Inteqam - 33 in Hindi Love Stories by Mamta Meena books and stories PDF | इंतेक़ाम - भाग 33

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इंतेक़ाम - भाग 33

वही रोमी वहीं अस्पताल में रही उसने अपने पिता को भी फोन कर सारा हाल सुना दिया,,,,,

उसके पिता भी विजय के एक्सीडेंट की खबर सुनकर अस्पताल पहुंच गए और डॉक्टरों से दिखावा करते हुए कहने लगे मेरे दामाद को कुछ नहीं होना चाहिए जितना पैसा हो मैं लगा लूंगा लेकिन उसकी हालत ठीक हो जाए बस,,,,,

वही रोमी के कुछ दोस्त भी वहां पहुंच गए थे, लेकिन विजय को तो बस निशा का इंतजार था,,,,

इसी तरह लगभग पांच-छह दिन गुजर गए लेकिन विजय की हालत में नाम मात्र भी सुधार नहीं आया, वह बोलने की कोशिश करता लेकिन जैसे आवाज ही नहीं निकलती थी,,,,

अब तो धीरे-धीरे रोमी भी विजय की इस हालत से परेशान होने लगी,,,,

निशा जब भी अस्पताल आती और विजय से बिना कुछ कहे ही उसकी तरफ देखकर डॉक्टर से बातचीत कर वहां से चले जाती,,,,,

1 दिन रोमी विजय का हाथ पकड़ कर उसे बोलने के लिए कह रही थी, लेकिन विजय की हालत पहले ही बहुत खराब थी इसलिए वह नहीं बोल पा रहा था,,,,

तब रोमी के एक दोस्त ने कहा यार रोमी तुम भी क्यों इस पुतले के पीछे पड़ी हुई हो,,,,,

यह सुनकर रोमी गुस्से में विजय का हाथ जट्टते हुए बोली तुम सही कहते हो डैनी, यह मेरे लायक है ही नहीं और वैसे भी अब मैं इस बेजान पुतले क्या करूंगी भी क्या ,जो सिर्फ देख सकता है लेकिन कुछ कर नहीं सकता, अब तो डॉक्टरों ने भी साफ कह दिया है कि इसका ठीक होना नामुमकिन है,,,,,

यह सुनकर विजय की आंखों में आंसू बरस पड़े की एक निशा है जिसने उसे अपनी जान से ज्यादा चाहा था और एक यह है रोमी है जिसे उसकी कोई परवाह ही नहीं है,,,,

आज उसे एहसास हो रहा था कि जैसा उसने कभी निशा के साथ किया था वही रोमी उसके साथ कर रही थी, निशा भी तो उसे जी जान से चाहती थी लेकिन उसने उसकी परवाह नहीं थी वैसे ही आज ऐसी हालत में होते हुए रोमी भी उसकी परवाह नहीं कर रही थी,,,,,

तब डैनी ने कहा यार रोमी मैं तो तुझ पर अपनी जान भी देता हूं, अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें अपनाने के लिए तैयार हूं,,,,

यह सुनकर रोमी उसके गले लगते हुए बोली डैनी डार्लिंग मैं तो कब से ही तुम्हारी हो चुकी हूं, सब तरह से बस अब लोगों के सामने होना बाकी है और वैसे भी अब यह मेरे कुछ काम का तो रहा नहीं,,,,,

उस समय अगर कोई यह बात सुनता तो हर किसी का खून खोल उड़ता की जिस व्यक्ति जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहा है उसी की बीवी उसके यार के साथ इश्क लड़ा रही है, लेकिन विजय चुपचाप रोने के सिवा और कुछ नहीं कर सकता था,,,,,

तभी डैनी ने रोमी का हाथ पकड़ा और कहा चलो डार्लिंग,,,,

तब रोमी बोली वह तो ठीक है लेकिन पापा क्या बोलेंगे,,, 

तभी अचानक रोमी के पापा अंदर आ गए और बोले रोमी माय चाइल्ड मैं तो तुमसे ही कहने वाला था कि अब इस बेजान पुतले का क्या करोगी, चाहे हम इस पर पानी की तरह हम इस पर पैसे बहा दे लेकिन इसका कुछ नहीं हो सकता और डैनी डैनी तो मेरे दोस्त का बेटा है, मैंने तो पहले ही तुमसे इससे शादी करने के लिए बोला था लेकिन तुम ही इस दो टके के आदमी में पता नहीं क्या देखा कि इस पर फिदा हो गई,,,,,,

यह सुनकर अब विजय का मन कर रहा था जैसे वह मर जाए इन लोगों के लिए उसने अपना हंसता खेलता परिवार दाव पर लगा दिया, आज वही लोग उसके लिए ऐसी बातें कर रहे है जिस रोमी के लिए उसने अपनी निशा को छोड़ दिया जिस रोमी के पिता के कारोबार को संभालने के लिए उसने दिन-रात लगा दिए, वे लोग अब दो शब्द भी सहानुभूति के उस उसे नहीं बोल सकते थे,,,,,

  विजय कुछ कहना चाहता, तभी रोमिं बोल पड़ी माफ करना विजय डार्लिंग हमारा और तुम्हारा साथ यहीं तक था चलो डैनी, चलो डैड,,,,,

यह बोल कर वह अपने पिता और डैनी के साथ चली गई, निशा जो दरवाजे की ओट में से सब सुन रही थी, उसे रोमी पर बहुत गुस्सा आ रहा था ,लेकिन वह उस रोमी से क्या बोले जिससे पहले ही उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी थी वह अब विजय को ऐसी हालत में छोड़ दे इसमें कोई हैरानी की बात तो थी नहीं और विजय विजय ने भी तो उसके लिए उसे छोड़ा था,,,,,

यह सोचते हो निशा की आंखें भर आई ,लेकिन अब इस समय वह सिर्फ विजय पर पूरा ध्यान देना चाहती थी,,,,