Wo jo Mera Tha - 16 in Hindi Love Stories by Neetu Suthar books and stories PDF | वो जो मेरा था - 16

Featured Books
  • मुक्ता....??️ - 6

             6.मला जगायचे आहे.....आ ssss विकास sss अरे विकास sss...

  • ऑपरेशन ब्लॅक ताज - 8

      पावसाचा जोर आता जीवघेणा झाला होता. मुंबईच्या कोस्टल रोडच्य...

  • Mr. Money - भाग 6

    जफर खान आणि शेट्टी भाईच्या अंतानंतर मुंबईच्या गुन्हेगारी जगत...

  • Ruthless Love - 7

    त्या पकडा पकडी मध्ये, तिचा लूज असलेला ड्रेस समोरून पूर्ण खाल...

  • तोतया वारसदार - भाग 59

     तोतया वारसदार पात्र रचना निशांत                      - शोधक...

Categories
Share

वो जो मेरा था - 16

✨ "वो जो मेरा था..."

🌹 एपिसोड – 16



---

शहर की रात, सड़क पर बिखरी पीली लाइटें, और गाड़ी के अंदर पसरी खामोशी—आरव और काव्या दोनों के लिए यह सफ़र आसान नहीं था। रिया का नाम उनके बीच एक ऐसी दीवार बन चुका था, जिसे पार करना अब मुश्किल लग रहा था।

काव्या खिड़की से बाहर देख रही थी। उसके दिल में एक अनजाना डर था। उसे लग रहा था कि कहीं उसकी ज़िंदगी में फिर से वही अँधेरा न उतर आए, जिससे निकलने में उसे सालों लग गए थे।

आरव ने उसकी ओर देखा। उसकी आँखों में बेचैनी साफ़ झलक रही थी।

आरव (धीमे स्वर में): "काव्या… अगर तुम चाहो तो मैं अकेला जा सकता हूँ। मैं तुम्हें किसी पुराने दर्द में नहीं खींचना चाहता।"

काव्या ने उसकी आँखों में देखा। वहाँ सच्चाई और डर दोनों थे।

काव्या: "अगर ये तुम्हारे अतीत का हिस्सा है, तो इसका सामना मैं भी करूँगी। क्योंकि अब तुम्हारा अतीत… मेरा भी हिस्सा है।"

आरव के होंठों पर हल्की मुस्कान आई, लेकिन दिल की धड़कन अब भी तेज़ थी।


---

🏨 रिया से मुलाकात

वे दोनों एक पुराने कैफ़े पहुँचे, जहाँ रिया ने उन्हें बुलाया था। जगह सुनसान थी, सिर्फ़ कोनों में कुछ लोग बैठे थे।

रिया पहले से वहाँ मौजूद थी। उसका चेहरा थका हुआ, आँखें सूजी हुईं और बदहवास सी हालत… उसे देख कर काव्या का दिल काँप गया।

रिया (रोते हुए): "आरव… मुझे माफ़ कर दो। मुझे पता है मैंने तुम्हारे साथ बहुत बुरा किया था, लेकिन इस बार मुझे सच में तुम्हारी मदद चाहिए।"

आरव ने ठंडी साँस ली, लेकिन उसकी आवाज़ सख़्त थी—

आरव: "रिया, जब तुमने मुझे छोड़ा था तब मेरे अंदर जो कुछ टूटा, वो आज तक नहीं जुड़ा। अब अचानक तुम्हारी ये हालत देखकर मैं क्यों तुम्हारी मदद करूँ?"

रिया की आँखों से आँसू झर-झर गिरने लगे।

रिया: "क्योंकि इस बार मैं अकेली नहीं हूँ… मेरे साथ मेरी बेटी भी है।"

काव्या ने चौंक कर उसकी ओर देखा। "बेटी?"

रिया ने काँपते हुए सिर हिलाया। "हाँ, वो सिर्फ़ पाँच साल की है। और उसके पिता… उन्होंने हमें छोड़ दिया है। अब वो मेरी जान के पीछे पड़े हैं। मुझे नहीं पता और कहाँ जाऊँ… इसलिए तुम्हारे पास आई हूँ।"


---

🌩️ रिश्तों की परीक्षा

काव्या के दिल में तूफ़ान मचा था। वो समझ नहीं पा रही थी कि इस स्थिति में क्या करे। सामने एक औरत थी जिसने आरव को तोड़ा था, और आज वही मदद माँग रही थी।

आरव ने काव्या की ओर देखा। उसकी आँखें सवाल पूछ रही थीं—"क्या मुझे मदद करनी चाहिए?"

काव्या ने गहरी साँस ली और धीरे से बोली—

काव्या: "कभी-कभी इंसान की सबसे बड़ी जीत उसके माफ़ करने में होती है। अगर आज तुमने उसकी मदद की, तो शायद तुम्हारा अतीत भी तुम्हें छोड़ दे।"

आरव ने काव्या की बात ध्यान से सुनी और फिर रिया की ओर मुड़ा।

आरव: "ठीक है रिया। मैं मदद करूँगा। लेकिन याद रखना, इसका मतलब ये नहीं कि हम फिर से वैसे हो सकते हैं जैसे पहले थे। अब मेरी ज़िंदगी में काव्या है… और वही मेरी सबकुछ है।"

काव्या का दिल धड़क उठा। उसकी आँखों में आँसू आ गए, लेकिन इस बार वो आँसू अपनापन और सुकून के थे।


---

🕯️ रिया की बेटी

कुछ ही देर बाद रिया अपनी छोटी बेटी को कैफ़े लेकर आई। मासूम-सी बच्ची, जिसकी आँखों में डर साफ़ झलक रहा था। उसने काव्या का हाथ कसकर पकड़ लिया, जैसे उसे किसी सुरक्षित छाँव की तलाश हो।

काव्या का दिल पिघल गया। उसने बच्ची को गोद में उठा लिया।

काव्या (मुस्कुराकर): "डरो मत, अब सब ठीक हो जाएगा।"

बच्ची ने पहली बार मुस्कुरा कर उसकी ओर देखा। उस पल काव्या को लगा जैसे उसकी बाँहों में सिर्फ़ एक बच्ची नहीं, बल्कि मासूमियत का एक टुकड़ा समा गया हो।

आरव उस दृश्य को देख रहा था। उसके दिल में काव्या के लिए सम्मान और भी गहरा हो गया।


---

🕶️ नया खतरा

लेकिन ये सब आसान नहीं था। रिया जिस आदमी से भागकर आई थी, वो बेहद ख़तरनाक था। अगले ही दिन उनकी गाड़ी का पीछा करते हुए कुछ लोग दिखाई दिए।

आरव ने गाड़ी तेज़ कर दी। काव्या ने बच्ची को अपनी गोद में कसकर पकड़ लिया। रिया का चेहरा पसीने से भीग गया।

आरव (दृढ़ स्वर में): "चिंता मत करो। जब तक मैं हूँ, कोई तुम्हें हाथ भी नहीं लगा सकता।"

गाड़ी किसी तरह आरव के फार्महाउस तक पहुँची, जहाँ उन्होंने सबको सुरक्षित रखा। लेकिन अब आरव और काव्या जानते थे कि उनका सामना सीधे खतरे से है।


---

🌙 रात की खामोशी

उस रात काव्या अकेली खिड़की पर बैठी थी। उसका मन उलझा हुआ था। आरव उसके पास आया और धीरे से उसका हाथ थाम लिया।

आरव: "डर रही हो?"

काव्या: "डर तो लग रहा है… लेकिन तुम पर भरोसा भी है।"

आरव ने उसके बालों पर हाथ फेरा।

आरव: "बस यही भरोसा मुझे सबकुछ जीतने की ताकत देता है।"

दोनों खामोश होकर चाँद की ओर देखने लगे। बाहर खतरा मंडरा रहा था, लेकिन उस पल उनकी आँखों में सिर्फ़ प्यार और साथ का यक़ीन था।


---

🌟 एपिसोड 16 समाप्त

👉 एपिसोड 17 में: आरव, काव्या और रिया पर मंडराते खतरे का पहला बड़ा वार… और एक चौंकाने वाला सच सामने आएगा।


---