर वीडियो में राजन नजर आता है और वो एक बार हवेली का चक्कर लगाकर निकल जाता है। लगभग 2.22 बजे डॉक्टर अविनाश सक्सेना के कमरे में दरवाजा खुलता है और वो बाहर निकलता हुआ नजर आता है। वो इधर-उधर देखता है फिर वो सीढ़ियां उतरकर नीचे की ओर आता है।

नीचे आने के बाद वो विशाल और उसके दोस्तों के कमरे के सामने खड़ा होता है और उनके दरवाजे पर दस्तक देता है। करीब दो मिनट बाद सभी अपने कमरे से बाहर आते हैं। डॉक्टर अविनाश सक्सेना उनसे कुछ बात करता है और फिर सभी वहीं रखी डाइनिंग टेबल पर बैठ जाते हैं। डॉक्टर अविनाश टेबल के चारों ओर घूमते हुए उनसे बात कर रहा था। फिर उसने अपनी जेब में हाथ डाला और कुछ लॉकेट जैसी चीज बाहर निकाली और फिर विशाल और उसके दोस्तों को दिखाने लगा। सभी गौर से उस लॉकेट को देख रहे थे। करीब दो मिनट तक वो उनसे बातें करता रहा और फिर विशाल और उसके दोस्त अपने-अपने कमरे में चले गए।

डॉक्टर अविनाश ने सभी के कमरों को चेक किया और फिर वो लॉकेट जैसी फिर से अपनी जेब में डाली और फिर एक बार हवेली का मुआयना किया और फिर अपने कमरे की ओर चला गया। करीब एक मिनट बाद वो अपने पूरे परिवार के साथ कमरे से बाहर आया। उसने एक बार वो लॉकेट जैसी निकाली और अपने परिवार को दिखाने लगा।

वीडियो देखते हुए परमार ने कहा- सर तो स्टूडेंटस ने हमसे झूठ बोला था ? वे तो कह रहे थे कि वे डॉक्टर अविनाश सक्सेना को जानते ही नहीं है, जबकि वीडियो में नजर आ रहा है कि उन सभी ने डॉक्टर से बात की है। डॉक्टर उन सभी से एक साथ बात कर रहा है।

नहीं विशाल और उसके दोस्तों ने कोई झूठ नहीं कहा है। वे सच में डॉक्टर अविनाश को नहीं जानते थे। वीडियो में जो दिख रहा है वो भी सच है। दरअसल डॉक्टर ने विशाल और उसके दोस्तों से बस ऐसे ही बात की थी, वो भी उन्हें नहीं जानता था। भौमिक ने कहा।

तो फिर इतनी रात को अपने कमरे से निकलकर इन सभी को उनके कमरे से बाहर बुलाकर आखिर डॉक्टर अविनाश ने सभी से क्या बात की थी। परमार ने कहा।

वो भी तुम्हें बताउंगा परमार फिलहाल तुम पहले पूरा वीडियो तो देख लो। भौमिक ने कहा।

क्या वीडियो में कातिल का चेहरा नजर आ गया है? डॉक्टर सक्सेना ने विशाल और उसके दोस्तों से क्या बात की थी ? वो लॉकेट जैसी चीज क्या थी ? डॉक्टर सक्सेना आखिर क्या करना चाह रहा था ? अगर विशाल और उसके दोस्त डॉक्टर से हवेली में मिले थे तो उन्होंने पुलिस से ऐसा क्यों कहा था कि वे उसे जानते भी नहीं हैं ? आखिर क्या है इस कत्ल का राज ? इन सभी सवालों के जवाब आगे कहानी में मिलेंगे, तब तक कहानी से जुड़े रहे, सब्सक्राइब करें और अपनी समीक्षा अवश्य दें व फॉलो करना ना भूले।