सूरज की हल्की रोशनी कमरे में फैल रही थी। खुशी की आँखें धीरे-धीरे खुलीं। उसका चेहरा लाल था, लज्जा से। वो पल भर हिल नहीं पाई। रुद्रांश अभी भी नींद में उससे चिपका पड़ा था। उसके होंठ खुशी की गर्दन पर हल्के से दबे हुए थे। चेहरा भी करीब था, हल्का सा दाब रहा था। हल्के-हल्के खर्राटे कमरे में सुनाई दे रहे थे।
खुशी ने धीरे-धीरे सांस ली। मन में एक अजीब-सी गर्माहट। दिल की धड़कनें तेज, लेकिन बाहर से वो बिल्कुल शांत थी। उसने हल्का सा हाथ हिलाया, ताकि रुद्रांश जाग जाए। रुद्रांश ने नींद में हाथ फैलाया और उसे अपने पास और कस लिया।खुशी ने खुद को दबाया, हिम्मत करके आँखें बंद कर ली।
खुशी (धीमे से सोचती हुई) बोली -
इतनी नजदीकी… और इतनी गर्माहट…
लेकिन याद नहीं… फिर भी ऐसा क्यों लगता है, जैसे ये हमेशा मेरा हिस्सा रही हो?
रुद्रांश की नींद अभी भी गहरी थी, लेकिन उसकी बाँहों की कसावट और हल्की सांसें खुशी को बताती थीं कि अब भी वो उसके पास सुरक्षित है।
कमरा शांत।
दिल की धड़कनें बस उनकी सांसों के साथ गूँज रही थीं। एक पल…एक एहसास…जो बिना शब्दों के, बिना यादों के,दोनों को जोड़ रहा था।
धीरे-धीरे रुद्रांश की आँखें खुलीं। पहली नजर में उसने देखा…खुशी उसकी बाँहों में लिपटी हुई, चेहरा लाल और हल्की मुस्कान लिए।
वो पलभर ठिठका। दिल की धड़कनें तेज हो गईं। याददाश्त अभी भी धुंधली थी,पर यह एहसास… यह गर्माहट उसे पूरी तरह जगा रही थी। रुद्रांश ने धीरे-धीरे अपना हाथ खुशी की कमर पर रखा।
खुशी ने हल्का सा हिलकर अपनी बाँहें उसकी ओर कस लीं।
खुशी (धीमे स्वर में, खुद से) बोली -
लगता है… ये एहसास… पुराना है या नया…पर दिल को बहुत सच्चा लग रहा है।
रुद्रांश ने उसे देखा। आँखों में गहरी नमी, पर हल्की मुस्कान।
उसने धीरे-धीरे खुशी के होठों के पास अपना चेहरा लाया।
रुद्रांश (धीमे, फुसफुसाते हुए) बोला -
मैं… शायद तुम्हें बचपन से जानता हूँ… या फिर…
बस अब मेरा दिल मान रहा है… तुम मेरी हो।
खुशी ने पलभर नज़रे झुका लीं। पर धीरे-धीरे उसके हाथ भी रुद्रांश के हाथ में मिल गए। दोनों बस एक-दूसरे के एहसास में खो गए।
कमरा शांत था। सूरज की हल्की किरणें धीरे-धीरे कमरे में फैल रही थीं। और पहली बार,रुद्रांश और खुशी बिना किसी डर और बिना यादों के, सिर्फ अपने दिल की आवाज़ पर एक-दूसरे के करीब थे।
रुद्रांश धीरे-धीरे उठकर बैठ गया। उसकी सांसें अभी भी थोड़ी तेज़ थीं, लेकिन आँखों में एक अजीब सी शांति थी। खुशी भी उठ गई।
चेहरा हल्का-सा लाल, लेकिन मुस्कान के साथ। वो धीरे-धीरे कमरे से निकलकर किचन की तरफ चली गई।
रुद्रांश पलभर वहीं बैठा रहा। उसकी नज़र धीरे-धीरे खुशी के पीछे-पीछे चली गई।
दिल में हल्का सा अहसास —
ये… शायद अब कुछ नया शुरू होने वाला है।
किचन में खुशी हल्की हलचल करती हुई, चाय के लिए पानी गरम करने लगी। रुद्रांश ने चुपचाप उसका इंतजार किया। कोई शब्द नहीं, केवल खामोशी और धीमी धड़कनें।
खुशी (धीमे स्वर में, अपने आप से) बोली -
सपनों जैसी रात के बाद…ये सुबह भी… कुछ अलग लग रही है।
रुद्रांश धीरे-धीरे उठकर किचन के पास गया। उसने खुशी को पीछे से हल्का सा छूकर मुस्कुराया। खुशी पलभर चौंकी, फिर हल्का सा मुस्कुराकर सिर झुका लिया। कमरा, किचन, और सुबह की रोशनी…सब कुछ शांत और हल्का महसूस हो रहा था। और इसी हल्की नर्मी में, दोनों धीरे-धीरे एक-दूसरे के करीब रहकर एक नए दिन की शुरुआत करने लगे।
धीरे-धीरे दिन आगे बढ़ रहा था। रुद्रांश अब खुशी को सिर्फ एक साथी की तरह नहीं देख रहा था। वो उसे अपनी पत्नी की तरह महसूस करने लगा। उसकी छोटी-छोटी आदतें, उसकी मुस्कान, उसका हल्का सा शर्माना…सब कुछ उसके लिए अनमोल हो गया।
रुद्रांश ने खुशी को धीरे-धीरे अपने पास खींचा। उसके होंठों को हल्के-हल्के चूमा। खुशी पहले थोड़ी घबराई, फिर दिल की गर्माहट को महसूस करते हुए पल भर उसके हाथों में हाथ डाल दिया।
रुद्रांश (धीमे स्वर में, फुसफुसाते हुए) बोला -
ये… प्यार… मुझे पहले भी मिला था…
जैसे… मैं इसे जानता हूँ… लेकिन याद नहीं…
खुशी की आँखों में हल्की नमी थी। दिल से वह भी महसूस कर रही थी कि ये एहसास नया नहीं है। कुछ धुंधली यादें उसके मन में चहक रही थीं, लेकिन तुरंत कहीं खो जाती थीं।
वे दोनों बस एक-दूसरे में खो गए। बिना शब्दों के, बिना किसी समझ के, सिर्फ दिल की आवाज़ और एहसास के साथ।
रुद्रांश ने धीरे-धीरे खुशी के बालों में हाथ फेरते हुए उससे फुसफुसाया —
मैं… तुम्हें कभी खोना नहीं चाहता।
खुशी ने सिर हल्का सा झुका लिया। उसकी धड़कनें तेज थीं,
पर इस बार डर नहीं, सिर्फ प्यार की गर्माहट। कमरे की खामोशी में
बस उनके दिल की धड़कनें और धीमे फुसफुसाने की आवाज़ थी।
और ये एहसास…जैसे एक खोया हुआ प्यार धीरे-धीरे लौट रहा हो।
दिन धीरे-धीरे ढल रहा था, लेकिन रुद्रांश और खुशी अभी भी एक-दूसरे के करीब थे। खुशी हल्की-सी मुस्कान लिए रुद्रांश को देख रही थी। उसके मन में अजीब-सा एहसास था कुछ पुराना, कुछ खोया हुआ…जैसे ये नज़दीकी, ये गर्माहट, पहले भी रही हो।
लेकिन यादें धुंधली थीं, बस झलकियाँ बची थीं।
रुद्रांश भी यही महसूस कर रहा था। जब खुशी उसकी बाँहों में थी,
उसके बालों की खुशबू उसके होठों तक जाती थी, तो उसे अचानक कुछ झलक दिखाई दी एक हँसी, एक प्यार भरी नजर, और एक अहसास कि उसने पहले भी यही सब महसूस किया है।
रुद्रांश (धीमे स्वर में) बोला -
ये सब… कहीं पहले भी… तो नहीं हुआ था?
खुशी ने सिर हिलाया, लेकिन जवाब नहीं दिया। बस उसकी आंखों में वही हल्की-सी शर्म और गर्माहट। धीरे-धीरे वे दोनों सोफे पर बैठ गए। रुद्रांश ने खुशी का हाथ अपने हाथ में लिया। खुशी ने उसे धीरे-धीरे कसते हुए देखा। उनके बीच कोई शब्द नहीं, बस यादों के टुकड़े और दिल की धड़कनें।
खुशी (मन में) बोली -
लगता है… ये एहसास, ये प्यार…कहीं खोया हुआ नहीं है।
बस धुंधला-सा याद आ रहा है… और मैं इसे फिर से जी रही हूँ।
रुद्रांश ने हल्के-हल्के उसके हाथों को चूमा। खुशी ने पल भर आंखें बंद कर लीं। धीरे-धीरे, उनकी पुरानी यादें धीरे-धीरे लौटने लगीं। अब सिर्फ एहसास नहीं, धीरे-धीरे यादें भी उनके बीच घर करने लगीं।