The Mafia Weakness - 1 in Hindi Love Stories by Goyal Khushi books and stories PDF | The Mafia Weakness - 1

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The Mafia Weakness - 1


शहर की रफ़्तार थम चुकी थी, लेकिन आसमान अपनी पूरी ताकत से गरज रहा था। रात के 11 बज रहे थे। ऐशा अपने भारी बैग को कंधे पर टांगे, कॉलेज की एक्स्ट्रा क्लास खत्म कर घर की ओर तेज़ कदमों से बढ़ रही थी। बारिश इतनी तेज़ थी कि छाता भी जवाब दे रहा था। उसके चेहरे पर पड़ती ठंडी बूंदें उसे बार-बार याद दिला रही थीं कि उसे आज देर नहीं करनी चाहिए थी।
वह जिस शॉर्टकट गली से गुज़र रही थी, वह दिन में भी डरावनी लगती थी और इस तूफानी रात में तो वह किसी कब्रगाह जैसी खामोश थी। अचानक, गली के नुक्कड़ पर लगी पीली स्ट्रीट लाइट टिमटिमा कर बुझ गई। ऐशा के कदम ठिठक गए। उसे महसूस हुआ कि सन्नाटे में उसके अपने जूतों की आवाज़ के अलावा भी कुछ है... एक और धड़कन, एक और सांस।
उसने पीछे मुड़कर देखा। कुछ नहीं था, सिर्फ अँधेरा।
"सिर्फ तुम्हारा वहम है ऐशा, जल्दी चलो," उसने खुद को तसल्ली दी। लेकिन जैसे ही वह मुड़ी, एक साया उसके बिल्कुल सामने खड़ा था। वह कोई साया नहीं, एक जीती-जागती मौत जैसा इंसान था।
"ख़तरा..."
वह आवाज़ इतनी भारी और ठंडी थी कि ऐशा के शरीर का खून जैसे जम गया। उसकी चीख गले में ही दब कर रह गई। सामने खड़ा शख्स लंबा था, उसका कंधा इतना चौड़ा था कि उसने पूरी गली का रास्ता रोक रखा था। काले ओवरकोट में ढका वह आदमी बारिश में पूरी तरह भीगा हुआ था, लेकिन उसकी आँखों में कोई शिकन नहीं थी। सिर्फ एक जानलेवा स्थिरता थी।
अर्मान खान।
ऐशा ने उसका नाम सुना था—शहर के अंधेरे कोनों में गूँजने वाला एक ऐसा नाम जिससे कानून भी कतराता था। उसे 'पत्थर का इंसान' कहा जाता था।
"त-तुम... कौन हो? मुझे जाने दो!" ऐशा की आवाज़ कांप रही थी। उसने भागने के लिए दाईं ओर कदम बढ़ाया, लेकिन तभी अँधेरे से चार और लंबे-चौड़े आदमी (गार्ड्स) बाहर निकल आए। उन्होंने घेरा बना लिया था। भागने का हर रास्ता बंद हो चुका था।
अर्मान ने एक धीमी चाल चली। उसके जूतों की आवाज़ पानी में छपाक-छपाक कर रही थी, जो ऐशा के लिए किसी डरावने संगीत जैसी थी। वह उसके इतने करीब आ गया कि ऐशा को उसके सिगार और ठंडी बारिश की मिली-जुली महक आने लगी।
"अब तुम कहीं नहीं जा सकती, ऐशा," अर्मान ने उसका नाम इस तरह लिया जैसे वह उसे सालों से जानता हो।
"तुम मेरा नाम कैसे जानते हो? मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? मैंने... मैंने कुछ नहीं देखा!" ऐशा चिल्लाई, उसकी आँखों में आँसू और बारिश का पानी मिल चुके थे।
अर्मान ने अपना हाथ उठाया और ऐशा के भीगे हुए बालों की एक लट को उसके चेहरे से हटाया। उसकी उंगलियां बर्फ जैसी ठंडी थीं, लेकिन उनका स्पर्श ऐशा के शरीर में बिजली की तरह दौड़ा। यह डर था या कुछ और, वह समझ नहीं पा रही थी।
"झूठ," अर्मान ने फुसफुसाया। "तुम्हारी आँखें गवाही दे रही हैं कि तुमने उस गोदाम में जो देखा, वह तुम्हारी मौत का वारंट हो सकता है। मेरी दुनिया में गवाहों की उम्र बहुत कम होती है।"
ऐशा का दिल डूबने लगा। वह समझ गई कि कॉलेज से लौटते वक्त उसने जिस 'हादसे' को दूर से देखा था, वह कोई मामूली लड़ाई नहीं थी। वह अर्मान खान का कोई काला धंधा था।
"मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगी, मैं वादा करती हूँ! बस मुझे घर जाने दो, मेरी माँ इंतज़ार कर रही होगी," ऐशा ने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते हुए कहा।
अर्मान के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आई। उसने ऐशा की कलाई को अपनी फौलादी पकड़ में लिया और उसे अपनी ओर खींचा। ऐशा सीधे उसके सीने से जा टकराई।
"घर? अब तुम्हारा कोई घर नहीं है। आज से तुम्हारी दुनिया, तुम्हारी सांसें और तुम्हारी किस्मत... सब मुझ पर खत्म होती हैं। तुम मेरी कैदी हो, और शायद मेरी सबसे कीमती संपत्ति भी।"
ऐशा ने उसे धक्का देने की कोशिश की, "तुम पागल हो! तुम मुझे जबरदस्ती नहीं रख सकते!"
अर्मान ने उसकी पकड़ और मजबूत कर दी, उसकी आँखों में एक अजीब सा जुनून (Possessiveness) था। "मैं जो चाहता हूँ, उसे हासिल कर लेता हूँ। याद रखना ऐशा, मैं तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन भी बन सकता हूँ जो तुम्हारी ज़िंदगी नर्क बना दे... और तुम्हारा वह रक्षक (Protector) भी, जिसके साये में मौत भी तुम्हें छू नहीं पाएगी। चुनाव तुम्हारा है।"
बारिश और तेज़ हो गई। बिजली कड़की और उस रोशनी में ऐशा ने अर्मान के चेहरे पर वह जुनून देखा जिसे देखकर वह कांप उठी। उसे अहसास हुआ कि यह अपहरण सिर्फ उसकी खामोशी के लिए नहीं था। अर्मान की आँखों में कुछ और था—एक डार्क रोमांस, एक ऐसी चाहत जो किसी को तबाह करने की ताकत रखती थी।
अर्मान ने अपने गार्ड्स को इशारा किया। एक काली लैंबोर्गिनी गली के मुहाने पर आकर रुकी।
"गाड़ी में बैठो," अर्मान का आदेश पत्थर की लकीर जैसा था।
ऐशा जानती थी कि अगर वह आज इस गाड़ी में बैठ गई, तो कॉलेज वाली वह मासूम ऐशा हमेशा के लिए मर जाएगी। लेकिन अर्मान की आँखों का सम्मोहन और उसके पीछे खड़े बंदूकों वाले आदमी उसे कोई और रास्ता नहीं दे रहे थे।
वह कांपते कदमों से गाड़ी की ओर बढ़ी। पीछे से अर्मान की ठंडी आवाज़ फिर गूँजी, "स्वागत है मेरी दुनिया में, मिसेज खान बनने की तैयारी कर लो।"
ऐशा रुकी, मुड़कर देखा, और उसकी रूह कांप गई। यह रात सिर्फ उसकी ज़िंदगी नहीं, उसकी पहचान बदलने वाली थी।
अगले भाग के लिए हिंट (Next Chapter Hook):
क्या अर्मान ऐशा को अपने महल में कैद कर लेगा? और क्या होगा जब ऐशा को पता चलेगा कि उसे उठाना सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि अर्मान का एक पुराना बदला था