फिर बादल उठा और ज़ेबा के करीब जाकर बोला, " ज़ेबा हम आपका दर्द सह तो नहीं कर सकते लेकीन आपके साथ हुये जुल्म और सीतम का इंतकाम जरुर ले सकते है. ज़ेबा आज मैं कसम खाता हूँ के आपके साथ और हमारी अवाम के साथ हैवानीयत करनेवाले इस कमीने और उसके साथीयों को उनके अंजाम तक मै जरुर पंहुचाकर ही दम लूँगा. इसके लीये चाहे मुझे फ़ना क्यों ना होना पड़े." तभी ज़ेबा ने बादल के मुंह पर हाथ रख दिया और वह बोली, " नहीं बादल, आपको हमारे लीये जीना है. फ़ना तो उन लोगों को होना है जो जीने के काबील नहीं है." फिर बादल ने ज़ेबा को अपनी आगोश में ले लीया और बोला, " हाँ ज़ेबा हमें तो अब और जीना है और अपने लीये जीना है. जब आप मेरे साथ हो तो मे कीसी से भी लड़ लूँगा बस मुझे आपका साथ चाहीये ज़िन्दगी भर का." फिर ज़ेबा बादल का चेहरा अपने हाथों में लेकर बोली, " हाँ मेरे सरताज हम हमेशा ही आपके रहेंगे जब तक इस जीस्म में जान है तबतक. आज आपसे मीलने के बाद पहली दफा हमें जींदा होने का अहसास हो रहा है. हमें अपने इस जीस्म में रूह होने का अहसास हो रहा है. यह वादा रहा आपसे के हम भी आपकी ख़ातिर जीयेंगे." फिर बादल ने ज़ेबा को अपने गले से लगाकर गोद में उठा लीया. तभी बादल दर्द से कराहा तो अम्मी बोली, " हाँ हाँ बेटा, लेकीन पहले कंधे का घाव भरने तो दो."
फिर यकायक ज़ेबा संगीन हो गयी और बोली, " बादल हमें अब अपने मकसद को पूरा करने के काम पर लगना है." फिर बादल बोला, “ कौन सा मकसद." ज़ेबा बोली, " हमारे इंतकाम का मकसद और इसके लीये हमें फिर से जुदा होना होगा." फिर बादल बोला, “ यह क्या बोल रही हो ज़ेबा अभी तो आप हमें साथ रहने की बात कर रहे थे और अभी जुदा होने की बात कर रहे हो.” तभी अम्मी बोली, " हाँ बेटी, आप यह क्या कह रही हो. आप हमें इतनी मुश्किल और ख़ुदा के करम से वापस मीली हो और आप फिर से जुदा होने की बात कर रहे हो." फिर ज़ेबा बोली, " हाँ अम्मी हम सही कह रहे है. हम दोनों यहाँ बैठकर उतने सारे लोगों का सामना नहीं कर सकते है और इस तरह हम अपना इंतकाम भी पूरा नहीं कर सकते है. इसके लीये हमें यहाँ से बाहर नीकलना पड़ेगा और उन लोगों के बीच रहकर उनका खात्मा करना होगा." फिर अम्मी डरते हुए बोली, “ बेटी आपने हमें आपके साथ हुयी हैवानीयत के बारे में बताया तो आप फिर से उनके पास जाओगी तो वह फिर आपके साथ वैसी ही हैवानीयत करेंगे. एक औरत हु ना तो औरत का दर्द क्या होता है एक औरत ही जान सकती है. वह एक मर्द का दिया हुआ दर्द हो या फिर दस दरिंदो का दिया हुआ दर्द हो. वह दर्द एक औरत को हमेशा से ही नागवार होता और तुम हो के वह दर्द सहने के लीये फिर जाना चाहती हो.”
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फिर ज़ेबा बोली, " अम्मी आपका डर और आपकी फ़िक्र जायज है लेकीन हमें वहाँ जाना ही पड़ेगा." फिर बादल बोला, हाँ ज़ेबा अम्मी ठीक कह रही है. आपके साथ इससे पहले जो भी हुआ हो इससे मुझे कुछ लेना देना नहीं है. आप आज भी मेरे लीये पहले की तरह ही पाक पवीत्र हो. इसके बाद आपकी तरफ कोई भी ऐसी वैसी नजर से देखे यह मुझे और मेरे ज़मीर को गवारा नहीं होगा. आपको छूना तो बहोत दूर अगर कोई ऐसा करने की जुर्रत भी करेगा तो मै उसका हात क्या उसकी गर्दन काट दूंगा.” फिर ज़ेबा बोली, “ बादल अब ऐसा नहीं होगा मै आप दोनों को वादा करती हूँ के अब आगे ऐसा नहीं होगा." तब अम्मी बीच में बोली, “ बेटी आप कैसे यह कह सकती हो के आपके साथ अब वह दरींदे पहले के जैसी हैवानीयत नहीं करेंगे. अरे बेटी औरत का जीस्म इन हवस से भरे जानवरों के लीये हमेशा नया और ताजा होता है. आज एक जानवर इसे नोचेगा तो कल दूसरा जानवर इसे नया और ताजा समझकर नोचेगा. बेटा इस जहाँन में तो ऐसे जानवर भी है जो सड़े गले जीस्म को भी नोचने से नहीं चुकते है. उनके लीये वह जींदा हो या मुर्दा उनको तो नोचना है बस और कुछ नहीं. यह जानवर जींदा औरतो के साथ उनकी मुर्दा लाशों को भी नोचने से घबराते नहीं है. उन्हें बस उनकी हवस मीटानी होती है बेटा. आप जान बुझकर उस जहन्नुम में मत जाईये मेरी आपसे गुज़ारिश है.”
फिर ज़ेबा बोलती है, “ अम्मी हम जानते है वह औरताना दर्द क्या होता है. हमारी तक़दीर में यह दर्द तो इस खौफ़नाक तरीके से आ गया के हम इसके लीये अभी तैयार भी नहीं थे. लेकिन हमारी तक़दीर ने वह दर्द हमें दिया और उसे सहने की ताकद भी दे दी. अम्मी आप कह रही हो यह बात १०१% सही है. ऐसा मेरे साथ या किसी भी लड़की औरत के साथ होगा. लेकिन अम्मी हम अभी यूँ ही घर में छिपकर बैठे रहे तो वह दरींदे आज न कल हमें ढूंडते हुए यहाँ पहुँच जायेंगे. फिर आप चाहो या न चाहो यह दरिंदगी वह हमसे क्या तो आपसे भी करने से नहीं चुकेंगे. अम्मी आजकल के यह दरिन्दे अभी कुछ ज्यादा ही नयी सोंच के हो गये है. इन्हें आज औरत के जीस्म से ज्यादा धन दौलत प्यारी लगने लगी है. आपने जैसे कहा की हर मर्द को औरत का जीस्म हमेशा नया लगता है. लेकिन एकबार या दसबार उसके जीस्म के साथ खिलवाड़ करने के बाद वह उसे बोझ लगने लगता है. उसे फिर चाहिये होता है नया और ताजा जीस्म नोचने के लीये. अम्मी यह बात मुझे आपके सामने नहीं करनी चाहिये लेकिन मेरी मज़बूरी है. अम्मी मै उनके लीये अभी वहीँ मरा हुआ जीस्म हूँ जीसको उन्होंने कई बार नोचा है और आज वह उब गये है मुझसे. आज उनको मेरे जरीये अपना मकसद पूरा करना है. अपना मकसद पूरा करने के लीये वह मुझे उनके दुश्मन के बीस्तर में भेजने से भी नहीं कतरायेंगे और अगर उन्हें मै किसी काम की नहीं लगूंगी तो वह मेरा क़त्ल भी कर देंगे लेकिन मुझे इस बात के लीये नहीं छोड़ेंगे की मै उनकी हवस मीटाने का सामान हूँ. अम्मी यह जीस्म जैसे मेरी कमजोरी है उस ही तरह यह मेरी ताकद भी है जो किसी भी शैतान का ईमान हिला सकता है. अम्मी उन्होंने मेरे जीस्म को हवस मीटाने के लीये इस्तेमाल किया आज मै उनको उनके अंजाम तक पहुँचाने के लीये इसका इस्तेमाल करूँगी."
शेष अगले भाग में.
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