Kismat Se Mila Rishta in Hindi Love Stories by सलोनी अग्रवाल books and stories PDF | किस्मत से मिला रिश्ता भाग - 1

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किस्मत से मिला रिश्ता भाग - 1

मुम्बई में,

एक शख्स अपने किसी खास आदमी पर गुस्सा करते हुए कहता है, "मुझे आज के आज मेरी बहन को ढूंढ के निकालो, मैं तुम से कब से कह रहा हु की मुझे मेरी बहन चाहिए तो चाहिए और वो भी सही सलामत समझ आया तुम्हे !"

आज एक बड़ी सी बिल्डिंग में एक शख्स अपनी किंग साइज कुर्सी पर बैठा होता है और सब पर अपना गुस्सा निकल रहा होता है क्योंकि उस की बहन पिछले चार दिनों से गायब होती है।

यह शख्स गुस्से में किसी को बोल रहा होता है, "और अगर तुम यह काम नही कर सके ना तो खुद से ही जहर खा कर मर जाना नहीं तो मैं तुम्हे ऐसी मौत दूंगा की तुम्हारे सात पुस्ते भी जन्म लेने से कतराएंगी, फिर अपना फोन टेबल पर फेंक देता है।"

उस शख्स के बगल में खड़ा उस का पी ए अपने बॉस का गुस्सा देख, वो थर थर कप रहा होता है साथ में अपने बॉस को कुछ कहने लायक तो बिलकुल भी नहीं होता है।

उस शख्स के पी ए का नाम आकाश तिवारी होता है, इस की उम्र 25 वर्ष, और उस की हाइट 5"9 होती हैं। आकाश ही उस शख्स के ऑफिस का सारा काम देखता है।

कोई आदमी, उस शख्स को फोन पर बता रहा होता है, "बॉस आप की बहन का पता चल गया है और वो अभी देहरादून के सिटी हॉस्पिटल में एडमिट होने की खबर मिली है।"

वो शख्स अपने पी ए से बोलता है, "आकाश जल्दी से अभी के अभी देहरादून के लिए जेट तैयार करवाओ, मुझे अभी वहा जाना है।"

4 घंटे के बाद देहरादून में,

आज पहली बार देहरादून के सिटी हॉस्पिटल में, रोज से कुछ ज्यादा ही लोग नजर आ रहे होते हैं क्योंकि आज यहा एक साथ इतनी सारी ब्लैक बीएमडब्ल्यू कार नजर नहीं आई होती है।

आज देहरादून के सिटी हॉस्पिटल के बाहर की तरफ एक साथ 11 ब्लैक बीएमडब्ल्यू कार आती हैं और उन 10 ब्लैक बीएमडब्ल्यू कार में से बहुत सारे ब्लैक ड्रेस पहने बॉडीगार्ड्स बाहर निकलते हैं!

फिर वो सब बॉडीगार्ड्स सिटी हॉस्पिटल की हर जगह को अच्छे से देखने लगते हैं और जब उन सब बॉडीगार्ड्स को लगता है कि कुछ भी गलत या खराब नही है तो वो अपने हेड बॉडीगार्ड को खबर करते हैं।

उस शख्स का हेड बॉडीगार्ड उस से कहता है, "बॉस अब आप बाहर आ सकते हैं सब कुछ हमारे अंडर में है।"

जिसका का नाम राज ठाकरे है, इस की उम्र 27 वर्ष, हाइट 6"3 और रंग गेरुआ पर दिखने में किसी हीरो से कम नहीं लगता है।

राज एक ब्लैक बीएमडब्ल्यू कार के पास जाता है और उस कार का गेट खोलता है जिस में से एक 28 वर्ष का आदमी बाहर निकलता है जिसकी हाइट 6"5 होती हैं और रंग गोरा होता है।

साथ में 6 पैक एब्स और मस्कुलर बॉडी होती है उन की गहरी भूरी आंखो में कोई आसानी से डूब सकता है और जो इन को देख ले तो देखता ही रह जाए।

यह शख्स है हमारे दूसरी फीमेल लीड के बड़े भाई, साथ मे जो है मुंबई के सबसे बड़े दूसरे नंबर के बिजनेसमैन मिस्टर अभय सिंह राजपूत, यह है राजपूत कॉर्पोरेशन कंपनी के सीईओ !

वहा पर खड़े हर इंसान की नजर अब सिर्फ और सिर्फ अभय पर होती है और हो भी क्यों न हमारे दूसरे हीरो किसी से कम थोड़ी ना है, और वहा खड़ी लड़किया, नर्स, फीमेल डॉक्टर्स सब बस अभय को ही देखे जा रही होती है, साथ में वहा खड़े लड़के और मेल डॉक्टर अभय को देख जल भुन रहे होते हैं।

अभय परेशान होते हुए पर अपनी परेशानी न दिखाते हुए अपने वफादार बॉडीगार्ड से पूछता है, "राज, बताओ मुझे तनवी किस रूम में एडमिट है ?"

राज, अपने बॉस के सवाल पर जवाब देता है, "बॉस तनवी मैम को आईसीयू में एडमिट किया हुआ है।"

तनवी सिंह राजपूत, हमारी कहानी की फीमेल लीड है जिन की उम्र 24 वर्ष, हाइट 5"8 होती है और जो दिखने में किसी अफसरा से कम नही होती हैं पर साथ में बहुत घमंडी, नकचड़ी और जिद्दी के साथ में बदतमीज भी होती है उस को जो एक बार में पसंद आ गया वो उस का हो जाता है।

अभय, अपनी बहन तनवी की हर ख्वाहिश पूरी करता है साथ में वो जो भी चाहती है उस को दे देता है क्योंकि अभय, तनवी को कभी भी अपने से दूर नहीं करना चाहता है।

अभय, राज से पूछता है, "क्या हुआ है मेरे बच्चे को (अभय प्यार से तनवी को बच्चा कह कर बुलाता है) जो उस को आईसीयू में रखा हुआ है?"

अभय को बहुत डर लग रहा होता है की उस की बहन आईसीयू में भर्ती है पर वो अपने डर को छुपा लेता है और किसी कोई कुछ नही दिखाता है पर अपनी बहन को जल्द से जल्द किसी भी हाल में देखना चाहता है।

उस के बॉडीगार्ड्स हॉस्पिटल के सब लोगो को एक तरफ करते हुए रास्ता साफ कर रहे होते हैं", बिना किसी भाव के साथ अभय देहरादून के सिटी हॉस्पिटल के अंदर जा रहा होता है और उस के साथ राज और आकाश भी उस के पीछे चल रहे होते हैं।

आकाश, अभय को बता रहा होता है, "बॉस, तनवी मैम को आईसीयू के स्पेशल वार्ड में रखा गया है और जो की सेकंड फ्लोर पर है।"

फिर अभय हॉस्पिटल के सेकंड फ्लोर पर जाने के लिए लिफ्ट की तरफ मुड़ जाता है और राज लिफ्ट का बटन दबाकर उस को खोल देता है फिर पहले अभय और उस के बाद आकाश और राज लिफ्ट में अंदर चले जाते है।

फिर अभय आईसीयू की तरफ जाने लगता है और फिर आईसीयू के गेट के सामने खड़े होकर अपनी बहन को उस गोल शीशे से देखने लगता है।

अभय अपने आप से ही गुस्से में बोले जा रहा होता है, "मुझे समझ नही आ रहा है कि कौन है वो इंसान जिस ने मेरी बहन की ये हालत की है, और अगर वो मुझे मिल जाए तो मै उस को जिंदा ही जमीन में दफन कर दूंगा"

अभय जैसे ही आईसीयू में जाने को होता है की कोई उस को पीछे से आवाज़ देता है।

एक सीनियर डॉक्टर अभय को रोक के बोलती हैं, "रुक जाए मुझे आप से कुछ बात करनी है !"

अभय पीछे मुड के देखता है तो एक सीनियर डाक्टर खड़ी होती हैं, अभी अभय जो अपनी बहन से मिलने के लिए आईसीयू के कमरे में जा ही रहा होता है वो वही रुक जाता है।

अभय अकड़ के साथ उस सीनियर डॉक्टर से कहता है, "बोलो क्या बोलना है तुम्हे?"

सीनियर डॉक्टर, अभय से कहती हैं, "यहां नही क्या हम केबिन में चल कर बात कर सकते हैं ?"

अभय उस सीनियर डॉक्टर से कहता है, "ठीक है चलो।"

सीनियर डॉक्टर के केबिन में,

अभय उस सीनियर डॉक्टर से पूछता है, "हां, अब बोलो क्या बोलना है तुम्हे?"

वो....वो, सीनियर डॉक्टर कुछ बोल ही नहीं पा रही होती है क्योंकि अभय के साथ आकाश और राज भी सीनियर डाक्टर के केबिन में आ गए होते हैं और राज के पास तो गन को देख उस डॉक्टर को बहुत ज्यादा डर लग रहा होता है।

वो सीनियर डॉक्टर अभी भी राज को देख डरे जा रही होती है तो जब अभय और आकाश उस सीनियर डॉक्टर की नज़र का पीछा करते हुए देखते हैं तो उन को पता चलता है कि क्या माजरा है !

अभय गुस्से से उस सीनियर डॉक्टर को बोलता है, "अब तुम बोलोगी भी या राज से के कह कर तुम अभी के अभी ऊपर ही पहुंचवा दू !"

वो सीनियर डाक्टर डर के साथ अभय से कहती हैं, "नही Please ऐसा मत कीजिएगा !"

अभय गुस्से से उस सीनियर डाक्टर को देख कर बोलता है, जो बोलना है जल्दी बोलो वरना !"

वो सीनियर डॉक्टर अभय की बात सुन के घबरा जाती है पर फिर भी अपने डर को कंट्रोल कर अभय से कहती हैं, "मैं अभी जो कुछ आप को बताने जा रही हू उस को आप समझने की कोशिश करिएगा ।"

अभय लगभग उस सीनियर डॉक्टर को डराते हुए कहता है, "तुम कहना क्या चाहती हो? और अगर मेरी बहन को कुछ भी हुआ न तो तुम अपने परिवार की शक्ल तक देखने को नसीब नही होगी, समझ में आया ना तुम को !"

वो सीनियर डॉक्टर, अभय के सामने रोते हुए कहती हैं, "Please ऐसा मत कीजिएगा, इस मे मेरी क्या गलती है कि आप की बहन को अब कुछ भी याद नहीं है।"

अभय, सीनियर डॉक्टर की बात सुन घबरा जाता है, "क्या ? अभी क्या कहा तुम ने ? मेरी बहन को कुछ भी याद नहीं से तुम्हरा क्या मतलब है?"

वो सीनियर डॉक्टर, अभय से कहती हैं, "आप ने सही सुना कि अब आप की बहन को कुछ भी याद नहीं है इस का मतलब है कि उन की याददाश चली गई हैं।"

अभय उस सीनियर डॉक्टर से पूछता है,"अब कब तक मेरी बहन की याददाश वापस आ जायेगी।"

वो सीनियर डॉक्टर लगभग अभय को समझाते हुए कहती हैं, "कुछ कहा नही जा सकता है क्योंकि ऐसे केस में मरीजों की याददाश उन के द्वारा देखे गए पुराने लोगो और उन से जुड़ी बातों पर निर्भर करती है।"

अभय उस सीनियर डॉक्टर से पूछ रहा होता है, "अच्छा, तो फिर भी कितना समय लग सकता है मेरी बहन की याददाश आने मे ।"

अभय की बात सुनने के बाद वो सीनियर डॉक्टर को समझ में ही नही आ रहा होता है कि वो क्या बोले क्योंकि किसी भी व्यक्ति की याददाश आने मे कितना वक्त लगेगा यह तो कोई भी डॉक्टर नहीं बता सकता है ?

तभी उस सीनियर डॉक्टर के केबिन में उस की जूनियर डाक्टर वहा आ जाती हैं और कहती हैं, "मैम वो लड़की को देख कर लगता नही है कि अब एक दम से उस की याददाश आएगी क्योंकि मैंने उस की रिपोर्ट पढ़ी है !"

वो जुनियर डॉक्टर आगे बोलने ही वाली होती है की वो अभय, आकाश और राज को भी अपनी सीनियर डॉक्टर के केबिन में देख लेती है तो कुछ बोल ही नहीं पाती है।

पर उस को पता नहीं होता है कि वहा पर अभय भी बैठा हुआ है और यह सब सुनने के बाद अभय का गुस्सा और बढ़ जाता है।

अभय ने उस जूनियर डाक्टर की बातो को सुन के कहा, "क्या, क्या कहा तुम ने अभी ?"

अभय अब अपनी बहन के लिए परेशान हो रहा होता है, "मेरी बहन की हालात कैसी है और तुम मुझे ठीक से बता क्यों नही रहे हो? और क्या लिखा है मेरी बहन की रिपोर्ट में ?"

वो जूनियर डाक्टर, अभय के डर से हकलाते हुए बोलती है, "वो...वो मेरा मतलब था कि अभी थोड़ा समय तो लग ही जायेगा ना उस लड़की को ठीक होने में क्योंकि उस की याददाश जो चली गई हैं।"

अभय गुस्से में उन डॉक्टर्स को बोलता है, "मुझे नहीं लगता है कि तुम लोगो से मेरी बहन का इलाज ठीक से हो पाएगा और मैं अभी इसी वक्त अपनी बहन को मुंबई लेकर जाऊंगा और वही पर इंडिया के बेस्ट डॉक्टर्स की मदद से अपनी बहन को ठीक कर लूंगा।"

अभय का गुस्सा शांत होने का नाम ही नही ले रहा होता है और वो कहता है, "अब खड़े खड़े मेरा मुंह क्या देख रहे हो जाओ जाके मेरी बहन के डिस्चार्ज पेपर तैयार करवाओ।"

वो सीनियर डॉक्टर के तो अब अभय के सामने खडे होने पर भी पसीने छूट रहे होते हैं, "जी...जी ठी...ठीक है हम डिस्चार्ज पेपर तैयार करवाते है।"

अब अभय गुस्से से उस सीनियर डॉक्टर के केबिन का दरवाज़ा खोलता है और बाहर निकल आईसीयू की तरफ मुड़ जाता हैं फिर अभय के पीछे पीछे आकाश भी जाने लगता है।

राज अपनी गन निकल के उस सीनियर डॉक्टर पर प्वाइंट कर के कहता है, "अगर मेरी तनवी मैम को कुछ हो गया न तो बॉस तो तुम्हे बाद में कुछ करेंगे, पहले तो मैं ही तुम्हारे परिवार को मौत की नीद सुला दूंगा !"

वो जूनियर डाक्टर, राज की बात सुन अपनी सीनियर डॉक्टर से कहती हैं, "मैम यह लोग तो बहुत खतरनाक है, अब हम क्या करे।"

अभय अपनी बहन को देखने के लिए उस आईसीयू के कमरे की तरफ जा ही रहा होता है पर उस को बहुत ज्यादा डर लग रहा होता है और वो किसी को यह दिखाता नही है।


कौन है वो इंसान जिस ने की है अभय की बहन तनवी की ये हालत ? और अब अभय क्या करेगा उस इंसान के मिलने के बाद ? और अब अभय, तनवी की याददाश कैसे वापस लायेगा ?

इस चैप्टर पर रिव्यू देकर और कॉमेंट कर के बताये कि आप लोगो को ये कैसा लगा और आगे जानने के लिए पड़ते रहे मेरी कहानी अगला एपिसोड सिर्फ मातृभारती पर।

"किस्मत से मिला रिश्ता"