Dil ne jise chaha - 12 in Hindi Love Stories by R B Chavda books and stories PDF | दिल ने जिसे चाहा - 12

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दिल ने जिसे चाहा - 12

कैंटीन की उस टेबल पर बैठकर, जब दो लोग खाने की थाली बांटते हैं…
तो सिर्फ खाना नहीं, कुछ अनकही सी बातें भी साथ बंटती हैं…

खाने की थाली आ चुकी थी। गरमागरम पंजाबी सब्ज़ी की खुशबू और नरम फुल्के की भाप में कोई अपना-सा एहसास घुल रहा था। मयूर सर और रुशाली ने खाना शुरू किया। दोनों के बीच वो शुरुआती हिचक अब घुलती जा रही थी, जैसे दो मौसम एक साथ मिलने लगे हों।

मयूर सर (हल्की मुस्कान के साथ):
"अच्छा रुशाली, ये तो बताओ… तुम्हारा फेवरिट फूड क्या है?"

रुशाली (बड़ी मासूमियत से):
"मुझे चाइनीज़ और साउथ इंडियन खाना बहुत पसंद है।"

मयूर सर (हैरानी से):
"अरे वाह… और गुजराती?"

रुशाली (हँसते हुए):
"अरे हम खुद गुजराती हैं, तो गुजराती खाना तो जन्मसिद्ध अधिकार है न सर!"
(और फिर दोनों मुस्कुरा दिए…)

थोड़ा सा वक्त बीता… फिर एक हल्का संकोच लिए रुशाली ने बात छेड़ी —

रुशाली (धीरे से):
"वैसे सर… आपको फिल्में पसंद हैं?"

मयूर सर (सीधा-सा जवाब):
"नहीं… मैं फिल्में नहीं देखता।"

रुशाली (चकित होकर):
"क्या!! मतलब, आपको मूवीज़ पसंद नहीं?"

मयूर सर:
"नहीं। बॉलीवुड तो बिल्कुल नहीं… हॉलीवुड भी कभी-कभार।"

रुशाली (आश्चर्य से):
"मतलब आपने गाने भी नहीं सुने होंगे?"
(वो जैसे अपनी दुनिया का एक बड़ा सच सुनकर दंग रह गई…)

मयूर सर (सिर हिलाते हुए):
"हाँ, नहीं सुनता।"

इतने में रुशाली के खाने में एक तीखी मिर्च आ गई और वो खाँसने लगी। मयूर सर तुरंत पानी की बोतल आगे बढ़ाते हुए बोले —

मयूर सर (थोड़ा डाँटने, थोड़ा हल्के चिंता करते हुए अंदाज़ में):
"जब तुमसे पहली बार मिला था तो लगा था — बड़ी शांत सी हो, कम बोलने वाली...
लेकिन अब लगने लगा है कि... तुम तो काफी बोलती हो..."
(फिर एक पल रुके, और मुस्कुराकर बोले...)
"...ख़ासकर जब सामने वाला चुपचाप सुनता हो तो तुम्हारी बातें और भी ज़्यादा चलती हैं, है ना?"

(रुशाली हँस दी... लेकिन मयूर सर की नज़र थोड़ी देर तक उसी पर ठहरी रही। फिर धीरे से बोले...)
"पर हाँ... इतना बोलते हुए कभी-कभी ध्यान भी रखा करो अपना।

रुशाली (थोड़ा भावुक होकर):
"सर… जिनसे वाइब मिल जाए न, उनके साथ दिल भी खुल जाता है।
और वैसे भी अब आप सिर्फ मेरे सर नहीं, दोस्त भी हैं…
और शायद… family जैसे भी…
तो परिवार से तो बातें होंगी ही।"

(एक क्षण के लिए दोनों चुप हो गए…)

रुशाली (धीरे से):
"और हाँ… मुझे ना, आपके बारे में सब जानना है…"

(यह कहते हुए वो चुप हो गई… जैसे अपने दिल की बात होठों तक आकर रुक गई हो…)

मयूर सर (गहरी नज़र डालते हुए):
"क्या?? सब जानना है मतलब?"

रुशाली (मुस्कुराते हुए):
"मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूँ सर…
आपसे इंस्पिरेशन मिलती है…
(और शायद कुछ और भी…)
इसलिए जानना चाहती हूँ कि आपके पीछे की कहानी क्या है…"

"कुछ रिश्ते अल्फ़ाज़ से नहीं, एहसास से बनते हैं...
जहाँ कोई पूछे बिना ही समझ ले — ‘तुम कौन हो’ और ‘क्यों खास हो’..."

मयूर सर:
"ओह अच्छा…
तो बताओ, अभी तक क्या-क्या जान चुकी हो मेरे बारे में?"

रुशाली (चहकते हुए):
"मुझे पता है कि 19 जुलाई को आपका बर्थडे है…" आपका favourite color black and Navy Blue हैं,  पंजाबी आपका पसंदीदा खाना है! 

मयूर सर (हैरानी से):
"अच्छा!! और बताओ?"

रुशाली:
"फिलहाल तो इतना ही…
लेकिन अगर आप थोड़ा-सा भी बताना शुरू करें —
तो मैं पूरी लाइब्रेरी बना लूँगी।"

(फिर दोनों हँस पड़े…)

मयूर सर (थाली की तरफ इशारा करते हुए):
"फिलहाल खाना खत्म करें?
लंच के बाद बहुत काम बाकी है…
और रही मेरी बात,
तो तुम्हें धीरे-धीरे सब पता चल जाएगा…
वैसे भी, हम साथ हैं —
I mean… साथ काम करते हैं न…"

रुशाली (शरारती अंदाज़ में):
"Okk Dr. Akdu!"
(और दोनों ज़ोर से हँस दिए…)

"हँसी की वो टपकती बूंदें, कभी-कभी दिल के दरवाज़े खोल देती हैं…
और उसी हँसी में छुपा होता है — एक रिश्ता बनने का पहला सुराग…"

रुशाली (थोड़ा गंभीर होकर):
"पर सर…
आपको गाने ज़रूर सुनने चाहिए।
मतलब… बिना गानों के दिल सुना सा हो जाता है…
Emotionless, जैसे कोई किताब बिना कविताओं के।"

मयूर सर (सहजता से मुस्कुराते हुए):
"ठीक है… तुम बताना अपना फेवरिट गाना।
मैं ज़रूर सुनूँगा।
Now happy?"

रुशाली:
"Very happy!" 😇

मयूर सर:
"चलो, अब लंच खत्म करें?"
(थोड़ा गंभीर होकर)

रुशाली (सिर हिलाते हुए):
"जी सर…"

लंच खत्म हो गया।
बर्तन समेटे जा चुके थे।
कैंटीन की भीड़ कम होने लगी थी।
पर दिलों के बीच की बातचीत अभी-अभी शुरू हुई थी।

दोनों उठे और वापिस मयूर सर के केबिन की ओर बढ़ गए।
रास्ता वही था…
पर अब कुछ और चल रहा था — साथ-साथ, चुपचाप, दिल के भीतर…


"कभी किसी की बातें कम लगती हैं…
तो समझ लेना — दिल ज़्यादा जुड़ चुका है।
और जब कोई बिना बोले भी सब समझने लगे…
तो शायद वो इंसान… कुछ खास बन चुका है…"


🔮 और अब…?

क्या वो गाना जो रुशाली सुनवाना चाहती थी — कोई इशारा है?
क्या मयूर सर सच में कुछ महसूस कर रहे हैं — या अब भी वही ‘डॉ. अकड़ू’ हैं?
और क्या रुशाली का दिल अब सिर्फ बातें करना चाहता है…
या किसी जवाब की तलाश भी शुरू हो गई है?

जानने के लिए पढ़िए —
‘दिल ने जिसे चाहा’ — अगला भाग जल्द ही… 💫

Coming Soon 🌸