Chikni Mitti ki Premika - 4 in Hindi Love Stories by Rajesh Rajesh books and stories PDF | चिकनी मिट्टी की प्रेमिका - भाग 4

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चिकनी मिट्टी की प्रेमिका - भाग 4

राज माया चुड़ैल की दर्द भरी आवाज को सुनकर समझ जाता है कि माया चुड़ैल सच कह रही है, इसलिए वह माया चुड़ैल के दिल में दबे बरसों से दुख के ज्वालामुखी के अलावा को बाहर निकालने के लिए माया चुड़ैल से कहता है "विस्तार से
बताओ तुम्हें मदों से इतनी नफरत क्यों है।"

"ना जाने राज तुम में क्या बात है कि मुझे अपने जीवन की एक-एक बात तुम्हें बताने कि क्यों मेरी बहुत इच्छा हो रही है, इसलिए मैं घर के रास्ते में चलते हुए तुम्हें सब कुछ बताती हूं।"
माया चुड़ैल के कहने से रत्ना राज दोनों माया चुड़ैल के साथ घर के लिए साथ चलने लगते हैं, और माया चुड़ैल पक्के रास्ते की जगह दोनों को कच्चे उबड़-खाबड़ रास्ते से अपने साथ घर लेकर जाती है और मटके में कैद जींद को सीने से लगाकर कहती है "मटके में जो यह जींद कैद है, यह मेरा सच्चा आशिक है, इसने मुझे प्रेम करना सिखाया था वरना मर्दों को तो देखकर मुझे प्रेम शब्द से नफरत होती थी प्यार नहीं 12 बरस की छोटी आयु में मां-बाप की मृत्यु के बाद मैं इस दुनिया में अकेली रह गई थी और 12 वर्ष की आयु से 18 वर्ष की आयु तक दो वक्त की रोटी खिलाकर कम से कम चालीस लोगों ने मेरी इज्जत के साथ खिलवाड़ किया था और मुझे जब अपने जीवन में सुधार होने की उम्मीद दिखाई दी जब रत्ना के पिता ने खूबसूरत पत्नी होने के बावजूद मेरी असलियत जानने के बावजूद मुझे बेसहारा समझ कर मेरे साथ शादी करने का फैसला लिया था, उन दिनों में माता काली की भक्ति में लीन रहती थी, इसलिए श्मशान घाट कि दीवार से लगें काली माता के मंदिर में पूजा करने मेरा रोज आना जाना था, रत्ना के पिता रंजीत की वही अंतिम संस्कार का सामान बेचने की दुकान थी, उन्हीं दिनों रंजीत और मैं एक दूसरे की तरफ आकर्षित हो गए थे, लेकिन मुझे नहीं पता था कि रंजीत उन चालीस लोगों से भी ज्यादा नीछ कामीना धोखेबाज मतलबी निकलेगा।"

माया मां के मुंह से यह बात सुनकर रत्ना चौंक कर माया की तरफ देखती है रत्ना के चेहरे के हाव-भाव देखकर राज के दिल में एक अजीब सी खुशी होता है कि चलो रत्ना का शरीर ही चिकनी मिट्टी का है उसमें दुख सुख प्रेम क्रोध आदि भावनाएं तो उस के अंदर है।

रंजीत को भला-बुरा कह कर माया चुड़ैल चुप हो जाती है, इसलिए राज कहता है "अपनी बात पूरी करो माया क्योंकि तुम्हारे जीवन में मेरा भी कहीं ना कहीं महत्वपूर्ण किरदार रहा है।"

"तो सुनो मैं रंजीत की बेटी के सामने बताती हूं, जिन चालीस लोगों ने मेरा शारीरिक शोषण किया था, तो उन्होंने यह काम वैसी दरिंदे दुष्ट नीछ धोखेबाज चेहरे पर शराफत का मुखौटा लगाकर नहीं किया था, लेकिन रत्ना के पिता रंजीत ने मुझे अपनी प्रेम दीवानी बनकर पैसों के लालच में वेश्या (तवायफ) बना दिया था, मैं रंजीत से कभी भी प्रेम नहीं करती क्योंकि मुझे मर्दों से नफरत थी, लेकिन एक दिन में अपने जीवन से दुखी होकर गहरे सुखे कुएं में पहाड़ी पत्थरों पर सर के बाल गिरकर अपनी जान देने की सोच रही थी, तभी तुम चरवाहे राज मेरे पास से गुजरे अपनी भेड़ बकरियों गाय भैंस आदि जानवरों को लेकर तुमने मुझे दुखी उदास देखकर ना जाने कहां से मिला आपको कस्तूरी इत्र मुझे दे दिया था, कस्तूरी इत्र की सुगंध से आकर्षित होकर मैंने वह सुगंधित कस्तूरी इत्र अपने पूरे शरीर पर छिड़क लिया था और कस्तूरी इत्र की खुशबू चारों तरफ फैलते ही मटके में कैद जींद जोर-जोर से चिल्ला कर बोलने लगा था, मेरी महबूबा मैं तेरा महबूब हूं, मुझे जल्दी मटके से बाहर निकल मैं तेरे जीवन की सारी समस्या हल कर दूंगा, तेरे दुश्मन मेरे होते हुए तेरा बाल भी बांका नहीं कर सकते हैं, मैंने उस समय जींद को तो मटके से बाहर नहीं निकला लेकिन मैं रोज उससे मिलने जाने लगी थी, सूखे कुएं वाले जींद से लगातार मिलने से मुझे उसकी प्रेम भरी बातें सुनकर उससे धीरे-धीरे प्रेम होने लगा था और जब रंजीत ने मुझे धोखा दिया तो मैंने हमेशा के लिए जींद के पास जाने का फैसला ले लिया था, इसलिए मैंने मटका फोड़ कर जींद को मटके से बाहर निकाल दिया था, लेकिन जींद कि अद्भुत शक्ति देखकर मुझे एहसास हुआ कि अगर मुझे जींद कि थोड़ी बहुत भी शक्ति प्राप्त हो जाए तो मैं मर्द जाति से बदला ले सकती हूं और उन्ही दिनों मेरे मन में दुनिया की सबसे बड़ी जादूगरनी बनने का विचार आया था, जादूगरनी बनने के बाद मुझे एक चिकनी मिट्टी के पुतले की जरूरत थी, दुनिया की सबसे शक्तिशाली जादूगरनी बनने के लिए जैसे जीवित चिकनी मिट्टी के पुतले तुम बनाते थे और माता काली ने मेरी मुलाकात तुम से करवा दी थी, मुझे मर्दों से नफरत थी, इसलिए मैंने तुमसे अपना काम निकलवाने के बाद तुम्हारी हत्या कर दी थी, लेकिन तुमने अपनी चालाकी दिखाते हुए अधूरी मूर्ति बनाकर मेरे सारे अरमानों पर पानी फेर दिया था, इसलिए मुझे तुम्हारे पूर्व जन्म में तुम्हारा पीछा करना पड़ा बस यही थी मेरी पूरी जीवनी।" माया चुड़ैल हारी थकि आवाज में कहती है

"नहीं यह तुम्हारी पूरी जीवनी नहीं है, अधूरी जीवनी है, तुमने यह नहीं बताया कि मासूम रत्ना की तुमने हत्या क्यों की थी।" राज पूछता है?

"तूने जो अधूरी मूर्ति बनाई थी, उस मूर्ति का चेहरा मेरे जैसा नहीं बल्कि बच्ची नहीं जवान रत्ना जैसा था, इसलिए मैं उस मूर्ति में चाह कर भी प्रवेश नहीं कर पाई थी और मैं उस अधूरी मूर्ति को किसी भी हालत में नष्ट नहीं करना चाहती थी, क्योंकि मैंने तेरी हत्या कर दी थी और मुझे यकीन था, एक दिन में तुझे ढूंढ कर इस अधूरी मूर्ति को पूरा जरूर करवा लूंगी, चाहे तू पूर्व जन्म में मूर्तिकार हो या ना हो इसलिए मैंने एक वर्ष की रत्ना की हत्या करके उसकी आत्मा को मूर्ति के अंदर प्रवेश करवा दिया था और मैं जिंदा रहकर तुझे नहीं ढूंढ पाती, इसलिए मुझे आत्महत्या करनी पड़ी, रत्ना के पिता की मैंने हत्या नहीं की बल्कि मेरे आशिक जींद ने कि थी, रत्ना की हत्या करके मैंने रत्ना की लाश रत्ना के घर में ही दफन कर दी थी, इस वजह से रत्ना और तुझे मैं रत्ना के घर लेकर जा रही हूं, ताकि रत्ना के ढांचे को निकाल कर उसे जवान सुंदर युवती का रूप दे सकूं और यह काम मैं तेरे बिना नहीं कर सकती हूं।" माया चुड़ैल की यह बात सुनकर रत्ना चक्कर खाकर जमीन पर गिरकर बेहोश हो जाती है।

माया चुड़ैल और राज रत्ना को बड़ी मुश्किल से होश में लाते हैं होश में आने के बाद रत्ना पैदल चलने की हालत में नहीं रहती है, इसलिए राज रत्ना को ऐसे पीठ पर उठा लेता है, जैसे महाराज विक्रम बेताल को अपनी पीठ पर उठते थे और माया चुड़ैल मटके में कैद जींद के मटके को सर पर उठा लेती है, उबड़-खाबड़ कच्चे रास्ते पर अचानक राज का दायां पैर गड्ढे में चला जाने की वजह से राज माया चुड़ैल के ऊपर गिरने लगता है, वैसे भी चुड़ैल जींद के साथ रहने की वजह से उसका शरीर बुखार से तप रहा था, इसलिए वह गड्ढे में दया पैर जाने के बाद अपने को गिरने से संभाल नहीं पता है, राज की पीठ पर चढ़ी हुई रत्ना जमीन पर गिरने से बचने के लिए जैसे ही माया चुड़ैल के कंधे का सहारा लेती है तो उसका दाया हाथ कनी उंगली(छोटी उंगली) कटा हुआ माया चुड़ैल के सर पर रखे जींद के मटके का ढक्कन खोलकर अंदर घुस जाता है, क्योंकि राज माया चुड़ैल से लंबाई में बहुत लंबा था, इसलिए रत्ना का हाथ सीधा माया चुड़ैल के सिर पर रखे मटके के अन्दर चला जाता है, कनी उंगली (छोटी उंगली) कटा हुआ रत्ना का हाथ घुसते ही जींद माया चुड़ैल को छोड़कर रत्ना का दीवाना हो जाता है और रत्ना को छोटे से मटके के अंदर खींचकर मटके के अंदर से गायब हो जाता है। जींद के साथ रत्ना के गायब होने के बाद माया चुड़ैल और राज ठगे से देखते रह जाते हैं।

राज साधारण इंसान था, इसलिए उसके चेहरे पर गहरी उदासी निराशा छा जाती हैं कि अब रत्ना का दोबारा मिलना असंभव है, लेकिन माया चुड़ैल के चेहरे पर उसे अभी भी उम्मीद की किरण दिखाई दे रही थी कि रत्ना हमें दोबारा वापस मिल सकती है, इसलिए राज माया चुड़ैल से कहता है "जो कुछ भी करोगी तुम करोगी मैं तो साधारण मनुष्य हूं।"

"सूर्योदय होने से पहले हमें रत्ना के घर से उसकी हड्डियों का ढांचा निकलना होगा।" माया चुड़ैल कहती है और रत्ना के घर पहुंच कर राज माया चुड़ैल से पता करके कि उसने एक बरस की रत्ना की हत्या करके उसे कहां दफनाया था वहां खुदाई करना शुरू कर देता है और तब तक माया चुड़ैल माता काली की पूजा करने में व्यस्त रहती है जब तक राज खुदाई करके रत्ना का हड्डियों का ढांचा (पिंजर) निकलता है।

रत्ना की हड्डियों का ढांचा देखते ही राज खुशी से माया चुड़ैल से कहता है "मुझे खुदाई खुदाई करते करते रत्ना की हड्डियों का ढांचा दिखाई दे गया है, अब जो करना है जल्दी करो।"

माया चुड़ैल जब तक राज कि कोई भी बात का जवाब नहीं देती है जब तक वह माता काली की पूजा पूरी नहीं कर लेती है और फिर कुछ देर बाद रत्ना की हड्डियों का ढांचा देखकर कहती है "हां यही रत्ना की हड्डियां हैं, अब सब ठीक हो जाएगा, मुझे माता काली ने सब दिखा दिया है कि हम दोनों को क्या-क्या करना है।"

"मुझे भी जल्दी बताओ हमें क्या-क्या करना होगा। राज पूछता है?

"हम दोनों को अपने पिछले जन्म में जाना होगा और तुमने जैसे पिछले जन्म में मुझे उदास देखकर मेरी उदासी खत्म करने के लिए मुझे सुखे कुएं के पास बैठा देखकर कस्तूरी इत्र दिया वैसे ही दोबारा कस्तूरी इत्र देना होगा ताकि मैं जींद को दोबारा मोहित करके अपना दीवाना बना सकूं, मेरे प्रेम जाल में जींद दोबारा फंसकर रत्ना को आजाद कर देगा, लेकिन इस काम में सबसे बड़ा खतरा तुम्हें और रत्ना को है।" माया चुड़ैल बताती है

"मैं रत्ना को पाने के लिए कोई भी खतरा उठाने के लिए तैयार हूं।" राज कहता है

"तुमने मेरी पूरी बात ध्यान से नहीं सुनी मैंने कहा था कि तुम्हारे साथ रत्ना की जान को भी खतरा है।" माया चुड़ैल कहती है

"कैसा खतरा मुझे अच्छी तरह समझओ।" राज पूछता है?

"तुम्हें पता है जिस समय हम जिस घर में बैठे हुए हैं, वह वर्षों से खाली पड़ा हुआ वीरान खंडहर है, यहां दिन रात जंगली जानवर जहरीले कीड़े मकोड़े सांप बिच्छू विशकवरे आदि घूमते फिरते रहते हैं और तुम पिछले जन्म में पहुंचने के बाद मूर्छित हो जाओगे सांप जहरीले कीड़े जंगली जानवर तुम्हारी जान ले सकते हैं और कोई मांसाहारी जानवर रत्ना की सारी हस्तियां (हड्डियां) खा सकता है, मैं भी तुम दोनों की चौकीदारी नहीं कर पाऊंगी, क्योंकि मैं तुम्हारे साथ अपने और तुम्हारे पिछले जन्म में जाऊंगी।"माया चुड़ैल बताती हैं

"वैसे भी रत्ना के बिना मैं चलता फिरता बोलने वाला पुतला रह जाऊंगा, इसलिए मैं पूरी तरह यह खतरा उठाने के लिए तैयार हूं।" राज कहता है

और माया चुड़ैल सूर्योदय होने से पहले ही माता काली की कृपा से राज को अपने साथ लेकर अपने और उसके पिछले जन्म में पहुंच जाती है।

पिछले जन्म में राज दीपू नाम का चरवाहा था और उसने अपने पालतू जानवर चराते हुए दोपहर के 12:00 बजे माया को सूखे कुएं के पास कस्तूरी इत्र दिया था, इसलिए दोनों एक पीपल के पेड़ के ऊपर बैठ कर दोपहर के 12:00 बज ने का इंतजार करते हैं, उसी समय एक बूढ़ा चारवाह राज को अपनी तरफ आता हुआ दिखाई देता है, जैसे ही वह चरवाहा उस पीपल के पेड़ के करीब पहुंचता है, जिस पर माया और राज बैठे हुए थे, तो राज की आंखों में आंसू आ जाते हैं, क्योंकि वह बुजुर्ग चरवाहा उसका पिता था।

पीछे पीछे दीपू यानी इस जन्म का राज अपनी भेड़ बकरियों गाय आदि को चराते हुए चर्च के पादरी के साथ आ रहा था, पादरी साहब ने दीपू उर्फ राज के भेड़ के बच्चे को अपनी गोदी में उठा रखा था, वह भेड़ के बच्चे को अपने बच्चे जैसे प्यार कर रहे थे, भेड़ का बच्चा भी उनको अपने माता-पिता जैसे प्यार कर रहा था, लेकिन राज को एक बात समझ में नहीं आ रही थी कि दीपू ऐसा बर्ताव (व्यवहार) क्यों कर रहा हूं कि जैसे उसे पादरी साहब दिखाई नहीं दे रहे।

फिर पादरी साहब पीपल के पेड़ पर बैठे हुए राज की तरफ देखकर दीपू यानी की राज कि कुर्तों कि जेब में कस्तूरी इत्र चुपचाप डाला कर उसकी भेड़ बकरियों से विपरीत दिशा में चले जाते हैं और भेड़ का छोटा सा बच्चा उनके पीछे कुछ दूर तक दौड़कर वापस लोट आता है।

उन पादरी साहब को कस्तूरी इत्र दीपू यानी राज कि कुर्ते कि जेब में चुपचाप डालते हुए देख कर माया चुड़ैल राज को समझ आ जाता है कि कस्तूरी इत्र राज को कहा से मिला था।

यह सब देखकर राज कहता है "हालेलुया हालेलुया हालेलुया जय मसीह की जय मसीह की जय मसीह की और कुछ देर यीशु मसीह से प्रार्थना करके विनती करता है कि मेरे जीवन में सब अच्छा ही हो मेरे जीवन की सारी उलझने खत्म हो जाए।" राज कि यीशु मसीह की प्रार्थना पूरी होने के बाद माया चुड़ैल पूछती है? "तुम्हें प्रार्थना करते हुए देखकर मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि तुम्हारी वजह से मेरा भी उद्धार हो जाएगा, वैसे तुमने किस भगवान से प्रार्थना कि है।"

"मैंने प्रभु यीशु मसीह से प्रार्थना कि है मैं अपनी पेंटिंग बेचकर जितना भी कमाता हूं, उस कमाई का दसवां हिस्सा चर्च में दान दे देता हूं, ताकि मेरी कमाई का पैसा गरीब बेसहारा मजबूर बीमार लोगों के काम आ सके इस के अलावा में गुड़गांव के शीतला माता मसानी माता मंदिर में दान देता हूं और अनाथ बच्चों वृद्ध आश्रम गरीब लड़कियों की शादी गरीब लोगों का अंतिम संस्कार आदि कार्य करने से मेरे दिल को बहुत सुकून और शांति मिलती है।" राज बताता है

"वाह राज तुम्हें तो मुझे अपने साथ लेकर ही जाना पड़ेगा।" यह कहकर माया चुड़ैल राज का हाथ पकड़ कर अपने साथ हवा में उड़कर सुखे कुएं के पास ले जाती है और सुखे कुएं के पास बैठकर कहती है "दीपू यानी कि तुम मेरी तरफ आ रहे हो अब तुम्हें मुझे देखकर कस्तूरी इत्र देना होगा।"

और जैसे ही 18 वर्ष की खूबसूरत युवती माया कस्तूरी इत्र राज से लेकर अपने शरीर पर छिड़कती है तो जींद सुखे कुएं से बाहर आकर कहता है "मुझसे डरना नहीं मेरी महबूबा मैं आपका पुराना आशिक जींद हूं।"

राज दूर से खड़ा होकर यह सब देख रहा था कि दीपू यानी कि मैं कस्तूरी इत्र माया को देकर कैसे अपनी भेड़ बकरियां आदि जानवरों के साथ मस्ती में झूमता हुआ जा रहा हूं और जींद के साथ माया कैसे सूखे कुएं के अंदर चली गई।

तभी अचानक राज के पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाती है और आज गहरे गड्ढे के अंदर चला जाता है गहरे गड्ढे में गिरते समय राज सोचता है मैं भी कितना पढ़ा लिखा मूर्ख निकला एक चुड़ैल पर इतना विश्वास कर लिया कि जिसकी कीमत मुझे अपनी जान देकर चुकानी पड़ी और यह सोचते सोचते राज को कुछ ही मिनटों के बाद ऐसा महसूस होता है कि तेज बारिश हो रही है और वह बारिश के पानी में पूरी तरह भीग चुका है, जैसे ही वह अपने चेहरे से बारिश का पानी पोंछता है तो उसे ऐसा महसूस होता है कि वह गहरी नींद से सोकर जागा है, लेकिन यह देखकर उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता कि उसके सामने रत्ना खड़ी हुई है, हाथ में पानी से भारा लोटा लिए पानी उसके चेहरे पर छिड़क कर उसे होश में लाने के लिए।

रत्ना को देखकर राज रत्ना को सीने से लगाकर कहता है "आप कहां चली गई थी।"

"अब मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी।" रत्ना यह कहकर अपने अंगूठे में बांस की नुकीली पतली लकड़ी चुभा कर खून निकल कर राज को दिखाकर कहती है "अब मैं चिकन मिट्टी का पुतला नहीं जीवित इंसान हूं और बाहर आपका वफादार नौकर आपके ड्राईवर के साथ गाड़ी लेकर आपको लेने आया है और यह लो अपना मोबाइल आपके मोबाइल से ही मैंने फोन करके उन्हें यहां बुलाया है।"

"मैं जिस रात्रि को अपने जीवन की सबसे भयानक रात्रि समझ रहा था, उस रात्रि ने तो मेरा जीवन ही बदल दिया है, लेकिन मैं यह बात समझ नहीं पाया कि मेरे वफादार नौकर की तो मृत्यु हो गई थी फिर वह जीवित कैसे हैं।" राज पूछता है?

"यह सब माता काली और माया मां की कृपा है।" रत्ना बताती है

"लेकिन माया मां कहां है।" राज पूछता है?
"माया मां हमेशा के लिए हमें छोड़कर जींद के साथ चली गई है, अब हमें उन्हें जीवन भर पवित्र आत्मा या देवी की तरह पूजना होगा।"रत्ना बताती है

और फिर राज अपने घर पहुंच कर रत्ना से धूमधाम से शादी कर लेता है।