Machine ka Dil - 3 in Hindi Love Stories by shishi books and stories PDF | मशीन का दिल - 3

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मशीन का दिल - 3

"इसी बीच, एक दिन जब शि‍शी फ्री फायर खेल रही थी, तभी उसे सक्का का मैसेज आया, 'ऑनलाइन आओ, तुम्हें कुछ दिखाना है।' शि‍शी ने जवाब दिया, 'मैं अभी आती हूँ।'"

शि‍शी ऑनलाइन आई और इंतज़ार किया, सक्का ने उसे कुछ तस्वीरें दिखाईं। उसने देखा कि वे रिज़ा की तस्वीरें थीं और उनके साथ एक और औरत भी थी।"

"शि‍शी ने पूछा, 'यह क्या है?' सक्का ने बताया कि ये वही तस्वीरें हैं जिनका तुम्हें इतनी बेसब्री से इंतज़ार था। शि‍शी चुप होकर सुनने लगी। सक्का ने बताया कि उसने रिज़ा का सच पता लगाने के लिए उसकी मम्मी को वीडियो कॉल किया था। दरअसल, सक्का और रिज़ा दोनों भाई ही थे। उसने उन दोनों की तस्वीरें दिखाईं और आंटी ने सक्का को रिज़ा और उसकी पत्नी की तस्वीरें भेजीं।"

"शि‍शी ने वे सारी तस्वीरें देखीं, पहले तो उसे गुस्सा आया। लेकिन बाद में वह हंस पड़ी। पहली बात, वह इसलिए हंसी क्योंकि उसके अंदर की सारी उलझनें मिट गई थीं और उसे सुकून मिला। दूसरी बात, वह इसलिए हंसी क्योंकि रिज़ा की पत्नी ज्यादा सुंदर नहीं थी और 'मोती सांड' जैसी दिखती थी। तो शि‍शी ने उसी वक्त बोला, 'अरे, यह तो मोटी सांड है??' 😅😂 सक्का भी इस बात पर हंस पड़ा। 😂😅"

"अब सक्का उसे रोज़ प्रपोज़ करता था, लेकिन शि‍शी देखना चाहती थी कि रिज़ा उसे खुद सच बताने वाला है या फिर शि‍शी उससे कुछ पूछे। शि‍शी ने सोचा कि वह बहुत होशियार है, क्योंकि सक्का ने पहले भी वह एक फोटो शि‍शी को दिखाई थी जब रिज़ा उससे बात करता था, और उसने बड़ी सफाई से उस फोटो वाली औरत को अपनी बहन बता दिया था। अब दूसरी बार उसे वही सेम फोटो मिली थी, जो उसी औरत की थी।

शि‍शी ने रिज़ा से फिर से बात की और उससे पूछा, 'अब तुम क्या कहना चाहोगे?' उसने जवाब दिया, 'तुम सक्का से बात करती हो?'—वह सवाल को पलट रहा था। शि‍शी ने पूछा, 'कौन है यह औरत?' रिज़ा ने फिर से वही कहा कि वह उसकी बहन है।

शि‍शी ने सोचा कि वह देखती है कि वह आगे क्या करेगा। वैसे भी शि‍शी को जो धोखा मिला था, उसे उसका बदला भी लेना था। शि‍शी ने तय किया कि वह एक इंडिपेंडेंट (आत्मनिर्भर) लड़की बनेग।" 

"शि‍शी ने सक्का को मना कर दिया कि वह उससे प्यार नहीं करती, लेकिन सक्का ने शि‍शी से कहा कि वह उससे बहुत ज्यादा प्यार करता है। शि‍शी ने उसे समझाने की पूरी कोशिश की, जबकि वह चाहती थी कि वह अब सक्का को 'हाँ' बोल दे, लेकिन उसने ऐसा न करके अपने दिल पर पत्थर रखकर उसे 'ना' कह दिया।

सक्का ने शि‍शी से कहा, 'तुम भले ही अभी ना बोल दो, लेकिन मैं तुम्हारा इंतज़ार करता रहूँगा। तुम्हारे लिए मेरे दिल के दरवाज़े हमेशा खुले रहेंगे।'

शि‍शी ने ऑनलाइन दुनिया से ऑफलाइन हो जाने का फैसला किया। अब वह एक इंडिपेंडेंट (आत्मनिर्भर) लड़की बनने की राह पर निकल चुकी थी। उसने अपनी मेहनत के दम पर एक टीचर की जॉब करनी शुरू कर दी। वह पार्ट-टाइम जॉब्स, टीचिंग जॉब और ट्यूशंस में भी स्टूडेंट्स को पढ़ाया करती थी। उसकी लाइफ अच्छी चल रही थी। उसने एक बार अपने फोन की तरफ नज़रें घुमाईं और उन सब पुरानी बातों को याद किया। फिर उसने देखा कि ट्यूशन से बच्चों की छुट्टी करने का टाइम हो गया है।" 

"एक दिन उसकी टीचिंग जॉब के लिए असम (Assam) में ट्रांसफर हो गया। वह बहुत हैरान रह गई थी कि उसका ट्रांसफर वहां हुआ जहां वह कभी मुड़कर देखना भी नहीं चाहती थी। शि‍शी घबराने वालों में से नहीं थी, उसने अपनी लाइफ में बहुत कुछ देखा था और अब वह एक इंडिपेंडेंट (आत्मनिर्भर) लड़की थी, इसलिए उसने वहां ट्रांसफर के लिए 'हाँ' कर दी।

इन सब दिनों में शि‍शी के साथ जो हुआ और जो हो रहा था, उसे वह खुद की एक डायरी बनाकर रोज़ उसमें लिखती थी। अब उसने सुबह की ट्रेन पकड़ी और असम के लिए रवाना हो गई। वहां वह एक दिन के लिए होटल में रुकी और अपना सामान सेफ जगह रखकर अपने लिए घर खरीदने (Buy करने) के लिए गई। किसी ने बताया कि यहां उसे एक अच्छा घर आसानी से मिल जाएगा।

शि‍शी ने बहुत से घर देखे, लेकिन वहां का माहौल अच्छा न होने की वजह से नहीं खरीदा, पर एक घर जो बहुत बड़ा, सिंपल और व्हाइट कलर (सफेद रंग) का था, वह बहुत अच्छा था और वहां का माहौल भी बहुत प्यारा था। वह एक सेफ जगह थी और वहां से स्कूल भी थोड़ी ही दूरी पर था। उसने वह घर खरीदा और वहां शिफ्ट हो गई।

शि‍शी ने घर की साफ-सफाई की, कुछ देर आराम किया और किचन सेटअप न होने की वजह से बाहर से खाना लाई। रात होने पर वह खाना खाकर सो गई, क्योंकि सुबह जल्दी उठकर स्कूल भी पहुंचना था और वह पहले दिन लेट नहीं होना चाहती थी। सुबह उसने साड़ी पहनी और वह बहुत ज्यादा सुंदर दिख रही थी। वह एक यंग टीचर थी, जो बहुत अच्छी और समझदार थी। बच्चे भी उसे बहुत पसंद करते थे। उसने फ्री फायर (Free Fire) गेम खेलना बंद नहीं किया था, वह रोज़ गेम खेलती थी। और जो बच्चे पढ़ाई में कमज़ोर थे, उनके लिए वह एक्स्ट्रा क्लासेस भी लगाया करती थी।"