Manzile - 32 in Hindi Motivational Stories by Neeraj Sharma books and stories PDF | मंजिले - भाग 32

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मंजिले - भाग 32

आसमान मेरी मुठी मे ---------(32 ) मंजिले कहानियो मे -------- मेरी सब से लिखी सुंदर कहानी।

जीवन की कड़िया कभी एक एक कर खोलना, तब ज़ब तुम अकेले हो। सोचना विचारना अब से तब तक तुमने कया ऐसा किया, जो तुम्हे कभी कभी बहुत ही तंग करता है वो पल, जज्बाती मत होना, किसी को बताना नहीं, भेद कोई जाने न, तुम हो उस कमरे मे एक बस क्लॉक की टिक टिक करती समय की गती बस।

फिर सोचना कुछ ऐसे, कि किसी को कुचल कर आगे तो नहीं निकल रहे, कानो की सरसराहट तभी होंगी... हाँ मन तभी मान जायेगा। कि तुम किसको आये हो पीछे छोड़ कर, जो एक ढंग की रोटी भी न खा रहा हो। सोचना कभी तो ------" जिंदगी मे आगे निकलना तो सब का होता है, पर किसी के खाबो की क़ीमत ही तुमने लगा दी हो, तो विचारा कया करेगा, जो कभी खाब वेचने चाहता ही नहीं था। "

जीओ जी भर कर, पर किसी को कुचल कर नहीं, जीतो अगर जीत सकते हो। उसे खरीदो न। फुसफसाहट मत करो, किसी के कान मत भरो, ये वैसा ही है, जैसे हम किसी की कुर्सी छीन रहे हो। मत करो ऐसा कभी, जीत कर देखो उससे आगे जाने तक, पर शार्ट कट राह जल्दी कभी कभार खत्म नहीं होते। समझो, मेरी बात को.... जल्दी कुछ भी नहीं होता, हम कर्मफल मे पड़े हुए, किसी के अच्छे कर्मो को गिन नहीं सकते।

एक बात मेरी गांठ बाध लो, जीवन छोटा हो, लेकिन तनाव के बिना हो। सोचना जरूर। जिंदगी मे कुछ ऐसे काम हम कर जाते है, जो किसी काम की नेकी को भी दबा देते है। तुम कभी सौ नहीं सकते एक अच्छी नींद, जो किये गलत काम अक्सरे मशीन की तरा आँखो के आगे आते रहेंगे। तुम किसी को दबाने की चेष्टा मत करो। दबा कर कया होगा ----- वो तुमाहरे सामने नहीं, पीठ पीछे बोलेगा, ऐसा करना ही कयो है ?

आसमान मेरी मुठी मे ले कर कया करोगे, ये कमजोर लोग उसमे घुट ही गए। हक़ जिसका है उसे दो, जिसका नहीं है उसको दोगे तो कया होगा ---- अराजकता फेल जाएगी, तनाव कभी पीछा नहीं छोड़ेगा.... जिंदगी मे कुल मिला कर सब कुछ खत्म हो जाएगा। कया हम किसी रुतबे के लिए लड़ते है... हाँ बिलकुल। लड़ते वक़्त याद रखो... कोई वो शक्श न डूब जाये, जो कमाने वाला एक है। याद रखना ---- तुम भला कर सकते हो तो खूब करो। पर जैसे हम उसका परिणाम नहीं विचारते, ऐसे ही जिंदगी के कुछ भाग को छोड़ दो। निमरता से चलो, कोई तुझे कुछ भी नहीं कह सकता... आँखो मे ज़ब तक किसी के बीच आँखे डाल कर बात करोगे, तो वो बे खौफता की निशानी होंगी। टूटे हुए को कभी सास देकर देखना, मतलब आपना पन देकर देखना, कितना सकून मिलेगा, शायद तेरे लिए  ये मखमली कमबल से कही गुना हो।

चलो ----- लेकिन कुचलो नहीं। खाब देखो मगर खरीदो मत, हक़ से लड़ो, पर बिगड़ो मत, झूठ आपने आप से मत बोलो, कि तुम सच बोलते हो।

(चलदा ) ---------------------- नीरज शर्मा

शहकोट, जलधर।