एपिसोड 1 - "तक्ष का रहस्य और आसमान से गिरी आफ़त"
दृश्य 1: साल 3020 - तक्ष महानगर
भविष्य का स्वर्ग... तक्ष! एक ऐसा राज्य जहाँ इंसानियत ने अपनी गलतियों से सीख ली थी। यहाँ की गगनचुंबी इमारतें ठंडे कांच और स्टील की तो थीं, लेकिन उनके चारों ओर विशाल पेड़ों की शाखाएं लिपटी रहती थीं। उड़न-खटोलों (Hover-cars) के शोर के बीच भी यहाँ पक्षियों की चहचहाहट सुनी जा सकती थी। इस यूटोपिया (Utopia) की कमान 'पांच सुप्रीम' लीडर्स के हाथों में थी।
लेकिन हर खूबसूरत दुनिया के पीछे कुछ काले राज़ होते हैं।
तक्ष के बाहरी इलाके में रहने वाला विराज सिंघानिया एक अनाथ था। उसे अपनी पहचान नहीं पता थी, लेकिन उसकी रगों में एक अजीब सी ऊर्जा बहती थी। वह तक्ष के उन गिने-चुने लोगों में था जो अगर किसी पेड़ पर हाथ रख दे, तो उसकी झड़ती पत्तियां फिर से हरी हो जाती थीं।
दृश्य 2: तारा की लैब
शहर के बीचों-बीच, तारा अपनी हाई-टेक लैब में खड़ी थी। वह तक्ष की सबसे होनहार युवा वैज्ञानिक थी। उसके चारों ओर नीले रंग की होलोग्राफिक स्क्रीन्स (Holographic Screens) हवा में तैर रही थीं। तारा की भृकुटी तनी हुई थी और उसकी नज़रें एक लाल रडार पर थीं।
"यह कोई आम उल्कापिंड नहीं है..." तारा ने अपनी स्मार्ट-वॉच पर कुछ कमांड टाइप करते हुए खुद से कहा, "इसकी गति (Speed) और दिशा बार-बार बदल रही है। जैसे... जैसे इसे कोई कंट्रोल कर रहा हो!"
तभी लैब का ऑटोमैटिक दरवाज़ा 'हिश' की आवाज़ के साथ खुला। विराज अपनी उसी बेफ़िक्र मुस्कान के साथ अंदर दाखिल हुआ।
"कब तक इन नीली स्क्रीन्स के मैट्रिक्स में उलझी रहोगी, तारा?" विराज ने पास रखे एक रोबोटिक आर्म को छेड़ते हुए कहा। "बाहर देखो, हवा में आज एक अलग ही खुशबू है। मेरे साथ राइडिंग पर चलोगी या इस उल्कापिंड से बातें करती रहोगी?"
तारा ने बिना पलक झपकाए कहा, "अगर यह उल्कापिंड तक्ष से टकरा गया विराज, तो बाहर न हवा बचेगी और न ही खुशबू। यह सीधा हमारे दक्षिणी ध्रुव (South Pole) की तरफ बढ़ रहा है।"
दृश्य 3: कपूर इंडस्ट्रीज़ का लालच
वहीं दूसरी तरफ, बादलों को चीरती 'कपूर इंडस्ट्रीज़' की सबसे ऊंची इमारत के टॉप फ्लोर पर अलग ही खेल चल रहा था।
अधिराज कपूर—सबसे शक्तिशाली सुप्रीम लीडर का बेटा—कांच की विशाल दीवार के पार शहर को ऐसे देख रहा था जैसे यह उसका कोई खिलौना हो। उसका सूट उसके गुरूर की तरह ही महंगा था। प्रकृति उसके लिए बस एक संसाधन (Resource) थी, जिसे निचोड़ कर उसे पैसा बनाना था।
"मेरी एक्सकैवेशन टीम को तुरंत तक्ष के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) की बर्फीली खाइयों में भेजो," अधिराज ने अपने मैनेजर पर चिल्लाते हुए कहा। "मुझे वहां छिपे हुए दुर्लभ मिनरल्स हर हाल में चाहिए। अगर रास्ते में कोई जंगल या जानवर आए, तो उन्हें जला कर राख कर दो!"
तभी कमरे का दरवाज़ा खुला। उसका पर्सनल असिस्टेंट हांफता हुआ अंदर आया। "सर... आपके पिता... सुप्रीम लीडर... उनकी हालत अचानक बहुत बिगड़ गई है। उन्होंने आपको तुरंत महल बुलाया है।"
अधिराज के होठों पर एक ठंडी, शैतानी मुस्कान तैर गई। 'तो आख़िरकार तक्ष का इकलौता राजा बनने का वक़्त आ ही गया,' उसने सोचा।
दृश्य 4: मौत के बिस्तर पर एक गहरा राज़
सुप्रीम लीडर के कक्ष में मशीनों की 'बीप-बीप' की आवाज़ गूंज रही थी। बिस्तर पर लेटे अधिराज के पिता की सांसें टूट रही थीं।
अधिराज ने पास जाकर घुटने टेके और अपने चेहरे पर झूठा दुख लाते हुए बोला, "पिताजी, आप चिंता मत कीजिये। आपके जाने के बाद तक्ष और इन पांच सुप्रीम्स की गद्दी को मैं पूरी ताकत से संभाल लूंगा।"
बूढ़े पिता ने अपनी कांपती उँगलियों से अधिराज का कॉलर पकड़ लिया। उनकी आँखों में बेबसी थी। "नहीं... अधिराज... तुम तक्ष को बर्बाद कर दोगे। गद्दी तुम्हारी नहीं है।"
अधिराज की मुस्कान गायब हो गई। "क्या मतलब?"
"तुम्हें... तुम्हें अपने बड़े भाई को ढूंढना होगा," पिता ने खांसते हुए एक ऐसा राज़ उगला जिसने अधिराज की दुनिया हिला दी। "बरसों पहले वो खो गया था... उसकी रगों में मेरा खून है। वही मेरा असली वारिस है... तक्ष का अगला सुप्रीम वही बनेगा।"
यह कहते ही मॉनिटर पर एक सीधी लाइन खिंच गई। पिता की मौत हो चुकी थी।
कमरे में खामोशी छा गई, जो अगले ही पल अधिराज के खूंखार अट्टहास (हंसी) में बदल गई। उसने अपने पिता के मृत शरीर को घृणा से देखा और अपने सबसे खास आदमियों को बुलाया।
"सुप्रीम लीडर की मौत की खबर अभी बाहर नहीं जानी चाहिए," अधिराज ने दाँत पीसते हुए आदेश दिया। "और तक्ष का कोना-कोना छान मारो! जहाँ भी मेरा वो तथाकथित बड़ा भाई मिले... उसे वहीं खत्म कर दो। जब तक वो ज़िंदा है, मेरे सिर पर ताज नहीं सज सकता।"
दृश्य 5: आसमान से गिरी आफ़त
शाम का गहरा रंग आसमान पर छा रहा था। विराज और तारा अपने होवर-बाइक्स पर शहर की सीमा से बाहर एक उफनती नदी के किनारे खड़े थे।
तभी अचानक, तारा की स्मार्ट-वॉच तेज़ी से लाल रंग में चमकने लगी और 'डेंजर' (Danger) का अलार्म बजने लगा। आसमान का रंग पलक झपकते ही नीले से खूनी लाल हो गया।
"विराज! ऊपर देखो!" तारा चीखी।
बादलों को चीरता हुआ आग का एक भयंकर गोला वायुमंडल में दाखिल हो चुका था। तारा की स्क्रीन बता रही थी कि मुख्य उल्कापिंड तो दक्षिणी ध्रुव की तरफ जा रहा है, लेकिन उसमें से टूटकर एक छोटी, रहस्यमयी चमचमाती चीज़ सीधे उनकी तरफ आ रही थी!
छपाक्क्क्!
एक कान फोड़ देने वाली आवाज़ हुई। वह चमकती हुई चीज़ सीधा उनके सामने बहने वाली गहरी नदी में जा गिरी। पानी की लहरें सुनामी की तरह कई फीट ऊपर उठ गईं।
"वह क्या था तारा?!" विराज की आँखों में अचरज था।
वह बिना कुछ सोचे उस चीज़ को देखने के लिए नदी के किनारे की तरफ बढ़ा। उसने जैसे ही गहरे पानी में झांकने की कोशिश की, अचानक किनारे की गीली मिट्टी धंस गई!
"विराज, पीछे हटो!" तारा ने अपना हाथ आगे बढ़ाया।
लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। संतुलन बिगड़ते ही विराज सीधे उस तेज़ बहाव वाली, अंधेरी नदी में जा गिरा!
"विराज!!!" तारा की चीख नदी के शोर में दब गई।
पानी के उस घुप्प अंधेरे में, जहाँ सांस लेना नामुमकिन था, विराज गहराई में डूबता जा रहा था। लेकिन तभी, नदी की तलहटी से एक अजीब सी नीली रोशनी उसकी तरफ बढ़ने लगी
वह नीली रोशनी क्या है यह जानक लिए हमें फॉलो कीजिए
आपका लेखक
सुरेश सौंधीया