inteqam, chapter-42 in Hindi Love Stories by Mamta Meena books and stories PDF | इंतेक़ाम - भाग 42

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इंतेक़ाम - भाग 42

अस्पताल से निशा को लगभग 34 दिन के बाद छुट्टी दे दी गई संगीता अब हर वक्त उसके साथ रहकर उसका पूरा ख्याल रखती थी,,,,

निशा के दोनों बच्चे भी अब अपनी मम्मा को ज्यादा परेशान नहीं करते शायद बेशक स्थिति को समझ रहे थे,,,

वही विजय को भी छुट्टी मिल चुकी थी जब विजय की मां ने यह खबर सुनी तो वह रोते हुए विजय से कहने लगी बेटा तुम न  यह क्या किया,,,,

तब विजय अपनी मां से बोला मां मैं निशा के लिए अपनी जान भी दे सकता हूं, बहुत प्यार करता हूं मैं निशा से,,,,

यह कहते हुए उसकी आंखों में आंसू आ गए तो उसकी मां ने उस उसके आंसू पहुंचे और कहां बेटा अब तुम आराम करो डॉक्टर ने तुम्हें ज्यादा बोलने के लिए मना किया है,,,,

सुनील दत्त अब विजय के इलाज का पूरा खर्च उठा रहा था और उसका पूरी तरह देखभाल भी करता, वहीं दूसरी तरफ संगीता निशा की पूरी तरह देखभाल करती,,,,,

इसी तरह 5 महीने निकल गए, अब विजय और निशा की हालत में काफी सुधार आ चुका था लेकिन निशा अभी नहीं जान पाई थी कि उसे किडनी किसने टोनेट की है,,,,

जब एक दिन सुनील दत्त और संगीता वहां थी तो आखिर में निशा ने उसे अपनी कसम देकर पूछ लिया कि उन्हें किडनी किस ने डोनेट की है,,,,

यह सुनकर सुनील दत्त ने कहा तुम्हें है तुम्हारे सवालों का जवाब कुछ ही देर में मिल जाएगा और यह कहकर वहां से चला गया,,,,

फिर कुछ देर बाद वह आया उसे आए देखकर निशा ने फिर पूछा कि भैया बताओ,,,,

तब सुनील दत्त और संगीता ने एक दूसरे की तरफ देखा और कहा निशा तुम्हें किडनी विजय ने दी है,,,,

यह सुनकर निशा का मुंह खुला का खुला ही रह गया, तब सुनील दत्त ने कहा मेरी बहन मैंने तुमसे बहुत कहा कि विजय को अब अपनी गलती का एहसास है वह तुमसे बहुत प्यार करता है लेकिन तुम्हें मेरी बातों पर विश्वास नहीं हुआ तुम्हें यही लगता था कि विजय शायद अब भी तुम्हें पैसों के लिए ही प्यार करता है लेकिन उसने अपनी जान की परवाह न करके तुम्हारी जान बचाने की सोची,,,,,,

यह सुनकर निशा की आंखों में आंसू आ गए और बह रोते हुए बोली सन्नो में एक बार विजय से मिलना चाहती हूं मैंने उन्हें बहुत दुख दिया है मैं अपने किए पर माफी मांगना चाहती हूं,,,,,,

यह सुनकर  सुनील दत्त बोले निशा आप बहुत देर हो चुकी है डॉक्टर ने तुम्हें तो बचा लिया लेकिन विजय को नहीं बचा,,,,

  यह सुनकर निशा के जैसे पैरों तले की जमीन खिसक गई और बह फूट-फूट कर रोने लगी और भगवान को कहने लगी कि उसकी जान चली जाती लेकिन उसका विजय बच जाता,,,,

आज उसे अपनी गलती का एहसास हो रहा था कि विजय न चाहे उसके साथ गलत किया था लेकिन जब विजय को उसकी गलती का एहसास था तो उसे उन्हें माफ कर देना चाहिए था, उसने हमेशा ही है क्यों सोचा कि विजय सिर्फ पैसों से प्यार करता है आज उसकी जान बचाते हुए उसके विजय ने अपनी जान दे दी,,,,,

यह सोचते हुए निशा फूट-फूट कर रोने लगी, तभी अचानक किसी ने उसे बाहे पकड़कर उठाया और उसके आंसू पहुंचे उसने देखा कि सामने विजय था,,,,

विजय को देखकर निशा हैरान रह गई ,तब सुनील दत्त ने कहा निशा तुम्हें तुम्हारी भूल और अपने प्यार का एहसास दिलाने के लिए मेरी बहन मुझे झूठ बोलना पड़ा मुझे माफ कर दो,,,,

यह सुना था कि  निशा विजय के गले लग कर फूट फूट कर रो पड़ी, विजय भी निशा को गले लगाकर फूट-फूटकर रो पड़ा दोनों ने अपने किए पर एक दूसरे से माफी मांगी,,,,

उन्हें एक साथ देख कर सन्नो और सुनील दत्त भी बहुत खुश थे ,उनकी आंखों में भी आंसू आ गए,,,,,

फिर विजय दुल्हन की तरह निशा को विदा कराकर अपने घर वापस ले आया,,,,

विजय आज अपनी निशा और अपने बच्चों को देखकर बहुत खुश था, वही उसकी मां भी अपने पूरे परिवार को एक साथ देख कर बहुत खुश थी,,,,,

दूसरे दिन माता रानी का आशीर्वाद लेने के लिए विजय और निशा मंदिर गए निशा मंदिर मैं पूजा के लिए प्रसाद लेने दुकान पर चली गई और विजय वही मंदिर के एक कोने में खड़ा रहकर निशा का इंतजार करने लगा,,,,

तभी अचानक किसी ने पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखा वह अच्छे से देख पाता उससे पहले कोई लड़की उसके गले लग गई,,,,