शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ान
भाग 4: “छाया का षड्यंत्र”
[दृश्य 1 – नगर का उत्सव, रात्रि]
नगर के मुख्य चौक में रोशनी, संगीत और भीड़। लोग जीत के जश्न में झूम रहे हैं। मंच पर वल्चर की विजय के पोस्टर लगे हैं। अर्जुन दूर छाया में खड़ा है। उसके पास उसकी सहकर्मी और गुप्त प्रेम मीरा खड़ी है।
मीरा (उत्साहित):
“वल्चर ने हमारा शहर बचा लिया। काश मैं उसे सामने से देख पाती।”
अर्जुन (मुस्कान दबाते हुए):
“अगर मिल भी गया… तो शायद वह साधारण इंसान ही निकले।”
मीरा:
“नहीं… वह साधारण नहीं हो सकता। उसकी उड़ान में कुछ अपना-सा लगता है।”
अर्जुन की आँखें भर आती हैं।
[दृश्य 2 – नए खलनायक का आगमन]
भीड़ के ऊपर आकाश काला पड़ जाता है। बिजली कड़कती है। धुएँ के बीच से एक आकृति उतरती है—मायावी। उसका शरीर दर्पण-सा चमकीला, चेहरा नक़ाब में छिपा।
मायावी (गूँजती आवाज़):
“जिसे तुम रक्षक समझते हो… वही तुम्हारा विनाशक है।”
भीड़ में हलचल मच जाती है।
[दृश्य 3 – षड्यंत्र का आरंभ]
मायावी हवा में हाथ घुमाता है। चारों ओर भ्रम के दृश्य उभरते हैं—वल्चर के हाथों से इमारत गिरती हुई, लोगों को चोट लगती हुई दिखती है। यह सब झूठे प्रक्षेपण हैं।
भीड़ (चिल्लाते हुए):
“वल्चर हत्यारा है!”
“वह हम पर हमला कर रहा है!”
मीरा भयभीत होकर पीछे हटती है।
मीरा:
“नहीं… यह सच नहीं हो सकता…”
अर्जुन भीतर से टूटता है।
[दृश्य 4 – वल्चर का प्रकट होना]
अर्जुन छाया से निकलकर आकाश में उड़ान भरता है। वह वल्चर बनकर मंच के सामने उतरता है। धूल का गुबार उठता है।
वल्चर:
“यह छल है! मैं निर्दोष हूँ!”
मायावी (हँसते हुए):
“सत्य वही जो लोग देखें…
और आज वे तेरा पतन देख रहे हैं।”
[दृश्य 5 – भीड़ के बीच युद्ध]
मायावी दर्पण-सी आकृतियाँ रचता है। वल्चर उन पर वार करता है, पर हर प्रहार खाली जाता है। भीड़ को लगता है कि वल्चर ही इमारतें तोड़ रहा है। लोग पत्थर फेंकते हैं। पुलिस निशाना साधती है।
मीरा (आँसुओं में):
“क्यों… अगर तुम रक्षक थे तो यह सब क्यों?”
वल्चर की उड़ान लड़खड़ाती है।
वल्चर (स्वगत):
“मेरी पहचान मेरा सबसे बड़ा शत्रु बन गई…”
[दृश्य 6 – शिखर युद्ध]
मायावी ठोस रूप लेकर वल्चर पर प्रहार करता है। दोनों आकाश में टकराते हैं। बिजली-सी गति, पंखों और दर्पण-जैसी धारों का टकराव। टकराव से काँच-सी चिंगारियाँ उड़ती हैं। वल्चर गोता लगाकर पलटवार करता है। मायावी उसके पंखों में भ्रम की शृंखलाएँ बाँध देता है।
मायावी:
“तेरी शक्ति रक्त से बनी है…
मेरी शक्ति विश्वास तोड़ती है।”
वल्चर छटपटाता है, पर जाल से निकल नहीं पाता।
[दृश्य 7 – मीरा का भ्रम]
मायावी मीरा के सामने वल्चर का विकृत रूप दिखाता है—खूनी आँखें, राक्षसी चेहरा।
मायावी (मीरा से):
“यही है तुम्हारा नायक।”
मीरा पीछे हटती है।
मीरा:
“दूर रहो… तुम राक्षस हो!”
वल्चर की आँखों में दर्द उतर आता है।
वल्चर (धीमे स्वर में):
“काश तुम सच जान पातीं…”
[दृश्य 8 – पराजय]
मायावी अपनी अंतिम शक्ति मुक्त करता है। वल्चर आकाश से गिरकर मंच पर आ टकराता है। पंख टूटे हुए, साँसें उखड़ी हुई। चारों ओर कैमरों की चमक।
मायावी (विजयी स्वर में):
“आज से शहर का शत्रु घोषित…
वल्चर!”
भीड़ जयकार नहीं, घृणा में शोर मचाती है।
[दृश्य 9 – नायक का पतन]
वल्चर घायल अवस्था में उठने की कोशिश करता है। पुलिस आगे बढ़ती है। मीरा दूर खड़ी काँप रही है।
मीरा (स्वगत):
“अगर यह राक्षस है… तो मेरा दिल क्यों रो रहा है?”
वल्चर अंतिम बार मीरा की ओर देखता है, फिर अँधेरे में उड़कर भाग जाता है।
[दृश्य 10 – खलनायक की विजय]
मायावी धुएँ में खड़ा शहर को देखता है।
मायावी:
“नायक को गिराने के लिए तलवार नहीं चाहिए…
बस सच को मोड़ देना काफ़ी है।”
आकाश में काला बादल छा जाता है। शहर भय और भ्रम के साये में डूब जाता है।