Shadows and surprise in Hindi Thriller by jassu books and stories PDF | अदृश्य: कालचक्र का रक्षक - 4

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अदृश्य: कालचक्र का रक्षक - 4

अंधेरा इतना गहरा था कि वह आर्यन के वजूद को निगल जाने को उतारू था। उसके गले में लटका वह रहस्यमयी लॉकेट, जो अब तक शांत था, अचानक एक मद्धम नीली रोशनी से थरथराने लगा। वह रोशनी आर्यन की छाती पर पड़ रही थी, जैसे कोई सोता हुआ दानव अपनी आँखें खोल रहा हो।
​आर्यन ने कांपते हाथों से उस लॉकेट को छुआ। लॉकेट से निकलती गर्मी उसकी उंगलियों को झुलसा रही थी। तभी उसे महसूस हुआ कि बनारस की वे गलियाँ, जो अब तक खामोश थीं, फुसफुसाने लगी हैं। वह आवाज़ें इंसानी नहीं थीं; वे हवा के साथ रगड़ खाती किसी पुरानी धातु की गूँज जैसी थीं।
​कालचक्र की पहली दस्तक
​"आर्यन... रुकना मत," एक भारी, फटी हुई आवाज़ उसके कानों के बिल्कुल पास गूँजी।
​आर्यन झटके से पलटा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। सिर्फ दीवारों पर जमी पुरानी काई और गीली मिट्टी की सड़ांध थी। अचानक, गलियों के मोड़ से एक लंबी परछाईं उभरी। वह किसी इंसान की नहीं लग रही थी—वह परछाईं दीवारों पर रेंग रही थी, जमीन पर नहीं। आर्यन की धड़कनें अब उसके सीने को फाड़कर बाहर आने को बेताब थीं।
​उसने दौड़ना शुरू किया। उसके जूतों की आवाज़ उन संकरी गलियों में पत्थर से टकराकर दोगुनी होकर वापस आ रही थी। उसे लग रहा था जैसे कोई एक नहीं, बल्कि दसियों लोग उसके पीछे भाग रहे हैं। तभी, एक अंधी गली के मुहाने पर वह ठिठक गया। सामने एक प्राचीन शिव मंदिर का ढह चुका हिस्सा था, और उसके बीचों-बीच खड़ा था—वह शख्स।
​वह नकाबपोश अजनबी
​अजनबी ने एक लंबा काला चोगा पहना था। उसके चेहरे पर एक चांदी का मुखौटा था जिस पर अजीबोगरीब ज्यामितीय आकृतिया
बनी थीं।
​"तुम इसे नहीं संभाल पाओगे, लड़के," मुखौटे के पीछे से एक ठंडी आवाज़ आई। "यह लॉकेट कोई गहना नहीं है, यह उस दरवाजे की चाबी है जिसे हज़ारों सालों पहले महादेव ने बंद किया था।"
​आर्यन ने लड़खड़ाते हुए पीछे हटने की कोशिश की, "कौन हो तुम? और मुझे क्यों डरा रहे हो?"
​अजनबी एक कदम आगे बढ़ा। उसके चलते ही आसपास की हवा का तापमान अचानक गिर गया। "मैं काल का पहरेदार हूँ। और तुम? तुम सिर्फ एक जरिया हो। कालचक्र घूम चुका है, और रक्षक का लहू ही इसे फिर से सक्रिय कर सकता है।"
​अचानक उस नकाबपोश ने अपना हाथ हवा में लहराया और आर्यन के पीछे की दीवार कांच की तरह टूट गई। दीवार के पीछे कोई कमरा नहीं था, बल्कि एक काला शून्य था, जिसमें आग की लपटें नाच रही थीं। आर्यन ने देखा कि उस आग के बीचों-बीच उसके पिता की तस्वीर जल रही थी—वही पिता, जो दस साल पहले बनारस के घाटों से रहस्यमयी ढंग से गायब हो गए थे।
​"पिताजी?" आर्यन के गले से एक चीख निकली।
​"वे मरे नहीं हैं, आर्यन," नकाबपोश ने क्रूरता से हंसते हुए कहा। "वे उस समय के कैदखाने में हैं जहाँ सूरज कभी नहीं उगता। और अगर तुम उन्हें देखना चाहते हो, तो तुम्हें इस लॉकेट की बलि देनी होगी।"
​लॉकेट अब आर्यन के गले को जकड़ने लगा था। नीली रोशनी अब खूनी लाल रंग में बदल चुकी थी। आर्यन को महसूस हुआ कि उसके पैरों के नीचे की ज़मीन दलदल की तरह उसे निगल रही है।
​जैसे ही नकाबपोश ने आर्यन के गले से लॉकेट छीनने के लिए हाथ बढ़ाया, मंदिर के शिखर पर लगा विशाल घंटा अपने आप बज उठा। उस आवाज़ से पूरे बनारस की धरती कांप उठी।
​आर्यन ने अपनी आँखें बंद की और पूरी ताकत से लॉकेट को खींचने की कोशिश की। तभी, लॉकेट से एक ऐसी चमकदार लहर निकली जिसने उस नकाबपोश को दस फीट दूर फेंक दिया। लेकिन जीत का अहसास क्षणिक था।
​जैसे ही रोशनी कम हुई, आर्यन ने देखा कि वह अब बनारस की गली में नहीं था। वह एक विशाल गुंबद के नीचे खड़ा था, जहाँ चारों तरफ हज़ारों घड़ियाँ दीवार पर टंगी थीं, और उन सबकी सुइयां उल्टी दिशा में भाग रही थीं।
आर्यन के सामने एक बड़ा सा आइना था। जब उसने आइने में खुद को देखा, तो उसकी चीख निकल गई। आइने में उसकी अपनी परछाईं उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी, और उस परछाईं के हाथ में एक खंजर था जो सीधे आर्यन के दिल की तरफ बढ़ रहा था।
​परछाईं ने धीरे से कहा— "स्वागत है आर्यन, कालचक्र के अंत में। यहाँ तुम खुद ही अपने कातिल हो।"
​तभी, पूरे गुंबद में आर्यन के पिता की चीखने की आवाज़ गूँजी और सब कुछ फिर से काला पड़ गया।

​क्या आर्यन अपनी ही परछाईं से बच पाएगा? क्या उसके पिता वास्तव में जीवित हैं या यह कालचक्र का कोई नया मायाजाल है?