MAHAASHAKTI - 16 in Hindi Mythological Stories by Mehul Pasaya books and stories PDF | महाशक्ति - 16

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महाशक्ति - 16

महाशक्ति – एपिसोड 16

"प्रेम का इज़हार"

अनाया अभी भी अचेत अवस्था में पड़ी थी। अर्जुन ने उसकी देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी। दिन-रात उसके पास बैठकर, उसकी सलामती के लिए प्रार्थना करता रहा। अनाया की चोटें गहरी थीं, लेकिन अर्जुन का प्यार और शिवजी की कृपा उसे धीरे-धीरे जीवन की ओर वापस खींच रहे थे।

एक नई शुरुआत

अर्जुन ने मंदिर जाकर शिवजी से अनाया के लिए प्रार्थना की—
"हे महादेव, यदि मेरी भावनाएँ सच्ची हैं, तो अनाया को जल्दी ठीक कर दो। अगर उसे कुछ हो गया, तो मैं खुद को कभी माफ नहीं कर पाऊँगा।"

शिवजी के चरणों में सिर झुकाए अर्जुन को एक दिव्य संकेत मिला। हवा में मंद स्वर गूंजा—
"सच्चे प्रेम का इम्तिहान कठिन होता है, अर्जुन। यह प्रेम केवल एक भावना नहीं, बल्कि आत्मा का मिलन है।"

यह सुनते ही अर्जुन का मन शांत हो गया। जब वह वापस लौटा, तो उसने देखा कि अनाया को होश आ चुका था।

अनाया की आंखों में अर्जुन

अनाया की नजर जैसे ही अर्जुन पर पड़ी, उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। अर्जुन ने राहत की सांस ली और धीरे से उसका हाथ थाम लिया।

"कैसी हो?" अर्जुन ने पूछा।

"अब पहले से बेहतर महसूस कर रही हूँ," अनाया ने धीरे से कहा।

उसकी आवाज में कमजोरी थी, लेकिन उसकी आँखों में एक अलग चमक थी। उसे याद था कि कैसे अर्जुन ने उसे बचाया था, उसकी परवाह की थी।

एक नया एहसास

अर्जुन उसके पास बैठा, लेकिन आज उसकी आँखों में कुछ अलग था। यह सिर्फ चिंता नहीं थी, यह कुछ और था—एक एहसास, जो अब तक उसके अंदर दबा था।

"अनाया, जब तुम्हें चोट लगी थी, मुझे लगा कि मेरी दुनिया ही खत्म हो जाएगी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि किसी की परवाह इतनी गहरी हो सकती है। लेकिन जब तुम्हें खोने का डर आया, तब समझ आया कि… मैं तुमसे प्यार करता हूँ।"

अनाया चौंक गई। उसने अर्जुन की आँखों में देखा—वहाँ कोई झिझक नहीं थी, सिर्फ सच्चाई थी।

"अर्जुन, तुम सच में…?"

"हाँ अनाया, ये सिर्फ एक अहसास नहीं, ये मेरा जीवन है। क्या तुम भी…?"

अनाया का जवाब

अनाया कुछ पल तक शांत रही। फिर उसने अर्जुन का हाथ अपने हाथों में लिया।

"अर्जुन, जब तुम मेरे लिए प्रार्थना कर रहे थे, जब तुमने मुझे बचाया… मैं अचेत अवस्था में थी, लेकिन मुझे तुम्हारी हर बात सुनाई दे रही थी। मैं भी तुम्हारे बिना अधूरी हूँ।"

अर्जुन की आँखों में खुशी के आंसू आ गए।

"तो क्या तुम हमेशा मेरे साथ रहोगी?" अर्जुन ने पूछा।

"हाँ, हमेशा," अनाया ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

शिवजी की कृपा

तभी मंदिर की घंटियाँ अपने आप बजने लगीं, जैसे स्वयं शिवजी ने उनके प्रेम को आशीर्वाद दिया हो। ठंडी हवा चली और अर्जुन और अनाया ने एक-दूसरे की आँखों में देखा। यह प्रेम केवल इस जन्म का नहीं था, यह शिवजी की इच्छा से जुड़ा प्रेम था—जिसका आधार आत्मा थी, न कि केवल मन।

(अगले एपिसोड में – अर्जुन और अनाया के प्रेम के बाद, उनकी जिंदगी में शांति के पल आएंगे। लेकिन क्या ये शांति ज्यादा दिन टिकेगी? जानने के लिए पढ़ते रहिए… 'महाशक्ति'!)

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